पेरेंटिंग– बेटी का स्कूल में एक लड़के पर क्रश है: क्या 16 साल की उम्र में ये ठीक है, बच्चों से रिलेशनशिप पर कैसे बात करें

टीनएज में रिलेशनशिप के बारे में बातचीत करना एक जटिल विषय है। बच्चों में अक्सर गलत फैसले लेने की संभावना होती है और डर दिखाकर उन्हें समझाना नहीं चाहिए।
 
🤔 इस समय टीनेज में रिलेशनशिप्स के बारे में बात करना बहुत जटिल हो गया है। मुझे लगता है कि बच्चों की उम्र में गलत फैसले लेने की संभावना भी अधिक है, और उन्हें समझाने के लिए डर दिखाकर नहीं सिर्फ शिक्षा देनी चाहिए। उनको ऐसी स्थितियों में पूर्ण जिम्मेदारी सिखानी चाहिए, जहां वे अपने फैसलों को समझते हैं। 📚
अब कोई भी टीनेजियर रिलेशनशिप्स में अच्छा या ख़ारा नहीं फ़ैसला लेने का स्वास्थ्य मनविज्ञान का साथ देता है, और इसे एक जिम्मेदारी समझनी चाहिए, नि:स्वार्थ प्रेम।
 
वो टीनेज में रिश्तों की बात बहुत जटिल है... बच्चे अक्सर अपने प्यार की वजह से गलत फैसले लेते हैं और उन्हें समझाना भी आसान नहीं है। उनके दिमाग में रोमांस ही सब कुछ होता है 🤔

मुझे लगता है कि पarents अपने बच्चों से बात करने के लिए सही तरीके से नहीं जानते हैं। वो उन्हें अक्सर डर दिखाकर या अपने हिसाब से सलाह देते हैं, लेकिन यह उनके लिए अच्छा नहीं है। बच्चों को खुद को समझने और अपने फैसले करने की स्वतंत्रता देना चाहिए।

वो टीनेज में रिश्तों की बात करने वाले लोग कुछ अलग तरीके से तैयार होते हैं... उन्हें अपने प्यार की वजह से कभी-कभी गलत फैसले लेना पड़ता है, लेकिन वो सब कुछ एक्सप्रेस करते हैं और खुद को समझने की कोशिश करते हैं।
 
अगर तीनो-आठवीं क्लास में बेटियों से पूछना है कि वे अपने शादी जैसे संबंध बनाना चाहती हैं या नहीं, तो मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा सवाल है! बच्चों को ऐसे बातचीत करने से पहले उनके दिमाग को ठीक से समझने की जरूरत है। उनकी इच्छाओं और भावनाओं का सम्मान करना ज़रूरी है, लेकिन उन्हें गलत रास्ते पर चलने से रोकना भी हमारा कर्तव्य है।

मुझे लगता है कि माता-पिता और गुरु-गुरुमाता बच्चों को सही दिशा में लाने के लिए एक साथ मिलकर बातचीत करनी चाहिए। उन्हें समझाना चाहिए कि जीवन में कई सारे फैसले लेने होते हैं और उनमें से कुछ बहुत बड़े भी हो सकते हैं। इसलिए, बच्चों को सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करना ज़रूरी है।
 
तीन साल की उम्र में रिलेशनशिप बातचीत करना थोड़ा ज़्यादा हो सकता है। बच्चे अभी अपनी पहचान बना रहे हैं और इस मामले में उन्हें समझाना चाहिए कि स्वाभिमान बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन, यह तीन-चार साल की उम्र में जरूरी नहीं है कि वे रिलेशनशिप के बारे में पूरी जानकारी लें। बच्चों को स्वास्थ्य और शिक्षा पर अधिक ध्यान देना चाहिए, खासकर जब उन्हें बड़े-बड़े निर्णय लेने की उम्र आ जाए।
 
बेटियों को उनके रिश्तों के बारे में सोचने का समय मिलना तो अच्छी बात है, लेकिन उस समय को सही ढंग से समझाना भी बहुत जरूरी है। बच्चे अपने प्यार की गहराई में डूब जाते हैं और सबकुछ सही लगता है। लेकिन वास्तविकता एक अलग ही बात है। हमें उन्हें समझाना चाहिए कि रिश्तों में गलतियाँ हो सकती हैं और उनके साथ रहने के लिए तैयार रहना भी जरूरी है।

मुझे लगता है कि बच्चों को अपने रिश्तों के बारे में सोचने का समय देने से पहले, उन्हें यह समझाना चाहिए कि उनके जीवन में क्या-क्या महत्वपूर्ण हैं और किस तरह के रिश्ते उन्हें सही रास्ते पर ले जा सकते हैं। हमें उन्हें सिखाना चाहिए कि सच्चाई और प्यार केवल एक ही मायने में होते हैं।
 
तीनदशियों में रिश्तों की बात करना बहुत जटिल हो गया है। बच्चे कई गलत फैसले लेते हैं और हमें उन्हें समझाने की जरूरत नहीं है, बल्कि उनके मन में प्यार और जिम्मेदारी की बात करनी चाहिए। तीनदशियों में रिश्ते बनाना सीखने की एक बहुत बड़ी उम्र हो गई है और हमें उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन करना चाहिए।

लेकिन अगर बच्चे अपने रिश्तों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं तो शायद वे पहले से ही बहुत ज्यादा गंभीर होने लगे हैं। फिर हमें उनके मन में एक संदेश देना चाहिए कि रिश्तों में समझदारी और सहयोग बहुत जरूरी है।
 
तीनआज में रिश्तों को टकराती बातें करना कठिन है। बच्चों में गलत निर्णय लेने की संभावना होती है और डराकर समझाना नहीं चाहिए। परिवार को खुलकर बात करनी चाहिए, उन्हें सुधी समझाना चाहिए 🤔
 
तो अब युवाओं की रिश्तों की बात करना एक जटिल मुद्दा बन गया है, लगता है 🤔। बच्चे तो ऐसे होते हैं कि जब सोचें और फिर कर देते हैं। उन्हें समझाने के लिए डर का सहारा लेना जरूरी नहीं है, इसके बजाय उन्हें अपने जीवन के बारे में सोचने की प्रेरणा देनी चाहिए। आज के युवाओं के लिए स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी है, इसलिए उन्हें अपने फैसलों के परिणामों को समझने का मौका देना चाहिए, ताकि वे बेहतर निर्णय ले सकें।
 
पर, तीनेज में रिश्तों की बात करना थोड़ा जटिल है। बच्चों को ये समझना होगा कि स्वतंत्रता और निजता बहुत जरूरी है, लेकिन उन्हें सही सलाह देना भी चाहिए। मुझे लगता है कि पारिवारिक मूल्यों और शिक्षा पर ध्यान देने से युवाओं को सही रिश्तों में आने में मदद मिल सकती है। लेकिन, तीनेज में जिम्मेदारी भी होती है, वे अपने फैसले का इंतज़ार नहीं कर सकते। सोशल मीडिया पर भी रिश्तों के बारे में बहुत सी गलत धारणाएं फैल रही हैं, इसलिए इसे समझने की जरूरत है।
 
मैंने अपने बेटे के रिलेशनशिप से जुड़े एक बड़े मुद्दे पर गहरी चिंता की है। उनकी उम्र अभी भी बचपन की है, लेकिन वे जैसे ही उन्हें प्रेम में पड़ने लगे, तो बहुत सारी गलतियां कर रहे थे। उनके दोस्तों ने उन्हें ऐसा करने के लिए मनाने की कोशिश नहीं की, बल्कि हमने उनसे यह पूछा कि वे पहले सोचते हैं या फिर बिना सोचे-समझे ही ऐसा कर रहे हैं। मुझे लगता है कि अगर उनके माता-पिता और दोस्त उनको सही रास्ते पर चलने में मदद करते, तो यह सभी के लिए अच्छा होता।
 
टीनेज में रिलेशनशिप की बातचीत करना बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है। बच्चों में जब वे सोचते हैं तो वे अपने दिल की बात नहीं समझ पाते। मुझे लगता है कि हमें उन्हें यह समझाना चाहिए कि रिलेशनशिप में खुशियाँ और दर्द दोनों आते हैं, लेकिन अगर वे सही फैसला लें, तो वे जीवन में बहुत सारी खुशियाँ पाएंगे।
 
तीनआयस में रिश्ते के बारे में बात करना बहुत मुश्किल है। मैंने अपने बच्चों को ऐसी बातें नहीं सुनाई जैसे वे तुरंत एक रिश्ता बनाने लगें। यह एक बड़ा फैसला है और उन्हें समझाने के लिए डर दिखाकर नहीं रखना चाहिए।

मेरी राय में जब बच्चे बड़े होते जा रहे हैं तब ही उन्हें रिश्तों के बारे में समझाया जा सकता है। प्रोफेशनल्स या फैमिली को कुछ विशेष सलाह देनी चाहिए कि बच्चों को समझाने के लिए सही तरीका कैसे अपनाया जाए। अगर उन्हें खुलकर बात करने का मौका मिलता है तो फिर वही सबसे अच्छा।
 
तीनाशील में रिश्ते के बारे में बातचीत करना बहुत जटिल हो गया है। बच्चों में गलत फैसले लेने की संभावना बहुत अधिक होती है और उन्हें समझाने के लिए डर दिखाकर नहीं चाहिए। इसके बजाय, उन्हें रिश्तों के महत्व और निर्णय लेने से पहले पensive करने का मौका देना चाहिए। अपने बच्चों को समझाएं कि गलत फैसले से कैसे निपटा जा सकता है और उन्हें सही रास्ते पर ले जाने में मदद करें।
 
😂👀 टीनेज में रिलेशनशिप बातचीत करना तो कोई आसान काम है! बच्चों के मन में कई बार सोच-समझकर फैसले लेने की क्षमता नहीं होती। दोस्तों और परिवार के नियमित सलाह मिलना चाहिए।
 
तीनसे से रिलेशनशिप बारे में बात करना बहुत जटिल है 🤔😕 पलों को फोन निकालना और फिर भी खुश रखना तेजी से बदलने वाला होता है। बच्चे अपने जीवन में नई चीजें सीख रहे हैं और रिलेशनशिप में गलत फैसले लेने की संभावना हो सकती है।
 
कुछ तीनदशक पुराने हैं जब मेरे परिवार के छोटे भाई ने 18 साल की उम्र में अपनी पहली रिलेशनशिप शुरू कर दी थी। वो बहुत खुश था, लेकिन मुझे लगता है कि उस समय उसको समझना मुश्किल था। पूरे परिवार को भी वही तारीफ देनी पड़ती थी, जैसे कि वह अपने साथियों से कहीं बेहतर है। लेकिन मेरे विचार में यह गलत है क्योंकि उस समय उसको समझना मुश्किल नहीं था, परिवार को भी वही प्रोत्साहन देना चाहिए था।
 
तीनआयसियों के रिश्तों पर बात करना एक जटिल विषय है, मेरा मन कह रहा है कि बच्चे तीनआयसियों के बारे में सोचते समय अपने पिता-माता की बात लेनी चाहिए। अगर वे रिश्ते को समझ नहीं पा रहे हैं तो उनके माता-पिता उन्हें सही सलाह दे सकते हैं। परंतु, कभी-कभी बच्चों को अपने सपनों और इच्छाओं को पूरा करने का मौका मिलना चाहिए।
 
तीनआयु में रिश्तों की बातचीत करना एक जटिल विषय है 🤔। बच्चे बड़े हो रहे हैं और अपने फैसलों को स्वयं समझने की जरूरत है। हमें उन्हें गलतियाँ करने देनी चाहिए, लेकिन उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखना भी जरूरी है 🙏। बच्चों को जोखिम उठाने का अवसर देना और उन्हें खुद पर भरोसा करने का मौका देना चाहिए, लेकिन साथ ही, हमें उनकी जरूरतों को समझने की कोशिश करनी चाहिए। रिश्तों के बारे में बातचीत करते समय, हमें अपने बच्चों की भावनाओं और जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए, न कि बस उन्हें समझाने की कोशिश करना 🤗
 
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