जम्मू के डोडा में रहने वाली अनीता राज ने कहा, 'आतंकवादी किसी भी तरह से जम्मू के इलाकों में आते हैं तो हम उनका अंजाम देने के लिए तैयार हैं। हमें अपने गांव की सुरक्षा पर जाने का विश्वास है और आतंकियों का सामना करने के लिए हम तैयार हैं।
इस मौके पर अनीता राज ने खुलकर बताया, 'हमने पहली बार ऑटोमैटिक राइफल चलानी सीखी है। अब वे ट्रेनिंग में आकर बहुत खुश हैं और कहती हैं, ‘अब सर्दियां है तो आतंकी ज्यादा एक्टिव रहते हैं। वो इसका फायदा लेकर हमारे इलाकों में घुसने का प्रयास करते हैं।’
इसी संदर्भ में, जम्मू-कश्मीर के गृह मंत्रालय ने 14 अगस्त 2022 को अपने आदेश के तहत विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) को लेकर नया दिशा-निर्देश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार VDG को अपनी इच्छा के आधार पर छोटे-छोटे ग्रुप बनाने हैं, जिसमें 15 से ज्यादा लोग नहीं होंगे। इनके पास हथियार का लाइसेंस होना जरूरी है।
इन ग्रुप का नेता रिटायर्ड आर्मी मैन या जम्मू-कश्मीर पुलिस का पूर्व कर्मी होना चाहिए। ग्रुप में ऐसे युवा होने चाहिए, जो अपनी खुशी से हथियारों की ट्रेनिंग लें।
इसीलिए जम्मू-कश्मीर की सरकार ने VDG पर नजर रखकर उसे सुरक्षित बनाने का प्रयास किया है, जिससे वहां के गांवों में आतंकी हमलों को रोका जा सके।
इसी संदर्भ में, जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP एसपी वैद ने बताया, 'जम्मू और कश्मीर की भौगोलिक स्थिति में काफी अंतर है। कश्मीर में दूर-दराज के दो से तीन गांव भी एक साथ सटे हुए हैं। वहीं जम्मू में डोडा, किश्तवाड़, रामबन, पुंछ, राजौरी और रियासी समेत कई इलाकों के हालात काफी अलग हैं।
यहां के गांवों में जाने के लिए एक या दो ही सड़क है। इसके बाद एक घर किसी एक पहाड़ी पर है तो दूसरा घर उससे काफी दूर दूसरी पहाड़ी पर है। इन घरों तक जाने के लिए सिर्फ पैदल रास्ते हैं। यहां आर्मी या फोर्सेस तुरंत नहीं पहुंच सकतीं। कोई घटना होने पर सूचना मिलने के बाद भी सेना को पहुंचने में कई बार 4-5 घंटे लग जाते थे। तब तक आतंकी घटना को अंजाम देकर फरार हो जाते थे।
इसीलिए जम्मू-कश्मीर की सरकार ने विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे वहां के गांवों में आतंकी हमलों को रोका जा सके।
इसीलिए पूर्व DGP एसपी वैद ने कहा, '1990 के दशक में कश्मीर की तरह जम्मू में भी नरसंहार होने लगा था। उस वक्त पाकिस्तान चाहता था कि जिस तरह कश्मीर से हिंदुओं को भगाया गया, वहीं जम्मू के पहाड़ी इलाकों में भी जुल्म हो और हिंदुओं को भगा दिया जाए।
इसीलिए VDG बनाने की जरूरत पड़ी, ताकि जम्मू के गांवों में आतंकी हमलों को रोका जा सके।
इसीलिए पूर्व DGP एसपी वैद ने कहा, 'जम्मू के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोग रात-रात भर आतंकियों से लड़े हैं। वे तब तक लड़ते, जब तक उनके पास से गोला-बारूद खत्म नहीं हो गए। बहुत सारे लोगों ने इसके लिए अपनी जान भी दी।
इसीलिए VDG का एक महत्वपूर्ण योगदान जम्मू कश्मीर में आतंकवादी हमलों को रोकने में है, और गांवों में सुरक्षित बनाए रखने में।
इस मौके पर अनीता राज ने खुलकर बताया, 'हमने पहली बार ऑटोमैटिक राइफल चलानी सीखी है। अब वे ट्रेनिंग में आकर बहुत खुश हैं और कहती हैं, ‘अब सर्दियां है तो आतंकी ज्यादा एक्टिव रहते हैं। वो इसका फायदा लेकर हमारे इलाकों में घुसने का प्रयास करते हैं।’
इसी संदर्भ में, जम्मू-कश्मीर के गृह मंत्रालय ने 14 अगस्त 2022 को अपने आदेश के तहत विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) को लेकर नया दिशा-निर्देश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार VDG को अपनी इच्छा के आधार पर छोटे-छोटे ग्रुप बनाने हैं, जिसमें 15 से ज्यादा लोग नहीं होंगे। इनके पास हथियार का लाइसेंस होना जरूरी है।
इन ग्रुप का नेता रिटायर्ड आर्मी मैन या जम्मू-कश्मीर पुलिस का पूर्व कर्मी होना चाहिए। ग्रुप में ऐसे युवा होने चाहिए, जो अपनी खुशी से हथियारों की ट्रेनिंग लें।
इसीलिए जम्मू-कश्मीर की सरकार ने VDG पर नजर रखकर उसे सुरक्षित बनाने का प्रयास किया है, जिससे वहां के गांवों में आतंकी हमलों को रोका जा सके।
इसी संदर्भ में, जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP एसपी वैद ने बताया, 'जम्मू और कश्मीर की भौगोलिक स्थिति में काफी अंतर है। कश्मीर में दूर-दराज के दो से तीन गांव भी एक साथ सटे हुए हैं। वहीं जम्मू में डोडा, किश्तवाड़, रामबन, पुंछ, राजौरी और रियासी समेत कई इलाकों के हालात काफी अलग हैं।
यहां के गांवों में जाने के लिए एक या दो ही सड़क है। इसके बाद एक घर किसी एक पहाड़ी पर है तो दूसरा घर उससे काफी दूर दूसरी पहाड़ी पर है। इन घरों तक जाने के लिए सिर्फ पैदल रास्ते हैं। यहां आर्मी या फोर्सेस तुरंत नहीं पहुंच सकतीं। कोई घटना होने पर सूचना मिलने के बाद भी सेना को पहुंचने में कई बार 4-5 घंटे लग जाते थे। तब तक आतंकी घटना को अंजाम देकर फरार हो जाते थे।
इसीलिए जम्मू-कश्मीर की सरकार ने विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे वहां के गांवों में आतंकी हमलों को रोका जा सके।
इसीलिए पूर्व DGP एसपी वैद ने कहा, '1990 के दशक में कश्मीर की तरह जम्मू में भी नरसंहार होने लगा था। उस वक्त पाकिस्तान चाहता था कि जिस तरह कश्मीर से हिंदुओं को भगाया गया, वहीं जम्मू के पहाड़ी इलाकों में भी जुल्म हो और हिंदुओं को भगा दिया जाए।
इसीलिए VDG बनाने की जरूरत पड़ी, ताकि जम्मू के गांवों में आतंकी हमलों को रोका जा सके।
इसीलिए पूर्व DGP एसपी वैद ने कहा, 'जम्मू के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोग रात-रात भर आतंकियों से लड़े हैं। वे तब तक लड़ते, जब तक उनके पास से गोला-बारूद खत्म नहीं हो गए। बहुत सारे लोगों ने इसके लिए अपनी जान भी दी।
इसीलिए VDG का एक महत्वपूर्ण योगदान जम्मू कश्मीर में आतंकवादी हमलों को रोकने में है, और गांवों में सुरक्षित बनाए रखने में।