ममता सरकार के खिलाफ दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस साल 31 मार्च तक विधायकों को उस रकम का 25 प्रतिशत भी देना होगा। इससे राज्य के खजाने पर तुरंत 10,000 करोड़ रुपये और लंबे समय में 42,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।
इस फैसले से चुनाव आयोग को ममता सरकार की खजाने से भुगतान करने की जिम्मेदारी निकाली गई है। इससे पहले, विधायकों को प्रत्येक सत्र के बाद 10,000 रुपये की रकम देने का आदेश था, लेकिन अब यह रकम अधिकतम 25 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है।
इस फैसले से ममता सरकार को अपने विधायकों को भुगतान करने के लिए एक नया तरीका ढूंढना होगा। इससे पहले, उन्हें अपने खजाने से पैसे तैयार कर देना था, लेकिन अब इस फैसले के बाद वे यह रकम सरकारी स्वाक्षरित समझौतों में भी भर सकते हैं।
इस फैसले ने चुनाव आयोग पर दबाव डाल दिया है, जो अब अपने प्रत्येक सत्र के लिए 25 प्रतिशत तक विधायकों से रकम जमा करने की जिम्मेदारी निकाल लेगा। इससे पहले, उन्हें यह रकम प्रत्येक सत्र के बाद 10,000 रुपये में भुगतान करते थे।
इस फैसले से चुनाव आयोग को ममता सरकार की खजाने से भुगतान करने की जिम्मेदारी निकाली गई है। इससे पहले, विधायकों को प्रत्येक सत्र के बाद 10,000 रुपये की रकम देने का आदेश था, लेकिन अब यह रकम अधिकतम 25 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है।
इस फैसले से ममता सरकार को अपने विधायकों को भुगतान करने के लिए एक नया तरीका ढूंढना होगा। इससे पहले, उन्हें अपने खजाने से पैसे तैयार कर देना था, लेकिन अब इस फैसले के बाद वे यह रकम सरकारी स्वाक्षरित समझौतों में भी भर सकते हैं।
इस फैसले ने चुनाव आयोग पर दबाव डाल दिया है, जो अब अपने प्रत्येक सत्र के लिए 25 प्रतिशत तक विधायकों से रकम जमा करने की जिम्मेदारी निकाल लेगा। इससे पहले, उन्हें यह रकम प्रत्येक सत्र के बाद 10,000 रुपये में भुगतान करते थे।