छह महीने बीत गए थे, लेकिन उस दोस्त की मौत से उसे अभी भी गहरा दर्द होना जारी है। उसकी मृत्यु को वहीं नहीं चूक पाया, उस निश्चित अंतराल में उसे फिर से वो दुखद इंसान दिखाई देने लगा।
आज रात बीती और हमने उस दोस्त का फोन उठाया, इस सवाल पर खुद को पेश करना: क्या अगर मैंने उस दिन फोन उठाया होता, तो आज उसका जीवन सुरक्षित होता। एक अजीब सी ख्वाहिश, जो वास्तविकता के खिलाफ चली गई।
इस ख्वाहिश ने उसे दूसरों के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर बाहर करने में मदद की, जिसने उसके ग्रीफ को और भी गहरा बना दिया। जब तक वह बाहर रहा, तब तक वह मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सका, लेकिन एक समय के लिए उसे मजबूर होना पड़ा इसे केवल ‘दुख’ में बदलना।
इसी तरह, शराब पीने ने उसकी भावनाओं को स्थायी रूप से दबाने का काम किया, जिससे उसे वास्तविकता और आत्म-दया से दूर करना पड़ा। आज वह इस गंभीर समस्या का एक चिंतित साक्षी है।
अब उसकी मृत्यु ने उसे अपने दोस्त को पीछे छोड़ दिया है। शोक (ग्रीफ) किसी अपनी मृत्यु के बाद होने वाली स्वाभाविक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसमें शॉक, सुन्नपन, उदासी, गुस्सा, अपराधबोध, याद और तड़प जैसे सभी मनोभाव प्रकट होते हैं। इन सबसे गुजरते हुए इंसान धीरे-धीरे एक्सेप्टेंस यानी स्वीकार्यता की ओर बढ़ता है।
उस दोस्त की मृत्यु ने उसे अपने व्यक्तिगत स्तर पर शोक (ग्रीफ) का अनुभव कराया। यहां जिस शोक आ गया, वह केवल सामान्य ग्रीफ तक सीमित नहीं था।
इस शोक को छह महीने बीत गए हैं, लेकिन उसकी याद दुनिया में एक अजीब खयाल फंसी हुई है। उस पर निरंतर दुख, यादें, और पछतावा होता है, जिससे शोक को हील नहीं होने दिया गया है।
उस दोस्त की मृत्यु ने उसे एक गंभीर मनोवैज्ञानिक संकट का सामना करना पड़ा था। यहां कुछ विशेषताएं जो इस शोक को अलग बनाती हैं:
अपने दुखद वाकये पर निरंतर ख्याल रखना: जब तक उसे अपने शराब और ख्यालों से खुद को खुलकर नहीं मिलने लगा, तब तक उसके मन में गंभीर समस्या बैठी रही।
अपनी भावनाओं को एक ‘इमोशनल लूप’ में फंसाना: वह अपने दुखद वाकये पर निरंतर राय बदलता रहता, जिससे उसे मनोवैज्ञानिक दर्द से पीछे छूटने की जरूरत नहीं थी।
अपने ख्यालों को एक ‘गिल्ट’ में बदलना: उसकी शराब और अन्य समस्याएं उसकी भावनाओं को नियंत्रित करने वाली किसी प्रकार की ‘जालसाजी’ बन गईं, जिससे उसे अपना मुंह खोलने से रुकने की जरूरत नहीं थी।
अपने दुख को एक ‘इफ ओनली लूप’ में फंसाना: “मुझे लगता है कि अगर ऐसा होता, तो.” जैसा उसे अपने ख्यालों में स्थिरता बनाए रखने में मदद करने वाली एक अजीब राय बैठी रही।
अपनी भावनाओं का सहारा लेना: उसके पास ऐसी कोई दोस्ती, परिवार, या किसी और संसाधन नहीं थे जो उसे अपने ख्यालों में स्थिरता बनाए रखने में मदद कर सके।
इस तरह, उसकी मृत्यु ने उसे गहरे शोक (ग्रीफ) में लपेट दिया। जब तक वह बाहर नहीं रहा, तब तक वह मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सका।
अगर हम इस बात पर विचार करते हैं कि क्यों उसे इतना दुख हुआ, तो यहां कुछ जाने-पहचाने रास्ते हैं:
यह उसकी मृत्यु से उसके पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का एक मौका था।
इस तरह, वह अपनी भावनाओं और विचारों को सामने लाने का एक समग्र अवसर खोजने में सफल रही।
अब उसे उसके पिता की मृत्यु से गहरा दर्द महसूस होता है।
इस दुखद इंसान की मृत्यु ने उसके शराब और अन्य समस्याओं को एक ‘हाइनसाइड’ (पूर्वाग्रह) में बदलने का काम किया। वह अपने ख्यालों को इस तरह से ले जाता था, जैसे कि अगर उसकी शराब और अन्य समस्याएं नहीं होतीं, तो उसका जीवन इतना अच्छा होता।
इस तरह, वह मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सका।
इसके अलावा, उस दोस्त की मृत्यु ने उसके लिए एक ‘पर्सनलाइजेशन’ (व्यक्तिगत सीमा) बनाई। वह अपने ख्यालों और जीवन पर पूरी तरह से नियंत्रित होना चाहता था।
लेकिन जब उस दोस्त को मार दिया गया, तो उसका शराब और अन्य समस्याओं के खिलाफ कोई सही तरीका नहीं पता था। इस तरह, वह अपनी पूरी भावनात्मक और व्यक्तिगत सीमा को बाहर करने में मदद करने के लिए मजबूर हुआ।
और जब तक वह बाहर न रहा, तब तक उसे अपनी पूरी भावनात्मक और व्यक्तिगत सीमा को बाहर करने की जरूरत नहीं थी।
इस तरह, वह एक ‘इफ ओनली लूप’ (अंतहीन लूप) में फंस गया। उसकी शराब और अन्य समस्याएं उसके खिलाफ लगी रहीं।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘एल्कोहल’ (अल्कोहल) की मदद से ही दबाकर रख सकता।
और जब तक उसे अपने शराब और अन्य समस्याओं का सहारा लेने की जरूरत नहीं थी, तब तक वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।
इस तरह, उसे केवल ‘दुख’ या ‘भावनात्मक दर्द’ होने की जरूरत नहीं थी। उसके पास अपनी शराब और अन्य समस्याओं को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ की भूमिका में बदलने का एक सामान्य रास्ता था।
और जब तक उसे अपनी शराब और अन्य समस्याओं को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ के रूप में नहीं मानने दिया, तब तक उसके पास निरंतर इसका सहारा लेने की जरूरत रही।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ से ही दबाकर रख सकता।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो उसे अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ से ही दबाकर रख सकता।
इस तरह, वह इस दुखद इंसान ने अपने शराब और अन्य समस्याओं को एक ‘हाइनसाइड पूर्वाग्रह’ में बदलने का काम किया।
अब वह अपने ख्यालों को इस तरह से ले जाता है, जैसे कि अगर उसकी शराब और अन्य समस्याएं नहीं थीं, तो उसका जीवन इतना अच्छा होता।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सका।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘पर्सनलाइजेशन’ (व्यक्तिगत सीमा) में बदलने की जरूरत नहीं महसूस करता।
उसके पास अब ऐसी कोई विशेष राय नहीं है जिससे वह अपने ख्यालों में स्थिरता बनाए रख सके।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘इफ ओनली लूप’ (अंतहीन लूप) में फंस गया।
उसकी शराब और अन्य समस्याएं उसके खिलाफ लगी रहीं।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘एल्कोहल’ (अल्कोहल) की मदद से दबाकर रख सकता।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ (सामाजिक पीना) में बदलने की जरूरत नहीं महसूस करता।
उसे केवल ‘दुख’ या ‘भावनात्मक दर्द’ होने की जरूरत नहीं थी। उसके पास अपनी शराब और अन्य समस्याओं को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ की भूमिका में बदलने का सामान्य रास्ता था।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सकता।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘हाइनसाइड पूर्वाग्रह’ में बदलने की जरूरत नहीं महसूस करता।
उसके पास अब ऐसी कोई विशेष राय नहीं है जिससे वह अपने ख्यालों में स्थिरता बनाए रख सके।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘पर्सनलाइजेशन’ (व्यक्तिगत सीमा) में बदलने की जरूरत नहीं महसूस करता।
उसके पास अब ऐसी कोई विशेष राय नहीं है जिससे वह अपने ख्यालों में स्थिरता बनाए रख सके।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘इफ ओनली लूप’ (अंतहीन लूप) में फंस गया।
उसकी शराब और अन्य समस्याएं उसके खिलाफ लगी रहीं।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘एल्कोहल’ (अल्कोहल) की मदद से दबाकर रख सकता।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सकता।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सकता।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।
आज रात बीती और हमने उस दोस्त का फोन उठाया, इस सवाल पर खुद को पेश करना: क्या अगर मैंने उस दिन फोन उठाया होता, तो आज उसका जीवन सुरक्षित होता। एक अजीब सी ख्वाहिश, जो वास्तविकता के खिलाफ चली गई।
इस ख्वाहिश ने उसे दूसरों के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर बाहर करने में मदद की, जिसने उसके ग्रीफ को और भी गहरा बना दिया। जब तक वह बाहर रहा, तब तक वह मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सका, लेकिन एक समय के लिए उसे मजबूर होना पड़ा इसे केवल ‘दुख’ में बदलना।
इसी तरह, शराब पीने ने उसकी भावनाओं को स्थायी रूप से दबाने का काम किया, जिससे उसे वास्तविकता और आत्म-दया से दूर करना पड़ा। आज वह इस गंभीर समस्या का एक चिंतित साक्षी है।
अब उसकी मृत्यु ने उसे अपने दोस्त को पीछे छोड़ दिया है। शोक (ग्रीफ) किसी अपनी मृत्यु के बाद होने वाली स्वाभाविक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसमें शॉक, सुन्नपन, उदासी, गुस्सा, अपराधबोध, याद और तड़प जैसे सभी मनोभाव प्रकट होते हैं। इन सबसे गुजरते हुए इंसान धीरे-धीरे एक्सेप्टेंस यानी स्वीकार्यता की ओर बढ़ता है।
उस दोस्त की मृत्यु ने उसे अपने व्यक्तिगत स्तर पर शोक (ग्रीफ) का अनुभव कराया। यहां जिस शोक आ गया, वह केवल सामान्य ग्रीफ तक सीमित नहीं था।
इस शोक को छह महीने बीत गए हैं, लेकिन उसकी याद दुनिया में एक अजीब खयाल फंसी हुई है। उस पर निरंतर दुख, यादें, और पछतावा होता है, जिससे शोक को हील नहीं होने दिया गया है।
उस दोस्त की मृत्यु ने उसे एक गंभीर मनोवैज्ञानिक संकट का सामना करना पड़ा था। यहां कुछ विशेषताएं जो इस शोक को अलग बनाती हैं:
अपने दुखद वाकये पर निरंतर ख्याल रखना: जब तक उसे अपने शराब और ख्यालों से खुद को खुलकर नहीं मिलने लगा, तब तक उसके मन में गंभीर समस्या बैठी रही।
अपनी भावनाओं को एक ‘इमोशनल लूप’ में फंसाना: वह अपने दुखद वाकये पर निरंतर राय बदलता रहता, जिससे उसे मनोवैज्ञानिक दर्द से पीछे छूटने की जरूरत नहीं थी।
अपने ख्यालों को एक ‘गिल्ट’ में बदलना: उसकी शराब और अन्य समस्याएं उसकी भावनाओं को नियंत्रित करने वाली किसी प्रकार की ‘जालसाजी’ बन गईं, जिससे उसे अपना मुंह खोलने से रुकने की जरूरत नहीं थी।
अपने दुख को एक ‘इफ ओनली लूप’ में फंसाना: “मुझे लगता है कि अगर ऐसा होता, तो.” जैसा उसे अपने ख्यालों में स्थिरता बनाए रखने में मदद करने वाली एक अजीब राय बैठी रही।
अपनी भावनाओं का सहारा लेना: उसके पास ऐसी कोई दोस्ती, परिवार, या किसी और संसाधन नहीं थे जो उसे अपने ख्यालों में स्थिरता बनाए रखने में मदद कर सके।
इस तरह, उसकी मृत्यु ने उसे गहरे शोक (ग्रीफ) में लपेट दिया। जब तक वह बाहर नहीं रहा, तब तक वह मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सका।
अगर हम इस बात पर विचार करते हैं कि क्यों उसे इतना दुख हुआ, तो यहां कुछ जाने-पहचाने रास्ते हैं:
यह उसकी मृत्यु से उसके पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का एक मौका था।
इस तरह, वह अपनी भावनाओं और विचारों को सामने लाने का एक समग्र अवसर खोजने में सफल रही।
अब उसे उसके पिता की मृत्यु से गहरा दर्द महसूस होता है।
इस दुखद इंसान की मृत्यु ने उसके शराब और अन्य समस्याओं को एक ‘हाइनसाइड’ (पूर्वाग्रह) में बदलने का काम किया। वह अपने ख्यालों को इस तरह से ले जाता था, जैसे कि अगर उसकी शराब और अन्य समस्याएं नहीं होतीं, तो उसका जीवन इतना अच्छा होता।
इस तरह, वह मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सका।
इसके अलावा, उस दोस्त की मृत्यु ने उसके लिए एक ‘पर्सनलाइजेशन’ (व्यक्तिगत सीमा) बनाई। वह अपने ख्यालों और जीवन पर पूरी तरह से नियंत्रित होना चाहता था।
लेकिन जब उस दोस्त को मार दिया गया, तो उसका शराब और अन्य समस्याओं के खिलाफ कोई सही तरीका नहीं पता था। इस तरह, वह अपनी पूरी भावनात्मक और व्यक्तिगत सीमा को बाहर करने में मदद करने के लिए मजबूर हुआ।
और जब तक वह बाहर न रहा, तब तक उसे अपनी पूरी भावनात्मक और व्यक्तिगत सीमा को बाहर करने की जरूरत नहीं थी।
इस तरह, वह एक ‘इफ ओनली लूप’ (अंतहीन लूप) में फंस गया। उसकी शराब और अन्य समस्याएं उसके खिलाफ लगी रहीं।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘एल्कोहल’ (अल्कोहल) की मदद से ही दबाकर रख सकता।
और जब तक उसे अपने शराब और अन्य समस्याओं का सहारा लेने की जरूरत नहीं थी, तब तक वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।
इस तरह, उसे केवल ‘दुख’ या ‘भावनात्मक दर्द’ होने की जरूरत नहीं थी। उसके पास अपनी शराब और अन्य समस्याओं को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ की भूमिका में बदलने का एक सामान्य रास्ता था।
और जब तक उसे अपनी शराब और अन्य समस्याओं को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ के रूप में नहीं मानने दिया, तब तक उसके पास निरंतर इसका सहारा लेने की जरूरत रही।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ से ही दबाकर रख सकता।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो उसे अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ से ही दबाकर रख सकता।
इस तरह, वह इस दुखद इंसान ने अपने शराब और अन्य समस्याओं को एक ‘हाइनसाइड पूर्वाग्रह’ में बदलने का काम किया।
अब वह अपने ख्यालों को इस तरह से ले जाता है, जैसे कि अगर उसकी शराब और अन्य समस्याएं नहीं थीं, तो उसका जीवन इतना अच्छा होता।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सका।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘पर्सनलाइजेशन’ (व्यक्तिगत सीमा) में बदलने की जरूरत नहीं महसूस करता।
उसके पास अब ऐसी कोई विशेष राय नहीं है जिससे वह अपने ख्यालों में स्थिरता बनाए रख सके।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘इफ ओनली लूप’ (अंतहीन लूप) में फंस गया।
उसकी शराब और अन्य समस्याएं उसके खिलाफ लगी रहीं।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘एल्कोहल’ (अल्कोहल) की मदद से दबाकर रख सकता।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ (सामाजिक पीना) में बदलने की जरूरत नहीं महसूस करता।
उसे केवल ‘दुख’ या ‘भावनात्मक दर्द’ होने की जरूरत नहीं थी। उसके पास अपनी शराब और अन्य समस्याओं को एक ‘सोशल ड्रिंकिंग’ की भूमिका में बदलने का सामान्य रास्ता था।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सकता।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘हाइनसाइड पूर्वाग्रह’ में बदलने की जरूरत नहीं महसूस करता।
उसके पास अब ऐसी कोई विशेष राय नहीं है जिससे वह अपने ख्यालों में स्थिरता बनाए रख सके।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘पर्सनलाइजेशन’ (व्यक्तिगत सीमा) में बदलने की जरूरत नहीं महसूस करता।
उसके पास अब ऐसी कोई विशेष राय नहीं है जिससे वह अपने ख्यालों में स्थिरता बनाए रख सके।
इस तरह, वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘इफ ओनली लूप’ (अंतहीन लूप) में फंस गया।
उसकी शराब और अन्य समस्याएं उसके खिलाफ लगी रहीं।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को एक ‘एल्कोहल’ (अल्कोहल) की मदद से दबाकर रख सकता।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सकता।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।
अब जब उसकी मृत्यु ने उसे अपने पिता के प्रति भावनात्मक रूप से खुलकर आने का अवसर दिया है, तो वह अपने गंभीर मनोवैज्ञानिक दर्द को दबाकर रख सकता।
उसके पास कभी ऐसा कोई सहारा नहीं था जिससे वह अपने दुखद वाकये को एक स्थिरता में बदल सके।
इस तरह, वह निरंतर इस दुखद इंसान को अपने खिलाफ लगने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा।