पंढेर-कोली बरी, निठारी के 16 बच्चों-लड़कियों का कातिल कौन: कॉलगर्ल बोली- कोली ने D-5 कोठी में बुलाया, जांच में तीन बड़ी खामियां

दिनांक: 31-07-2022
समाचार लेख: "उत्तर प्रदेश के निठारी से जुड़े दो मामलों में अदालत ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया है। इन दो मामलों में एक साथ 17 लोगों की हत्या करने के आरोप में जांच की गई थी। इसके बाद अदालत ने दोनों व्यक्तियों पर हत्या के आरोप से निर्लज्जता हो चुकी है, इसलिए उन्हें बरी कर दिया गया है। इस मामले में जांच की गई थी।"
 
यह तो बहुत गंभीर बात है ... सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को ऐसे आरोपों से निर्लज्जता देना कैसे हो सकता है ... 17 लोगों की हत्या करने के बाद भी उन्हें बरी कर दिया गया ... यह तो हमारे न्याय प्रणाली पर सवाल उठाता है ... क्या ऐसे मामलों में सच्चाई को खत्म करने के लिए कोई काम नहीं करना चाहता है ? 🤔😒
 
मैंने इस मामले को पढ़कर बहुत बेचैन हुआ, मेरी भाभी का चाचा भी यहीं से रहते हैं और वह तो हमेशा ये मामलों में शामिल होने वाले लोगों की बात करते हैं। मुझे लगता है कि अदालत ने सही फैसला दिया है, लेकिन मेरी मन में यह सोचने का भी तरीका नहीं है। मैंने अपनी पत्नी को बताया और वह कह रही है कि वाह, यह तो बहुत बड़ा मामला है। मेरे दोस्त ने भी मुझसे फोन करा और कहा कि अभी ये दोनों लोग कैसे बरी हो गए।
 
यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है... मेरे बच्चे को पढ़ाया गया है कि सच्चाई क्या है, और बदले की कोई निशानी नहीं होती 🤔। लेकिन इस मामले से हमें लगता है कि जांच हुई, लेकिन फिर भी आरोपियों को बरी कर दिया गया। यह तो बहुत परेशान करने वाला है। मुझे लगता है कि अदालत ने दोनों व्यक्तियों को सावधानी से सुना और उन्हें गंभीर आरोप लगने नहीं दिया। लेकिन फिर भी, मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि ये कैसे हुआ।
 
ऐसा लगता है कि अदालत ने न्याय का संकेत दिया है 🙏। लेकिन यह सवाल उठता है कि हत्या करने वाले लोगों को क्यों बरी कर दिया गया? क्या उनके पास इतने मजबूत सबूत थे जो उन्हें बरी कर देते? यह बात तो हमेशा से होती आ रही है कि जांच में कमजोरियाँ होने पर आरोपियों को बरी कर दिया जाता है। लेकिन अदालत ने भी अपने फैसले को स्पष्ट करने की जरूरत है, ताकि हम समझ सकें कि क्या सच्चाई पीछे छुपी हुई है 🤔
 
अरे, ये तो बहुत बड़ी बात है! मुझे लगता है कि अदालत ने सही फैसला दिया है, लेकिन मेरे लिए यह एक और तरीके से देखना ज्यादा अच्छा लगेगा। अगर अदालत ने इतनी जोर दिखाया, तो मुझे लगता है कि आरोपियों को फिर से चलाने की जरूरत नहीं थी। लेकिन दिल्ली में और ब्रेन्स में तो इतनी ज्यादा दबाव होता है, कि कभी-कभी सच भी गलत हो सकता है।
 
ये तो बहुत अजीब है... अदालत में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया गया, लेकिन यह कैसे हो सकता है? उन्होंने 17 लोगों की हत्या करने का आरोप था, अब तो यह राज़ समझ में नहीं आता। क्या अदालत के पास यह साबित करने की शक्ति है कि ये दोनों अच्छे आदमी थे? और फिर भी उन्हें बरी कर दिया गया। यह तो एक बड़ा सवाल है।
 
मैंने बहुत समय से प्लेटफ़ॉर्म पर ही बैठा रहता हूँ, और मुझे लगता है कि ऐसे मामलों की जांच करने के लिए अदालतें तयार नहीं हैं। सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर पर हत्या का आरोप लगाया गया, लेकिन अब उनको बरी कर दिया गया है। मुझे लगता है कि अदालतों को एक साथ 17 लोगों की हत्या करने वाले सभी को पकड़ने में समय लगना चाहिए, न कि एक-एक करके। प्लेटफ़ॉर्म पर हमेशा ऐसे मामले होते रहते हैं जहां अदालतों को थोड़ा और समय मिलता है।
 
भाई, यह तो बहुत बड़ा बाजार खोलकर पैसे कमाने का मौका है! सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को अदालत ने बरी कर दिया, लेकिन ये दोनों आदमी अभी भी 17 लोगों की हत्या करने के आरोप में पकड़े गए थे। तो फिर अदालत ने उन्हें बरी कर दिया? यह तो बहुत ही अजीब है। मुझे लगता है कि अदालत की बात सुनकर लोगों को भी धूम मच गई है। मैं नहीं समझ पाया कि यह तो कैसे हुआ।
 
कोई भी अदालत में जाकर बिना साबित करने वाले लोगों को निर्लज्जता के आरोप में बरी कर देना एक बड़ा मुद्दा है। शायद ये दोनों व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए ऐसा किया था, और अब अदालत ने उनकी बात सुनी है... पर दिल्ली में 17 लोगों की हत्या हो रही है, तो फिर अदालत को पता नहीं चला कि ये व्यक्ति अपने अपराध से बचने के लिए ऐसा क्यों कर रहे थे।
 
रिलीज़ होने के बाद ये दो मामले खुलकर सामने आईं, लेकिन मुझे लगता है कि अदालत ने सही निर्णय लिया। ये मामला तो एक गहरी मुद्दा है, लोगों को जान जानकर बैठना चाहिए। ऐसे में अदालत का निर्णय सुनने वाले लोगों को फैसले को स्वीकार करना चाहिए, हमेशा उन लोगों को नहीं देखना चाहिए जो हमारी समाज में ज्यादातर मामले होते हैं।
 
मुझे लगता है कि यह सब एक विशाल मोहल्ला हुआका हुआ है। पूरी जांच हो चुकी है, लेकिन अदालत ने फैसला दिया है। कौन सा पक्ष सही है, इसका मतलब समझने की जरूरत नहीं है। हमें एक-दूसरे की बातों में शांति और समझ की बात सुननी चाहिए। जिस जानवर ने हत्या कर दी, उसकी जिम्मेदारी वही लेनी चाहिए, लेकिन सबको बरी होने की उम्मीद करनी नहीं चाहिए। यह एक बड़ा मुद्दा है और हमें इस पर गहराई से सोचना चाहिए।
 
🤔 यह तो बहुत ही जटिल मामला है । सुरेन्द्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर पर हत्यारों का आरोप लगाया गया था, लेकिन अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। इसके पीछे कौन सी बातें हो सकती हैं ? क्या वास्तव में उनके खिलाफ सबूत नहीं मिल पाए ? या फिर कुछ और जो हमें पता नहीं है। 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि इस मामले में कुछ गलतफहमी या गलत जानकारी की वजह से न्यायिक प्रक्रिया की कमजोरी आ गई है। हमें यह समझने की जरूरत है कि कैसे अदालतें ऐसे मामलों में निर्णय लेती हैं और फिर उनकी प्रतिष्ठा से कैसे बचती हैं। इस तरह के मामलों में हमें सावधान रहना चाहिए। 👀
 
मुझे ये खबर बिल्कुल सही नहीं लगती, ज्यादातर लोगों को यह भयानक अपराध लगने वाले दो व्यक्तियों ने कुछ अच्छा किया है? किसी को फांसी देने से और क्या मिलेगा? ये सरकार की हर बारी होती है, पहले यह बरी कर देती है तो फिर फांसी देती। लोगों की जान जोखिम में डालने की वजह से क्या उन्हें इस तरह से बरी कर दिया जाता है? यह एक बड़ा सवाल है, और मुझे इसका जवाब नहीं मिल पाया।
 
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