पानीपत स्थित कोर्ट परिसर में मोबाइल नेटवर्क में आ रही दिक्कतों से परेशान वकीलों ने खुद कोर्ट में केस दायर कर दिया है। टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो के खिलाफ लोक अदालत में दायर याचिका में कंपनी की मैनेजमेंट को भी पार्टी बनाया है।
वकीलों ने बताया कि कोर्ट परिसर, विशेष रूप से वकीलों के चेंबर, दो मुख्य कोर्ट बिल्डिंग और टाइपिस्ट कॉम्प्लेक्स में जियो का नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। इसके अलावा, वकीलों ने बताया कि ऑनलाइन भुगतान में आ रही समस्याओं के चलते अदालती कार्यवाही में अनावश्यक देरी हो रही है और वादकारियों के बीच बहस और तनाव बढ़ रहा है।
वकीलों ने यह भी बताया कि एक बार किसी मामले में क्लाइंट ने फेसबुक से कुछ सबूत दिखाने थे, लेकिन नेटवर्क की दिक्कतों के चलते वे उस समय वह नहीं देख सके। इसके बाद उन्होंने मन बना लिया था कि वे अदालत का रुख करेंगे।
इस मामले में रिलायंस जियो के हेड ऑफिस (नवी मुंबई) को संबोधित करते हुए कंपनी मैनेजमेंट को प्रतिवादी बनाया गया है। इसके अलावा, पानीपत के जीटी रोड स्थित ब्रांच मैनेजर को भी इसमें पक्षकार बनाया गया है।
पानीपत कोर्ट परिसर में रोष का माहौल है, जहां वकीलों ने इस पहल का समर्थन किया है। इसके अलावा, यह मामला न केवल पानीपत बल्कि देश भर के उन उपभोक्ताओं के लिए एक मिसाल बन सकता है जो टेलीकॉम कंपनियों की खराब सेवाओं से त्रस्त हैं, लेकिन कानूनी रास्ता अपनाने से हिचकिचाते हैं।
वकीलों ने बताया कि कोर्ट परिसर, विशेष रूप से वकीलों के चेंबर, दो मुख्य कोर्ट बिल्डिंग और टाइपिस्ट कॉम्प्लेक्स में जियो का नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। इसके अलावा, वकीलों ने बताया कि ऑनलाइन भुगतान में आ रही समस्याओं के चलते अदालती कार्यवाही में अनावश्यक देरी हो रही है और वादकारियों के बीच बहस और तनाव बढ़ रहा है।
वकीलों ने यह भी बताया कि एक बार किसी मामले में क्लाइंट ने फेसबुक से कुछ सबूत दिखाने थे, लेकिन नेटवर्क की दिक्कतों के चलते वे उस समय वह नहीं देख सके। इसके बाद उन्होंने मन बना लिया था कि वे अदालत का रुख करेंगे।
इस मामले में रिलायंस जियो के हेड ऑफिस (नवी मुंबई) को संबोधित करते हुए कंपनी मैनेजमेंट को प्रतिवादी बनाया गया है। इसके अलावा, पानीपत के जीटी रोड स्थित ब्रांच मैनेजर को भी इसमें पक्षकार बनाया गया है।
पानीपत कोर्ट परिसर में रोष का माहौल है, जहां वकीलों ने इस पहल का समर्थन किया है। इसके अलावा, यह मामला न केवल पानीपत बल्कि देश भर के उन उपभोक्ताओं के लिए एक मिसाल बन सकता है जो टेलीकॉम कंपनियों की खराब सेवाओं से त्रस्त हैं, लेकिन कानूनी रास्ता अपनाने से हिचकिचाते हैं।