तेलंगाना नगर पालिका चुनाव में AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने दिलचस्प बयानबाज़ी की है, जिसमें उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए मुस्लिम लीडरशिप की राजनीति में एक नया दांव खेला है। ओवैसी ने कहा, "हमारे पास अपनी लीडरशिप को मजबूत करने के लिए सिर्फ वोट नहीं बल्कि अधिकार और शिक्षा का मकसद है।"
उन्होंने यह भी कहा है कि भारतीय संविधान हमें अपने वोटों से अपनी लीडरशिप चुनने का अधिकार देता है, चाहे वह कांग्रेस, BRS या BJP हो। ओवैसी ने यह संदेश दिया है कि मुस्लिम समाज को प्रतीकात्मक राजनीति या डर के माहौल में नहीं, बल्कि अधिकारों, शिक्षा, रोज़गार और राजनीतिक हिस्सेदारी के ठोस एजेंडे से आगे बढ़ना चाहिए।
ओवैसी का यह दांव पारंपरिक सेक्युलर दलों के लिए भी एक चुनौती बनकर उभरा है, जिन पर अक्सर आरोप लगाते रहे हैं कि वे मुस्लिम वोट तो लेते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनके मुद्दों को हाशिए पर डाल देते हैं।
ओवैसी की बयानबाज़ी मीडिया और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ जाती है, लेकिन यह सच है कि उनकी रणनीति शहरी अल्पसंख्यक युवाओं के बीच लोकप्रिय बन रही है। ओवैसी ने यह भी संकेत दिया है कि मुस्लिम राजनीति अब केवल रक्षात्मक नहीं रहेगी, बल्कि आक्रामक और मुद्दा-आधारित होगी।
उन्होंने यह भी कहा है कि भारतीय संविधान हमें अपने वोटों से अपनी लीडरशिप चुनने का अधिकार देता है, चाहे वह कांग्रेस, BRS या BJP हो। ओवैसी ने यह संदेश दिया है कि मुस्लिम समाज को प्रतीकात्मक राजनीति या डर के माहौल में नहीं, बल्कि अधिकारों, शिक्षा, रोज़गार और राजनीतिक हिस्सेदारी के ठोस एजेंडे से आगे बढ़ना चाहिए।
ओवैसी का यह दांव पारंपरिक सेक्युलर दलों के लिए भी एक चुनौती बनकर उभरा है, जिन पर अक्सर आरोप लगाते रहे हैं कि वे मुस्लिम वोट तो लेते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनके मुद्दों को हाशिए पर डाल देते हैं।
ओवैसी की बयानबाज़ी मीडिया और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ जाती है, लेकिन यह सच है कि उनकी रणनीति शहरी अल्पसंख्यक युवाओं के बीच लोकप्रिय बन रही है। ओवैसी ने यह भी संकेत दिया है कि मुस्लिम राजनीति अब केवल रक्षात्मक नहीं रहेगी, बल्कि आक्रामक और मुद्दा-आधारित होगी।