भारत ने दुनिया को एक अलग लीग में दिखाया है। हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा, "जब हमारी ग्रोथ रेट 2-3% थी, तब कुछ बुद्धिजीवियों ने इसे हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहा और देश की धीमी अर्थव्यवस्था का कारण हिंदू संस्कृति को बताया। लेकिन हमने ऐसी बातें नहीं मानीं। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
हमारे देश में कुछ चीजें बदल गई हैं। पहले 1000 रुपए के लोन के लिए बैंक गारंटी मानता था। हमने इसे तोड़ दिया। अब 37 लाख तक गारंटी फ्री लोन मिलता है। इससे नौजवानों को एन्टरप्रेन्योर बनने का अवसर मिल रहा है।
हमारा स्पेस सेक्टर पहले सरकारी कंट्रोल में था। हमने इसे प्राइवेट सेक्टर के लिए खोला। आज इसके नतीजे देश देख रहा है। अभी 11 दिन पहले हैदराबाद में स्काई रूट कैंपस का इनॉगरेशन किया। यह भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है।
हमारा इंटेंट नेशन फर्स्ट है। हमारे देश में ऐसे प्रावधान थे जहां छोटी गलती को गंभीर अपराध माना जाता था। हमने उन्हें अपराध की कैटैगरी से हटाया।
हमारे एक सामर्थ्य का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक अनटैप रहा है। हमारा पूर्वी भारत, गांव, नारी शक्ति, छोटे शहर, यूथ पॉवर, ब्लू इकोनॉमी का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पा रहा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा, "जब हमारी ग्रोथ रेट 2-3% थी, तब कुछ बुद्धिजीवियों ने इसे हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहा और देश की धीमी अर्थव्यवस्था का कारण हिंदू संस्कृति को बताया। लेकिन हमने ऐसी बातें नहीं मानीं। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
हमारे देश में कुछ चीजें बदल गई हैं। पहले 1000 रुपए के लोन के लिए बैंक गारंटी मानता था। हमने इसे तोड़ दिया। अब 37 लाख तक गारंटी फ्री लोन मिलता है। इससे नौजवानों को एन्टरप्रेन्योर बनने का अवसर मिल रहा है।
हमारा स्पेस सेक्टर पहले सरकारी कंट्रोल में था। हमने इसे प्राइवेट सेक्टर के लिए खोला। आज इसके नतीजे देश देख रहा है। अभी 11 दिन पहले हैदराबाद में स्काई रूट कैंपस का इनॉगरेशन किया। यह भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है।
हमारा इंटेंट नेशन फर्स्ट है। हमारे देश में ऐसे प्रावधान थे जहां छोटी गलती को गंभीर अपराध माना जाता था। हमने उन्हें अपराध की कैटैगरी से हटाया।
हमारे एक सामर्थ्य का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक अनटैप रहा है। हमारा पूर्वी भारत, गांव, नारी शक्ति, छोटे शहर, यूथ पॉवर, ब्लू इकोनॉमी का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पा रहा था।