लोकतंत्र दांव पर, संघवाद हो रहा है खत्म: जानें ममता बनर्जी ने ऐसा क्यों कहा

मुझे लगता है कि अरविंद केजरीवाल जी का बयान बहुत ही प्रेरक है, लेकिन यह सवाल तो उठता है कि सरकार भी क्या कर रही है? हमें सोचना चाहिए कि क्या सरकार ने भी इस मुद्दे पर कोई कदम उठाया है या नहीं। सरकार द्वारा किसी भी तरह से समाज में बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए।
 
अरे, ये बयान बहुत अच्छा है लेकिन कुछ सवाल हैं जिनके जवाब चाहिए। जैसे कि अरविंद केजरीवाल जी ने कहा है कि संविधान में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता की आत्मा को रक्षा करने के लिए हमारा संकल्प होना चाहिए। लेकिन सरकार भी बहुत बड़ी भूमिका निभाती है ताकि ये सभी मूल्यों को पूरा करने में मदद कर सके। जैसे कि सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार जैसे क्षेत्रों में नियमन और नियंत्रण ताकि हमारी समाज में ये सभी मूल्यों को पूरा हो सके।
 
मुझे लगता है 🤔 कि अरविंद केजरीवाल जी का यह बयान सच्चा और महत्वपूर्ण है। वहाँ पर एक बहुत ही अच्छी डायग्राम बनाई जा सकती है जिसमें संविधान के मूल्यों को प्रदर्शित किया जा सके।

मैं सोचता हूँ कि अगर हम संविधान की आत्मा—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता—को एक वृक्ष के रूप में देखें, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके प्रत्येक शाखा मजबूत और स्वस्थ हो।

हमारी सरकार की भूमिका किस बात में साफ है? मुझे लगता है कि अगर हम संविधान के मूल्यों को अपने राजनीतिक निर्णयों में शामिल करते हैं, तो दूसरी ओर सरकार को भी यह जिम्मेदारी होती है। 🤝
 
राजनीति में ऐसे दिनों में बोलते समय सावधानी बरतनी चाहिए। अरविंद केजरीवाल जी ने सच्ची बात कही है, लेकिन सरकार को भी उनका बयान सुनना चाहिए और अपनी ओर से समाज में बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।
 
मैंने कल मेरे छोटे भाई ने अपनी नई कार खरीद ली है और वह बहुत खुश है, लेकिन मुझे लगता है कि उनके पास से देने के लिए कुछ नहीं बचा है। 🤣

तो यह बात करें, अरविंद केजरीवाल जी ने सच कहा होगा या नहीं, लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपने देश को सुधारने के लिए और भी बहुत कुछ करना होगा। मेरी बीवी ने कुछ समय पहले एक अच्छी पुस्तक पढ़ी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र मजबूत होता है जब हम सब एक-दूसरे को समझने और सहन करने लगते हैं।
 
बोलते बोलते यह तो देखिए, हमारे प्रधानमंत्री जी ने भी संविधान दिवस पर बहुत ही सकारात्मक बयान किया था, लेकिन इस बयान में अरविंद केजरीवाल जी के बयान को सुनकर लगता है कि वे सरकार के खिलाफ नहीं बन रहे हैं 🙅‍♂️। अगर हमारी सरकार तो सत्ता सर्वोपरि होती, तो फिर क्यों इस तरह के बयान देते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि भले ही केजरीवाल जी के बयान से कुछ विपक्षी खिलाड़ी खुश हों, लेकिन यह हमारी सरकार को मजबूत करने में मदद नहीं करेगा।
 
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