‘न प्लानिंग, न तैयारी!’ ओडिशा में PUC के नाम पर जनता की शामत? नए नियम पर नवीन पटनायक ने जो कहा वो चौंका देगा

बिहार में पेट्रोल, डीजल की कीमतों में तेजी! नवीन पटनायक ने कहा, 'पूर्वी घाट से आगे चलने पर देश फुट कर जाएगा।'

ओडिशा में पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट को लेकर लागू नए नियम ने आम जनता के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। राज्य सरकार द्वारा 1 जनवरी 2026 से बिना PUC, बिना फ्यूल नियम लागू करने की अचानक घोषणा के बाद टेस्टिंग सेंटरों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं।

इस तरह की अराजकता में पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने तीखा हमला बोला है, 'जो देशभर में इस तरह से गिरने वाला है वह उसे पहले से जानता था।' उन्होंने कहा, 'ओडिशा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बाधित होगी।'

नवीन पटनायक ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा इस तरह से अचानक नियम बदलने से युवाओं और मध्यम वर्ग को बहुत मुश्किलें उठानी पड़ेंगी। उन्होंने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला भी किया है, जिसे 'घोर कुप्रबंधन' कहा गया है।
 
अरे दोस्तों! मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ कि ओडिशा में ऐसा हाल तो उत्पन्न हो रहा है… पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट की बात करें, यह तो हमेश से अच्छा नियम था, लेकिन अब सरकार ने अचानक से बदल दिया और आम आदमी को चोट पहुंचाने का मौका दिया। युवाओं और मध्यम वर्ग को तो बिल्कुल भारी मुश्किलें होंगी, वे सब फ्यूल खरीदने जा रहे हैं और पूरी तरह से बाधित होंगे।
 
बहुत बड़ी बुराई है यह ... 😔

किसी भी समस्या का समाधान सोचते समय, हमें अपने आप को याद दिलाना चाहिए कि 'संघर्ष' ही जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक है। 🤝
 
क्या ये पूरा सही है? सरकार द्वारा ऐसे नियम बदलने से पहले परीक्षण सेंटरों को तैयार नहीं किया जाता? क्या हमारे देश में इतनी अराजकता चलती रहती है? पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बीजेपी सरकार पर ध्यान से हमला किया है, लेकिन मुझे लगता है कि इसके पीछे और अधिक गहराई हो सकती है।
 
मुझे लगता है कि ऐसा अचानक नियम बदलना कभी नहीं चाहिए। पहले तो कोई मूल्यांकन करना चाहिए और फिर सोचा जाना चाहिए कि इससे कैसे परिणाम होंगे। लेकिन अब तक सरकार ने बस एक अचानक निर्णय लिया है और देख रही है कि सब कुछ ठीक से चलेगा। मुझे लगता है कि इससे वास्तव में बहुत परेशानी होगी, खासकर युवाओं और मध्यम वर्ग के लिए।
 
अरे, ये सचमुच बहुत बड़ी समस्या है? ओडिशा में PUC सर्टिफिकेट को लेकर नियम बदलने से पहले लोगों को इतनी देर तक तैयार करना पड़ा। यह अचानक घोषणा क्यों की गई, इसका जवाब तो नहीं है। सरकार को ये समझना चाहिए कि युवाओं और मध्यम वर्ग को ऐसी मुश्किलें उठानी पड़ने से पहले उन्हें कम से कम 6 महीने तक समय देना चाहिए।
 
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