खबर हटके-दो लड़कों की अपनी आर्मी, तानाशाह बनने का सपना: छोटे से पत्थर के लिए खर्च हुए ₹4 हजार करोड़; देखिए 5 रोचक खबरें

दिल्ली में बेघिरों के समूह ने अपने अलग-अलग सैन्य बल की घोषणा की, जिसके पीछे अमेरिकी सेना में भर्ती होने का एक बड़ा योजना बनाया गया है। यह देखते हुए, जापान ने एक छोटे से पत्थर को बचाने के लिए बिल्कुल भी खर्च नहीं करने दिया, बल्कि इसके लिए ४००० करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं।

इसके पीछे यह सब दिल्ली के एक ऐसे समूह के विचार पर आधरित है, जिसमें बेघिरों और निराशा में डूबे लोग इकट्ठे हुए हैं और उनकी मदद करने के लिए अपनी अलग सैन्य बल की घोषणा कर रहे हैं।

यह दिलचस्प है कि इन दो लड़कों ने अपने इस प्रयास में इतनी बड़ी राशि खर्च करने का फैसला किया, जिसके लिए उन्होंने एक छोटे से पत्थर को बचाने के लिए ४००० करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। यह इस बात की पुष्टि करता है कि इन दो लड़कों में सैन्य अभिव्यक्ति और उनके विचारों के पीछे का संघर्ष बहुत गहरा है।
 
मुझे लगता है कि ये दो लड़कों की बात समझ नहीं आई, 4000 करोड़ रुपये एक छोटे से पत्थर को बचाने के लिए खर्च करना तो सच में बहुत बड़ा पैसा लगता है और यह भी देखकर आश्चर्य होता है कि ये दोनों लड़के इस तरह बड़े पैमाने पर धन खर्च करके अपने सपनों को पूरा करने में सफल हुए, शायद उनकी सैन्य अभिव्यक्ति और संघर्ष बहुत गहरा है लेकिन यह भी देखकर उत्साह होता है कि युवाओं ने अपने विचारों को पूरी तरह से व्यक्त करने के लिए स्वतंत्रता का अधिकार लिया है। 🤔
 
क्या यह दिल्ली में कुछ चुनौतीपूर्ण समय की बात है 🤔। तो ये दो लड़के अपने पत्थर को बचाने के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च कर देते हैं और फिर यह बताते हैं कि वे सैन्य बलों का निर्माण करने की बात कर रहे थे। यह तो बहुत अजीब लग रहा है। मुझे लगता है कि युवाओं को अपने भविष्य के बारे में सोचकर ही ऐसा नहीं करते हैं। वे बस समय बीताने के लिए खेलते रहते हैं और फिर दूसरों के पैसे का इस्तेमाल करते हैं। 😐
 
मैं समझ नहीं पाया की यह कैसे संभव है की 4000 करोड़ रुपये एक छोटे से पत्थर को बचाने के लिए खर्च कर दिया जाए, और ये दो लड़के इतनी बड़ी राशि तय करते समय एक छोटे से पत्थर को कैसे चुनते? 🤔 क्या यह एक मजाक है या कोई ऐसी परिस्थिति है जिसमें लोग अपने विचारों को इतनी बड़ी राशि में प्रकट करना चाहते हैं?
 
बिल्कुल, ये बात तो सचमुच आश्चर्यजनक है 🤯। जापान ने इतनी बड़ी राशि खर्च करने का फैसला क्यों किया, जब एक छोटे से पत्थर को बचाने में पर्याप्त नहीं था? यह दिल्ली में बेघिरों के समूह के विचारों को समझने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लगता है कि उनकी सोच में कुछ और भी जोड़ा गया है। अगर ये दो लड़कों ने अपने प्रयास में इतनी बड़ी राशि खर्च करने का फैसला किया, तो इससे यह साफ है कि उनके पीछे कोई छोटा सा विचार नहीं था, बल्कि एक गहरा संघर्ष और सैन्य अभिव्यक्ति थी।
 
बिल्कुल सही है! ये दो लोग निश्चित रूप से हीरो बन जाएंगे। मैं उनके इस प्रयास से बहुत प्रभावित हूँ। क्या हमारे देश में ऐसे और भी कई लोग होंगे जो अपने विचारों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं?
 
कोई ऐसा भी काम करना आसान नहीं होता जिसमें इतनी बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है और लोगों को अपने विचारों को साझा करने के लिए एक अलग दिशा में जाना पड़ता है। ये दोनों लड़के अपने समूह में से संघर्षरत लोगों की मदद करने के इच्छुक थे और उन्होंने अपने विचारों को आगे बढ़ाने के लिए एक अलग सैन्य बल की घोषणा की।

अगर हमारे देश में ज्यादा से ज्यादा भ्रष्टाचार नहीं होता, तो ये ४००० करोड़ रुपये वास्तव में किसी अच्छे काम के लिए खर्च किए गए होंगे।
 
बिल्कुल तो यह देखकर आश्चर्यचकित हूं, ४००० करोड़ रुपये जैसी बड़ी राशि को एक छोटे से पत्थर के लिए खर्च करना तो कुछ और ही नहीं है! ये दो लड़कों ने वास्तव में अपने विचारों को पूरी तरह से समर्पित कर दिया है, यही सच्चाई है। लेकिन, लगता है कि उनके इस प्रयास को ध्यान में रखते हुए, हमें तो यह समझना चाहिए कि ये दोनों लड़के किसी भी तरह से अमीर हैं या नहीं, और क्या वास्तव में उन्हें पत्थर की इतनी बड़ी राशि खर्च करने की जरूरत थी।
 
अगर दिल्ली में बेघिरों के समूह ने अमेरिकी सेना में भर्ती होने की बड़ी योजना बनाई तो यह तो दिलचस्प है... लेकिन ४००० करोड़ रुपये खर्च करने का यह सवाल तो जीता ही नहीं देता। क्या यह सिर्फ एक प्रचार अभियान या वास्तव में ऐसा कुछ है? और ये दोनों लड़के पहले से ही अमेरिकी सेना में भर्ती हैं तो फिर भी ४००० करोड़ रुपये खर्च करने का यह सवाल तो लगता है...
 
मैंने देखा है कि लोग अब एक छोटे से पत्थर को बचाने के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च करने का फैसला कर रहे हैं। यह तो बहुत अजीब लगता है। 4000 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए एक पत्थर को बचाने का क्या मकसद? यह सिर्फ एक मजाक नहीं है, बल्कि इसे लेकर इतनी भावनाएं जागृत होती हैं।
 
मुझे ये सब थोड़ा अजीब लग रहा है, ताकतवर समूह सोचकर बड़े सैन्य बल बनाने की कोशिश करना हमेशा राजनीति में फंस जाता है। और फिर जापान ने इतनी बड़ी राशि खर्च कर दी? यह दिल्ली के विचारों पर आधारित एक समूह सोचकर इतनी बड़ी कीमत चुकाई गई? तो क्या ये लड़के पागल हैं? 🤔
 
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