खरगोन में पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, VIDEO: गाड़ी के गेट पर पटककर डंडे से अंदर ठूंसा; प्रदर्शनकारी कर रहे थे चक्काजाम - Khargone News

खरगोन में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ाकर डंडों से पीटा, जिसमें कई लोग घायल हुए और हिरासत में लिए गए 4-5 लोगों को गाड़ी के गेट पर पटककर अंदर ठूंसा। पुलिस ने इस मामले में हल्का बलप्रयोग किया, जिसकी वजह से घटना में तनाव बढ़ गया।

इस घटना के पीछे एक 15 दिन पुरानी घटना है, जब शराब ठेकेदार के वाहन ने समाज के एक युवक को टक्कर मार दी थी। इस घटना के बाद, युवक के परिजनों ने शराब ठेकेदार को 15 लाख रुपये का मुआवजा और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में हाईवे पर चक्काजाम कर दिया, लेकिन पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन बाद में जब हालात बदलते रहे, तो उन्होंने हल्का बलप्रयोग किया। इस मामले में पुलिस ने बताया है कि पहले हल्के बलप्रयोग से समझाने की कोशिश की, लेकिन जब बाद में तनाव बढ़ गया, तो उन्होंने नियमानुसार हल्का बलप्रयोग किया।

इस घटना में कई लोग घायल हुए और पुलिस ने 4-5 लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने बताया है कि उन्होंने इस मामले में बलप्रयोग किया ताकि तनाव पर नियंत्रण रखा जा सके।

इस घटना से पहले, बोरखेड़ा निवासी कमल गंभीर हादसे में घायल हुआ था, जब उनकी गाड़ी को आबकारी विभाग की गाड़ी से टक्कर लगी। इस घटना के बाद, बिस्टान नाका क्षेत्र में तोड़फोड़ हुई और शहर की सभी शराब दुकानें एक दिन बंद रखनी पड़ीं। आबकारी विभाग ने आरोपों से इनकार किया था कि घटना वाले दिन क्षेत्र में उनकी कोई कार्रवाई या वाहन मौजूद थी।
 
यह बहुत दुखद है कि ऐसी घटनाएं फिर से हो रही हैं। पुलिस को अपनी भूमिका को अच्छी तरह से सोच-विचार करना चाहिए। पहले हल्के बलप्रयोग से समझाने की कोशिश करनी चाहिए, न कि आगे-पीछे ही लड़कर। यह देखकर शर्मिंदगी होती है कि पुलिस ने तनाव को बढ़ाने के लिए बलप्रयोग किया। 🤕

इसके अलावा, इस मामले से हमें यह सीखना चाहिए कि राजनीतिक दबाव और समाज की भावनाओं पर पुलिस की हरकतें निर्णय लेने से पहले सोच-समझकर होनी चाहिए। पुलिस को हमेशा लोगों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और तनाव को नियंत्रित रखने के लिए संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि यह घटना केवल प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच एक संघर्ष नहीं है, बल्कि एक बड़े तंत्र की समस्या है। जैसा कि आपने बताया, युवक को टकराकर शराब ठेकेदार ने जानबूझकर घायल कर दिया। इसके बाद, पुलिस ने घटनास्थल पर जाकर उस वाहन की तलाश शुरू की, लेकिन यह तभी हुआ जब प्रदर्शनकारी आ गए।

हमें ऐसा सोचना चाहिए कि शहर में क्या हो रहा है, और कैसे हम अपने समाज को बेहतर बना सकते हैं। अगर पुलिस ने पहले हल्का बलप्रयोग नहीं किया, तो शायद घटना से बचा जा सकता। लेकिन इस मामले में सरकार ने आरोपों से इनकार कर दिया है, और प्रदर्शनकारियों ने भी अपनी बात नहीं समझी गई।

अब, यह सवाल उठना चाहिए कि शराब ठेकेदार को मुआवज़ा कैसे देना जाए और उनके लिए क्या सजा होनी चाहिए? और पुलिस ने सही तरीके से काम किया या नहीं? इन सवालों के उत्तर ढूंढने के लिए हमें एक-दूसरे से बात करनी चाहिए।
 
पुलिस वाले लोग खुद को भी घायल कर लेते हैं तो? पहले तो उन्होंने चक्काजाम कर दिया तो फिर पीटपमत करने लगे। सारा तनाव बढ़ गया, और फिर उन्होंने डंडे चलाने शुरू किए। 4-5 लोग हिरासत में लिए गए, यह तो खेद है न कि खुशी? 🤦‍♂️

कमल गंभीर हादसे में घायल हुआ था, और फिर पुलिस ने आबकारी विभाग से आरोप लगाए। लेकिन आज यह पुलिस भी शराब ठेकेदार को खुद पकड़ लिया? यह तो कुछ नहीं है, केवल राजनीतिक दबाव था। पुलिस को अपने दम पर निर्णय लेने की जरूरत नहीं है 🙅‍♂️
 
पुलिस को समझाना चाहिए कि दंगाई लोग ना तो शांत और ना ही गुस्से में। प्रदर्शनकारियों ने समझाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन पुलिस को यह स्वीकार करना चाहिए कि तनाव बढ़ गया, तो हल्का बलप्रयोग करना सही नहीं है।
 
क्या बिल्कुल सही पुलिस ने इस मामले में हल्का बलप्रयोग किया, यह तो साफ साफ गलत है 🤦‍♂️। अगर उन्होंने पहले ही समझाने की कोशिश नहीं की, तो क्यों हालात बदलते रहे, और फिर भी हल्का बलप्रयोग किया। इससे तो प्रदर्शनकारियों को बिल्कुल सही लगता है कि पुलिस उनकी आवाज़ नहीं सुन रही थी।
 
इस तरह पुलिस को क्या हुआ, यह तो बहुत अजीब लग रहा है… पहले हल्का बलप्रयोग कर लेने से पहले समझाने की कोशिश करनी चाहिए। और इतनी देर में जब भी ऐसा करते हैं, तो मालिकों पर भी दबाव डालना चाहिए, न कि उन्हें घायल करके… क्योंकि यह जानबूझकर नहीं किया गया, तो किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है। और गाड़ी के गेट पर पटककर अंदर ठूंसना भी सही नहीं है। 🤔
 
वाह, यह तो बहुत ही गंभीर मामला है 🤕। पुलिस ने तो डंडों से पीटा, जिसमें कई लोग घायल हुए और कुछ लोग हिरासत में लिए गए... इसका मतलब है कि पुलिस ने अपनी पारदर्शिता खो दी है। पहले तो हल्के बलप्रयोग से समझाने की कोशिश की, लेकिन फिर उन्होंने नियमानुसार बलप्रयोग किया... यह तो बहुत ही गंभीर गलती है।

इस मामले के पीछे एक 15 दिन पुरानी घटना है, जिसमें युवक को टक्कर मार दी गई थी। पुलिस ने क्या समझा था? कि यह घटना केवल एक छोटी सी घटना है? नहीं, यह तो बहुत बड़ी बात है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी आवाज उठाई, लेकिन पुलिस ने उनकी आवाज पर कुछ नहीं माना।
 
🙏 यह तो बहुत ही गंभीर मामला है, लेकिन अगर हम सोचते हैं कि पुलिस ने पहले हल्के बलप्रयोग से समझाने की कोशिश की तो यह अच्छा है 🤔। फिर भी, यह घटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है और मेरी खास बात यह है कि प्रदर्शनकारियों ने अपने अधिकारों के लिए जागरूकता बढ़ाने का निश्चित रूप से सही तरीका चुना हुआ। 🚗

मुझे लगता है कि अगर हम सभी को एक-दूसरे की जगह नहीं मानें और अधिक समझदारी से बात करें, तो हम कई तरह की समस्याओं से निपटने में सक्षम होंगे। 🤝

अब, यह घटना हमेशा नहीं दिखेगी, लेकिन अगर हम इस पर से सीखते हैं और अपने समाज को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं, तो यह सब खुलकर मिट जाएगा। 🌈
 
अरे भाइयो! 😱 यह तो बहुत ही गंभीर मामला है। पुलिस ने इतना बलप्रयोग किया कि लोगों को घायल कर दिया गया। और फिर भी, पुलिस ने कहा कि उन्होंने तनाव पर नियंत्रण रखा? 🤔 यह तो सुनकर बिल्कुल नहीं मान सकते।

मुझे लगता है कि प्रदर्शनकारियों की चिंता समझनी चाहिए थी। उनके परिवारों के लोग भी शराब ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा चलवाने की बात कर रहे थे, तो क्यों पुलिस ने इतना बलप्रयोग किया? 🤷‍♂️

और यह बात भी है कि आबकारी विभाग ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें पूरी जांच करनी चाहिए। शायद उनके द्वारा कुछ गलत हुआ था। 🤔

यह तो एक बहुत ही गंभीर मामला है, और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। 🚨
 
मुझे यह बात बहुत परेशान करती है जो आज हुई। पुलिस ने तो तो डंडों से दौड़ा-दौड़ाकर प्रदर्शनकारियों को पीटा और 4-5 लोगों को गाड़ी के गेट पर पटककर अंदर ठूंस दिया। यह तो बहुत ही बुरी स्थिति है जिसमें कई लोग घायल हुए हैं। मुझे लगता है कि पुलिस ने इस मामले में हल्का बलप्रयोग किया था, लेकिन इसकी वजह से तनाव बढ़ गया। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि क्या पुलिस को समझाने की कोशिश करनी चाहिए थी या फिर इस तरह से काम करना चाहिए था।

जैसे ही सोचता हूँ, मुझे यह घटना वाकई बहुत दुखद लगती है। प्रदर्शनकारियों ने जो बंद कर दिया था, वह क्यों नहीं समझाया गया था। मुझे लगता है कि हमें इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए एक अच्छा तरीका ढूंढने की जरूरत है।
 
यह तो बहुत ही गंभीर और दुखद घटना है जिसने खरगोन में पूरी तरह से बिगड़ जाना चाहिए। पुलिस की हरकतें किसी भी नियमों की नहीं हैं, वो दिखाई देते हैं कि वो तो अपने आप में बहुत ही अन्यायपूर्ण और अत्याचारी हैं।

लोगों के साथ ऐसा जुल्म करना चाहिए या क्या?

क्या यह हमारे समाज में आतंक बन गया है? लोग बिना किसी कारण के पुलिस पर निशाना बनाए देते हैं और फिर वो सुरक्षा के खिलाफ ही काम करते दिखाई देते हैं।

हमें यह सोचना चाहिए कि हमारे समाज में इतनी बढ़ती हुई अनियंत्रितता क्यों है। क्या हमारी पुलिस अपनी भूमिका पर काबू कर सकती है? या क्या हमें इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि हमारे समाज में इतना अधिक तनाव हो गया है।

कोई तो पुलिस वालों की हरकतों से सहमत होना चाहिए या नहीं?
 
यह तो फिर भी पुलिस की मूढ़ता है। पहले तो उन्होंने हल्का बलप्रयोग किया, लेकिन जब तनाव बढ़ गया, तो दूसरा डंडा निकाल लिया। यह साबित करता है कि उनका पागलपन शुरू में थोड़ा टालने की कोशिश थी, लेकिन बाद में वो दोनों भांजे निकले। और जैसे ही सारी घटनाओं को डंडे-डंडे से समझाया गया, तो हमें पता चल गया कि प्रदर्शनकारियों ने पहले से ही अपने रास्ते पर गलत फैसले लिए थे।
 
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बहुत हड़किमानी से डंडों से मारा। यह तो बिल्कुल सही नहीं है। पहले कोई समझने की कोशिश करनी चाहिए, फिर अगर कुछ गलत हुआ है तो नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। पुलिस का काम यह है, लोगों को सुरक्षित रखना। लेकिन ऐसे में जब तनाव बढ़ जाता है, तो बहुत बड़ी गलती होती है।
 
बड़ा शोक है यह घटना। पुलिस ने बहुत दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से प्रदर्शनकारियों को पीटा 🤕। क्या जरूरत थी इतना बलप्रयोग? मुझे लगता है कि पहले समझाने की कोशिश करनी चाहिए थी, लेकिन जब तनाव बढ़ने लगा, तो यह गलती कैसे हुई? सड़कों पर जाने वाले लोगों की सुरक्षा सबसे जरूरी है, इसे समझने में कुछ समय लगता है।
 
अरे, इस घटना को समझने की कोशिश करूँ, लेकिन कुछ चीजें अजीब लगती हैं। प्रदर्शनकारियों को गाड़ी के गेट पर पटककर अंदर ठूंसना कैसा हुआ? और फिर पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन बाद में बलप्रयोग किया। यह तो गलत लगता है 🤔

मुझे लगता है, इस घटना के पीछे शराब ठेकेदार और युवक की घटना से जुड़ी चीजें हैं। लेकिन पुलिस ने क्यों इतना बलप्रयोग किया? और क्या प्रदर्शनकारियों ने पहले पुलिस से बातचीत नहीं की? यह सोचने पर अच्छा लगेगा 🤷
 
मैंने पढ़ा है की खरगोन में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बहुत बुरी तरह से पीटा, जिसमें कई लोग घायल हुए। मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ी गलती थी, हमेशा समाज के लिए सुरक्षा और शांति का ध्यान रखना चाहिए। पुलिस ने पहले हल्के बलप्रयोग से समझाने की कोशिश की, लेकिन जब हालात बदलते रहे, तो उन्होंने हल्का बलप्रयोग करने का। मुझे लगता है कि पुलिस को अपने कार्यों पर एक बार फिर से विचार करना चाहिए। 🤕💔
 
मैं समझ नहीं पाया कि पुलिस क्यों इतना बलप्रयोग करना पड़ा। पहले तो लोगों ने हाईवे पर चक्काजाम किया, लेकिन जब हालात बिगड़ने लगे, तो पुलिस ने समझाने की कोशिश नहीं की। मुझे लगता है कि इस मामले में कुछ गलत हुआ था, लेकिन पुलिस ने ऐसा दिखने वाला हल्का बलप्रयोग किया। 🤔

मैं समझता हूँ कि घटना से पहले भी एक गंभीर दुर्घटना हुई थी, लेकिन लगता है कि पुलिस ने ऐसा सबक नहीं सीखा। मुझे खेद है, लेकिन यह घटना अचानक से हुआ, और मैं समझता हूँ कि पुलिस को भी अपने कर्तव्यों का पालन करना पड़ा।

इस तरह की घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि कैसे हम अपने समाज को बेहतर बना सकते हैं। 🤝
 
यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है 🤕 पुलिस की तरह-तराहट करने से कुछ भी नहीं समझ मिलता। पहले हल्का बलप्रयोग से समझाने की कोशिश करें, फिर तनाव बढ़ने पर नियमानुसार कदम उठाएं। यह तो किसी की जान भी नहीं बचाता, बस प्रदर्शनकारियों को डरा देता। मुझे लगता है कि पुलिस को अपने पद से जिम्मेदारी समझनी चाहिए और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सामाजिक समर्थन लेना चाहिए।
 
😒 यह तो पुलिस की रफ्तार है! पहले समझाने की कोशिश करती है, फिर जब परेशानियाँ बढ़ने लगती हैं तो डंडों से पीटना शुरू कर देती है। क्या यही लोकतंत्र की तरक्की का मतलब है? 🤔

और यह तो शराब ठेकेदार की बिल्कुल भी गुणवत्ता नहीं है! समाज से टकराने और किसी को घायल करने के बाद इतनी आसानी से मुआवजा लेने की ताकत कहाँ से निकली? 😡

लेकिन यह घटना सिर्फ शराब ठेकेदार की नहीं है, बल्कि पुलिस की भी जिम्मेदारी है कि वे अपने कर्तव्य को सही तरीके से निभाती हैं। और अभी तक कोई जवाब नहीं देते हुए यहाँ खड़े हैं! 👎
 
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