कमल दुर्घटना के बाद से समाज में एक गहरी चिंता है । मेरी समझ में यह घटना न केवल कमल के परिवार के लिए, बल्कि हमारे राष्ट्रीय युवाओं के लिए भी बहुत दुखद है। पुलिस और सरकारी अधिकारियों से उम्मीद है कि वे जिम्मेदारी मानते हुए इस घटना के मामले को गंभीरता से लेंगे। अगर यह रिपोर्ट मिलती है तो बंदूक, घास और ट्रैफिक मैनेजमेंट सभी कारणों की जांच की जाएगी। इसके अलावा, हमारे देश में युवाओं के लिए सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
कमल की दुर्घटना के बाद यह सब बहुत ही उदास है। पुलिस और सरकार को अगर कुछ नहीं पता, तो कमाल की मां को भी सख्ती से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। लेकिन इस मामले में अगर यह कहा जाए कि लापरवाही हुई थी, तो बिल्कुल नहीं समझ में आता। सरकार को सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है, न कि कमाल की मृत्यु को छुपाकर। अगर ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होने दी जाती हैं, तो फिर भी नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए एक अलग समूह बनाने की जरूरत है कि ऐसी घटनाएं कभी भी नहीं होतीं।
कमल की दुर्घटना ने फिर से हमें सोचने पर मजबूर किया है कि हमारे राज्य में कैसे रहने की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। मुझे लगता है कि यह घटना ने सबक सीखने का एक अच्छा मौका दिया है। लेकिन मैं सोचता हूँ कि हमें अपनी परिवारों के लिए और भी कुछ करना चाहिए। हमें अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए और भी जागरूक रहना चाहिए।
कमल की मृत्यु बहुत दुखद है । मैंने बातें सुनी थीं कि वह खूबसूरत हाथों से बने बर्तन बेचता था, लेकिन उसकी मौत ने हमें सबक सिखाया है कि शहर की गतिविधियों में सुरक्षा कितनी जरूरी है। मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री ने सही कदम उठाए हैं, लेकिन फिर भी यह सवाल उठता है कि अगर ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होने दी जाती हैं तो क्यों? सुरक्षा पर पूरा ध्यान रखने के बावजूद, हमें अपने शहर की स्वच्छता और सुरक्षा के लिए और भी कदम उठाने होंगे।
कमल की मृत्यु के बाद, यह देखना दुखद है कि पुलिस अधिकारी वहीं ग्रुप चैट में खुद को 'कमल' नाम से दर्ज करा लेते हैं । क्यों नहीं अपने व्यक्तिगत जीवन को फोरम से दूर रखा जाता? यही नहीं, पुलिस अधिकारी हमें बताने में भी विफल रहते हैं कि उनके पास मामले की जांच करने का क्या तरीका है। सब कुछ साफ-सुथरा और नियमितता के बिना।
कमाल की मृत्यु की गहराई में तो यही बात है: हमारे देश में सुरक्षा व्यवस्था बिल्कुल भी ठीक नहीं है। पुलिस के साथ-साथ सरकार और नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारियां समझने की जरूरत है। तो, मैं फोरम पर 'सुरक्षा' शब्द को अक्सर देखता हूं, लेकिन वास्तविकता तो यही है कि सुरक्षित नहीं हैं।