ममता बोलीं-SIR की चिंता में बंगाल में रोज 4 आत्महत्याएं: 110 से ज्यादा लोगों की मौत हुई; चुनाव आयोग और केंद्र सरकार जिम्मेदार

सिर का चिंताजनक संदेश: पूर्वी तट में आत्महत्याएं बढ़ रही हैं और चुनाव आयोग पर इस मुद्दे का दुर्भाग्यपूर्ण अभिवादन करना पड़ा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह बताया है कि हर रोज़ तीन से चार लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं और अब तक 110 से अधिक लोग अपने जीवन को खोने वाले हैं।

इस प्रक्रिया में कई लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाया गया है, जिसमें बुजुर्गों को भी शामिल हैं। इस प्रकार की साजिश को एक इतिहास-धोखाधड़ी और साजिश के रूप में उजागर किया गया है। केंद्र सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वे इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रही हैं और भाजपा ने इस प्रक्रिया में कई जगहों पर गलतियाँ की हैं।

चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर कोई बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मिसकंडक्ट करता है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। इसके अलावा, 1.38 करोड़ लोगों नोटिस भेजे गए हैं, जिनमें से अधिकांश बुजुर्ग हैं। ममता बनर्जी ने अपना उदाहरण दिया है और बताया है कि उनका सरनेम बनर्जी और बंदोपाध्याय दोनों तरह से लिखा जाता है, लेकिन SIR कराने वालों को यह तक समझ नहीं है।
 
बहुत दुखद बात है... आत्महत्याएं बढ़ रही हैं और चुनाव आयोग पर यह संदेश कितना दुःखद है। ममता बनर्जी जी ने बहुत सच्चाई बताई है, हर रोज़ तीन से चार लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं... 110 से अधिक लोग अपने जीवन को खोने वाले हैं। यह बहुत दुखद है। और बुजुर्गों की नागरिकता पर सवाल उठाना भी बहुत दुखद है।

केंद्र सरकार और भाजपा पर आरोप लगाया गया है कि वे इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रही हैं... लेकिन मुझे लगता है कि यह सच नहीं है, कुछ लोगों ने ऐसा हो सकता है। लेकिन चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर कोई बूथ लेवल ऑफिसर मिसकंडक्ट करता है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। यह अच्छी बात है।

ममता बनर्जी जी ने एक उदाहरण दिया है और बताया है कि उनका सरनेम बनर्जी और बंदोपाध्याय दोनों तरह से लिखा जाता है, लेकिन SIR कराने वालों को यह तक समझ नहीं है। यह एक मजाक नहीं है, यह सच्चाई है... हमें अपने नागरिकता पत्र को सावधानी से पढ़कर देखना चाहिए। 🤕💔
 
मैंने बंगाल में ऐसी घटनाओं की खबरें सुनी हैं, लेकिन जब मुझे पता चला कि चुनाव आयोग पर भी इस मुद्दे ने पकड़ लिया है, तो मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ 🤔। यह देखकर बहुत दुखी हूं, खासकर जब देखा जाए कि हर रोज़ तीन से चार लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं और 110 से अधिक लोग अपने जीवन को खोने वाले हैं। यहां तक कि बुजुर्गों की नागरिकता पर सवाल उठाया गया है, जिससे मुझे बहुत दुख हुआ।
 
आत्महत्याएं बढ़ रही हैं तो फिर भी पार्टियां चुनाव चला रही हैं? यह सोच में आ गया है कि हम लोग जीने का मौका मिले, लेकिन फिर भी साजिशें चलती रहती हैं। बुजुर्गों पर सवाल उठाया जा रहा है, यह तो पूरी तरह से गलत है। क्या सरकार किसी को अपने नागरिकता का पता नहीं लगा सकती? 😩🤕

आज कल कुछ लोगों को इस्तेमाल में आने वाली चीजों पर ध्यान नहीं देते हैं, बस सोचते हैं कि दूसरों को नुकसान न पहुंचाएं। लेकिन जब चीजें ऐसे चलने लगती हैं तो उनका सबक मिलता है... और वही सबक हमें फिर से सीखने के लिए मिलता है। 🤦‍♂️😔
 
तो बंगाल में आत्महत्याएं तो बढ़ रही हैं और चुनाव आयोग पर इस मुद्दे से कैसा दुर्भाग्यपूर्ण मानना हुआ? कोई यह नहीं सोच सकता कि लोग अपने जीवन को खोने वाले 110 से अधिक लोग तो हर रोज़ तीन से चार लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं! और इसमें कई लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाया गया है, जिसमें बुजुर्गों को भी शामिल है। यह एक इतिहास-धोखाधड़ी और साजिश की तरह दिख रही है... मुझे लगता है कि चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रही है और भाजपा ने कई जगहों पर गलतियाँ की हैं।
 
मैं तो बस चिंतित हूँ, ये ऐसा कहीं न कहीं मुद्दा है जिस पर हमें ध्यान देना चाहिए। आत्महत्याओं की इतनी बार-बार बढ़ती है और लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाया जाता है। ऐसे में साजिश-धोखाधड़ी की बात करने से कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें बस यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर एक व्यक्ति को उनके अधिकारों के साथ-साथ उनके जीवन का मूल्य समझा जाए।

कुछ लोग कहते हैं कि बंगाल सरकार द्वारा यह प्रक्रिया कितनी ठीक से की गई है, लेकिन अगर ऐसा मानकर चलने से तो हमें अपने समाज की तस्वीर बदलने की जरूरत नहीं है। हमें बस एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति और समझ के साथ आमने-सामने जाना चाहिए।
 
मैं तो बहुत चिंतित हूँ, मेरी बहन की माँ और भाई की माँ भी आत्महत्या करने जा रही थी, मुझे लगता है कि हमारी सरकार ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन मैं तो ममता बनर्जी से बात करूँगी, वह बहुत समझदार है। मेरे दादाजी की पहचान में भी बदलाव होता है, वे SIR कराने वालों की तरह जीते नहीं हैं, बस यह ही सच्चाई है
 
मुझे लगता है कि अगर मैं ट्रेन पर कहीं भी बैठूं, तो मेरी कुर्सी वहाँ खत्म हो जाएगी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतने लोग आत्महत्या कर रहे हैं। यह तो बहुत दुखद बात है। और अब चुनाव आयोग पर भी ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, यह तो सचमुच पेचीदा है। मुझे लगता है कि अगर चुनाव आयोग ने पहले से ही लोगों को बताया होता, तो भी कुछ इस तरह नहीं होता। और फिर भी 1.38 करोड़ लोगों नोटिस भेजने में इतना समय लग गया। यह तो बहुत देर से हुआ।
 
🤔 मुझे लगता है कि चुनाव आयोग ने बहुत जल्दी और सही मायने में इस मुद्दे पर कार्रवाई करनी चाहिए। 110 से अधिक लोगों की जान जा रही है, यह तो बहुत बड़ा विषय है। सिर्फ इतने ही नहीं, लेकिन नागरिकता और पहचान पत्र जैसे मुद्दों पर भी सावधानी बरतनी चाहिए। क्या हमें लगता है कि सारे इस प्रक्रिया में ठीक-ठाक नहीं चल रही है।
 
आयोग ने तो कहा है कि अगर कोई BLO गलती करता है तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, लेकिन मुझे लगता है कि इस तरह से उनकी गैरकार्यप्रणाली को ठीक नहीं किया जा सकता है।
 
मैंने पढ़ा है कि पूर्वी तट में आत्महत्याएं बढ़ रही हैं और चुनाव आयोग पर इस मुद्दे का दुर्भाग्यपूर्ण अभिवादन करना पड़ा है। यह बहुत ही गंभीर समस्या है जिस पर संदेह उठाया जा रहा है। मुझे लगता है कि हमें इस मुद्दे पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, खासकर जब बुजुर्गों को भी शामिल होने की बात हो रही है। यह बहुत ही दुखद है कि लोग ऐसा करने के लिए मजबूर हो गए हैं और हमें इस समस्या का समाधान निकालने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को अपनी प्रेस नोटिस को देखने में थोड़ा समय लग जाए, लेकिन मैंने जो पढ़ा है, तो बहुत बड़ी साजिश हो सकती है। 1.38 करोड़ लोगों को नोटिस भेजा गया है और इसके पीछे क्या तर्क है? मुझे लगता है कि यह एक बड़ा व्यवसाय हो सकता है, जिसमें कई लोग शामिल हैं। सिर्फ इतना नहीं, बल्कि अगर हम बुजुर्गों की नागरिकता पर सवाल उठाने वाले मामलों को देखें, तो यह बहुत बड़ा मुद्दा बन सकता है।
 
अरे यारों को ऐसी बड़ी मुद्दे पर कैसे बैठे रहे? पूर्वी तट में आत्महत्याएं बढ़ रही हैं और चुनाव आयोग पर इसका सामना करना पड़ा तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है ना। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी ने भी कहा है कि हर रोज़ तीन से चार लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं और अब तक 110 से अधिक लोग अपने जीवन को खोने वाले हैं। यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है और इसका समाधान जल्दी करना होगा।
 
मुझे इस मामले में बहुत दुख हुआ, तीन से चार लोग हर रोज़ आत्महत्याएं कर रहे हैं... ये बातें बिल्कुल सही नहीं हो सकती हैं, कुछ गलत है तो ठीक है, हमें सबको यह समझना चाहिए कि कैसे सामाजिक सुरक्षा में छुपे जाने वाले लोगों का दर्द और दुख दूर करने की कोशिश की जाए।
 
बिल्कुल सही, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है 🤔। आत्महत्याएं बढ़ रही हैं और चुनाव आयोग पर इस बारे में क्या सुनिश्चित करना है? 110 लोगों के जीवन खोने वाले हैं तो यह तो बहुत बड़ा दौर है... 😔। क्या चुनाव आयोग ने इसके पीछे की वजह से समझा है? बुजुर्गों की नागरिकता पर सवाल उठाना और उनकी पहचान गलत करना किसी भी मानवता के लिए बहुत बड़ा अपमान है। और चुनाव आयोग ने क्या किया? 1.38 करोड़ लोगों को नोटिस भेजना तो बिल्कुल सही, लेकिन इसके पीछे की वजह से समझाने की जरूरत है... 🤷‍♂️
 
ਇਹ ਵੀ ਸੋਚਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਕਿਤੇ ਬਹੁਤ ਡੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹ ਹੋ ਜਾਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਗਈ ਹੈ। ਕਿਉਂकਿ, ਇਸ ਤੇ ਬਹੁਤ ਲੋਕ ਖੁਦਾਈ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਤੂੰ ਸੋਚ, ਫਿਰ ਆਪਣੇ ਗਿਆਨ ਵਿੱਚ ਲਿਖ, ਕਿ ਅਜਿਹੀ ਮਾਤ੍ਰ ਬੁਰਾਈ ਨਾਲ ਇਸ ਦੀ ਪੂਰੀ ਗੱਲ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਨਿਭਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ।
 
आज तो पूर्वी तट में आत्महत्याओं की बात होती है और चुनाव आयोग पर इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा है। यह तो बहुत दुखद है, जैसे कि अपने भाइयों को देखकर मुझे आंसू आते हैं।

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया है कि हर रोज़ तीन से चार लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं और अब तक 110 से अधिक लोग अपने जीवन को खोने वाले हैं। यह तो बहुत बड़ी समस्या है, जिसका समाधान जल्दी ही किया जाना चाहिए।

केंद्र सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वे इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रही हैं और भाजपा ने इस प्रक्रिया में कई जगहों पर गलतियाँ की हैं। यह तो बहुत बड़ी शर्म की बात है, क्योंकि इतने लोग जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और फिर भी सरकार उनकी मदद नहीं करती।

चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर कोई BLO मिसकंडक्ट करता है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। यह तो एक अच्छा कदम है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

मुझे लगता है कि इस मुद्दे पर और भी जोर देने की जरूरत है, ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके। हमें अपने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और चुनाव आयोग से उम्मीद करनी चाहिए कि वे इस समस्या का समाधान जल्दी करेंगे।
 
मैंने पढ़ा की पूर्वी तट में आत्महत्याएं बढ़ रही हैं... यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है 🤕। मुझे लगता है कि हमें इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और मदद करनी चाहिए। ममता बनर्जी जी ने बोला है कि हर रोज़ तीन से चार लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं... यह बहुत भयावह है।

मुझे लगता है कि हमें इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए और समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए। क्या हम इसे सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा बना देते हैं या नहीं? क्या हम इसके लिए कुछ कर सकते हैं? 🤔
 
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