Karnataka: राज्यपाल के अपमान में भाजपा-JDS का प्रदर्शन; विधान सौधा के सामने सरकार के खिलाफ जताएंगे विरोध

कर्नाटक में 27 जनवरी को विपक्षी दल भाजपा और जेडी(एस) ने तय किया है कि वे बंगलूरू में विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह प्रदर्शन विधान सौधा के सामने महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास होगा। राज्यपाल थावरचंद गहलोत पर कथित अपमान की बात कहकर उन्होंने इस प्रदर्शन की घोषणा की है।

विपक्षी दल ने कहा है कि राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। उनके साथ ऐसा व्यवहार या उपवास जैसी बुराई करने का हर कोई इसका माफ नहीं कर सकता। इस प्रदर्शन को भाजपा और जेडी(एस) नेताओं ने बताया है कि यह राज्यपाल के अपमान का एकमात्र मामला नहीं है, बल्कि संविधान, कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और भ्रष्टाचार से जुड़े बड़े मुद्दे को लेकर होगा।

इस प्रदर्शन के लिए कई नेता व एमएलसी शामिल होंगे, जिनमें आर. अशोक, चलवादी नारायणस्वामी, बी.वाई. विजयेंद्र और सुरेश बाबू समेत कई बड़े नेता शामिल रहेंगे।

इस प्रदर्शन के अलावा, यह भी मुद्दों को लेकर होगा। जिसमें एक्साइज विभाग घोटाले, कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा, बल्लारी में मॉडल हाउस जलाने का मामला, विदेशी महिला से दुष्कर्म और हत्या पर बयान, और केंद्र सरकार की नई रोजगार गारंटी योजना जैसे कई अन्य मुद्दे शामिल होंगे।
 
बस बात करो... इस समय कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के नेताओं को सिर्फ राज्यपाल थावरचंद गहलोत पर अपमान की बात कहकर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए, लेकिन जैसे ही वह सबकुछ बताएंगे, तभी उनकी मुख्यमंत्री को दुश्मनी करने का मौका मिलेगा। और फिर भी लोग कहते हैं कि विपक्षी दलों को अपने मुद्दों पर स्थिर रहकर बातचीत करनी चाहिए, नहीं तो हमारा देश एक दिन बमबारी होने जा रहा है। और भाजपा को बस इतना करना चाहिए, अपने नेताओं में पेशेवरता लानी और अपने विरोधों में स्थिरता बनाए रखनी, नहीं तो हमारा देश उनकी राजनीतिक कमजोरियों का खेल होने जा रहा है 🤦‍♂️
 
🤔 सुनकर लगता है कि प्रदर्शन को लेकर बहुत चिंतित नेताएं और समाज हैं। विपक्षी दल भाजपा और जेडी(एस) के द्वारा राज्यपाल पर अपमान की बात करने से यह देखना रोचक लग रहा है कि प्रदर्शन में क्या शामिल होगा। 🤝
 
बोलिए तो भाजपा और जेडी(एस) नेताओं ने विपक्षी दल द्वारा आयोजित किया गया प्रदर्शन के बारे में बहुत गरमागिराह किया है। लेकिन बात यह है कि अगर वे इतना जोर-जोर से बोल रहे हैं तो शायद उन्हें खुद की बुराई हुई हो। और विपक्षी दल ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला क्यों किया?

और अगर राज्यपाल पर कथित अपमान की बात कहकर उन्होंने इस प्रदर्शन की घोषणा की तो शायद वे अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सिर्फ झूठे हैं!

क्या हमें विपक्षी दल द्वारा आयोजित प्रदर्शन में भाग लेना चाहिए या नहीं, इसकी बात तो अलग है। लेकिन एक बात तो यह जरूरी है कि हम इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करें।
 
जो लोग बंगालू में ताजा हुए किसी भी पुलिस को छूने से खुश हैं, वे कर्नाटक में जाने चाहिए, वहां राजनीति थोड़ी और गहरी होती है... 🤔

विपक्षी दलों ने कहा कि राज्यपाल को भी उनका संवैधानिक प्रमुख पद समझना चाहिए। अगर वे किसी को अपने सामने खड़ा कर सकते हैं, तो क्या अन्य लोग उनसे नहीं कर सकते? इस देश में इतनी बड़ी जनसंख्या है, और हर कोई अपने मामलों को उजागर करना चाहता है। 🤷‍♂️

अगर विरोध प्रदर्शन में कई नेताओं का हिस्सा लेने का फैसला करें, तो उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। क्या उन्होंने अपने स्वयं के मुद्दों पर चर्चा नहीं की थी? अब तो विरोध प्रदर्शन होने लगा है। 🚫

कुछ लोग कहते हैं कि बंगालू और कर्नाटक के राजनीतिज्ञ अलग-अलग हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हर एक जगह की राजनीति अपनी तरह से जटिल होती है। अगर विपक्षी दलों ने अपने मुद्दों पर चर्चा करने का समय नहीं लिया, तो अब यह प्रदर्शन हुआ है... 🤷‍♂️

क्या यह राज्यपाल के अपमान का एकमात्र मामला नहीं है? अगर ऐसा मानना है, तो कुछ भी माफ़ नहीं होगा। लेकिन अगर इसमें और जटिलताएं हैं, तो हमें स्पष्टता की जरूरत है। 💬
 
बंगालूरू में विरोध प्रदर्शन करने की बात तो चोरी से लग गई। क्या कोई जानता है कि राज्यपाल पर ऐसा अपमान किया गया है? नहीं तो फिर भी एकत्र होकर विरोध करेंगे। लेकिन यह सोचिए, मुख्यमंत्री और विपक्षी दल दोनों ही एक साथ इकट्ठे हुए हैं। तो इससे क्या नतीजा होगा? चाहे वह राज्यपाल पर अपमान कर रहे हो, या फिर बैंगलोर में मॉडल हाउस जलने की बात कहकर विरोध कर रहे हो।
 
तो ये क्या बात है! विपक्षी दल विधान सौधा पर प्रदर्शन करने जा रहे हैं और राज्यपाल गहलोत पर अपमान करने की बात कहकर। लेकिन मुझे लगता है कि ये तो बस दीवार की दूसरी ओर फेंकने की तरह ही है। क्योंकि विपक्षी दल स्वयं भी कई बुराइयां करते रहते हैं और अब उन्हें अपनी बुराई करनी पड़ रही है? और राज्यपाल पर अपमान? यह तो बस नेताओं का खेल है, जिसमें वे एक दूसरे को दीवार की दूसरी ओर फेंकते रहते हैं।

मुझे लगता है कि यह प्रदर्शन सिर्फ अपने नेताओं को ही माफ करेगा, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे बड़े मुद्दों पर रोक नहीं लगाएगा। और विदेशी महिला से दुष्कर्म और हत्या पर बयान? यह तो बस अपने खेल को बढ़ाने की तरह ही है। मैं इस प्रदर्शन को देखकर कोई आश्वासन नहीं लूंगा।
 
बड़े बड़े लोग आज भी खेत में बैठकर बात कर रहे हैं 🤦‍♂️। यह सब विरोध प्रदर्शन करने का बहाना बनाकर देश को बर्बाद करने की कोशिश करते हैं। अगर उन्हें सोचते तो हमारे देश में पहले से अच्छी तरह से सरकार चल रही थी, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे खराब कर दिया है 🤔
 
कोई भी ऐसी बात नहीं कर सकता कि इस प्रदर्शन से कुछ अच्छा होगा। विपक्षी दल तो बस अपने नेताओं के रुख बदलने का मौका ढूंढ रहे हैं। और यह सभी मुद्दे एक दिन ही सुलझ जाएंगे। लेकिन इतना तो साफ है कि इस प्रदर्शन से बंगाल की तरह कोई हल नहीं निकलेगा।
 
मुझे बहुत खेद है लेकिन यह सब बहुत अजीब लग रहा है। राज्यपाल को उनके काम पर इतनी आलोचना करने की जरूरत नहीं थी, मान लीजिए उन्होंने तो कुछ गलती कर ली तो वह भी समझना चाहिए कि गलती को सुधारने का तरीका दूसरों को जमीन पर फेंकना नहीं है। 🤔

बस यह सोच लीजिए कि विपक्षी दल ने अपना प्रदर्शन कैसे करना चाहिए, तो शांतिपूर्ण तरीके से। हमेशा भ्रष्टाचार और अन्याय पर चलने की जरूरत है, लेकिन उसके लिए हमें दूसरों को मुश्किल में डालने की जरूरत नहीं होती। शांतिपूर्ण तरीके से अपना आवाज उठाना और बदलाव लाना हमेशा सबसे अच्छा रहता है। 🌈
 
बंगालूरू में विरोध प्रदर्शन करने वाले नेताओं को अपने तरीके से चलना चाहिए, लेकिन उनकी योजना अच्छी नहीं लग रही 🤔
 
बोलते हैं तो बॉलीवुड में अभिनेताओं ने अभी भी अपने पत्रकारिता कौशल पर ध्यान देने से रुका नहीं है 📰। यह तो एक अच्छा अवसर होता कि विपक्षी दलों ने अपने आप को मुद्दों से जोड़कर बाहरी हाशिए पर खड़ा कर दिया हो।

जैसे कि राज्यपाल के अपमान से लेकर, एक्साइज विभाग घोटाले, कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा तक - ये सब मुद्दे बहुत जरूरी हैं और हमें इन पर ध्यान देना चाहिए।
 
राज्यपाल पर ऐसा व्यवहार करना न तो सही है न ही उचित। राज्य के संवैधानिक प्रमुख बनने के बाद भी यह सीखने की जरूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति अपने पद पर ऐसी गलतियाँ न करे। लेकिन इस मामले में यह देखकर चिंता है कि विपक्षी दलने राज्य के लिए एकजुट होकर इस मुद्दे को आगे बढ़ाए बिना।

बस यह तय किया है कि नेताओं को अपने पद पर गलती करने की जरूरत नहीं है। इसके लिए हमें स्थायी समाधान ढूंढने की जरूरत है, लेकिन इस मामले में राज्यपाल पर ऐसा व्यवहार करने की जरूरत नहीं है
 
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