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बजट साल 2023-24: अरुण जेटली पर लगा योजना में पैसा निकालने का आरोप, बजट से तीन बड़े विकल्प
 
मेरो ध्यान यह है कि बजट में पैसा निकालने का दावा करने वालों पर जाँच करनी चाहिए। अरुण जेटली के बारे में ऐसा कहने से पहले उनके पास इतने सारे पैसे थे? और उन्होंने कहीं से इतना पैसा निकाला था?

मुझे लगता है कि बजट में पैसा निकालने की बात तो बहुत ही आसान है, लेकिन उसके पीछे की सच्चाई हमेशा अलग होती है। हमें सबकुछ जानने की जरूरत नहीं है, लेकिन कम से कम जानकारी की जरूरत होती है ताकि हम सही निर्णय ले सकें।
 
मेरे दोस्त, बजट से हमारे देश के भविष्य की बात करो तो मुझे लगता है कि यह सब कुछ धुंधला ही है। रिजर्व बैंक की आर्थिक नीतियों में परिवर्तन आ रहा है, लेकिन मुझे लगता है कि यह सब अच्छे विकल्प नहीं हैं। बजट से हमारे देश को तीन बड़े विकल्प मिले हैं - पहला विकल्प है जीएसटी में कटौती, दूसरा विकल्प है बैंकों को अधिक पैसा देना, और तीसरा विकल्प है सरकार को अपने खर्चों को कम करना। लेकिन मुझे लगता है कि इनमें से कोई भी विकल्प नहीं है, अगर हम पहले से ही पैसा निकालने वाली योजनाओं में लगा रहे हैं।

मेरी तो याद आती है जब अरुण जेटली के बजट में उन्होंने 50,000 रुपये की नई नौकरी पर रोजगार प्रतिष्ठान घोषणा की थी, लेकिन आज तक हमारे देश में यह रोजगार नहीं हुआ।

मुझे लगता है कि बजट साल 2023-24 में कुछ अच्छा नहीं है।
 
मुझे लगता है कि बजट में अरुण जेटली पर लगने वाले आरोप बहुत बड़े हैं और योजनाओं में पैसा निकालने का आरोप भी सच्चाई से नहीं चलेगा। लेकिन अगर हम विकल्पों को देखते हैं, तो मुझे लगता है कि बजट से तीन बड़े विकल्प हो सकते हैं:

सबसे पहला, सरकार को अपनी योजनाओं को और भी प्रभावी बनाने के लिए और अधिक पैसा खर्च करना चाहिए। यह हमें सुधरने में मदद करेगा और लोगों को बेहतर जीवन देगा।

दूसरा, सरकार को अपने बजट में और अधिक स्ट्रीमलाइन्स शामिल करनी चाहिए, ताकि लोग आसानी से पैसे निकाल सकें। यह हमें आर्थिक स्थिरता में मदद करेगा।

तीसरा, सरकार को अपने बजट में और अधिक सार्वजनिक-वित्तीय सहायता शामिल करनी चाहिए, ताकि छोटे व्यवसायों और निजी उद्योगों को भी मदद मिल सके। यह हमें आर्थिक विकास में मदद करेगा। 📈
 
मुझे लगता है कि बजट से निकलने वाले धन का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च करना चाहिए। अरुण जेटली को उनकी योजनाओं में पैसा निकालने का आरोप लगाना थोड़ा दुखद है, लेकिन हमें यह भूलना चाहिए कि बजट से निकलने वाले धन का उपयोग न केवल सरकारी योजनाओं में जाता है, बल्कि वह भी आम आदमी के लिए फायदेमंद हो सकता है।

मुझे लगता है कि बजट से तीन बड़े विकल्प यह रहे: पहला, शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर देना और सरकार की आर्थिक मदद लेने की जरूरत नहीं है। दूसरा, सरकार को अपनी योजनाओं में पैसा निकालने के बजाय, आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए। तीसरा, सरकार को अपने विकल्पों को सोचकर और आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए, ताकि वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सके। 🤔
 
अरे दोस्तो तो यह बजट बहुत ही रोचक रहा, लेकिन मुझे लगता है कि योजनाओं में पैसे निकालने का आरोप अरुण जेटली पर लगना बिल्कुल सही नहीं है। हमारे देश को बहुत सारे विकल्प हैं, लेकिन बजट में तीन बड़े विकल्प हैं - एक तो रोजगार, दूसरा शिक्षा, और तीसरा स्वास्थ्य। ये तीन ही चीजें हमारे देश को आगे बढ़ाने में बहुत मदद करेंगी।

लेकिन मुझे लगता है कि सरकार ने बजट में इनमें से एक को अधिक महत्व देना चाहिए। रोजगार पर ज्यादा ध्यान देना अच्छा नहीं है, क्योंकि इससे लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर न हो पाएगी। शिक्षा को बहुत महत्व देना चाहिए, ताकि हमारे देश के युवाओं को अच्छी शिक्षा मिल सके।

और स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देना भी जरूरी है, ताकि हमारे देश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
 
वाह, अरुण जेटली जी को यह आरोप लगने से लोगों में बहुत खेद होगा। लेकिन हमारी सोच में एक सवाल उठता है - बजट क्या है? इसका उद्देश्य नहीं बस पैसा निकालना है, बल्कि देश के भविष्य को सुरक्षित करना है। बजट साल 2023-24 में तीन बड़े विकल्प हैं, जिनमें से हमें अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज़ को समझने की जरूरत है।

पहला विकल्प है आर्थिक विकास। यह बजट हमें देश के आर्थिक सुधार की ओर ले जाने का मौका देता है। लेकिन इसे प्राप्त करने के लिए हमें अपनी सोच बदलनी होगी, हमें यह समझना होगा कि विकास क्या है और हम इसकी ओर कैसे बढ़ सकते हैं।

दूसरा विकल्प है सामाजिक न्याय। यह बजट हमें समाज के उत्तरोत्तर विकास को देखने का मौका देता है। लेकिन इसे प्राप्त करने के लिए हमें अपनी सोच बदलनी होगी, हमें यह समझना होगा कि न्याय क्या है और हम इसकी ओर कैसे बढ़ सकते हैं।

तीसरा विकल्प है पर्यावरण संरक्षण। यह बजट हमें पृथ्वी के भविष्य को देखने का मौका देता है। लेकिन इसे प्राप्त करने के लिए हमें अपनी सोच बदलनी होगी, हमें यह समझना होगा कि संरक्षण क्या है और हम इसकी ओर कैसे बढ़ सकते हैं।

हमें इन विकल्पों पर विचार करने की जरूरत है, हमें अपनी सोच बदलनी होगी, और देश के भविष्य को सुरक्षित करने का मौका लेना होगा। 💡
 
बजट साल 2023-24 में अरुण जेटली पर योजना में पैसा निकालने का आरोप लगने से तो लोगों का दिल घायल हो गया है 🤕। यह तो सच्चाई की गहराइयों को दर्शाता है। लेकिन आजकल योजनाओं में पैसा निकालने की बात करने से पहले हमें यह सोचना चाहिए कि इन योजनाओं से कौन फायदा उठता है और कौन पीड़ित होता है।

बजट से तीन बड़े विकल्प हैं - एक तो वह विकल्प जिसमें हमारी खेती में फायदा होगा, दूसरा तो वह विकल्प जिसमें हमारे बच्चों की शिक्षा में फायदा होगा। और तीसरा तो वह विकल्प जिसमें हमारी स्वास्थ्य सेवाओं में फायदा होगा।
 
अरे, बजट में पैसा निकालने का दावा अरुण जेटली पर बहुत बुरा है 🙅‍♂️। ये आरोप लगने पर उनकी प्रतिष्ठा तो जरूर कम होगी। लेकिन, बजट में से पैसा निकालने का आरोप लगने का मतलब यह नहीं है कि अरुण जेटली एक बुरे व्यक्ति हैं या उनकी योजनाएं खराब हैं 🤔। उनकी योजनाओं में जरूर से कमियां हो सकती हैं, लेकिन आरोप लगने पर इनकार करना भी सही नहीं है 😐

मुझे लगता है कि बजट में से पैसा निकालने का आरोप लगने पर सरकार को जरूर अपनी तरफ से बात करनी चाहिए और यह जांचना चाहिए कि योजनाओं में कहीं भ्रष्टाचार नहीं हुआ है 🤑। और अगर ऐसा हुआ है, तो आरोपित व्यक्तियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए 🚔
 
😊 बजट साल 2023-24 में जो देखा गया है, वह बिल्कुल भी नहीं सही सोचकर आया गया है। हमेशा सोचें, कि योजना में पैसा निकालने वाले व्यक्ति की ताकत कितनी होती है। अरुण जेटली जी को भी यही सबक मिलेगा। किसानों को बाजार में खरीदने की जरूरत नहीं है, सरकारी खातों से पैसा निकालकर उनकी लाभदायक परिस्थितियां बनाए जा सकते हैं।
 
मेरा लगता है कि बजट में पैसा निकालने का आरोप अरुण जेटली पर लगने से मुझे थोड़ा असहज महसूस होता है। लेकिन अगर हम बात करें तो यह सिर्फ एक राजनीतिक खेल है, और हमें इसकी बीछे की सच्चाई नहीं ढूंढनी चाहिए।

मेरा विचार है कि बजट में कुछ ऐसे विकल्प होने चाहिए जिनसे आम आदमी को लाभ हो। जैसे कि कम कर योजनाओं को और अधिक सामान्य बनाएं, ताकि हर किसी को इसका लाभ मिल सके।

और फिर भी बजट में पास होने वाले राशि को देश के विकास के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।
 
मैंने बजट से पहले ही सोचा था कि यह बजट मुश्किल होगा, लेकिन अरुण जेटली के नेतृत्व में तो मुझे आशा थी। लेकिन अब जब बजट आ गया है और इस पर आरोप लगने लगे हैं कि उन्होंने योजना में पैसा निकाला है, तो यह बहुत दर्दनाक लगता है।

मुझे लगता है कि सरकार ने बजट में अच्छी सोच नहीं की, खासकर अगर हम विकल्पों पर बात करें। पहला, अगर सरकार ने आर्थिक सुधार के लिए और भी जोर दिया होता, तो हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत हो पाती। दूसरा, अगर सरकार ने आम आदमियों की मदद करने के लिए और भी योजनाएं बनाई होतीं, तो हमारे देश में गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को फायदा होता।

तीसरा, अगर सरकार ने पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया होता, तो हमारा देश एक स्वस्थ और स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ पाता। लेकिन अब ऐसा लगता है कि सरकार ने सबकुछ बिल्कुल भूल दिया है। 🤕
 
😂📊 बजट में पैसा निकालने का आरोप! अरुण जेटली पर ऐसा आरोप लगने से पहले उन्हें बजट तैयार करने का समय मिल गया था? 🤔😂

बजट से तीन बड़े विकल्प हैं:

🚀 पैसे बचाना
💰 और भी लोकप्रिय विकल्प
👀 देखिए फिर तो क्या है? 😜
 
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