न बजट में कुछ-न कंपनियों ने सुनी; क्या हम रोबोट: गिग वर्कर्स बोले- एक्सीडेंट हो तो भी 12-13 घंटे काम करो; सरकार अंधी-बहरी हुई

कंपनियों से यह माफी माँगनी चाहिए कि वे अपने गिग वर्कर्स को 12-13 घंटे तक काम करने के लिए मजबूर कर रही हैं। इसे क्या कहें? नेहा जी की बात सुनकर दिल भी टूट गया। उसके पास बस 20-25 हजार बचाए हुए, और वह अभी भी अपने परिवार को खाना, कपड़ा और घर का खर्च चुकाने के लिए मजबूर है।

गिग वर्कर्स नेताओं की बात सुनकर दिल अच्छा लगा। ऑर्डर कैंसिल करने की पर्मिशन नहीं देने के खिलाफ विरोध कर रही हैं। हमारे देश में इतने कई गिग वर्कर्स हो गए हैं, और उनकी संख्या 1.20 करोड़ हो गई। यह देश की कुल वर्क फोर्स का 2% है?

कंपनियों को अपनी इस छूट के बारे में तुरंत ध्यान देना चाहिए। अगर सरकार एक कानून बनाकर इन्हें खुली छूट देती है, तो यही कंपनियां मनमानी कर रही हैं। गिग वर्कर्स यूनियन की अध्यक्ष सीमा जी और अन्य नेताओं की बात सुनकर मुझे लगता है कि सरकार को तुरंत काम करना चाहिए।
 
गिग वर्कर्स की समस्या बहुत बड़ी है 🤔। मेरा सवाल यह है कि हम दूसरों के साथ सहानुभूति करने की क्षमता क्यों खो रहे हैं? नेहा, जो 12-13 घंटे काम करती है, और भावना, गिग वर्कर्स नेता, जो ऑर्डर कैंसिल किए जाने पर पीड़ित हैं, दोनों की बात सुननी चाहिए। हमारा समाज बदलने के लिए एकजुट होना चाहिए, न कि विभाजन में फंसना। सरकार को गिग वर्कर्स के अधिकारों के लिए कुछ करना चाहिए। देश की कुल वर्क फोर्स में से 2% तो गिग वर्कर्स हैं! 🤯
 
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