Mumbai Marathon winner: इथियोपिया के टाडू अबाटे डेमे ने जीता मुंबई मैराथन, इनाम में मिले 45 लाख रुपये

मुंबई मैराथन में बीते दिन मिले परिणामों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि इथियोपियाई एथलीट टाडू अबाटे डेमे ने मुंबई मैराथन में अपनी विशेषता और प्रतिभा दिखाकर जीत हासिल की है। उनके साथ-साथ महिला वर्ग में भी इथियोपियाई दबदबा बनाए रखने वाली येशी कालायु चेकोल ने गोल्ड मेडल जीता, जिससे उसकी प्रतिभा और मेहनत को और अधिक बढ़ावा मिला।

महिला वर्ग के इस विजेता की कहानी है कि वह अपने देश से बाहर भी अपना नाम बना सकती है, अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने ला सकती है। यह इथियोपियाई एथलीटों की सफलता की एक नई शुरुआत मानी जा रही है जिससे हमें आश्वस्त करती है कि वे दुनिया की सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में भी अपना स्थान बनाए रख सकते हैं।

मुंबई मैराथन के इस वर्ष के परिणामों ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि एथलेटिक्स में प्रतिभा और मेहनत की जितनी भी बड़ी भूमिका, उसे लेकर आगे बढ़ने की भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करनी चाहिए।
 
अरे दोस्त, यह मुंबई मैराथन का परिणाम अच्छा लगा, लेकिन तडू अबाते डेमे और येशी कालायु चेकोल जैसे इथियोपियाई एथलीटों को देखकर लगता है कि उनकी प्रतिभा और मेहनत से यहां तक की भारतीय खिलाड़ियों को भी हराने का तरीका ढूंढना चाहिए।
 
बहुत बुरा लगता है कि हमारे देश में एथलेटिक्स सport में विशेषज्ञता को लेकर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। अगर हमारे युवाओं को और भी अच्छी शिक्षा मिले, तो उनकी प्रतिभा और मेहनत को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
मुझे लगता है कि हमें अपने एथलेटिक्स सport को और भी विकसित करने के लिए काम करना चाहिए, ताकि हमारे देश के युवाओं को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा में भाग लेने का अवसर मिल सके।
आजकल इथियोपियाई एथलीटों की सफलता से हमें बहुत उत्साहित होना चाहिए, लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमारे देश में भी बहुत प्रतिभाशाली एथलीट हैं।
यशी कालायु चेकोल की जीत से हमें बहुत आश्वस्त महसूस हुआ, और हमें उम्मीद है कि वह अपने देश को और भी गर्व में रखते हुए आगे बढ़ेगी।
 
मुंबई मैराथन की जीतों से हमें यह एहसास हुआ है कि प्रतिभा और मेहनत से जो चीज़ हो सकती है, वह हो सकती है। लेकिन जब हम देश के बाहर की घटनाओं पर नज़र डालते हैं, तो हमें यह एहसास होता है कि हमारे पास अभी भी बहुत काम करने की ज़रूरत है। मेरा कहना है कि इस वर्ष की जीतों से हमें अपनी प्रतिभा और मेहनत पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे पास अभी भी बहुत काम करने की ज़रूरत है।

मेरे अनुसार, यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम अपनी प्रतिभा और मेहनत पर ध्यान देते समय हमें विकास और प्रगति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण काम करने की ज़रूरत है।
 
टेडू अबाटे डेमे जीतने के बाद मुझे याद आया था जब इमरान खान ने पहली बार पाकिस्तान को ऑस्ट्रेलिया में खेला था। वह दिन भी याद है जब हमने सोचा था कि कुछ नए और अच्छे होने वाले हैं। लेकिन अब यहाँ यह महिला येशी कालायु चेकोल जीतने की बात है। वह बहुत भाग्यशाली है और मुझे लगता है कि उसकी जीत से हमें एथलेटिक्स में नई उम्र की शुरुआत मिली है।
 
बीते दिनों के परिणाम देखकर मुझे लगता है कि टाडू अबाटे डेमे और येशी कालायु चेकोल की जीतें बहुत अच्छी हैं 🏆. मुझे लगता है कि हमें भारतीय एथलीटों को प्रेरित करना होगा, ताकि वे अपनी प्रतिभा को दुनिया सामने लाएं। मुंबई मैराथन जीतने के बाद ये दोनों एथलीट हमें एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
 
मैं तो याद आता है जब मेरे दादाजी ने बार-बार कहा था कि "प्रतिभा और मेहनत से कभी खलल नहीं पड़ता।" और आज भी ऐसा ही हो रहा है, टाडू अबाटे डेमे और येशी कालायु चेकोल ने दिखाए हुए कि वे दोनों में बहुत प्रतिभा और मेहनत है। मैं सोचता हूँ कि उनकी सफलता की कहानी भारतीय एथलीट्स को प्रेरित करेगी, जैसा हमारे पूर्व के एथलीटों ने हमेशा किया था। और मैं याद करता हूँ, जब हमारे देश के पहले खिलाड़ी चेतनानंद भंडारकर ने भारत को राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाया था, वैसे तो उनकी कहानी बहुत ही प्रेरक थी।
 
मैंने देखा है ये टाडू अबाटे डेमे खेलते हुए तो बहुत अच्छा दिखाई दिया। उनकी प्रतिभा से इथियोपियाई एथलीट्स को बहुत फायदा हुआ। और यह भी सच है येशी कालायु चेकोल ने गोल्ड मेडल जीता है, वह भी बहुत अच्छा खिलाड़ी है। मैं उनकी प्रशंसा करता हूँ।
 
मेरा मन है कि टाडू अबाटे डेमे को देखकर मुझे याद आया कि पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने भी अपने खेल से देश का पride बनाया था। उनकी जीत की बात होने पर मुझे यही सोचना है कि अगर सचिन तेंदुलकर ऐसा कर सकते थे, तो टाडू अबाटे डेमे भी ऐसा कर सकते हैं। लेकिन फिर भी मैं उनकी बात ही नहीं कहता, बस यह कहूँगा कि इथियोपियाई एथलीटों ने देश को गर्वित करने का एक नया साहस दिखाया है।
 
बिल्कुल सही तो यह मैराथन का परिणाम आ गया है और इथियोपियाई एथलीट टाडू अबाटे डेमे की जीत हासिल हुई है! वाह वाह! उनकी प्रतिभा और मेहनत को देखने से हमें बहुत प्रेरणा मिलती है। और येशी कालायु चेकोल की भी जीत के बाद, मुझे लगता है कि इथियोपियाई एथलीटों ने अपना स्थान बनाए रख लिया है और वे दुनिया भर में अपनी प्रतिभा लेकर आ रहे हैं। यह हमें एथलेटिक्स में प्रतिभा और मेहनत की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका सोचने पर मजबूर करता है! 💪🏽👏
 
मुंबई मैराथन के इस साल के परिणाम देखकर लगता है कि इथियोपियाई एथलीट्स हमेश से प्रतिभाशाली थे, लेकिन अब उनकी प्रतिभा और मेहनत को भारतीय खेल प्राधिकरण (आईएफसी) द्वारा अधिक मान्यता देने की जरूरत है। यहाँ तक कि टाडू अबाटे डेमे को भी पुरस्कृत नहीं किया गया, जिससे उनकी प्रतिभा और मेहनत को बढ़ावा नहीं मिला। 🤔🏃‍♂️

इसके अलावा, महिलाओं के लिए पुरस्कार सिस्टम में भी बदलाव की जरूरत है। येशी कालायु चेकोल ने अपनी जीत के बाद कई सवाल उठाए हैं, जैसे कि उनके पुरस्कार में इतना अंतर क्यों है? यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमें महिलाओं के लिए समान अवसर देने की जरूरत है। 💁‍♀️🏆
 
अरे, ये टाडू अबाटे डेमे की जीत तो सुनकर मैं खुश हुआ, लेकिन यह भी सच है कि उनकी जीत को देखकर हमें एथलेटिक्स के दुनिया में उनकी प्रतिभा और मेहनत का सम्मान करने का तरीका सीखना चाहिए।
 
बिल्कुल, यह तो देखकर खुश हूँ कि इथियोपियाई एथलीटों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से जीत हासिल कर ली है... मैंने भी एक बार ट्रेनिंग करने की कोशिश की थी, लेकिन मेरे शरीर पर बहुत समस्याएं आईं... लेकिन यह देखकर अच्छा लगा कि येशी कालायु चेकोल ने अपनी प्रतिभा से जीत हासिल कर ली है...

मैंने भी अपने दोस्त को इथियोपियाई एथलीटों की तरह तैयार करने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। अब देखकर अच्छा लगा कि वे लोग इतनी प्रतिभाशाली हैं... और यह भी सच है कि महिला वर्ग की येशी कालायु चेकोल ने अपनी प्रतिभा से जीत हासिल कर ली है...

मेरी बहन भी खेलती है, लेकिन वह कभी नहीं जीतती। मैं उसकी कड़ी मेहनत की सराहना करता हूँ, लेकिन यह देखकर अच्छा लगा कि येशी कालायु चेकोल ने अपनी प्रतिभा से जीत हासिल कर ली है...
 
मुझे लगता है कि यह बात सही हो सकती है 🤔, लेकिन दूसरी तरफ़ तो यह भी सच हो सकता है... मुंबई मैराथन में जीतने वाले टाडू अबाटे डेमे की कहानी तो बहुत प्रेरणादायक लगती है, लेकिन फिर भी इथियोपियाई एथलीटों की सफलता को देखते समय, मुझे लगता है कि हमें अपने देश के खिलाड़ियों की तुलना में बाहरी प्रतिभा की महत्ता पर विचार करना चाहिए... लेकिन फिर तो यह भी सच हो सकता है कि निर्वाचित टीम की सफलता को महत्व देना चाहिए 🤷‍♂️, जैसा कि मुंबई मैराथन ने आज दिखाया है।
 
मुंबई मैराथन के परिणामों से मुझे थोड़ा दुख हुआ क्योंकि मैंने देखा कि मंच पर प्रशंसक अपनी पसंदीदा एथलीटों को चुनते समय कितने भीड़भाड़ में होते हैं। मुझे लगता है कि लोग इतने टीवी और डिजिटल दुनिया में सोये हुए हैं कि वे कभी भी पूरी तरह से जुड़े हुए नहीं हो सकते। 🤔
और एक बात, मुंबई मैराथन की वेबसाइट पर जाने पर मुझे बहुत दिक्कत हुई कि वे अपने लाइव ट्रैकिंग फीचर के साथ ऐसा मजेदार न हो। यही नहीं, उन्हें अपने वीडियो क्लिप्स को डाउनलोड करने के लिए भी बहुत देर लग रही थी। 🤦‍♂️
क्या कभी मंच पर प्रशंसक अपने पसंदीदा एथलीटों को चुनने के साथ-साथ वेबसाइट और फीचर्स के बारे में भी बात करेंगे? 🤔
 
तो फिर यह इथियोपियाई एथलीटों की जीत तो बस मन में खुशी लाने वाली बात है 🏆 परंतु जब हम देश की छोटी-छोटी टीमों को देखते हैं तो यह हमारे लिए एक सीख है कि अगर हम अपने खेलों में प्रतिभा और मेहनत को बढ़ावा दें, तो विश्व स्तर पर भी हमारा नाम उजागर कर सकते हैं।
 
मुंबई मैराथन में टाडू अबाटे डेमे और येशी कालायु चेकोल जैसे इथियोपियाई एथलीटों की विजय से हमें बहुत प्रेरित हुआ है। उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा देखकर लगता है कि अगर हम अपने खेलों में सादगी रखें और धैर्य बनाए रखें, तो हम भी बड़े-बड़े लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। मेरा विचार है कि प्रतिभा और मेहनत की जितनी महत्वपूर्ण भूमिका है, उसका लाभ उठाने के लिए हमें अपने देश में खेल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत बनाने की जरूरत है। 🏃‍♀️👍
 
मैराथन में टाडू अबाटे डेमे जीतने की बात तो अच्छी है, लेकिन हमें सोचنا चाहिए कि यह विजेता कैसे बन पाई और आगे क्या करेगी। इसके पीछे कई कारक हैं जिनमें सरकार द्वारा चलाए गए योजनाओं और समर्थन से उनकी प्रतिभा को खोला गया। लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिए कि इन योजनाओं में कितना सहयोग हुआ और कितना व्यक्तिगत प्रयास था।

अब जब येशी कालायु चेकोल ने गोल्ड मेडल जीता है, तो हमें सोचना चाहिए कि आगे भी महिलाओं को भी समान अवसर मिलें। सरकार द्वारा चलाए गए प्रयासों को और बढ़ावा देने की जरूरत है।
 
बेटे तो इस मैराथन में टाडू अबाटे डेमे जैसे खिलाड़ी देखकर लगता है कि वे लोग मैराथन चलाने की कला सीखने के लिए भारत के पास नहीं है, तो ये इथियोपियाई लोग कुछ गलत नहीं कर रहे हैं 🏃‍♂️। लेकिन जब येशी कालायु चेकोल ने गोल्ड मेडल जीता, तो हमें यह सोचना पड़ा, कि भारतीय खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने लाने के लिए क्या करना होगा। और फिर मुझे याद आया कि 1980 के दशक में हमने भी एक छोटे से खिलाड़ी ने इंटरनेशनल एथलेटिक्स एसोसिएशन में प्रवेश कर लिया था, तो वही शुरुआत होनी चाहिए। हमें अपने खिलाड़ियों को सही परिदृश्य देने की जरूरत है, जिससे वे अपनी प्रतिभा को बेहतर ढंग से दिखा सकें।
 
मुझे लगता है कि यह विजेताओं की कहानी बहुत प्रेरणादायक है। उनकी मेहनत और संघर्ष को देखकर हमें यह सोचने पर मजबूर किया जाता है कि अगर हम अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करें, तो भी हम वास्तविकता का सामना नहीं करते। 🏃‍♀️

आजकल हर किसी को जीने का मौका मिलता है और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर भी मिलता है, लेकिन यह सफलता कभी नहीं आसान होती। इस मामले में टाडू अबाटे डेमे और येशी कालायु चेकोल ने अपनी प्रतिभा और मेहनत को दिखाकर हमें प्रेरित किया है। 🙌

मैं उनकी कहानी सुनकर लगता है कि अगर हमारे पास अपने लक्ष्यों के लिए कड़ी मेहनत करने की इच्छा और निरंतरता हो तो हम वाकई जीवन को बदल सकते हैं। इस दुनिया में सफलता की कहानी बहुत सारी हैं, बस हमें अपने लक्ष्यों के प्रति ईमानदार रहना और कड़ी मेहनत करनी चाहिए। 🌟
 
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