कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड: 29 लड़ाकू विमानों ने सिंदूर, वज्रांग, अर्जन फॉर्मेशन बनाए; 90 मिनट की परेड में वंदे मातरम समेत 30 झाकियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का फैसला किया है। इस बार इसमें कई बदलाव आए हैं।

गणतंत्र दिवस परेड में इस बार दो चीफ गेस्ट होंगे। CRPF की पुरुष रेजिमेंट का नेतृत्व महिला अधिकारियां करेंगी। सेना के युद्ध का लाइव डिस्प्ले और पशुओं की परेड भी होगी। इसमें कुल 8 बदलाव आए हैं।
 
ब्रो! मोदी जी ने फिर से दिल्ली परेड में भाग लेने का फैसला किया है। तो अब यहां दो बड़े गेस्ट होंगे। CRPF की रेजिमेंट का नेतृत्व महिला अधिकारी करेंगी, यह तो अच्छा है लेकिन सेना के युद्ध का डिस्प्ले भी जानकर मैं थोड़ा उत्साहित हुआ। और अब दिल्ली परेड में पशुओं की भी परेड होगी, यह तो बहुत रोचक है। लेकिन मुझे लगता है कि इन बदलावों से इस परेड को और भी अच्छा बनाया जाएगा।
 
मोदी जी को फिर से गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का मौका मिलना अच्छा है। लेकिन क्या थोड़ा विविधता नहीं चाहिए? आज के समय में महिला अधिकारी CRPF की कमजोरी को सुधारने में कितनी मदद कर सकती हैं? 🤔 और युद्ध का लाइव डिस्प्ले तो सचमुच जोश बढ़ाएगा। लेकिन इस परेड में पशुओं की भागीदारी तो थोड़ी अजीब लग रही है। क्या यह एक नई ट्रेंड है? 🐕
 
मुझे लगने लगा है कि हमारे देश में बहुत सारी चीजों में बदलाव आ रहे हैं, लेकिन जब तक समाज और राजनीतिक दलों में एक-दूसरे को समझने की भावना नहीं बनती, तो ये बदलाव किसी काम के नहीं हो सकते।

क्या हमने कभी सोचा है कि देश की जिम्मेदारियों में महिलाओं की भूमिका और महत्ता कितनी बढ़ गई है? यह अच्छी बात है कि CRPF की पुरुष रेजिमेंट का नेतृत्व महिला अधिकारियां करेंगी। इससे हमें अपने समाज में महिलाओं को भी सशक्त बनाने और उनकी भूमिका को महत्व देने की ओर एक संदेश मिलता है।
 
मुझे लगता है कि यह गणतंत्र दिवस परेड में महिलाओं को अधिक महत्व देने का एक अच्छा कदम है। महिला अधिकारियों नेतृत्व वाली पुरुष रेजिमेंट की भागीदारी से हम अपने समाज में बदलाव लाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। लेकिन क्या इस परेड में हमारे युवाओं और खिलाड़ियों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा? जैसे कि उनकी प्रतिभाओं और ऊर्जा को व्यक्त करने के लिए। 😊
 
मोदी जी के नेतृत्व में देश भर में गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाया जाएगा, लेकिन क्या यह परेड वास्तव में हमारी सेना और पुलिस की ताकत को दर्शाता है? CRPF की महिला अधिकारियों के नेतृत्व में लड़ने वाली रेजिमेंट को शामिल करना अच्छा कदम है, लेकिन क्या हमारी सेना और पुलिस की संख्या इस तरह कम कर दी जाएगी?

और तो तो पशुओं की परेड, मैं समझ नहीं पा रहा हूँ। क्या यह हमारे देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है? और युद्ध का लाइव डिस्प्ले भी कैसे काम करेगा? मुझे लगता है कि इन बदलावों से परेड की खूबसूरती गायब हो गई है। फिर भी, मैं इस देश के नेताओं का समर्थन करता हूँ, लेकिन उनके निर्णयों पर सवाल उठाने की जरूरत है। 🤔
 
Back
Top