Manikarnika Ghat Demolition: मणिकर्णिका घाट पर भाजपा- कांग्रेस में बढ़ा विवाद,सीएम योगी- अजय राय भिड़े!

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य ने राजनीतिक विवाद में डाल दिया है। बुलडोजर चलाकर मूर्तियों को तोड़ने का आरोप लगाया गया है, जिसमें काशी की मान्यताओं को ध्वस्त करने का भी दावा किया जा रहा है।

कांग्रेस नेता अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने काशी की विरासत और सनातन परंपरा को नष्ट करने के लिए काम शुरू किया है। अजय राय ने कहा है कि अहिल्याबाई होल्कर द्वारा स्थापित मूर्तियों को तोड़ना काशी का अपमान है, और उन्हें सुरक्षित रखना चाहिए।

दूसरी ओर, सरकार ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, वे AI द्वारा जनरेटेड या भ्रामक हैं। उन्होंने यह भी बताया है कि किसी भी मंदिर या मूर्ति को तोड़ा नहीं गया है, और अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित है।

इस विवाद ने वाराणसी में राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है, और कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
 
मैंने देखा कि पुनर्विकास कार्य में मूर्तियों को तोड़ने का आरोप लगाया गया है, लेकिन सरकार ने कहा है कि यह वीडियो AI द्वारा जनरेटेड या भ्रामक है। मुझे लगता है कि यह एक दिलचस्प स्थिति है। अगर वीडियो सच नहीं है, तो इसके पीछे क्या कारण हैं? और अगर सच है, तो क्या सरकार ने सही रीति से काम करने की कोशिश नहीं की? मुझे लगता है कि इस मामले में जांच करना जरूरी है।
 
मूर्तियों को तोड़ने का वीडियो वायरल हुआ, लेकिन नहीं पता कि क्या सच है ? 🤔 पुलिस भी कह रही है कि यह AI द्वारा जनरेटेड है, और मंदिरों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लेकिन वीडियो ने राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है, और अब तो कांग्रेस और भाजपा के बीच बहुत बड़ा मच्छर है।
 
मैंने पहले से कहा था कि मणिकर्णिका घाट पर काम करने वालों को कुछ समझने की जरूरत है, लेकिन कोई भी नहीं सुनता 🤷‍♂️। जो वीडियो वायरल हो रहे हैं वह AI द्वारा बनाए गए हैं, और वास्तविकता तो बाकी सब कुछ पर ध्यान देती है 😂। पूरी बात अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति है, लेकिन काशी के लोगों को समझने की जरूरत नहीं है? या फिर यह तो सब कुछ राजनीतिक मुद्दा बन जाने की बात है? 🤔
 
मेरी राय है कि ये सब एक बड़ा खेल है। सरकार ने मूर्तियों को तोड़ने का आरोप लगाए रखने से काशी की संस्कृति और परंपरा को ज्यादा बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया है। यह वीडियो वायरल होने से तुरंत पूरे देश में चर्चा शुरू हो गई, लेकिन अगर हम अच्छी तरह से देखें, तो यह सब कुछ एक बड़ा चाल था।
 
बिल्कुल, यह सचमुच बहुत गुस्सा करने वाला मामला है 🤯। मैंने देखा है कि कैसे एक वीडियो वायरल होने पर सबकुछ बदल जाता है, और कोई भी सुनिश्चित नहीं कर सकता कि यह सच है या नहीं।

मुझे लगता है कि शायद मंदिरों की सुरक्षा के लिए कुछ भी गलत नहीं हो रहा है, लेकिन फिर भी हमें सोच-विचार करना चाहिए कि कैसे हम अपनी परंपराओं और समाज को बचाए रख सकते हैं।

काशी में बहुत बड़ा पुनर्विकास कार्य चल रहा है, लेकिन यह तो अच्छा भी है और बुरा भी हो सकता है। हमें पता लगाना चाहिए कि वास्तव में क्या हो रहा है और आगे कैसे बढ़ना चाहिए।
 
नहीं हुआ, यह पूरी तरह से भ्रामक वीडियो है 🙄। मैंने देखा है कि गाड़ी चलाते समय मूर्तियों पर कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। और कहाँ वह अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा बैठी है? यह तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए मंदिरों का नुकसान कर रहे हैं। 🤷‍♂️
 
मैंने खुद वाराणसी की मणिकर्णिका घाट पर गया है और वहां की सुंदरता देखी है, लेकिन मुझे लगता है कि यहां की मूर्तियों को तोड़ने का आरोप बहुत बड़ा है। मैं समझ नहीं पाता कि बुलडोजर चलाकर मूर्तियों को तोड़ने से हमारी विरासत और परंपराओं को नष्ट कैसे किया जाएगा। और इतना भी कहना है कि अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को सुरक्षित रखना कोई बड़ी बात नहीं है।
 
मैंने देखा है कि मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास कार्य में वास्तव में बहुत सारी समस्याएं आ गई हैं। मूर्तियों को तोड़ने का आरोप लगाना एक बड़ी समस्या है, और यह देखना ही बुरा है कि काशी की मान्यताओं को ध्वस्त करने का क्या निर्णय लिया गया है। और यह भी देखकर शर्मिंदा होना ही चाहिए कि अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर वार कर रहे हैं। सरकार से उम्मीद थी कि ये मामले तेजी से हल हो जाएंगे। लेकिन लगता है कि अब यह एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है।
 
मुझे लगता है कि यह सारा मामला बहुत ही अजीब है 🤔। पहले से ही वाराणसी में इतनी गर्मियां होती हैं तो फिर बुलडोजर चलाकर मूर्तियों को तोड़ने का आरोप लगाया जाता है? यह तो और भी अजीब है 😕। और वह भी काशी की विरासत को ध्वस्त करने के लिए? नहीं तो ये कुछ भी नहीं होता। मुझे लगता है कि आरोपों से पहले सब कुछ समझना चाहिए, फिर ही आलोचना करनी चाहिए 🤷‍♂️

मैंने देखा है कि ऐसे मामलों में कभी-कभी सच्चाई भी अजीब होती है 😳। तो पहले से ही सबकुछ ठीक से नहीं जानकर आलोचना करना अच्छा नहीं है।
 
मुझे याद आया था जब मैं बच्चा था, वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर प्यार से चलकर टहलता था। अब यहां को देखकर लगता है कि सरकार कुछ कर रही है, लेकिन क्या सही हुआ या नहीं, यह तो समझ में नहीं आता।

वीडियो देखकर मुझे लगा कि कोई बड़ी चीज़ निकली हुई है। लेकिन यह भी सच है कि जैसे जैसे समय बढ़ता है, नई तकनीक आई और सारी बातें बदलने लगी। अब यह कहना मुश्किल है कि सच्चाई क्या है और झूठ कहां है।

मुझे लगता है कि ऐसी चीज़ों में राजनीति होनी चाहिए, लेकिन इससे वाराणसी को नुकसान नहीं होना चाहिए।
 
मुझे ये सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ, मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाकर मूर्तियों को तोड़ने का आरोप लगाया गया? और काशी की मान्यताओं को ध्वस्त करने का भी दावा किया जा रहा है? यह तो बहुत बड़ा विवाद है... 🤔

क्या हमें नहीं पता था कि ये कार्य शुरू करने से पहले लोगों ने इसके बारे में जानकारी नहीं दिया? और फिर भी यहां तक कि वीडियो वायरल हो रहे हैं... यह तो बहुत बड़ी गलती है...

मुझे लगता है कि हमें इस मामले में और अधिक जानकारी चाहिए, ताकि हम समझ सकें कि ये आरोप सच हैं या नहीं? और क्या सरकार की प्रतिज्ञापन वास्तव में सच्ची थी? 🤷
 
मुझे लगता है कि योगी आदित्यनाथ को अपनी सरकार की नीतियों पर सोचना चाहिए, नहीं तो वे काशी की विरासत को ध्वस्त करने के आरोप में फंस जाएंगे। तो क्या होल्कर संस्थान की प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए कुछ नहीं कर सकते? और कांग्रेस नेताओं को अपने बयानों पर सोचना चाहिए, नहीं तो वे भाजपा के खिलाफ ही हंसते रहेंगे।
 
Back
Top