बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की एक बड़ी याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, जिसमें उन्होंने कथित लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले में सीबीआई की तरफ से दर्ज केस को रद्द करने की मांग की है. इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनके बच्चों तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और मीसा भारती पर आरोप लगाए गए थे.
लालू यादव ने अपनी याचिका में कहा है कि सीबीआई ने उनके खिलाफ बिना वैधानिक मंजूरी के प्रारंभिक जांच शुरू की जो कानून के खिलाफ है. उन्होंने यह भी बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत किसी भी जांच से पहले अनुमति जरूरी थी.
हालांकि, सीबीआई ने कड़ा विरोध किया और कहा है कि लालू यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़े नहीं हैं, इसलिए धारा 17A के तहत पूर्व इजाजत की कोई जरूरत नहीं थी. सीबीआई ने यह भी कहा कि याचिका तकनीकी रूप से भी गलत है क्योंकि लालू यादव ने पहले सेशन कोर्ट का रुख नहीं किया और सीधे हाई कोर्ट आ गए.
इस मामले में 2004 से 2009 तक का समय पर ध्यान दिया गया है, जब रेल मंत्रालय में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई. लालू यादव ने यह भी कहा कि 2009 से 2014 के बीच सीबीआई ने जांच कर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी. इसके बावजूद 2021 में दोबारा जांच शुरू करना और 2022 में एफआईआर दर्ज करना कानून का दुरुपयोग है.
लालू यादव ने अपनी याचिका में कहा है कि सीबीआई ने उनके खिलाफ बिना वैधानिक मंजूरी के प्रारंभिक जांच शुरू की जो कानून के खिलाफ है. उन्होंने यह भी बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत किसी भी जांच से पहले अनुमति जरूरी थी.
हालांकि, सीबीआई ने कड़ा विरोध किया और कहा है कि लालू यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़े नहीं हैं, इसलिए धारा 17A के तहत पूर्व इजाजत की कोई जरूरत नहीं थी. सीबीआई ने यह भी कहा कि याचिका तकनीकी रूप से भी गलत है क्योंकि लालू यादव ने पहले सेशन कोर्ट का रुख नहीं किया और सीधे हाई कोर्ट आ गए.
इस मामले में 2004 से 2009 तक का समय पर ध्यान दिया गया है, जब रेल मंत्रालय में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई. लालू यादव ने यह भी कहा कि 2009 से 2014 के बीच सीबीआई ने जांच कर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी. इसके बावजूद 2021 में दोबारा जांच शुरू करना और 2022 में एफआईआर दर्ज करना कानून का दुरुपयोग है.