पेरेंटिंग– बेटी का स्कूल में एक लड़के पर क्रश है: क्या 16 साल की उम्र में ये ठीक है, बच्चों से रिलेशनशिप पर कैसे बात करें

अपनी बेटी को रिलेशनशिप के बारे में बात करने से पहले, उसकी ताकत और कमजोरियों को समझना बहुत जरूरी है। यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि वह किस उम्र में ऐसे विचारों को अपनाने लगी है, जिसके बाद आप उसके साथ बातचीत शुरू कर सकते हैं।

रिलेशनशिप एक जिम्मेदारी है। इसमें दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर निर्भर होती हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप उसको सिखाएं कि रिश्ता में जिम्मेदारी और समझौता कैसे आया।

याद रखें, बच्चों को पेरेंट्स से खुलकर बात करना चाहिए, इसलिए उन्हें हमेशा अपनी बात कराने की स्वतंत्रता देनी चाहिए।
 
रिलेशनशिप पर बात करते समय मुझे लगता है कि लोग बहुत जल्दी ही ऐसे निर्णय लेते हैं और फिर तो बहुत परेशानी होती है। मेरी बेटी को रिश्ते के बारे में बात करने से पहले हमें उसकी जरूरतों और लक्ष्यों को समझना चाहिए। मुझे लगता है कि बच्चों को अपने दिल की बात कहानी चाहिए, लेकिन फिर भी उन्हें अपने साथियों को अच्छे विचारों से भरना चाहिए 🤗
 
रिलेशनशिप के बारे में बात करना बच्चों के लिए बहुत जरूरी, लेकिन इसमें देखो उनकी ताकत और कमजोरी क्या है, तभी उन्हें सही सलाह देनी चाहिए। मेरी बेटी की उम्र 16 है और अब वह रिलेशनशिप के बारे में सोच रही है, लेकिन अभी तक मैं उसके साथ बात नहीं कर सका क्योंकि वह बहुत परेशान हो जाती है।
 
मुझे लगता है कि अब कोई बच्चा 18 साल का नहीं होता है, तो वह रिलेशनशिप में जाने लगे। मैंने अपनी बेटी को भी ऐसा ही सिखाया था, लेकिन जब उसने मुझसे कहा कि वह माइक्रोसॉफ्ट पर अपनी प्रोफ़ाइल बनाने की योजना बना रही है, तो मैंने अच्छी तरह से नहीं समझा। मैं उसे बताता हूं कि उसकी उम्र में यह बहुत ही जिम्मेदारी है 🤔
 
मुझे लगता है कि आजकल के युवाओं को रिलेशनशिप के बारे में पूरी तरह से शिक्षित नहीं किया जाता, तो वे अक्सर गलतफहमी में रहते हैं 🤔। लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपने बच्चों को रिलेशनशिप के बारे में सिखना चाहिए, न कि उनको दूसरों को समझाना चाहिए।

याद रखना चाहिए कि रिलेशनशिप में दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर निर्भर होती हैं, इसलिए हमें अपने बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि जिम्मेदारी और समझौता कैसे आया। लेकिन इससे पहले, उन्हें अपनी ताकत और कमजोरियों को समझना चाहिए, और हमें उनकी उम्र को ध्यान में रखते हुए बातचीत करनी चाहिए।

मुझे लगता है कि हमें अपने बच्चों को खुलकर सिखाना चाहिए, ताकि वे जिंदगी में सही निर्णय ले सकें।
 
अगर मैं अपनी बहन की बेटी को रिलेशनशिप के बारे में बताऊं तो मैं कहूंगी कि उसकी उम्र पहले ही रिलेशनशिप के बारे में सोच रही होगी। लेकिन हमें उसे समझाना होगा कि रिलेशनशिप में कितना महत्व है, और इसके लिए कैसे तैयार होना है। अगर वह अपनी भावनाओं और जिंदगी की योजनाओं को साझा करे, तो हम उसे सही रास्ते पर चलने में मदद कर पाएंगे।
 
रिलेशनशिप के बारे में बात करने से पहले बेटी को समझना बहुत जरूरी है... जैसे वे कैसे सोचती हैं और क्या उम्र में उनकी सोच बदलने लगी है।

तो हम उनसे खुलकर बातचीत करनी चाहिए, लेकिन धीरे-धीरे करके। पहले उनकी ताकत- कमजोरियों को समझना जरूरी है, फिर सिखाना कि रिलेशनशिप में जिम्मेदारी और समझौता कैसे आया।

बच्चों को हमेशा अपनी बात कराने की स्वतंत्रता देनी चाहिए, लेकिन यह भी जरूर है कि हम उन्हें सही रास्ते पर रखने में मदद करें।
 
रिलेशनशिप के बारे में बेटी से बात करना तो बहुत मुश्किल है... 🤔 कभी सोचता था कि एक दिन वह ऐसी लड़की बन जाएगी जिसकी खुद को समझना मुश्किल है। लेकिन जब भी मैं उसके फोन पर होता हूं तो उसे रिलेशनशिप के बारे में बात करनी पड़ती है... 📱 कभी-कभी लगता है कि उसकी उम्र कितनी तेज़ चल रही है। और जब भी वह सोचती है कि रिश्ता में जिम्मेदारी बहुत जरूरी है, तो मुझे खुद को याद रखना पड़ता है कि उसकी बात सुननी है... 💬 मगर अगर मैं सच कहूँ तो वह हमेशा अपनी बात नहीं सुनती।
 
मैंने हमेशा सोचा था कि लोगों को अपनी बेटियों को रिलेशनशिप में प्रवेश करने से पहले उनकी खुदकुशी की तैयारी नहीं करनी चाहिए, जैसे कि लोग यह कह रहे हैं। क्या हमें उन्हें एक्सप्लिकिटली बताना चाहिए कि वे कब से अपने शरीर पर नियंत्रण खोने लगे हैं? और फिर भी, मुझे लगता है कि हमें उन्हें यह समझने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए कि रिलेशनशिप एक जिम्मेदारी है, लेकिन कभी-कभी तो यह स्वाभाविक और आनंदमयी भी हो सकती है।
 
मुझे लगता है कि लड़कियों को अपने प्यार में पड़ने के बाद कैसे जिम्मेदारी समझनी है, यह बहुत जरूरी है। पिता-माता को उनकी समझ और सहानुभूति के साथ बातचीत करनी चाहिए, ताकि वे अपनी बेटियों को रिश्ते में जिम्मेदारी के महत्व को समझाएं। और सबसे जरूरी, पिता-माता को खुलकर अपनी बात कहानी स्वतंत्रता देनी चाहिए, ताकि वे खुद कैसे महसूस करें और अपने रिश्ते में क्या जिम्मेदारी समझें। ❤️
 
मुझे लगता है कि इस दुनिया में सबकुछ तेज़ हो गया है, और बच्चों को भी तेज़ करना पड़ता है। लेकिन प्रेम और समझदारी पर ध्यान देना नहीं बंद करना चाहिए। मेरे अनुभव से मुझे लगता है कि बच्चों को अपने रिश्ते में जिम्मेदारी और समझौता सिखाने के लिए समय और प्रेम की जरूरत है।

मैंने देखा है कि जब हम उनके साथ खुलकर बात करते हैं, तो वे जल्दी से समझ जाते हैं और अपने रिश्तों को मजबूत बनाने में सक्षम होते हैं। यह जरूरी है कि हम उन्हें ऐसा महसूस कराएं, जैसे हम उनके लिए सबसे बड़े प्रियजन हैं।
 
रिलेशनशिप तो एक जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार ने अभी भी बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन के बारे में कुछ नहीं कहा है। यह बहुत अजीब है कि हमारे देश में बच्चों को रिलेशनशिप के बारे में बात करने की स्वतंत्रता देने के लिए सरकार को तैयार नहीं है। हमें लगता है कि सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए और बच्चों को सेक्स एजुकेशन के बारे में अच्छी जानकारी देनी चाहिए।
 
रिलेशनशिप की बात करने से पहले, मुझे लगता है कि परिवार और दोस्तों को अपनी बेटी के विचारों को समझने की जरूरत है, न कि उसे बताने की। क्या हमें पता है कि वह वास्तव में क्या चाहती है?
 
मुझे लगता है कि ये बहुत जरूरी बात है, ताकत और कमजोरियों को समझने से पहले रिलेशनशिप के बारे में बात करना बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन फिर भी, यह एक कठिन बात है, खासकर जब बच्चों की उम्र और विचारों में परिवर्तन होता है। मुझे लगता है कि पैरेंट्स को अपने बच्चों से खुलकर बात करने की आजादत देनी चाहिए, ताकि वे सीख सकें और फिर उनकी मदद कर सकें।
 
अगर तुम्हारी बेटी रिलेशनशिप में है तो फिर पूछो कि वह क्या चाहती है, उसकी जरूरतें क्या हैं, और वह तुमसे कहाँ से मदद लेगी। सबसे ज्यादा ताकतदार उस बेटी का नहीं होता जो दूसरों को सहारा देती है, बल्कि वह जो अपने आप में खुद को मजबूत बनाती है। और यह एक बहुत ही जरूरी बात है कि तुम्हारी बेटी को पता चले कि रिलेशनशिप में दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर निर्भर होती हैं। 🤗
 
अरे यार, रिलेशनशिप के बारे में बात करने से पहले तो अपनी बेटी की ताकत- कमजोरियों को समझना ही ज़रूरी है फिर से उस उम्र के बारे में देख लेना चाहिए जब वह रिलेशनशिप के बारे में सोचने लगेगी।

मैंने अपनी बच्चियों को रिलेशनशिप के बारे में बताया है तो उन्हें यही समझाना होगा कि यह जिम्मेदारी है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर निर्भर होती हैं इसलिए जिम्मेदारी और समझौता कैसे आये।

पेरेंट्स को अपनी बेटियों से खुलकर बात करनी चाहिए और उन्हें हमेशा अपनी बात कराने की स्वतंत्रता देनी चाहिए ताकि वो जान सकें कि रिलेशनशिप में कैसे आये। फिर लोगों की जिंदगी आसान होती है
 
रिलेशनशिप से जुड़ी बातें होने पर हमें अपनी बेटी की ताकत और कमजोरियों को समझना चाहिए, भले ही वह 18 साल की हो। यही नहीं रिलेशनशिप एक जिम्मेदारी है, इसे लेकर हमें दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर निर्भर होती हैं, इसलिए हमें उसको समझौता और जिम्मेदारी के बारे में सिखाना चाहिए।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें अपनी बेटी को पेरेंट्स से खुलकर बात करने देना, न तो हमें उसके फैसलों पर रोकना चाहिए और न ही हमें उसकी ज़िंदगी में आने वाली समस्याओं को लेकर अनिश्चित रहना चाहिए।
 
🤔 रिलेशनशिप की बात करते समय मैंने एक बात है जो मुझे विशेष रूप से परेशान करती है कि लोग खुद को रिश्ता का 'सही' तरीका समझ लेते हैं और फिर दूसरों को भी उसकी तरह ही सिखाने लगते हैं। यह कभी भी सही नहीं है। हर लोग की अलग-अलग जिंदगी होती है, इसलिए हमें अपने-अपने बच्चों को उनकी ताकत और कमजोरियों को समझना चाहिए, न कि एक ही 'सही' तरीके से।

रिलेशनशिप में जिम्मेदारी बहुत जरूरी है, लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि हम अपने-अपने बच्चों को समझाएं कि जिंदगी में हर चीज़ एक साथ नहीं चलती, इसलिए हमें कई बार खुद को फिर से सोचना पड़ता है।
 
रिलेशनशिप पर बात करने की तैयारी करना बहुत जरूरी, लेकिन ऐसे में तो यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि खुद कैसे तैयार हैं। अपनी बेटी की उम्र और उसके दिमाग को समझना सबसे ज्यादा जरूरी।

तो जब वह स्कूली उम्र में पलपलता करने लगे, तो हम उसे रिलेशनशिप के बारे में बात करना शुरू करें। लेकिन पहले उसकी मजबूत और कमजोरियों को समझना होगा।

मुझे लगता है कि मेरे पास ये सब जानकारी नहीं थी, जब मैं भी अपनी पत्नी से रिलेशनशिप पर बात करनी शुरू की। अब मुझे यह सब समझ आ गया है, और मैं इसे हर किसी को सिखाने का प्रयास करूंगा।

मेरा विचार है कि बच्चों को खुलकर अपने माता-पिता से बात करने की स्वतंत्रता देनी चाहिए। इसलिए उन्हें रिलेशनशिप पर बात करते समय हमेशा जिम्मेदारी और समझौता को सिखाना होगा।
 
रिलेशनशिप के बारे में बात करने से पहले अपनी बेटी को समझना बहुत जरूरी है। वह तभी समझ पाएगी कि जिम्मेदारी और समझौता कैसे आया। मैंने भी अपने दोस्त की बेटी को ऐसा ही सिखाया था, लेकिन हमेशा सोचता रहता था कि वह सही चीज कह रही है या नहीं। अब मैं समझ गया हूं कि बच्चों को अपनी भावनाओं और विचारों को साझा करने की आजादी देनी चाहिए, ताकि वे अपने रिश्तों को मजबूत बना सकें।
 
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