भारत और यूएई की आधिकारिक यात्रा पर शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों को तैयार किया गया। यह यात्रा, जो 19 जनवरी 2026 को हुई, भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा करती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की। वे इस बात पर सहमत हुए कि भारत और यूएई के बीच एक प्रमुख परियोजना पर सहमति बनी है, जिसके तहत अबू धाबी में भारतीय कला विरासत और पुरातत्व के संग्रहालय सहित एक सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किया जाएगा।
इस यात्रा के दौरान, भारत और यूएई ने आतंकवाद, एआई, रक्षा सहयोग और निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों ने सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के विकास वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
भारत और यूएई ने आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्रों में भारत को प्रति वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति के लिए एक समझौता किया। गुजरात के धोलेरा में स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन के विकास में यूएई की भागीदारी के लिए एक अलग दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए।
खाद्य सुरक्षा और कृषि सहयोग को लेकर भी समझौते हुए। खाद्य सुरक्षा और तकनीकी आवश्यकताओं पर एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे भारतीय किसानों को लाभ होने के साथ-साथ यूएई में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की उम्मीद है। दोनों देश आपसी संप्रभुता के आधार पर 'डेटा एंबेसी' (Data Embassy) स्थापित करने की संभावना पर भी काम करेंगे।
दोनों देशों ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में साझेदारी पर सहमति जताई है और एआई को प्राथमिकता देने वाले क्षेत्रों पर चर्चा की। इसके अंतर्गत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत में डेटा सेंटर में निवेश करेगा और दोनों देश मिलकर एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापति करेंगे।
दोनों देश पश्चिम एशिया और अफ्रीका में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे और द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने को लेकर अबू धाबी में 'हाउस ऑफ इंडिया' स्थापित किया जाएगा।
आतंकवाद पर पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया गया है। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और वैश्विक मुद्दों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा को कायम रखने पर दोनों देशों ने सहमति जताई। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद की निंदा की और इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि आतंकवाद, उसे फंड करने वाले और उसके समर्थकों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए, जो कि पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संदेश है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की। वे इस बात पर सहमत हुए कि भारत और यूएई के बीच एक प्रमुख परियोजना पर सहमति बनी है, जिसके तहत अबू धाबी में भारतीय कला विरासत और पुरातत्व के संग्रहालय सहित एक सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किया जाएगा।
इस यात्रा के दौरान, भारत और यूएई ने आतंकवाद, एआई, रक्षा सहयोग और निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों ने सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के विकास वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
भारत और यूएई ने आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्रों में भारत को प्रति वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति के लिए एक समझौता किया। गुजरात के धोलेरा में स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन के विकास में यूएई की भागीदारी के लिए एक अलग दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए।
खाद्य सुरक्षा और कृषि सहयोग को लेकर भी समझौते हुए। खाद्य सुरक्षा और तकनीकी आवश्यकताओं पर एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे भारतीय किसानों को लाभ होने के साथ-साथ यूएई में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की उम्मीद है। दोनों देश आपसी संप्रभुता के आधार पर 'डेटा एंबेसी' (Data Embassy) स्थापित करने की संभावना पर भी काम करेंगे।
दोनों देशों ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में साझेदारी पर सहमति जताई है और एआई को प्राथमिकता देने वाले क्षेत्रों पर चर्चा की। इसके अंतर्गत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत में डेटा सेंटर में निवेश करेगा और दोनों देश मिलकर एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापति करेंगे।
दोनों देश पश्चिम एशिया और अफ्रीका में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे और द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने को लेकर अबू धाबी में 'हाउस ऑफ इंडिया' स्थापित किया जाएगा।
आतंकवाद पर पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया गया है। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और वैश्विक मुद्दों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा को कायम रखने पर दोनों देशों ने सहमति जताई। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद की निंदा की और इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि आतंकवाद, उसे फंड करने वाले और उसके समर्थकों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए, जो कि पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संदेश है।