मुंबई समेत 15 नगर निगम में महिला महापौर होंगी: उद्धव गुट का आरोप- BMC के लिए नियम बदले, OBC या ST का मेयर होना था

આ સર્વેખ માટે પણ લોકો ઉભરાં ગયા છે. ઘણા મહિલા નેતાઓ દ્વારા આ પસંદગી ચળવળના ઉદેશ કોઈ લોકમાં અસ્પષ્ટ છે. રાજ્ય પરિવહન દ્વારા તમારા આપની એ ચોકી સેટ ભળવણી વિનંતી છે.
 
अरे दोस्तों, तो मुंबई में महिला मेयर हुई और शिवसेना ने विरोध किया है, लेकिन मुझे लगता है कि यह एक अच्छी बात है। हमारे देश में महिलाओं को बहुत से अवसर मिलते हैं और फिर भी उन्हें सामाजिक रूप से पीछे छोड़ दिया जाता है।

महिला मेयर के निकलने से न केवल मुंबई में लेकिन पूरे देश में महिलाओं को नई ऊर्जा और शक्ति मिलेगी। यह एक अच्छी बात है कि शिवसेना ने विरोध किया है, लेकिन मुझे लगता है कि विरोध करने के बजाय उन्हें सिस्टम में बदलाव लाने की जरूरत थी।

अब मुंबई में महिला मेयर होने से हमें उम्मीदें हैं कि वह शहर को बेहतर बनाएगी और महिलाओं को अपने करियर में आगे बढ़ाएगी।
 
ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਸੀ ਇਹ ਘਟਨਾ, ਕਿ ਮੁੰਬਈ ਵਿੱਚ ਮਹਿਲਾ ਮੇਅਰ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਸੀਨੀਅਰ ਜ਼ਿਮੀਨਦਾਰਾਂ ਵੱਲੋਂ ਆਪਣੇ ਬੈਠਕ ਤੋਂ ਉਡਾਉਣ ਵਾਲੀ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਗੱਲ।
 
मैं समझता हूँ कि इस बदलाव से लोगों को फ़ायदा होने की उम्मीद है, लेकिन मुझे लगता है कि यह बदलाव सही तरीके से विचार करा नहीं गया। आरक्षण नीति के बारे में बहुत से लोगों को पैसा चलने की बात पर ध्यान देना पड़ रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तविक जरूरतमंदों की मदद नहीं हो सकती। इसके अलावा, मुझे लगता है कि यह बदलाव भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा। हमें आरक्षण नीति में सुधार करना चाहिए, लेकिन सही तरीके से।
 
बड़े बुरे फैसले हो रहे हैं देश में, तुमने सोचा था कि आरक्षण नियम हमारी समाज को मजबूत करेंगे, लेकिन अब सोचना पड़ रहा है कि ये फैसले हमारे भविष्य को कैसे प्रभावित करेंगे। मुंबई की महिला मेयर ने भी अपने देश के बड़े नेताओं के सामने अपनी बात कही, लेकिन क्या सच्चाई और न्याय की बात ही सुनी गई?

मैं समझता हूं कि आरक्षण एक मुद्दा है, लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि कैसे हम इसे बदलकर देश को आगे बढ़ा सकते हैं। बदलने की जरूरत है, लेकिन बदलने का तरीका सही होना चाहिए। हमारे देश में इतने सारे लोग हैं जो अपने जीवन में लड़ते रहते हैं, इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे निर्णय इतने भारी नहीं हों।
 
अरे, यह तो बहुत ही दिलचस्प बात है 🤔। मुझे लगता है कि शिवसेना की जानबूझकर पार्टी के राजनेताओं ने महिला मेयर को विरोध करने का फैसला क्यों किया? यह तो बस पुरुषहित नहीं है, बल्कि उनके पास आरक्षण से जुड़े कुछ गंभीर मुद्दे हो सकते हैं जिनकी उन्हें निपटना पड़ रहा है।

आरक्षण नियम बदलने से पहले, सरकार ने यह तय कर लेना चाहिए था कि ये बदलाव कैसे किया जाएगा और इसमें कौन शामिल होगा। अब, जब विरोध हो रहा है, तो लगता है कि यह एक बड़ा मुद्दा हो सकता है और इसके बाद से कोई भी निर्णय लेने से पहले पूरी दिशा पर जांच करना चाहिए।
 
तो यह बातें देखकर लगता है की शिवसेना लोग अभी भी आर्थिक संसाधनों के बारे में ज्यादा चिंतित हैं। महिला मेयर बनाने पर उन्हें खुशी नहीं हो रही, इसलिए वे आरक्षण नियम बदलने की बात कर रहे हैं... लेकिन देखते हैं कि सांसदों और मंत्रियों को भी यही चिंता है। ये सरकार सिर्फ ताकत में बढ़ रही है तो फिर क्या?
 
अरे भाई, तुमने सुना है कि मुंबई की महिला मेयर ने शिवसेना के खिलाफ बोला? 🤣 यह तो बहुत ही मजेदार है! लगता है कि शिवसेना के लोग अभी भी राजनीति में महिलाओं की स्थिति पर पुराने विचारों को नहीं छोड़ पाए हैं... और महिला मेयर ने उनके खिलाफ विरोध किया? यह तो एक दोस्ती की समस्या है! 😂

लेकिन अरे भाई, आरक्षण नियम बदल गए? यह तो बहुत ही अच्छी बात है! अब लोगों को अपनी जाति और सामाजिक स्थिति पर ध्यान नहीं देना पड़ेगा, बस उनके मेहनत और योग्यता पर ध्यान देंगे। यह तो एक नई दुनिया है! 🌎
 
अरे, ये बात तो हुई ही थी 😒 मुंबई की महिला मेयर को शिवसेना ने विरोध किया है, लेकिन यह तो उनकी भूमिका के लिए जिम्मेदार नहीं है। सीनियरिटी के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए, न कि महिला मेयर को। और आरक्षण नियम बदलने से पहले हमें इसके प्रभाव को समझना चाहिए। यह तो एक बड़ा मुद्दा है, जिस पर हमें ध्यान देना चाहिए।
 
😊 यह तो बहुत ही रोचक है मेरे दोस्त! मुझे लगता है कि इसने ज्यादातर लोगों का दिल चुरा लेगा। महिला मेयर बनने वाली पहली महिला के रूप में मुंबई में ऐसी बात तो सचमुच बहुत प्रेरणादायक है। शिवसेना ने विरोध किया, लेकिन यह बदलने से हमारे समाज में एक नई दिशा मिलेगी। 👍 आरक्षण नियम में बदलाव करने से हमारी सामाजिक असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी, जो तो बहुत जरूरी है। 😊 और सबसे अच्छी बात यह है कि इसने हमें महिलाओं की शक्ति और प्रेरणा दिखाई है। 👏
 
🤔 ये तो बहुत ही दिलचस्प बात है... आरक्षण नियम बदलने से पहले कोई तय कर लेते, तो यही सारा मालिक पागलपन साबित होता। शिवसेना ने विरोध किया, लेकिन अब पूछिए, दूसरी पक्ष की बात क्या है? किसी को कुछ मिल गया तो अच्छा है, कोई खारिज नहीं होना चाहिए। 🤷‍♂️

तो अब ये सोच लें, आरक्षण नियम बदलने से, हमें अपने देश को आगे बढ़ाने की जरूरत है। जाति-धार्मिक बाधाओं से मुक्ति, यही है हमारा लक्ष्य। 🌟
 
अरे यार, तो ये बात है मैंने सुनी है... मुंबई में महिला मेयर नियुक्त हुई है लेकिन शिवसेना ने विरोध किया है कि आरक्षण नियम बदल गए। मुझे लगता है कि यह तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, हमारी सरकार ने आरक्षण नीति पर इतनी जोर दिया था, और अब ये बदलने की बात आ रही है।

मैं सोचता हूं कि इससे हमारे पासवर्ड कॉलेजों में बहुत त्रासदी हो सकती है, जहां छात्रों को आरक्षण की जरूरत होती है, लेकिन अब यह नियम बदलने से उनके लिए आगे बढ़ना आसान नहीं होगा।
 
🤔 बीते दिनों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ गई है, और अब मुंबई में एक ऐसी घटना हुई जो हमें सोचती-सोचने पर मजबूर कर रही है। शिवसेना ने विरोध किया, लेकिन यह सवाल उठता है कि आरक्षण नियम बदलने से लड़कियों और महिलाओं के लिए क्या फायदा होगा? 🤷‍♀️

मुझे लगता है कि हमें अपनी समाज में बदलाव लाने के लिए सोच-विचार करना चाहिए। आरक्षण नियम बदलने से हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि लड़कियों और महिलाओं को सम्मान मिले, और उन्हें अपने लक्ष्यों तक पहुंचने की सुविधा दी। 🌟

आजादी के बाद भारत में हमने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन अभी भी लड़कियों और महिलाओं को समाज में अपना स्थान बनाने में चुनौतियाँ हैं। हमें एक-दूसरे के साथ सहयोग करना चाहिए और समाज में बदलाव लाने के लिए एकजुट होना चाहिए। 🌈

मुझे लगता है कि हमारी सरकार और प्रशासन ने इस पर ध्यान देना चाहिए और लड़कियों और महिलाओं को समर्थन देना चाहिए। इससे हमें एक बेहतर भविष्य देखने में मदद मिलेगी। 🌟
 
बात करे तो मुम्बई में महिला मेयर बनाने पर कोई बिगड़ा नहीं है, लेकिन जब स्वatantra और समाजवादी दलों ने आरक्षण नियम बदलने की बात कही, तो मुझे लगा कि थोड़ी समझदारी चाहिए। जी हां, आरक्षण नीतियों में बदलाव करने से पहले हमें यह सोचना चाहिए कि हम दूसरों के अनुसार क्या कर रहे हैं। पिछड़े वर्गों और समाज के वंचित लोगों की बात नहीं हो सकती। आरक्षण नीतियां हमेशा थोड़ी भ्रष्टाचार की स्थान पर चलने के लिए बनाई गई हैं, इसलिए उनके बदलने में एक अच्छा तरीका नहीं है। 🤔
 
अरे, यही तो है सच्चाई कि आरक्षण नियम बदलने से सामाजिक समरसता कम होती है। मैं समझता हूँ कि शिवसेना ने महिला मेयर के खिलाफ विरोध किया, लेकिन इससे महिलाओं को आरक्षण देने के बारे में सोचने पर मजबूर होना चाहिए।

आरक्षण एक अच्छी बात है जिससे कमजोर वर्गों को सम्मान और सुरक्षा मिलती है। लेकिन अगर हम इसे भ्रष्टाचार के रूप में देखेंगे, तो इससे हमारे समाज को नुकसान पहुंचेगा।

मुझे लगता है कि सरकार को आरक्षण नियमों पर फिर से विचार करना चाहिए और लोगों की बात माननी चाहिए। इससे हमें अपने समाज को बेहतर बनाने का मौका मिलेगा।
 
आर्थिक बुराई की बात नहीं तो भले ही महिला मेयर बन गई और सेवनी युवरा सिंह जैसी लड़ने वाली महिलाएं हमारे राज्य की मानें फिर भी आरक्षण नियम बदल गए। तो कौन करेगा उसके खिलाफ प्रदर्शन? 🤔

मेरी बात ये है कि अगर सेवनी जी तरह की महिलाएं विरोध करती हैं तो उनका भी कोई समर्थन करना चाहिए। हमारे देश में बहुत सारी लड़कियां स्कूलों में पढ़ाई नहीं कर पातीं। अगर उन्हें शिक्षा मिलती है तो वह अपने राज्य की सेवा कर सकती हैं और विरोध भी कर सकती।

जिस नियम को बदलने का फैसला किया गया वही ऐसा है जिससे हमारे देश में बदलाव आने का मौका मिले।
 
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