मुंबई मैराथन में बीते दिन मिले परिणामों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि इथियोपियाई एथलीट टाडू अबाटे डेमे ने मुंबई मैराथन में अपनी विशेषता और प्रतिभा दिखाकर जीत हासिल की है। उनके साथ-साथ महिला वर्ग में भी इथियोपियाई दबदबा बनाए रखने वाली येशी कालायु चेकोल ने गोल्ड मेडल जीता, जिससे उसकी प्रतिभा और मेहनत को और अधिक बढ़ावा मिला।
महिला वर्ग के इस विजेता की कहानी है कि वह अपने देश से बाहर भी अपना नाम बना सकती है, अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने ला सकती है। यह इथियोपियाई एथलीटों की सफलता की एक नई शुरुआत मानी जा रही है जिससे हमें आश्वस्त करती है कि वे दुनिया की सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में भी अपना स्थान बनाए रख सकते हैं।
मुंबई मैराथन के इस वर्ष के परिणामों ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि एथलेटिक्स में प्रतिभा और मेहनत की जितनी भी बड़ी भूमिका, उसे लेकर आगे बढ़ने की भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करनी चाहिए।
महिला वर्ग के इस विजेता की कहानी है कि वह अपने देश से बाहर भी अपना नाम बना सकती है, अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने ला सकती है। यह इथियोपियाई एथलीटों की सफलता की एक नई शुरुआत मानी जा रही है जिससे हमें आश्वस्त करती है कि वे दुनिया की सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में भी अपना स्थान बनाए रख सकते हैं।
मुंबई मैराथन के इस वर्ष के परिणामों ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि एथलेटिक्स में प्रतिभा और मेहनत की जितनी भी बड़ी भूमिका, उसे लेकर आगे बढ़ने की भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करनी चाहिए।