'मार्च में इंडियन आर्मी करेगी बड़ा ऑपरेशन': जैश-लश्कर-हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकियों को मैसेज, कश्मीर में ‘हाइब्रिड टेरर मॉडल’ एक्टिव

कश्मीर में ‘हाइब्रिड टेरर मॉडल’ एक्टिव, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज़बुल मुजाहिदीन अपने नेटवर्क से युवाओं को जोड़ने के लिए प्रोपेगैंडा चला रहे हैं। इन मैगज़ीनों में 1992 से फरार आतंकी जहांगीर सरूरी का इंटरव्यू भी है। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया है कि इसका मकसद पढ़े-लिखे नौजवानों को टारगेट करना है। मैगज़ीनों के जरिए आतंकियों को आर्मी के ऑपरेशन और आगे की तैयारी की जानकारी दी जा रही है।
 
ऐसा लगता है कि युवाओं पर बहुत सारा दबाव डाला जा रहा है कि वो आतंकवाद की दिशा में आकर्षित हों। यह पूरी तरह से गलत है। हमें अपने शिक्षा और पेशेवर जीवन को आगे बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए न कि आतंकवाद की। मैं समझता हूँ कि कश्मीर में बहुत सारे दरिद्र और अस्थिरता की स्थितियाँ हैं, लेकिन इसे आतंकवाद के रास्ते पर जाने से नहीं हल किया जा सकता। हमें शांति और सहयोग के माध्यम से समाधान ढूँढना चाहिए। 🙏
 
कश्मीर में युवाओं पर प्रभाव डालने के लिए क्या बात कर रहे हैं? 🤔 आतंकवादी नेताओं से इंटरव्यू देने वाले मैगज़ीन्स तो बस हमारी सुरक्षा को खतरे में डालते हैं... 😬
 
कश्मीर में युवाओं पर इतना प्रभाव डालने वाली चीजें भारी सवाल उठाने की जरूरत है। उन मैगज़ीनों से निकलने वाली पढ़ाई की बात? ज्यादातर बच्चे स्कूल से पढ़कर आते हैं, फिर इन मैगज़ीनों से प्रभावित होना कैसे हो सकता है? और ये मैगज़ीनें जो विदेशी जर्नलिस्ट्स से इंटरव्यू ले रही हैं वह तो शायद अपने-अपने देशों में आतंकवादी गतिविधियों के बारे में पता नहीं होते। हमें इन मैगज़ीनों पर और उनके प्रभाव पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, न कि इनके सिर पर हमला करने की।
 
मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है, लेकिन कहीं तक साबित नहीं हुआ है कि ये मैगज़ीन खुद आतंकवादियों द्वारा बनाए गए हैं। क्या हमें विश्वास करना चाहिए कि सरकार ने खुद आतंकवादी समूहों से जुड़े लोगों को बुलाकर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है? और फिर, ये मैगज़ीन 1992 से फरार आतंकी जहांगीर सरूरी का इंटरव्यू चलाते हुए... यह तो देखकर राहत नहीं मिलती, बल्कि हैरानी होती है कि हमारे शिक्षा प्रणाली में ऐसा कुछ भी स्वीकार किया जा रहा है। 😕
 
मुझे यह बहुत चिंता का विषय लगता है! युवाओं पर इस तरह का प्रभाव पड़ना तो बिल्कुल नहीं चाहिए। इन मैगज़ीनों से जुड़े लोगों को हमें समझाना चाहिए कि आतंकवाद की दुनिया में अंदर आने से तो कोई फायदा नहीं होता। ये सभी सिर्फ हमारे समाज को नुकसान पहुंचाते हैं और हमारे भविष्य को खतरे में डालते हैं।
 
अरे ये तो बहुत बड़ा खतरा है 🚨। इन मैगज़ीनों से पढ़कर बच्चे अपनी देशभक्ति छोड़ देते हैं और आतंकवाद की ओर आकर्षित होते हैं। यह सब तो एक बड़ा खेल है, जहां आतंकवादी अपने नेटवर्क से युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

मुझे लगता है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को इन मैगज़ीनों को बंद करना चाहिए और ऐसे प्रचारकों पर कड़ा हाथ उठाना चाहिए। ये सब तो हमारे देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।

मैं समझता हूँ कि आतंकवादियों ने अपने आप को छुपाने के लिए इतनी चालाकी से विचार किया है, लेकिन हमें उन्हें पकड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए। 🕵️‍♂️
 
मैं समझ नहीं पाता, क्योंकि इन मैगज़ीनों का उद्देश्य कौन सा है? यह तो भारत के लिए खतरा है, और हमें अपने युवाओं को इससे दूर रखना चाहिए। मुझे लगता है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को इस पर कड़ी नज़र रखकर काम करना चाहिए ताकि ऐसी गतिविधियाँ रोकी जाएं।
 
कश्मीर में युवाओं पर इतनी हिंसक प्रोपेगैंडा चलाने का मतलब क्या? ये सब कहीं नहीं चले गये हैं, फिर भी लोग ये मैगज़ीन पढ़ने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसा लगता है कि युवाओं को खोने की बुरी आदत है। मुझे लगता है कि अगर सरकार और सुरक्षा एजेंसियां हमेशा आपसी समझ से पहले स्कूलों में आतंकवाद के बारे में शिक्षित करतीं, तो शायद युवाओं को इस तरह की खतरनाक प्रोपेगैंडा नहीं पढ़ने दिया जाता।
 
क्या ये सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है कि वे हर एक आतंकवादी समूह को खत्म कर दें? और फिर इन सभी समूहों के जरिए युवाओं को प्रोपेगैंडा करने देना ? 😡

मुझे लगता है कि हमारी सरकार को हर एक आतंकवादी समूह के खिलाफ लड़ने के लिए अच्छी रणनीति बनानी चाहिए। और फिर इन सभी मैगज़ीनों को बंद करना चाहिए जिनमें आतंकियों की जानकारी दी जा रही है।

लेकिन ये तो आसान नहीं है। हमारे देश में कई अन्य समस्याएं भी हैं जैसे कि बेरोजगारी, गरीबी, शिक्षा में कमी। इसलिए, हमें इन सभी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए और आतंकवाद को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए। 🤔
 
मुझे लगता है कि युवाओं को ऐसे मैगज़ीनों से दूर रखना चाहिए, जिसमें आतंकवादियों की बातें चलती हैं 🙅‍♂️। यह तो और भी खतरनाक होगा अगर ये मैगज़ीन खालिस्तान मOVEMENT से जुड़ें। शायद सरकार को इस तरह के मैगज़ीनों पर रोक लगानी चाहिए। ये सब कुछ देखकर भी तो लोगों का ध्यान नहीं होता। यह कश्मीर में एक बड़ा मुद्दा बन गया है और अगर इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती तो बुरा ही होगा।
 
ਮैंनੂੰ ਇਹ बਹुत ਖ਼ਤਰਨਾਕ ਲੱਗ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਉਦੋਂ ਤੋਂ ਜਦੋਂ ਸੱਚੇ ਮਾਹੌਲ 'ਤੇ ਬਨਾਮ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ, ਕਿ ਅਖ਼बਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਜਾਣਕਾਰੀ ਪ੍ਰਚਲਤ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ। 1992 ਤੋਂ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਫ਼ਰਾਰ ਹੋਏ ਜਹਾਂਗੀਰ ਸਰੌਰੀ ਦਾ ਇੰਟਰਵਿਊ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਆਪਣੀ ਗ਼ਲਤੀ ਬਾਰੇ ਮਸ਼ਵਰਾ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ।
 
कश्मीर में यह सभी आतंकी समूह अपने नेटवर्क से युवाओं को जोड़ने के लिए प्रोपेगैंडा चला रहे हैं, तो फिर भी कोई उनकी बात नहीं सुनता। मुझे लगता है कि सुरक्षा एजेंसियों को पता होना चाहिए कि युवाओं को इस तरह प्रोपेगैंडा देने से उनकी जिंदगी कैसी बनती है। 1992 से फरार आतंकी जहांगीर सरूरी का इंटरव्यू मैगज़ीनों में दिखाई दिया, तो यह समझौता नहीं है कि वह अपने अपराधों को कैसे छुपाने का तरीका ढूंढ रहा था। सुरक्षा एजेंसियों को इन आतंकियों से लड़ने की तैयारी करनी चाहिए, लेकिन पहले उनको अपने नेटवर्क में खाई गई होल को भरना होगी।
 
मैंने फिर से पढ़ा है कि शायद सुरक्षा एजेंसियां मुझे सही नहीं समझ रही। ये 1992 से फरार आतंकवादी जहांगीर सरूरी को लेकर क्या प्रोपेगैंडा चला रहे हैं? यह तो साफ़ है कि उन्हें पढ़े-लिखे नौजवानों को डराने-धमकाने की जरूरत है। और फिर ये 3 समूह क्यों लाए गए? मुझे लगता है कि यह सभी एक ही खेल का हिस्सा हैं। विशेषज्ञ जैसे पांडे जी ने भी कहा है, कि आतंकवादियों को हमेशा से नौकरी देने की जरूरत नहीं होती। शायद यह सब एक बड़ा खेल है।
 
अरे बिल्कुल समझ आ गया है कि लाश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ये कैसे हाइब्रिड टेरर मॉडल का उपयोग कर रहे हैं... उनकी तरह की चीजें स्कूलों में भी फैल रही हैं, लेकिन वहां हमारी शिक्षा और जागरूकता ही बाधा बनती है 🤔

मुझे लगता है कि इन आतंकवादियों द्वारा फैलाई जाने वाली खबरें स्कूलों में पढ़े-लिखे बच्चों को खतरे में डालने की कोशिश करती हैं... हमें ऐसी चीजों को पहचानने और उनसे निपटने की जरूरत है ताकि हम अपने भविष्य को सुरक्षित रख सकें 💪
 
ક્યારે પણ આવી તો અનડળ છુટા લગાડીને દુખધારી બહુ જ શું કહ્યું તો એવું લાગે. આજે પણ ફરार અને બદ-મंजિલ શૈક્ષણિક સાથે વિચારવહાલ યુવાનો એટલે જમાઅતવાદીઓ સોંપણીથી આક્રમિત હોય છે. ખબર એટલું ઘનિષ્ઠ નથી, 1992ની આગળ કેમ અને જેવી કાર્યક્રમો એટલે તેવું ચિંતાદાયક નથી.
 
अगर ये प्रोपेगैंडा चलाने वाले मैगज़ीन्स सुरक्षित स्थान पर लोगों को पढ़ने की अनुमति नहीं देंगे तो अच्छा होगा। अगर उनके इंटरव्यू में फरार आतंकी जहांगीर सरूरी जैसे लोगों की चेहरे की तस्वीरें भी हैं तो और भी खतरनाक है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि ये मैगज़ीन्स किसी भी उम्र के लोगों को पढ़ने की अनुमति नहीं दें।
 
कश्मीर में फिर से तनाव बढ़ गया है... आतंकवादी ग्रुप्स ने युवाओं को आकर्षित करने के लिए प्रोपेगैंडा चला रहे हैं, और यह बहुत खतरनाक है... 1992 से फरार आतंकवादी जहांगीर सरूरी का इंटरव्यू मैगज़ीनों में चला रहा है, यह तो बहुत खतरनाक है... सुरक्षा एजेंसियों ने बताया है कि इनका मकसद पढ़े-लिखे नौजवानों को टारगेट करना है, और यह बहुत खतरनाक है... 🚨💥

मुझे लगता है कि हमें इस समस्या से निपटने के लिए एक मजबूत दिशा में कदम उठाने होंगे, और युवाओं को आतंकवाद की ओर आकर्षित करने वाली गतिविधियों से दूर रखने के लिए हमें बहुत सावधान रहना होगा... 🤔🚫
 
अरे, यह तो बहुत चिंताजनक बात है 🤔। मुझे लगता है कि युवाओं को ऐसी झूठी जानकारी न देना चाहिए, वे अपने भविष्य को सोचें। आतंकवादियों को पैसे और बंदूकें मिलाने के लिए हमारे बच्चों को ऐसी प propaganda नहीं होनी चाहिए। सरकार को तो अपने युवाओं को अच्छी शिक्षा देनी चाहिए, उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना चाहिए।
 
मैं समझ नहीं पाया कि ये सब क्या है? काश्मीर में ऐसे लोग फैला रहे हैं कि पढ़े-लिखे लड़के-लड़कियां आतंकवाद में शामिल होने को मजबूर होते हैं... यह तो बहुत भयानक है! मुझे लगता है कि ऐसी चीजें कभी नहीं हुईं, लेकिन फिर भी ख़बरें आती रहती हैं... मैंने सुना है कि ऑनलाइन फोरम पर इतनी बातें चलती हैं, लेकिन यह तो सच्चाई से अलग है। मुझे लगता है कि हमें ऐसी चीजों से दूर रहना चाहिए और ख़बरें ध्यान से पढ़नी चाहिए... 🤔💡
 
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