’मुर्शिदाबाद में बाबरी बनना तय, हिम्मत है तो गिराओ’: कौन हैं मस्जिद का ऐलान करने वाले विधायक हुमायूं, TMC ने सस्पेंड किया

बाबरी मस्जिद बनाने की बात करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा है कि अगर हमें अपने परिवार के नाम से कुछ भी किया जाए तो उसकी स्थिति हमारी नहीं होती। वह हमारे परिवार के सदस्यों की तरह यादगार है।
 
मुझे लगता है कि बाबरी मस्जिद का विषय हमेशा भी बहुत जटिल रहेगा, लेकिन मैं सोचता हूँ कि हमें अपने भविष्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए। कबीर साहब ने अपनी बात कही है कि अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ भी करते हैं तो उसकी स्थिति हमारी नहीं होती। यह सच है और मुझे लगता है कि हमें अपने समाज के लिए कुछ सकारात्मक करने की जरूरत है। अगर हम अपने परिवार या समुदाय के नाम से कुछ भी करते हैं तो उसकी सफलता और असफलता हमारी नहीं होती। यही वह बात है जो मैं अपने दोस्तों से कभी नहीं कह पाता, लेकिन आज मैं इस पर लिख रहा हूँ। 🤔
 
बाबरी मस्जिद वास्तुकला बिल्कुल भी मेरी पसंद नहीं थी, लेकिन अगर हम उसके निर्माण को देखें तो वह एक बहुत ही रोमांटिक कहानी है। मुझे लगता है कि उस मस्जिद का निर्माण करने वालों ने अपने परिवार और समुदाय के प्रति बहुत ही महत्वकान्ता दिखाई है। हुमायूं कबीर जी की बात सुनकर मुझे लगता है कि हमें अपने परिवार के साथ खासतौर पर रहना चाहिए और एक-दूसरे को यादगार बनाना चाहिए। लेकिन मैं सोचता हूँ कि अगर उन्होंने ऐसी बात कही तो उनके निर्माण की वास्तुकला का कोई मतलब नहीं होता।
 
मुझे लगता है कि बाबरी मस्जिद की बात कर रहे हैं और फिर से हमारी देश की इतिहास को लेकर चर्चा हो रही है … 🤔
लेकिन मेरा विचार है कि अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ भी करें तो फिर उसकी स्थिति हमारी नहीं होती। मैंने हाल ही में अपनी दादी की खास बात सुनी थी जिन्होंने भारत में गांधीजी का बचपन का घर देखा था। वह कह रही थी कि अगर हमारे परिवार के नाम से कुछ भी करें तो उसे हमारी तरह यादगार लगेगा।
मुझे लगता है कि हमें अपने देश की इतिहास और समृद्धि को समझने की जरूरत है। मैंने हाल ही में अपने परिवार से कहा था कि अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ भी करें तो उसकी स्थिति हमारी नहीं होती। 😊
 
मुझे लगता है कि यह बात थोड़ी अजीब लग रही है 😐। अगर हमें अपने परिवार के नाम से कुछ भी किया जाए तो उसकी स्थिति हमारी नहीं होती। यह तो सच है, लेकिन मुझे लगता है कि यह बात थोड़ी बदल गई है। अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ भी करते हैं तो उसका मतलब है कि हमने उस परिवार को खुद दिया होता है, लेकिन मुझे लगता है कि बाबरी मस्जिद की बात में ऐसा नहीं है। वहाँ की गहराई और ऐतिहासिक महत्व को समझने की जरूरत है।

मुझे लगता है कि यह बात थोड़ी सरल है, लेकिन हमें इसके पीछे की गहराई को समझने की जरूरत है। अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ भी करते हैं तो उसका मतलब है कि हमने उस परिवार को खुद दिया होता है, लेकिन बाबरी मस्जिद की बात में ऐसा नहीं है। वहाँ की स्थिति और ऐतिहासिक महत्व को समझने की जरूरत है।
 
बाबरी मस्जिद बनाने की बात करते हुए, यह एक दिलचस्प विषय है 🤔। मुझे लगता है कि हमें अपने परिवार के नाम से कुछ भी नहीं करना चाहिए। अगर हम ऐसा करते हैं तो यह हमारी स्थिति को बेहतर नहीं बनाता और फिर भी यह हमारे परिवार के सदस्यों की तरह यादगार होता है। मुझे लगता है कि यह एक पुरानी कहावत है जो अभी भी सही है। अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ नहीं करते तो यह हमें आगे बढ़ने की अनुमति देता है और हमारी पहचान को अलग बनाता है।
 
बाबरी मस्जिद की बात करें तो मुझे लगता है कि यह बहुत जटिल मुद्दा है। हुमायूं कबीर जी ने बोला है कि अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ बनाते हैं तो उसकी स्थिति हमारी नहीं होती। यह सच है, लेकिन मुझे लगता है कि यहाँ एक बहुत बड़ा मुद्दा छुपा हुआ है। बाबरी मस्जिद की मुख्य समस्या इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता है। अगर हम इसे बनाए तो हम अपने इतिहास की एक बहुत बड़ी कड़ी जोड़ रहे हैं और अगर नहीं तो भी यह एक ऐसी जगह है जहाँ लोगों को एक साथ आने का मौका मिलता है। लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपनी राय को खुलकर बोलना चाहिए और इसके पीछे दूसरों की राय भी सुननी चाहिए।
 
🤔 यह बात सुनकर मुझे लगा कि हुमायूं कबीर जी ने और भी सच्चाई बोल रहे हैं। अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ बनाते हैं तो उसकी स्थिति हमारी नहीं होती, लेकिन जब वह अपने परिवार का हिस्सा बनता है तो हमारी जिंदगी में उसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

मुझे लगता है कि यह सच्चाई बिल्कुल लागू होती है, जब हम अपने परिवार के सदस्यों को याद करते हैं तो उनकी स्थिति और भी समझ में आती है। अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ बनाते हैं तो उसका महत्व कम होता है, लेकिन जब वह हमारे परिवार का हिस्सा होता है तो उसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

मुझे लगता है कि यह बात हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने परिवार के सदस्यों की तुलना में कुछ बनाते समय उसकी स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए। 🙏
 
मैंने बातें देखी है और समझ गया हूँ कि जब भी कोई ऐसी बात करता है, तो हमेशा वो हंसते-मुस्कराते रह जाते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि कबीर साहब ने दो चीजें कहीं। पहली तो वह परिवार के बारे में बोला, और मुझे लगता है कि यह बहुत सच्चा कहा गया। जब हम अपने परिवार के नाम से कुछ करते हैं, तो वो स्थिति हमारी नहीं होती, लेकिन फिर भी हम उन्हें यादगार मानते हैं। और दूसरी चीज वह भावना थी जिससे हम सब प्रभावित होते हैं।

मैंने अपनी पीढ़ी के बातों पर सोचा, और लगता है कि यही reason है कि हमारी संस्कृति इतनी खूबसूरत है। जब भी हम जो कहें या करें, उसके पीछे एक भावना और अर्थ होता है, जिससे हमें अच्छा लगता है।
 
बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर बात करते समय मुझे लगता है कि यह बहुत ही दिलचस्प है कि हमारे पास अपने परिवार को सुनने का मौका मिलता है। कबीर जी ने सही कहा है कि अगर हमें अपने परिवार के नाम से कुछ भी किया जाए तो उसकी स्थिति हमारी नहीं होती। यह बहुत ही सच्चा है। मैं यादगार महसूस करता हूं जब मेरे बच्चे अपने प्यारे परिवार के साथ समय बिताते हैं, और मैं उनकी स्थिति को हमेशा महत्व देता हूं।

कबीर जी ने यह भी कहा है कि हमारे परिवार के सदस्यों की तरह यादगार होना चाहिए, जो बहुत ही सच्चा है। जब हम अपने परिवार को महत्व देते हैं और उनकी जरूरतों को समझते हैं, तो हम वास्तव में समृद्ध जीवन जीने के लिए एक मजबूत आधार बनाते हैं।
 
अरे, ये बात बहुत सुंदर है! मुझे लगता है कि यह देखभाल और सम्मान की बात है। अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ भी करते हैं तो वह स्थिति हमारी नहीं होती, लेकिन अगर हम खुद के नाम से कुछ करते हैं और उसका आनंद लेते हैं, तो यह हमारे परिवार के सदस्यों जैसा महसूस कराता है। मुझे लगता है कि इस दुनिया में कई चीजें ऐसी हैं जिनमें से हमें खुशी और आनंद लेना चाहिए।
 
बाबरी मस्जिद की बात करते समय यह कहावत सच है - अगर हम अपने परिवार का नाम रखें तो उसका स्वाधीनता और स्थिति हमारी नहीं होती। उसे हमारा प्रतिनिधित्व नहीं मिलना चाहिए, वह एक यादगार स्थल है जिसमें हमारे संस्कृति, इतिहास और परिवार की कहानियां समेटी हैं।
 
ਮस्जिद-ਗੜ੍ਹ ਦੀ ਗੱਲ ਬਣੇ ਤਾਂ ਸਾਰੇ ਕਿਹੜੇ ਨਾਮ ਲੈ ਕੇ ਬੋਲਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ। ਸਾਡੀ ਅੱਖਾਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵੀ ਨਹੀਂ ਕਮਰਤ ਚੁੱਕੇ, ਹੁਣ ਸਾਡੇ ਲਈ ਹੋ ਗਏ ਉਹ ਦੌਰ ਵੀ ਜ਼ਾਇਫ਼ ਨਾ ਜਾਣ।

ਕਿਸੇ ਦੇ ਪਿਤਾ ਮਾਂ ਆਦਿਕ, ਕਿਸੇ ਦੇ ਭਰਾ ਭੈਣ, ਜਨਮ, ਖੁੱਲ੍ਹ-ਫੁੱਲ, ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਆਪਣਾ ਸਾਡਾ ਨਾਂ ਤੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਡੂੰਘਾ ਬਣ ਜਾਏ?

ਹਮਦਰੱਦੀ ਅਤੇ ਸਿਆਣਪ ਨਾਲ, ਉਹ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ਕਿ ਪਰਿਵਾਰ ਹਮਾਰਾ ਬਣਨ ਵਾਲਾ ਸਾਡਾ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦਾ ਇੱਕ ਭਾਗ ਹੈ। ਉਹ ਮਤਲਬ, ਅਸੀਂ ਪਰਿਵਾਰ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਕੰਮ, ਧਨ, ਸ਼ਖ਼ਸੀਅਤ ਆਦਿਕ ਵੀ ਹੈ।
 
बाबरी मस्जिद, यह शायद एक बहुत बड़ा विषय है जिस पर लोगो में बहुत तर्क है। मेरा ख्याल है कि अगर हम अपने परिवार का नाम लेते हैं तो उसके साथ हमारी स्थिति तय नहीं होती। हुमायूं कबीर जी ने बिल्कुल सही कहा है।

जैसे ही हम अपने परिवार का नाम लेते हैं तो हमारी खुशियों और दुखों में उसकी स्थिति होती है, नहीं तो वह सिर्फ हमारे नाम पर होती।

उसका अर्थ यह है कि जब भी हम अपने परिवार का नाम लेते हैं तो उसके साथ हमारी जिम्मेदारियां भी होती हैं।
 
मैं समझता हूँ कि यह सब बात बड़ी दुखद है ⚔️। लेकिन अगर मैं सोचूँ तो यह मस्जिद बनाने के पीछे क्या मकसद है, यह जानने की जरूरत है। हमें पता चलना चाहिए कि वास्तव में क्या चिंता है और क्या हमें समझने की जरूरत है। अगर परिवार के नाम से कुछ किया जाए तो उसकी स्थिति हमारी नहीं होती, यह बात सच है, लेकिन फिर भी यह पूरी कहानी एकदम छुपी हुई नहीं है 🤔
 
बाबरी मस्जिद की बात करते समय यह बात जरूरी है कि हमें अपने परिवार के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए। हुमायूं कबीर जी ने बिल्कुल सही कहा है, अगर हमारा परिवार का नाम से कुछ भी किया जाए तो वह हमारी नहीं होती। वह हमारे परिवार के सदस्यों की तरह यादगार हैं। लेकिन बाबरी मस्जिद की मुद्दे में यह जरूरी नहीं है कि हम अपने परिवार के नाम से इसे बांधें। यह एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसने बहुत से लोगों को प्रभावित किया है।
 
😊 इस बातचीत में हुमायूं कबीर ने अपने विचार व्यक्त किए हैं और देखा जा रहा है कि उनकी बात सुनने लायक है। उन्होंने कहा है कि अगर हमारे परिवार के नाम से कुछ बनाया जाए तो वह हमारे परिवार के सदस्यों की तरह यादगार नहीं होता। यह एक बात है जिस पर बहुत से लोग सोच सकते हैं और अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। मुझे लगता है कि हमें अपने परिवार को इतना महत्व देना चाहिए कि उसकी स्थिति हमारी नहीं होती। यह एक अच्छा सबक है जो हमें अपने परिवार और समाज के प्रति सहानुभूति विकसित करने में मदद कर सकता है।
 
ये दुनिया में क्या वास्तविकता है? बाबरी मस्जिद बनाने की बात करते हुए हुमायूं कबीर ने अपनी बात कही है, लेकिन यह तो समझने के लिए कुछ और सुनना पड़ सकता है। अगर हमारे परिवार के नाम से कुछ भी किया जाए, तो उसकी स्थिति हमारी नहीं होती। यही बात अब भी सच है, खुद को तो हम अपने परिवार के सदस्यों की तरह यादगार समझ लेते हैं, लेकिन देश में ऐसा नाम और जगह बनाना... यह तो और भी जटिल है। अगर सब अच्छे सोचते, तो क्या बाबरी मस्जिद बनती, क्या वहीं हरिमंदिर बनता, या फिर दोनों ही अलग-अलग रास्ते में चल पाते। यह देश में कुछ ऐसा है जिस पर हमें ध्यान रखना चाहिए।
 
बाबरी मस्जिद की बात करने वाले लोग बहुत ही गंभीर हैं 🤔। मुझे लगता है कि हमें अपने परिवार के नाम से नहीं कुछ भी बनाना चाहिए, बल्कि हमें अपने समाज को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए 🌈। हुमायूं कबीर जी ने बिल्कुल सही कहा, अगर हमारे परिवार का नाम से कुछ भी किया जाए तो उसकी स्थिति हमारी नहीं होती। वह हमारे परिवार के सदस्यों की तरह यादगार हैं और हमें उनकी याद में कुछ अच्छा करना चाहिए ❤️
 
मुझे यह बात बहुत अजीब लगती है 🤔, हुमायूं कबीर जी ने अपने परिवार के नाम से कोई काम नहीं किया था, लेकिन फिर भी उन्हें अपने परिवार को यादगार समझने का मौका मिला। मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा अन्याय है, जो हमें अपने परिवार के नाम से कुछ भी नहीं करने देना चाहिए। लेकिन फिर, शायद वह सही बात कह रहे थे, क्योंकि अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ भी करते हैं तो उसका अर्थ यह होता है कि हमें उसमें कुछ देना है, और मुझे लगता है कि हमें कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे सभी को लाभ हो। 🤷‍♂️
 
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