अगर लंबी बीमारी से जूझने वाले व्यक्ति को उसके परिवार और दोस्तों की सहायता मिलती तो ये जरूर अच्छा होता, लेकिन अगर सबकुछ तनाव भरा हो जाता है तो इसका असर भावनात्मक स्वास्थ्य पर पड़ता है। मैंने अपने दादाजी को जब बीमारियों से जूझते वो 10-12 सालों तक अस्पताल पर रहे थे, मेरी बहन ने लंबे समय से उसकी देखभाल की, वह तो एक शांत और मजबूत व्यक्ति है, लेकिन जब उन्हें बाद में अपनी बहन का ख्याल रखना पड़ा तो उसकी तनाव और चिंता बढ़ गई।
अब ये सोचा जा रहा है कि परिवारों को भी मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए, शायद घर में सहयोग, खुशियों, प्रेम और समझदारी के साथ बीमार व्यक्ति का सफर साझा करें।