कहां छिपा है 400 किलो सोना चुराने वाला सिमरनप्रीत: 32 करोड़ खर्च, लेकिन कनाडा पुलिस खाली हाथ; तीन साल बाद पाकिस्तानी मास्टरमाइंड अरेस्ट

कानून बैंक पर हुए हमले के बाद कई सवाल उठते हैं। सबसे पहले, यह तय करना जरूरी है कि कहां से 400 किलो सोना चुराया गया था। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, दुबई में एक सेफ हाउस में बैठकर अरसलान चौधरी ने सोना ठिकाने लगाया था, जिससे उसके पास यहां से भारत और दुबई के लिए भेजने का मौका मिला।

इसी तरह, 18 अप्रैल 2023 को टोरंटो के पियर्सन एयरपोर्ट पर एक वेयरहाउस से गायब हुआ था, जिसमें 24 कैरेट सोने के 6 हजार बिस्किट और 2 करोड़ कनाडियन डॉलर यानी 134 करोड़ रुपए थे।

इस चोरी में आठ लोग शामिल थे, जिनमें मास्टरमाइंड अरसलान चौधरी, सिमरनप्रीत पनेसर, अर्चित ग्रोवर, अमित जलोटा, परमपाल सिद्धू, अली रजा और प्रसद परमालिंगम शामिल थे।
 
मुझे तो यह हमला बहुत ही आश्चर्यकारी लगा 🤔। क्या हमारी पुलिस इतनी कमजोर नहीं है? कि कोई भी ऐसा बड़ा हमला कर सकता है? और सबसे बुराई, यह सोना कहां जा रहा था? क्या हमारे देश में इतने लोग एक साथ मिलकर काम कर सकते थे? और क्यों चोरी किया गया? तो फिर उसके पास क्या करने का मौका था? 🤑
 
ये तो एक बहुत बड़ी चोरी हुई है ... 400 किलो सोना चुराने में आसानी से कहीं से सोना लाया गया होगा या फिर इन लोगों ने अपने पास बेच दिया होगा। पुलिस की रिपोर्ट में यह जरूरी नहीं है कि वे सभी चोरों को पकड़ पाएंगे। इसके अलावा, यह भी सवाल उठता है कि इन लोगों ने इतना सोना बेचने का तरीका कैसे सोचा। और पैसे कहां जा रहे थे... तो मुझे लगता है कि ये सब एक बड़ी झूठी कहानी है।
 
ये तो दुनिया की सबसे बड़ी चोरी है 🤯। सरकार को यह तय करना होगा कि आर्सलान चौधरी ने सोना कैसे चुराया और फिर कहां भेजा। पुलिस रिपोर्ट में यह जानकारी नहीं है, लेकिन मेरा मानना है कि इस पर जांच करने वाले अधिकारियों को अपनी नौकरी से छुटकारा पाने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि वे हमेशा राजनीतिज्ञ और सरकार के पक्ष में हों।
 
"जैसे जानवरों को खून देने वाली बाजार में भेजा जाता है, वैसे ही ये लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपने अस्तित्व को खतरे में डाल देते हैं " 💡
 
बात करो, यह हमले की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना कहां जा रहा था। पुलिस ने बताया कि यह सभी चीजें दुबई में एक सेफ हाउस में रखी गईं थीं। तो यह सवाल उठता है कि क्या हमारे बैंकों और सुरक्षा व्यवस्था पर कुछ लोग ने ध्यान नहीं दिया? क्योंकि अगर इतनी बड़ी मात्रा में चीजें दुबई में रखी गईं, तो यह हमारे आर्थिक विस्तार की बात नहीं है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल उठाता है 🤔

और एक बात तो और है कि इन चोरियों में इतनी बड़ी जटिलता और विशेषज्ञता का प्रयोग क्यों किया गया। यह हमारे सुरक्षा उपायों की कमी को दिखाता है। तो हमें अपनी सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा पर ध्यान रखने की जरूरत है, न कि इन चोरियों को बंद करने की।
 
ये दुनिया तो ऐसी है जहां हर कोई सोने का शौक रखता है, लेकिन फिर भी 400 किलो सोना चोरी करना और उसका मुंह साफ रखना आसान नहीं है। पुलिस की रिपोर्ट में यह तय करना जरूरी है कि कहां से दुबई में सेफ हाउस में बैठकर अरसलान चौधरी ने सोना ठिकाने लगाया था, और उसे वहाँ से भेजने का मौका मिला। लेकिन पुलिस को यह जानकारी तय करनी होगी कि उसके पास दुबई से भारत भेजने का कैसे मौका मिला।
 
इस हमले के बाद तो मेरी एक सवाल है कि इतनी बड़ी चोरी कैसे किया गया और कहां से सोना लाया गया था। यह पूरा खेल पुलिस के पास ही समझाना होगा, परन्तु मुझे लगता है कि हमें इस बारे में और जानने की जरूरत है। तो क्या यह हमला बस इतना था या इससे कुछ और भी निकल रहा है, जिसे हमें नहीं पता।
 
बस बात करिए, यह सब तो बहुत ही दिलचस्प है 🤔। मेरा ये विचार है कि जैसे ही हम किसी भी चोरी की रिपोर्ट सुनते हैं, तो सबसे पहले हमें पता लगाना चाहिए कि यहां तक कि 400 किलो सोना कहां से आया था। यह जानकारी बहुत जरूरी है, फिर ही हमें पता लगाना चाहिए कि सोना दुबई या टोरंटो में कैसे ठिकाने लगाया गया था।

और सबसे बुरी बात यह है कि 8 लोगों ने इस चोरी में शामिल हुए, जिसमें एक से ज्यादा लोग थे जो अपने मास्टरमाइंड अर्सलान चौधरी को फॉलो कर रहे थे।

मेरी भावना है कि अगर हम तीन चीजों पर ध्यान दें, तो यह देश और पुलिस दोनों को सोने की ट्रैकिंग में सक्षम होने में मदद कर सकते हैं।
 
बस, ये हमले कैसे हुए? पहले तो मैंने सोचा था कि यह एक गैर-सरकारी संगठन की बात है, लेकिन फिर मेंदू चोरी की बात सुनकर मुझे बहुत निश्चितता नहीं लगी। कहां से 400 किलो सोना चुराया गया था, यह तय करना जरूरी है। और इन लोगों के पीछे क्या इरादे थे, यह समझना भी ज़रूरत है।

मैं सोचता हूँ कि बैंक पर हमले में न तो खून बहा और न ही कोई गंभीर चोट लगी, लेकिन इतनी बड़ी चोरी हुई। क्या यह एक धमकी थी, या बस एक चोरी थी? मुझे लगता है कि पुलिस को इन लोगों को पकड़ने के लिए बहुत मज़दूरी करनी पड़ेगी।
 
यह तो माफ करें लेकिन यह 400 किलो सोने की चोरी के पीछे की जड़ क्या है? दुबई में एक सेफ हाउस में बैठकर अरसलान चौधरी ने सोना ठिकाने लगाया था, तो क्या यह मुझे लगता कि वह एक छोटे से शेड्यूल्ड अपराधी है? यह तो बहुत बड़ा केस है, और पुलिस को इस मामले में खुद को अच्छी तरह से पकड़ना होगा। और 18 अप्रैल 2023 को टोरंटो के पियर्सन एयरपोर्ट पर हुए वेयरहाउस से गायब होने वाले सोने की बात तो यहां भी कई सवाल उठते हैं। क्या ये दो मामले अलग-अलग हैं? और आठ लोगों ने एक ही अपराध में शामिल होने की क्या कोई समझ है? 🤔
 
मेरे दोस्तों को ये विचार आया है कि यह हमला जैसा किया गया है, वह तो सिर्फ लोगों की ध्यान खींचता है। लेकिन चोरी में इतनी बड़ी बातें लाई गईं, समझ नहीं आती कि चोरों ने इतने पैसे और सोने के क्यों चुराए।

मुझे लगा कि यह हमारे बैंकों को मजबूत बनाने का मौका है, लेकिन ऐसा लगता है जैसे हमें अपनी खजाने की गुंडागर्दी सुधारने का मौका मिल गया है।

मुझे यह तय करना है कि अगर मैं भी 400 किलो सोना चुराऊं, तो क्या दुनिया में ऐसा एक सेफ हाउस होगा जिसे मैं बैठकर ठिकाने लगाऊं।

मुझे लगता है कि पुलिस की रिपोर्ट में चारों ओर से सोना लेकर चलने का तरीका बताया गया है। अर्सलान चौधरी ने ऐसा कैसे किया? और दूसरों को इसका ज्ञान कैसे मिला।

मुझे यकीन नहीं है कि यह वेयरहाउस सेफ था या नहीं। अगर न होता, तो चोरी कैसे हुई।
 
बहुत बड़ा सवाल है यह कि पुलिस ने 18 अप्रैल को वेयरहाउस में 2 करोड़ कनाडियन डॉलर की चोरी की रिपोर्ट में इतना सोना बताया था या नहीं। अगर वह सच है, तो यह बिल्कुल भ्रम है और हमें इस पर ज्यादा सवाल करने चाहिए।
 
अरसलान चौधरी की इस जासूसी में तीन टन सोने का खेल हुआ है तो क्या यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा नहीं है? 🤔 यार, बैंकों पर हमले और चोरियाँ सिर्फ आर्थिक नुकसान से खत्म नहीं होती, बल्कि हमारी जीवनशैली और मूल्यों को भी प्रभावित करती हैं।

अरसलान चौधरी का यह खेल तो दुनिया भर में धूम मचा रहा है, लेकिन इसके पीछे क्या सच्चाई है? क्या हमारी आर्थिक नीतियों और सुरक्षा सिस्टम में कोई कमी थी, जिससे यह संभव हुआ? यार, इन सवालों के जवाब ढूंढना जरूरी है, ताकि हम अपने देश की सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि को मजबूत कर सकें।
 
सोने की चोरी में आठ लोग कैसे शामिल हो सके? यह तो बहुत आसान नहीं है। पहले से, अरसलान चौधरी ने कहां से 400 किलो सोना पाया था? क्या हमें पता है कि वह इतना सोना कहां मिला था?

और फिर, दुबई में एक सेफ हाउस में बैठकर सोना ठिकाने लगाने की बात तो बहुत अजीब है। क्या यह सुनिश्चित है कि वहाँ कोई सुरक्षा नहीं थी? और फिर, सिमरनप्रीत पनेसर जैसे लोग 24 कैरेट सोने के 6000 बिस्किट चुराने में सक्षम हो गए? यह तो बहुत बड़ा डील है।
 
मुझे यह बात देखने में मजा आया कि सोना चोरी में कितने लोग शामिल हैं! तो फिर पुलिस क्यों नहीं लगाती कि यार, आप सभी एक साथ गाना चाहते हैं, न कि इस सोने का गाना! 😂 और अरसलान चौधरी की दुबई में सेफ हाउस में बैठकर सोना ठिकाने लगाने की बात तो फिर से लगती है कि यार, यह लड़का थोड़ा सोचता नहीं! और टोरंटो के पियर्सन एयरपोर्ट पर वेयरहाउस से गायब हुआ सोना तो यार, वहां मौजूद लोगों ने भी कुछ कर नहीं पाया।
 
ये बात तो बहुत अजीब है कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना चुराने वालों को पकड़कर नहीं लाया गया। पुलिस ने अरसलान चौधरी को पकड़ा है, लेकिन यह तय करना कि कहां से शुरू हुआ था, इसके लिए और भी जाँच की ज़रूरत है।
 
बस हुआ कुछ तो है ना? यहां तक कि दुबई में भी किसी को चोरी करने का मौका नहीं मिलता, लेकिन अरसलान चौधरी ने टिक गई जैसे! पुलिस कह रही है कि वह सेफ हाउस में बैठकर सोना ठिकाने लगाया था। यह तो क्या होगा अगर वह भारत वापस आया?

और ये 6 हजार बिस्किट टोरंटो पियर्सन एयरपोर्ट से गायब हुए। क्या यही नहीं था जो हमें वादा करते थे - 'सोना और सोना का देश'! लेकिन लगता है कि हमारे देश में सोना तो बस एक छोटा सा खिलौना बन गया है।
 
बात दोस्ता तो ऐसे में क्या बोलिए? यह सोच लेना जरूरी है कि हमारे देश में चोरी तो जारी ही, और पुलिस कैसे पकड़ेगी? 400 किलो सोना कितना आसानी से उधार लेते हैं अर्सलान चौधरी? और यहां तक कि वेयरहाउस में भी गायब होता है? हमें अपनी पुलिस की सास को बचाने के लिए ज्यादा सिर्फ दोष खुद देना ही चाहिए।

और ये तो हमारे अर्जुन की शान देख रहे हैं! एक टोरंटो एयरपोर्ट में 6 हजार बिस्किट और 2 करोड़ डॉलर क्यों उधार लेते हैं? ऐसा तो फिल्म से लिया गया कोई सीन ही नहीं था।

लेकिन, दोस्त की बात ये है कि हमें अपनी पुलिस को मजबूत बनाने के लिए जरूरी होगा, और चोरों के खिलाफ मुकदमा चलाने की जरूरत है। फिर तो हमारा सोना फिर से कहीं जाने देंगे या?
 
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