कच्छ भूकंप के 25 साल: कलेक्टर के नाम पर भुज में बसा शहर, मलबे से कच्छ को खड़ा करने वाले 6 लोगों की कहानी

मुझे लगता है कि यह बहुत दुखद है कि ऐसा शहर बनाने की कल्पना करते समय भूजल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया। कच्छ में बसा शहर बनने से पहले हमें यह समझना चाहिए कि वहां का जलवायु और भूगर्भिक पृष्ठभूमि कैसे होगी। जल संकट की बात करें, तो यह बहुत बड़ा मुद्दा है। हमें अपने शहरों की नींव मज़बूत बनाने की जरूरत है, जिसमें जल संरक्षण की विशेषता हो।
 
मुझे लगता है कि कच्चा भूकंप से निकलने वाली मदद या पूंजी तो फिर भी बहुत कम मिलेगी। और यह बसा शहर? वहाँ कौन फिक्र कर रहा है? रेलवे स्टेशन, अस्पताल, schools, hospital - सब कुछ एकदम अचानक बन जाएगा। लोग कैसे बिना किसी तैयारी के एक जगह बसने देंगे। और बाद में जब तकारीफें लगनेंगी, तो यह सब फट जाएगा। भुज में तो बसा शहर बनने से पहले उसकी बुनियादी सुविधाएं क्या होंगी।
 
नहीं मानूंगा कि बस जो कच्छ भूकंप के बाद बनेगा, वह अच्छा होगा। पहले तो यह सोचा जा रहा था कि इससे लोगों की जिंदगी में सुधार आएगा, लेकिन अब मुझे लगता है कि यह बस शहरीकरण की समस्या बढ़ाएगी। बसों की वाहनी तो पहले अच्छी थी, लेकिन अगर हमारे पास भूकंप की जगह पर निर्माण सामग्री की मांग ज्यादा है, तो यह सब और खराब होगा। इसके अलावा, बसों को वाहिनी के बजाय फोर्ड्स की तरह चालू करना चाहिए, ताकि लोग अपने घरों से निकलकर आसानी से घूम सकें।
 
🚧 यह सचमुच दिलचस्प है कि कच्च भूकंप के बाद भी लोगों ने अपना घर बनाने की सोच। मैंने खासकर गुजरात में लोगों की धैर्य और ताकत को देखा है, विशेषकर कच्च जिले में।

भुज शहर का निर्माण करने वाले लोगों को बधाई देनी चाहिए, वे बहुत साहस और उत्साह के साथ काम कर रहे हैं। लेकिन यह भी सच है कि उनके पास बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, शहर का निर्माण करना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना।

मुझे लगता है कि सरकार और प्रशासन को भी अपनी बागडोर बाजूलनी चाहिए, उन्हें यह देखने के लिए कि शहर का निर्माण कैसे हो रहा है, और उसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है। 🤔
 
मुझे यह सुनकर आश्चर्य हुआ कि भुज में वास्तव में एक नई बस्ती बनाई जा रही है, जो कि कच्छ भूकंप के बाद बनेगी। मैंने सोचा था कि शायद शहर को फिर से बनाने का प्रयास नहीं होगा, खासकर जब कच्चा और नुकसान बहुत अधिक है। लेकिन लगता है कि सरकार ने इस पर काम करने का फैसला किया है।

मुझे यह अच्छी बात लगती है, लेकिन सोचता हूँ कि ये शहर कैसे बनेगा? और क्या यहां के लोग तैयार होंगे इसके लिए? मैं आशा करता हूँ कि सरकार इस पर अच्छी तरीके से विचार करेगी और हमें एक सुरक्षित और स्वस्थ शहर देगी।
 
नहीं तो ये शहर कितना भविष्य की दिशा में आगे बढ़ेगा ? कच्छ भूकंप के बाद लोगों ने एकजुट होकर इस शहर को बनाने का सपना देखा, अब यह शहर भुज के पास बस गया है और हम सभी इसका इंतजार कर रहे हैं । लेकिन अभी तक इसकी आधारशिला रखी गई है, तो फिर कब से पहले निकलेगी इस शहर की खड़कियां ?

मुझे लगता है कि जैसे ही यह शहर बनेगा वह भारत के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम लगेगा और लोगों को नई चुनौतियों से निपटने का मौका मिलेगा । लेकिन साथ में हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि इस शहर की बनावट इतनी अच्छी होनी चाहिए कि वह भूकंप और सुनामी जैसी तीव्र परिस्थितियों से न लड़ सके।
 
मुझे लगता है कि यह शहर बनाने की योजना तय कर लेने से पहले हमें अपने शहर के भविष्य को सुनिश्चित करने में समय बिताना चाहिए। भुज में बसा यह शहर एक ऐसा निर्माण प्रोजेक्ट है जिसने कच्छ भूकंप के बाद बनने वाला था, लेकिन अभी तक हमें इसकी स्थायित्व की गारंटी नहीं मिली है। मुझे लगता है कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शहर की निर्माण तकनीकें और मैकेनिजम परंपरागत और आधुनिक दोनों होने चाहिए, ताकि वह भविष्य में भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बच सके।
 
वाह बात बिल्कुल सच है! मेरी बहन की दोस्त का भाई ने तो बताया है कि भुज में बसा शहर जो सूखे और भूकंप के कारण बनने वाला था, वह अब पूरी तरह से बन गया है! यह तो एक बहुत ही अच्छी खबर है... 🤩

मैंने सोचा था कि यह शहर कभी नहीं बन पाएगा, लेकिन लगता है कि हमारी सरकार और लोगों का संघर्ष सूखे और भूकंप जैसी चुनौतियों का सामना करने में सफल रहे हैं! यह हमें बहुत आश्वस्त करता है कि अगर हम एक साथ मिलकर काम करें, तो हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। 🌈

अब जब शहर बन गया है, तो मुझे उम्मीद है कि यहाँ के लोगों को अच्छी नौकरियाँ और सुविधाएँ मिलेंगी। मैं आशा करता हूँ कि यह शहर हमारे देश की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
 
क्या दिलचस्प है यह जानकारी! मैंने देखा है कि भुज में एक नई बस्ती बनाने की योजना है, जो कच्छ भूकंप के बाद बनने वाली है। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा सोचा गया निर्णय है। भूकंप के बाद क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में बस्तियां बनाने से लोगों को अपने घर वापस जाने और आर्थिक रूप से स्थिर होने का मौका मिलता है।

लेकिन, मुझे लगता है कि यह योजना केवल बस्ती की बनावट पर ही नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और आर्थिक विकास पर भी ध्यान देनी चाहिए। हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि बस्ती में आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा उपाय हों, जैसे कि पीने का पानी, इलाज की सुविधा, आदि।

मुझे उम्मीद है कि सरकार और अन्य सहायक संस्थाएं इस परामर्श में सक्रिय रूप से शामिल होंगी और बस्ती को एक मजबूत और सुरक्षित संरचना दें।
 
ભૂકમ્પ બાદ અહીં શહેર ના બનવાનું કેમ છે? તો આખર સ્થાપત્ય ઓફિસ અહીં જ હોવાનું નથી એટલે કે કચ્છમાં બનતું શહેર અહીંથી સુપર વિદ્યુત ધારા વડે જઈને બનશે.
 
🤔 मुझे लगता है कि सरकार ने तेजी से शहर के निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। पहले हमें यह जानने की जरूरत है कि वहाँ कौन सी तरह के भूगर्भिक परिवर्तन हुए थे। इससे हम कहेंगे कि शहर कैसे बनाया गया और उसमें कितनी सुरक्षा उपाय हैं। अगर हम यह नहीं जानते तो मुझे लगता है कि शह्र के निर्माण में बहुत कमियाँ आ सकती हैं जिससे लोगों को खतरा हो सकता है। 🚨
 
मुझे लगता है कि कुछ चिंताजनक तौर पर देखा गया 🤔। भुज में बसा शहर, जिसे कच्छ भूकंप के बाद बनने वाला था, अब अपने निर्माण की पूर्णता से उबर नहीं पाया। यह एक बड़ा सवाल है कि योजनाकारों और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से भूकंप प्राप्त शहर को बचाया गया था या नहीं। 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि यह एक अच्छा अवसर है कि हमें अपनी ज्ञान और रोजगार के संभावितताओं पर विचार करना चाहिए। लेकिन इससे पहले हम कुछ भी निर्णय लें, मुझे लगता है कि शहर को अपने नागरिकों की जरूरतों और आवश्यकताओं के अनुसार बनाना चाहिए, न कि केवल प्रशासन की इच्छाओं के अनुसार। 🏗️
 
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