नम आंखों से दी गई ‘दादा’ को अंतिम विदाई: भाभी सुनेत्रा को संभालती दिखीं सुप्रिया सुले, आखिरी सफर की भावुक तस्वीरें

अजित पवार की अंतिम विदाई: भाभी सुनेत्रा ने आखिरी सफर की भावुक तस्वीरें दिखाई

अजित पवार की गंभीर अवस्था में लंबे समय तक अस्पतालों में भर्ती रहने के बाद उनके अंतिम संस्कार को शाम 12.10 बजे पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी अस्पताल में किया गया। इस दौरान हजारों लोग उपस्थित थे, जिनमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी शामिल थे।

अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा और उनके बेटे पार्थ एवं जय ने अपने पिता की चिता मुखाग्नि दी। इस दौरान पार्थ पवार ने कहा, "मेरे पिता को हमें अपने जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिला था।"

अजित पवार की अंतिम यात्रा शाम 9 बजे से शुरू हुई और लगभग छह किलोमीटर लंबी रही। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्धव ठाकरे सहित आंध्र प्रदेश के नेता नारा लोकेश इस यात्रा में शामिल रहे।

अजित पवार के अंतिम संस्कार को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर उनके गांव काटेवाडी से विद्या प्रतिष्ठान के मैदान में लाया गया, जहाँ लोगों ने 'अजित दादा अमर रहे' के नारे लगाए। इस दौरान अजित पवार की चचेरी बहन सुप्रिया सुले और राकांपा के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल भी उपस्थित थे।
 
🙏 "जीवन जीने का सौभाग्य एक बार मिलता है तो दोबारा नहीं मिलता।" 🌹

अजित पवार की अंतिम यात्रा में शामिल कई बड़े नेताओं को उनके जीवन और नेतृत्व की यादें दिलानी थीं। यह एक ऐसा समय है जब हमें अपने नेताओं को और उनके पारिवारिक व्यक्तियों को याद करना चाहिए। आज भी लोग अजित पवार से जुड़े अनुभवों को साझा कर रहे हैं और उन्हें याद करते हुए अपने नेतृत्व की शैली पर विचार कर रहे हैं।

मुझे अजित पवार की गंभीर अवस्था के बारे में जानना बहुत दुखद लगा, लेकिन उनकी अंतिम यात्रा और संस्कार को देखना एक ऐसा अनुभव था जिसने मुझे सोचने पर मजबूर किया।
 
अजित पवार के अंतिम संस्कार में हजारों लोगों ने उपस्थित होना देखने को मिला, और ये सभी लोग उनके जीवन और उपलब्धियों को भूलकर नहीं गए। लेकिन मेरा सवाल यह है कि क्या हम वास्तव में उनकी याद में कुछ नया करने के लिए तैयार हैं? आजादी के बाद से कई महान नेताओं को हमने अपने देश को आगे बढ़ाने के लिए समर्थन दिया, और अब जब वह शांति प्राप्त कर गए, तो हम उनकी याद में क्या बनाएंगे।

मेरे खयाल में, अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हमें अपने समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए काम करना चाहिए। हमें अपने बच्चों और युवाओं को उनकी संस्कृति और जीवन शैली को समझने की जरूरत है।
 
जानकर दिल में खेद हो रहा है 🤕, लेकिन यह बात सच है कि हमारे समाज में जीवन की अनिश्चितता और मृत्यु की दर बढ़ गई है। अजित पवार जैसे व्यक्ति की गंभीर अवस्था में उनकी लंबे समय तक अस्पतालों में भर्ती रहने की बात सुनकर लगता है कि हमें अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए और जीवन को पूरी तरह से जीना चाहिए।

किसी भी समाज में नेताओं की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हमें उनकी यादों को नहीं भूलना चाहिए और उनके अनुभवों से हमें सीखना चाहिए। 📚 यही reason है कि अजित पवार जैसे नेताओं को हम अपने समाज में अपने अनुभवों को देने का अवसर दिया जाना चाहिए ताकि वह लोगों को सीखने के लिए एक अच्छा उदाहरण बन सकें।
 
अजित पवार की अंतिम यात्रा बहुत ही सुंदर थी। मुझे लगता है कि उनके अंतिम संस्कार में शामिल लोगों ने बहुत ही अच्छे इरादे से काम किया। मैंने देखा कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह भी उनकी यात्रा में शामिल रहे, जो कि एक अच्छा विचार है। लेकिन मुझे लगता है कि अगर अजित पवार का अंतिम संस्कार सिर्फ देशभक्तों और राजनेताओं के हाथों नहीं किया जाता, तो यह बहुत ही भावुक और सुंदर था।

मैंने देखा कि लोगों ने 'अजित दादा अमर रहे' का नारा लगाया, जो कि एक बहुत ही अच्छा विचार है। मुझे लगता है कि अगर हमारे देश में ऐसे नारे लगाने से हर किसी को अजित पवार जैसे महान लोगों को याद रखने का मौका मिलता, तो यह बहुत ही अच्छा होगा।

मैंने देखा कि उनकी पत्नी सुनेत्रा और बेटे पार्थ एवं जय ने अपने पिता की चिता मुखाग्नि दी, जो कि एक बहुत ही गहरी भावना है।
 
अरे, अजित पवार को अभी एक्ट किया गया है, लेकिन उनके अंतिम यात्रा में इतने सारे बड़े नेताओं को शामिल करने की बात तो थोड़ी भी अजीब लगती है 🤔। और वाह, 6 किलोमीटर लंबी रैली क्यों? बस उन्हें उनके गांव तक पहुंचाने के लिए कुछ कर दिया जाए था, फिर भी इतना बाज़गांड़ा करना पड़ा 🙄
 
अजित पवार की अंतिम यात्रा बहुत ही शांत और सम्मानजनक थी। यह साबित करता है कि हमारे समाज में अभी भी इतनी शांति और सम्मान की बातचीत हो सकती है। पवार दादा ने अपने जीवन को बहुत खूबसूरत तरीके से रंगने में सफल रहे, उनकी याद में लोगों ने इतनी सुंदर और शांत व्यवस्था बनाई है। यह दिखाता है कि हमें अपने प्रियजनों को अकेला नहीं छोड़ सकते। मैं आशा करता हूं कि उनकी याद में हमें भी बहुत सारी शांति और सम्मान की बातचीत करने का मौका मिलेगा। 🙏🌹
 
🤕 ये अजित पवार को लेकर बहुत दुख है... उन्हें सालों से अस्पताल में भर्ती रहने के बाद अंतिम संस्कार करना पड़ा। उनकी पत्नी सुनेत्रा और बेटे ने चिता मुखाग्नि कराई, खेद है उन्हें यह जानकर नहीं मिल सका 🙏

मैंने पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी अस्पताल में उनके अंतिम संस्कार को देखा, वहां हजारों लोग उपस्थित थे, मुख्यमंत्री भी शामिल थे। लेकिन मुझे लगता है कि इतनी विशेषता में अंतिम संस्कार पर जोर देना चाहिए, न कि यात्रा और सभी प्रमुख व्यक्तियों को सूचीबद्ध करना।

आज भारत के नेताओं को अपने देश के लिए मिलकर खुद कुछ नहीं कर सके, लेकिन उनके नाम घूंटते हुए यात्रा पर जोर दिया गया। आज बहुत सारी बातें बदलने की जरूरत है, मैं चाहता हूँ कि श्रद्धांजलि देने वालों को अपने देश और समाज के लिए कुछ करने का मौका मिले।

मेरी इस तरह से बातें करते रहने से मुझे लगता है कि कुछ बदल सकता है। मैंने तो अपने पिता ने मुझे बताया था, 'अपने देश और समाज के लिए खुद कुछ करो, बस इतना ही'।
 
अजित पवार को यह एक बहुत दुखद मोड़ है 🤕। लंबे समय तक अस्पतालों में भर्ती रहने के बाद उनका निधन हो गया। मुझे लगने लगा कि कल कुछ ऐसा ही होने वाला है। मैं उनके अंतिम संस्कार को देखकर बहुत भावुक रहा, पार्थ एवं जय ने अपने पिता की चिता मुखाग्नि करने में बहुत साहस और आत्मविश्वास दिखाया। यह एक अच्छा संदेश है 🙏
 
मैं तो जानता हूँ कि अजित पवार को उनके गंभीर स्वास्थ्य की समस्याओं ने बहुत परेशान किया, लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि वह अपने जीवन को खुशहाल रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे थे। लेकिन, तभी ऐसा लगता है कि उनकी देह बिल्कुल भी मजबूत नहीं हुई।

अब जब वे शांति से जाने के लिए तैयार हैं, तो मुझे खेद होता है कि हमें उन्हें इतनी दूर तक पीछे धकेलना पड़ा। लेकिन, फिर भी, मैं सोचता हूँ कि उनकी बात सच है, जीवन को खुशहाल रखने के लिए हमें अपने हर व्यक्तिगत निर्णय पर चिंतित रहना चाहिए।

लेकिन, तभी मुझे याद आता है कि दुनिया में ऐसा और भी बहुत सारे अच्छे लोग हैं, जो हमेशा अपने जीवन को खुशहाल रखने के लिए प्रयास करते रहते हैं।

कोई तो न हो, लगता है कि सबकुछ एक ही तरीके से नहीं चलता।
 
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