Mark Tully करते थे भारत पर जान निसार, बनना था पादरी-बन गए जर्नलिस्ट, जिलियन ने हिंदी साहित्य से जोड़ा

बीबीसी के पूर्व ब्यूरो चीफ मार्क टुल्ली, जिन्हें भारतीय समाज से निकटता महसूस करने वाले जर्नलिस्ट के रूप में जाना जाता है, 1965 में भारत आकर अपनी पत्रकारिता की दिशा पर पहली नजर डाली। उन्होंने अंग्रेजी मीडिया की तुलना में भारतीय समाज और संस्कृति को समझने की कोशिश की, जिससे उन्हें वास्तविकता के बारे में एक नया दृष्टिकोण प्रदान हुआ।

उनके 30 वर्षों के करियर ने कई महत्वपूर्ण घटनाओं को उनकी पत्रकारिता के साथ जोड़ा। उन्होंने भारत-पाक युद्ध, भोपाल गैस त्रासदी, इंदिरा गांधी की हत्या, सिख दंगों, राजीव गांधी की हत्या और बाबरी मस्जिद विध्वंस जैसी घटनाओं पर अपने लेंस को केंद्रित किया। इन घटनाओं ने उन्हें भारतीय समाज में सामाजिक असमानता, राजनीतिक अस्थिरता और धार्मिक भेदभाव के गहरे मुद्दों पर प्रकाश डाला।

उनकी पत्रकारिता ने न केवल घटनाओं को उजागर किया, बल्कि उन्हें व्यापक रूप से चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में भी योगदान दिया। उनकी गहरी समझ और तटस्थता ने पाठकों को घटनाओं के परिणामों और उनके बाद की सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों के बारे में जागरूक किया।

आज, मार्क टुल्ली की पत्रकारिता का महत्व और भी बढ़ गया है। उनकी गहरी समझ और तटस्थता ने उन्हें एक प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषक बनाया, जिन्होंने भारतीय समाज में सामाजिक असमानता और राजनीतिक अस्थिरता के गहरे मुद्दों पर प्रकाश डाला।
 
मार्क टुल्ली की पत्रकारिता हमेशा से ही एक जीवन शिक्षा रही है 🤔। उन्होंने हमें दिखाया है कि सच्चाई को उजागर करने और सामाजिक असमानता, राजनीतिक अस्थिरता और धार्मिक भेदभाव जैसे गहरे मुद्दों पर प्रकाश डालने की जरूरत है। उनकी तटस्थता और गहरी समझ ने उन्हें एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषक बनाया। हमें भी अपने आसपास की दुनिया में ऐसे ही मायने और जीवन शिक्षाएं ढूंढनी चाहिए। 📚
 
बच्चू 🤣 मार्क टुल्ली को अब भी 'द अंडरस्टैंडिंग' कहा जाता है 😂 क्योंकि वह हमेशा वास्तविकता के पीछे चिपके रहते हैं, लेकिन उनकी पत्रकारिता से लगता है कि दुनिया अभी भी एक बड़ा मिश्रित है 🤯 न केवल भारतीय समाज, बल्कि अन्य देशों को भी।
 
राहुल की बात है तो ये टुल्ली बहुत बड़ा चेन्नईवाला है 🤔, लेकिन वह इतना खट्टा नहीं था जितना हिंदुस्तान में सोचते हैं 🙄। उनकी पत्रकारिता ने भारतीय समाज को एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया, लेकिन अब वह तो बीबीसी के पूर्व चीफ इंच है 👴, और उनकी विचारधारा बहुत बदल गई है।
 
आज कल ये बात समझ आ गई की कैसे एक पत्रकार अपने देश को समझने के लिए अंग्रेजी मीडिया से अलग होता है और वास्तविकता के बारे में नया दृष्टिकोण लाता है। मार्क टुल्ली जैसे पत्रकारों की जरूरत है, जिन्हें भारतीय समाज की गहराई में घुसने की ताकत हो। उनकी पत्रकारिता ने हमें कई महत्वपूर्ण घटनाओं को समझने में मदद की, लेकिन यह सिर्फ घटनाओं तक ही सीमित नहीं थी।

मुझे लगता है कि उनकी तटस्थता और गहरी समझ ने उन्हें एक प्रमुख विश्लेषक बनाया, जो हमें सामाजिक असमानता और राजनीतिक अस्थिरता के गहरे मुद्दों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता। मैं उनकी पत्रकारिता की सराहना करता हूं, जिसने हमें कई महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान दिलाया।
 
बाबरी मस्जिद विध्वंस ने तो हरकत में आ गयी थी, लेकिन उस दिनों जैसी घटनाएं आज भी होती रहती हैं ना 🤕। मार्क टुल्ली की पत्रकारिता ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया कि अगर ऐसी घटनाओं को नहीं उजागर किया जाता, तो कैसे इसे रोका जा सकता था? मुझे लगता है कि हमें भारतीय समाज में सामाजिक असमानता और राजनीतिक अस्थिरता के बारे में और अधिक चर्चा करनी चाहिए, ताकि इससे भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
 
बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद, तुल्ली ने उन्हें एक बहुत ही संवेदनशील और जटिल घटना के रूप में दिखाया, जहां धार्मिक भेदभाव और सामाजिक असमानता को दर्शाया गया। उनकी पत्रकारिता ने इस पल को और अधिक गहराई से समझने में मदद की, जिससे लोगों को इस घटना के पीछे के जटिल जिम्मेदारों और परिणामों के बारे में जागरूक किया गया।
 
बीके की बातें सुनकर लगता है कि उन्होंने जो भारतीय समाज को समझने की कोशिश की, वह अभी भी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन मुझे लगता है कि उनकी पत्रकारिता ने ब्रिटेन से भी बहुत कुछ सीखा, जैसे कि प्रभावशील पत्रकार बनने के लिए कितनी चतुराई की आवश्यकता है।
 
मुझे लगता है कि मार्क टुल्ली जी ने भारतीय समाज को समझने के लिए बहुत साहस और मेहनत किया है। उनकी पत्रकारिता ने हमें कई महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में जागरूक किया, जिन्होंने हमें अपने समाज में कई समस्याओं को देखने के लिए मजबूर किया। 🤔

मुझे लगता है कि भारतीय समाज में सामाजिक असमानता और राजनीतिक अस्थिरता जैसी समस्याओं को समझने के लिए हमें अपने देश की इतिहास और संस्कृति को अच्छी तरह से जानना होगा। मार्क टुल्ली जी ने हमें इन बातों पर ध्यान दिलाने में मदद की है। 📚

लेकिन मुझे लगता है कि आज के समय में, हमें अपने देश में एक नई तरह से पत्रकारिता विकसित करनी होगी, जो न केवल घटनाओं को उजागर करे, बल्कि हमारे समाज में बदलाव लाने के लिए भी योगदान करे। 📰
 
🤔 बेबी मार्क टुल्ली की पत्रकारिता को देखकर मुझे लगता है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत यही है कि वे भारतीय समाज की गहराई से जुड़कर घटनाओं को समझने की कोशिश करते हैं 📚 वह अपनी पत्रकारिता में एक नया दृष्टिकोण लाते हैं, जिससे वास्तविकता के बारे में हमें नई चीजें सिखाई जाती हैं।

उनके 30 वर्षों के करियर ने उन्हें भारतीय समाज के गहरे मुद्दों पर प्रकाश डाला, जैसे कि सामाजिक असमानता और राजनीतिक अस्थिरता। उनकी पत्रकारिता ने न केवल घटनाओं को उजागर किया, बल्कि उन्हें व्यापक रूप से चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में भी योगदान दिया।

आज, मार्क टुल्ली की पत्रकारिता का महत्व और भी बढ़ गया है। उनकी गहरी समझ और तटस्थता ने उन्हें एक प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषक बनाया, जो हमें भारतीय समाज में सामाजिक असमानता और राजनीतिक अस्थिरता के गहरे मुद्दों पर प्रकाश डाल रहा है।
 
मार्क टुल्ली की पत्रकारिता वास्तव में बहुत प्रभावशाली है 📰👍 उन्होंने हमेशा सच्चाई को उजागर किया और लोगों को जागरूक किया। उनकी गहरी समझ और तटस्थता ने उन्हें एक महान पत्रकार बनाया है। मुझे लगता है कि उनकी पत्रकारिता ने हमें भारतीय समाज के गहरे मुद्दों पर सोचने के लिए प्रेरित किया है, जैसे कि सामाजिक असमानता और राजनीतिक अस्थिरता। उनकी पत्रकारिता ने हमें सच्चाई की ओर ले जाने में मदद की है और मुझे लगता है कि यह हमेशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। 👏
 
मैं तो लगता है कि बीबीसी के मार्क टुल्ली जी ने भारतीय समाज को एक नया दृष्टिकोण देने में बहुत योगदान दिया है। उनकी पत्रकारिता ने हमें कई महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में जागरूक किया, जैसे कि भोपाल गैस त्रासदी और सिख दंगे। उनकी तटस्थता और गहरी समझ ने पाठकों को इन मुद्दों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।

मुझे लगता है कि आज भी उनकी पत्रकारिता का महत्व है, और हमें इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है।
 
बीबीसी के इस बारे में तो मुझे लगता है कि मर्क टुल्ली की पत्रकारिता ने हमें सोचने पर मजबूर किया है 🤔, उनकी गहरी समझ और तटस्थता ने उन्हें एक वास्तविकता के दोहरे चश्मे की तरह बनाया है। उनकी पत्रकारिता ने हमें इन घटनाओं को देखने के लिए प्रेरित किया है जो हमारे समाज में सामाजिक असमानता, राजनीतिक अस्थिरता और धार्मिक भेदभाव के गहरे मुद्दों पर प्रकाश डालती हैं। उनकी पत्रकारिता ने हमें सोचने पर मजबूर किया है और हमें इन मुद्दों के बारे में जागरूक करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाया है।
 
मुझे ये विचार बहुत पसंद आया 🤩, लेकिन मैं कहूंगा कि उनकी पत्रकारिता ने हमें न केवल घटनाओं को समझने का अवसर दिया, बल्कि उन्होंने हमें भारतीय समाज के गहरे मुद्दों पर सोचने के लिए भी प्रेरित किया। उनकी तटस्थता और गहरी समझ ने उन्हें एक सच्चे पत्रकार बनाया, जिन्होंने हमेशा सच्चाई को उजागर किया। 📰💬
 
बात बात बाबू, मार्क टुल्ली की पत्रकारिता ने हमें कई ऐसी चीजें दिखाई हैं जिनसे हमने पहले नहीं सोचा, उनके लेंस से हमें सामाजिक असमानता और राजनीतिक अस्थिरता के गहरे मुद्दों पर प्रकाश डाला। उनकी तटस्थता ने उन्हें एक विश्लेषक बनाया जो सच्चाई को बताता है और हमें सोचता है। 📰💡
 
बस तो दिलचस्प बात है कि कैसे भी खुशियां मनाएं, कभी-कभी सोचने की जरूरत है। यार, बीबीसी के मार्क टुल्ली जी ने अपने पत्रकारिता के करियर में बहुत सारे दुखद घटनाओं पर रिपोर्टिंग की है, जैसे कि भोपाल गैस त्रासदी, इंदिरा गांधी की हत्या, और बाबरी मस्जिद विध्वंस। ये सब घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं और हमें यह समझने में मदद करती हैं कि भारतीय समाज में अभी भी बहुत सारे दर्दनाक मुद्दे हैं। फिर, क्या हमारी पत्रकारिता इतनी तटस्थ हो सकती है? यार, लगता है कि समय ही सबसे बड़ा बताएगा।
 
यह देखकर आश्चर्य हुआ कि लोग अभी भी भोपाल गैस त्रासदी को याद करते हैं और इसके परिणामस्वरूप सामाजिक असमानता को देखते हुए बात कर रहे हैं। यह हमें वास्तविकता की ओर मिलाने का समय है। हमें अपने समाज में मौजूद मुद्दों को समझने और उन पर चर्चा करने की जरूरत है, न कि उन्हें भूल जाना। 🤔
 
मार्क टुल्ली की पत्रकारिता वास्तव में बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय समाज में कई गहरे मुद्दों पर प्रकाश डाला है, जैसे कि सामाजिक असमानता, राजनीतिक अस्थिरता और धार्मिक भेदभाव। उनकी तटस्थता और गहरी समझ ने उन्हें एक प्रमुख विश्लेषक बनाया है। मुझे लगता है कि उनकी पत्रकारिता ने हमें याद दिलाया है कि स्वतंत्रता के बाद भी भारत में कई गहरे मुद्दे अभी भी विवादास्पद हैं।
 
मार्क टुल्ली की पत्रकारिता को देखकर मुझे बहुत प्रेरणा मिलती है 🙌। उनकी 30 वर्षों की दूरी ने उन्हें भारतीय समाज को समझने और उसके गहरे मुद्दों पर उजागर करने की शक्ति दिलाई है। उनकी पत्रकारिता ने हमें यह सिखाया है कि कैसे घटनाएं हमें एक नया दृष्टिकोण प्रदान कर सकती हैं और हमें सामाजिक असमानता, राजनीतिक अस्थिरता और धार्मिक भेदभाव जैसे गहरे मुद्दों पर प्रकाश डाल सकती हैं। उनकी पत्रकारिता को देखकर मुझे यह भी याद आता है कि कैसे एक अच्छा पत्रकार हमें सच्चाई और वास्तविकता के बारे में जागरूक कर सकता है। #मार्कटुल्ली #पत्रकारिता #सामाजिकसमानता #राजनीतिकअस्थिरता
 
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[Image: मार्क टुल्ली का फोटो 📸]

अरे भाई, बाबा वो लेंस वाले जो देख रहे थे वो तो सिर्फ़ सच्चाई की खोज कर रहे थे। 🌟

[GIF: एक पत्रकार की कैमरा लेंस की गति]

क्योंकि सच्चाई में भी दास्तान होती है! 💬
 
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