Karnataka Crisis: 48 घंटे अहम, सोनिया-राहुल और मैं…सीएम बदलने की अटकलों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष ने ऐसा क्यों कहा

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने राष्ट्रीय मोर्चे पर अपने संघर्ष कौशल का दिखाया। उन्होंने कहा है कि इस मामले को तुरंत सुलझाने की जरूरत है, ताकि शीतकालीन सत्र से पहले कोई बड़ा घोटाला नहीं होता। खरगे ने खुलकर कहा, "इस मामले को सोनिया-राहुल और मैं सुलझा लेंगे।"

उन्होंने 48 घंटे की समयसीमा तय की है, जिसमें राहुल गांधी से मुलाकात करनी होगी। खरगे ने बताया, "हमारे पास इस मामले को जल्दी से सुलझाने की जरूरत है। 5 दिसंबर से शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है, ताकि हमारे पास पर्याप्त समय हो।"

इस मामले में संसद में हंगामा बढ़ गया है, और कई राजनेताओं ने सरकार की आलोचना की है। खरगे ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा, "हमारी इस बातचीत से सरकार पर दबाव डाला जाएगा।"

कांग्रेस में भी विभाजन की खबरें आ रही हैं। खरगे ने अपने समर्थकों को शांति से कहा, "हमारे पास एकजुट रहने की जरूरत है। हम इस मामले को जल्दी से सुलझाना चाहते हैं।"
 
बेटा, यह सरकार की भी तालमेल करने की जरूरत है, लेकिन समाज की बात भी सुननी चाहिए। अगर सच्चाई छुपाई जाए तो दिल को दर्द होता है। खरगे जी ने यही सोचा होगा, जब उन्होंने सरकार को चुनौती देने का फैसला किया। लेकिन, एक सवाल उठता है - सच्चाई क्या है? और अगर वह सच्चाई सरकार के पास नहीं है, तो क्या खरगे जी विरोध में निकलेंगे या फिर उनके पास खुद को बदलने का मौका मिलेगा। यह देखना दिल को रोमांचित कर देता है 🤔
 
मुझे यकीन है कि खरगे का यह दावा सच नहीं होगा। उन्हें सोनिया-राहुल के साथ मिलकर इस मामले को हल करने की जरूरत है, लेकिन मुझे लगता है कि उनकी बातचीत सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए है। और 48 घंटे की समयसीमा? यह तो बस एक विचार है। और सरकार पर दबाव डालने की बात? यह तो बस खरगे की राजनीति है।

मुझे लगता है कि कांग्रेस में भी विभाजन की बात सच हो सकती है। खरगे अपने समर्थकों को शांति से कह रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह बस एक चुटकरी है। और 5 दिसंबर से शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है? यह तो बस एक निश्चितता नहीं है। मुझे यकीन है कि खरगे की बातचीत सिर्फ एक घोटाला होगा।
 
मुझे लगता है कि खरगे जी ने बहुत सही कहा, तो देर हुआ यार, सरकार को भी जवाब देना होगा। 48 घंटे में ऐसे बड़े घोटाले सुलझाने का मकसद तो क्या? शीतकालीन सत्र से पहले ऐसी चीजें न होनी चाहिए। और खरगे जी को सरकार पर दबाव डालने में अच्छा अभियान चलाना चाहिए, इससे कांग्रेस भी मजबूत होगी।
 
क्या तू सोचेगा कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे को राष्ट्रीय मोर्चे पर अपना विरोध करना चाहिए? नहीं, नहीं, नहीं! उन्होंने ही राजनेताओं को एक दिन के लिए सोचने का मौका दिया। 48 घंटे की समयसीमा तय करने से पहले, उन्हें खुलकर कहा, "मैं राहुल गांधी से बात करूँगा, और फिर हमारे पास पर्याप्त समय होगा!" 🤣 यह तो दिखाने की जरूरत नहीं थी, सब जानते हैं कि खरगे में चाल की समझ है।
 
बिल्कुल सही किया गया है! खरगे जी ने बिल्कुल सही कहा है, इस मामले को तुरंत हल करना चाहिए। 48 घंटों में ही इसे सुलझाया जा सकता है, और राहुल गांधी जी से भी मिलना जरूरी है। सरकार की आलोचना करना ठीक है, लेकिन खरगे जी ने कहा है कि हम उनकी बात सुनने के लिए तैयार हैं। और विभाजन की खबरें? पूरी तरह से गलत! हमें एकजुट रहना चाहिए, और अपने मुद्दों पर लड़ना चाहिए। खरगे जी ने बिल्कुल सही कहा है, हमें अपने मामले को जल्दी से हल करना चाहिए। 🙌
 
अरे, ये तो बहुत बड़ा मामला है, जो हमारे देश की राजनीति में बिगड़ गए हुए हैं 🤯। खरगे जी ने अच्छा काम किया है संघर्ष कौशल दिखाने का, लेकिन यह तो एक बड़ा खतरा भी है, खुद को इतना बुरा बनाने का। 48 घंटे में इसे सुलझाना बहुत मुश्किल होगा, और सरकार पर दबाव डालने का तरीका थोड़ा दुर्भाग्यपूर्ण लग रहा है 😐। लेकिन फिर भी मैं उनकी बात समझता हूँ, और उम्मीद करता हूँ कि वे इसे जल्द से जल्द हल कर सकें।
 
मैंने पढ़ा है कि खरगे जी ने राष्ट्रीय मोर्चे पर अपना दिखावा कर दिखाया है। लेकिन वास्तविकता यह है कि कांग्रेस का अंदरूनी संघर्ष और सरकार को दबाने की उनकी कोशिश कुछ भी नहीं सुलझाएंगी। 48 घंटे की समयसीमा तय करना और राहुल गांधी से मिलना केवल विपक्षी दलों की खेल है। और खरगे जी ने सरकार पर दबाव डालने की बात कही, लेकिन उनके पास ऐसा कोई संदेश नहीं है जिससे सरकार को रुकना पड़े।
 
मेरे दोस्त, तो यह तो बड़ा मुद्दा है! कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने बहुत ही चतुर तरीके से अपने संघर्ष कौशल का प्रदर्शन किया है। 48 घंटे की समयसीमा तय करने में उनकी रणनीति अच्छी लग रही है, खासकर जब हम देखते हैं कि शीतकालीन सत्र तेजी से आ रहा है।

लेकिन, मेरा सवाल यह है कि क्या खरगे ने इस मामले को पूरी तरह से समझ लिया है? उन्हें पता है कि सरकार कैसे व्यवहार करेगी और कांग्रेस के समर्थकों का कैसे मनाना होगा।

मेरा अनुमान है कि खरगे ने इस मामले को अच्छी तरह से समझ लिया है, और उन्हें पर्याप्त समय मिलेगा। लेकिन, यह तो एक दांव है जो वे खेल रहे हैं। 🤔
 
अरे दोस्त, खरगे की बातें सुनकर लगता है कि वे राष्ट्रीय मोर्चे पर अपना खेल दिखा रहे हैं... क्या यही तरीके से देश को आगे बढ़ाने का हिस्सा बनेंगे। लेकिन अगर सच तो कहिएं, तो खरगे जैसे नेता हमारे देश के भविष्य को कितना सुरक्षित दिखाते हैं। मैं उन्हें यह बात समझ में नहीं आती कि फिर वे सरकार को चुनौती दे रहे हैं? क्या उनका मतलब ये नहीं है कि हमें सरकार पर दबाव डालना चाहिए... अरे, यह तो एक और समस्या बन जाएगी।
 
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