पेरेंटिंग- मम्मी-पापा एथलीट, लेकिन बेटे को स्पोर्ट्स में इंटरेस्ट नहीं: क्या करूं कि वो खेलों में रुचि ले, क्या फोर्स करना सही है

मां-बाप अपने बच्चों को स्पोर्ट्स में रुचि लाने का प्रयास करते रहते हैं, लेकिन अगर उनका बच्चा खेलकूद में रुचि नहीं लेता है, तो क्या करें?

साइकोलॉजिस्ट डॉ. अमिता श्रृंगी ने बताया, "आपका उद्देश्य बच्चे को एथलीट बनाना या मेडल जिताना नहीं, बल्कि फिजिकली एक्टिव रहना होना चाहिए।"

इसलिए, जब आप अपने बच्चे को स्पोर्ट्स में शामिल करने का प्रयास करते हैं, तो उसके मनोवैज्ञानिक कारणों पर विचार करें। क्या वह खेल को लेकर सोशल जजमेंट या एंग्जाइटी से डर रहा है? क्या वह फिजिकली ज्यादा एक्टिव नहीं है, या उसका एनर्जी लेवल कम?

आपका बच्चा क्यों खेल नहीं खelta?
 
मेरा पता है तुम्हारे बच्चे खेलने में रुचि नहीं लेगा 😊। मैं तो अपने बेटे ने खेल कूद में रुचि नहीं ली थी, तो मैंने उसे फिजिकली एक्टिव रहने के लिए अन्य विकल्प दिये थे, जैसे कि साइकिल चलाना, फुटबॉल खेलना आदि। लेकिन अगर बच्चा खेलने में रुचि नहीं लेगा, तो शायद वह खुद की पसंद के अनुसार विकल्प ढूंढे 😊

मैं सोचता हूँ, शायद पिता-माता द्वारा दबाव डालने से बच्चा खेलने में रुचि नहीं लेगा, जो एक अच्छा तरीका नहीं है। क्योंकि बच्चों को अपनी पसंद के अनुसार चीजें करनी चाहिए, न कि किसी दूसरे का।
 
मुझे लगता है कि यह समस्या सरकार द्वारा शिक्षा विभाग में आयी है, जो स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन की कमी के कारण बच्चों में खेलकूद की रुचि नहीं है। हमें अपने बच्चों को ऐसे खेल देने चाहिए जिनमें वह मजा ले और अपनी ऊर्जा निकाले। सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि हमारे पास एक स्वस्थ और फिट जनसांख्यिका हो।
 
मुझे लगता है कि मेरे दो छोटे भाइयों ने कभी भी खेल को स्वीकार नहीं किया है। उनकी रुचि पढ़ाई और गेम्स में ही रही है, लेकिन जब मैं उन्हें स्कूल के बाहर खेलने जाने के लिए कहता हूँ, तो वे नहीं चले पाते। मुझे लगता है कि शायद उनके मन में कोई डर हो सकता है, या फिर वह सोचते हैं कि खेल करना मुश्किल होगा। लेकिन अगर मैं उन्हें सही तरीके से समझा दूँ और उन्हें अपने स्वास्थ्य के बारे में बता दूँ, तो शायद वे भी खेलने लगें।
 
मुझे लगता है कि हमें सिर्फ पैसे और मेडल पर ध्यान न देना चाहिए, बस यह तो समझना चाहिए कि हर बच्चा अलग है, एक बच्चा फुटबॉल खेल सकता है लेकिन दूसरा क्रिकेट पसंद करेगा, फिर भी दोनों अच्छे हैं...
 
मुझे लगता है कि माता-पिता अपने बच्चों को स्पोर्ट्स में शामिल करने का प्रयास करते समय, उन्हें यह समझना चाहिए कि हर बच्चा अलग-अलग होता है। अगर उनका बच्चा खेल नहीं खelta तो फिर भी वह अपने दोस्तों से खेल सकता है या घर में ही कुछ खेलता है जैसे कि गोल्फ, बास्केटबॉल आदि।

मैंने देखा है कि बच्चों को खेल में शामिल होने से पहले उन्हें थोड़ा समय मिल सकता है। अगर वह एक निश्चित खेल में रुचि नहीं लेता तो उस खेल की जगह दूसरा चुनना भी ठीक है। और सबसे ज्यादा जरूरी बात यह है कि बच्चों को उनके पसंदीदा खेल में खेलने का मौका मिले।
 
मुझे लगता है कि माता-पिता हमेशा अपने बच्चों को खेलने के लिए मजबूर करते रहते हैं, ताकि वे उन्हें एथलीट बना सकें। लेकिन मेरे द्वारा सोची जाए, शायद बच्चे अपने खेल के प्यार को खोने की भावना से डरते हैं। और यह बिल्कुल सही है, क्योंकि जब हमें कुछ करने को मजबूर किया जाता है, तो हमारा मूड खराब हो जाता है। 🤔

इसके अलावा, शायद बच्चों को खेलने से पहले उनकी इच्छाओं और रुचियों पर ध्यान देना चाहिए। क्या वे साइकिल चलाने में रुचि रखते हैं या फुटबॉल? हमें उन्हें अपनी पसंदीदा गतिविधियों को खोजने में मदद करनी चाहिए, न कि उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर करना। 🚴‍♀️
 
बच्चों को खेलने में रुचि न आने का मतलब यह नहीं कि उनके माता-पिता से कुछ सही नहीं है। सबसे पहले, यह जरूरी है कि बच्चे को विभिन्न प्रकार के खेलों की परिक्षा दी जाए ताकि वह किसी भी एक में रुचि ले सके।

लेकिन अगर बच्चा कोई खेल नहीं खेलता, तो शायद इसका कारण उसके एनर्जी स्तर में कमी हो। या फिर शायद वह अपने दोस्तों से दूर रहता है और उनसे न जुड़ पाता है। याद रखें, बच्चों को खेलने की जगह अधिक समय विश्वास से बैठकर काम करने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, मेरे अनुभवानुसार, अगर आपका बच्चा खेलमें रुचि नहीं लेता है तो उसे शायद किसी और फिटनेस योजना में शामिल करना चाहिए जैसे ट्रेडमिल या साइकल चलाना।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों को अपनी रुचियों को खोजने और उनको पूरा करने का मौका देना चाहिए।
 
મેં એક ભાઈ છે, જે ખેલ નહીં પસંદ કરે છે, તો શું થાય? 🤔

મારે આગળ બે વિચાર હશે:

પ્રથમ, એક ખેલ નહીં કરતા સાથે જીવનનો અભ્યાસ કરવો. જો મારું ખેલ બહુ ભ્રમણ થઈ ગયું છે, તો સાહિત્ય, શિક્ષણ, લીનપણ અથવા બોલતા ભાષાંતર માટે સંયમથી ડિફનિશન કરું. એવો જેમ, આ ખેલનો પ્રત્યેની સૌથી ચિરકાળની વિશ્વાસઘાતબદ્ધતા મૂકવી લો.

બીજે અભ્યાસનું હશે: પ્રથમની ત્યાં કેટલાએ ચિત્તરો છે, બધું હોવા જોઈએ. એની શૈક્ષણિક સફળતાઓની દેખરેખ તું જાણ, પછીથી તેમને એક યોગ્ય ભેટલેલું વિષય શોધો.
 
मुझे लगता है कि हमारे समाज में परिवारों को अपने बच्चों को स्पोर्ट्स में शामिल करने की दबाव में लाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि हर बच्चा अलग है, और उनकी रुचियाँ भी अलग-अलग होती हैं। अगर अपना बच्चा खेल में रुचि नहीं लेता है, तो हमें उसे अपने जुनून के अनुसार प्रोत्साहित करना चाहिए।

मेरी भावना है कि हमें अपने बच्चों को खेल में शामिल होने के बजाय, उनकी रुचियों और शौकों को पहचानने की जरूरत है। क्योंकि फिजिकली एक्टिव रहना बहुत जरूरी है, लेकिन यह सिर्फ खेल में ही नहीं होता। हमें अपने बच्चों को विभिन्न गतिविधियों में शामिल करने की जरूरत है, जैसे कि गेमिंग, पढ़ाई, या कला।

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(मुझे लगता है कि हमें अपने बच्चों को खेल में शामिल होने के बजाय, उनकी रुचियों और शौकों को पहचानने की जरूरत है।)
 
मुझे लगता है कि माता-पिता अपने बच्चों को स्पोर्ट्स में रुचि लाने का प्रयास करते हैं ताकि वे फिट और सक्रिय रहें। लेकिन अगर बच्चा खेल में रुचि नहीं लेता, तो शायद माता-पिता पर सोचना चाहिए कि क्या उनका बच्चा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में हिचकिचा रहा है।

मुझे लगता है कि डॉ. अमिता श्रृंगी की बात सही है, बच्चों को एथलीट बनने या मेडल जीतने का प्रयास नहीं करना, बल्कि सिर्फ फिजिकली एक्टिव रहना चाहिए। इससे उनके मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए।

मुझे लगता है कि माता-पिता अपने बच्चों को खेल में शामिल करने का प्रयास करते समय, उनके बच्चों के मनोवैज्ञानिक कारणों पर विचार करना चाहिए। क्या वह खेल को लेकर सोशल जजमेंट या एंग्जाइटी से डर रहे हैं? क्या उनका एनर्जी लेवल कम है?
 
मुझे लगता है कि मेरी बहन ने अपने बेटे को क्रिकेट में खेलने का प्रयास किया, लेकिन वह वास्तव में दिल्ली डेथ स्टार्स नहीं खेल रहा। 😂

मुझे लगता है कि बच्चों को अपनी पसंद के अनुसार खेलने की आजादत देनी चाहिए। अगर वह खेल में रुचि नहीं लेता है, तो उसे कोई भी फिजिकल एक्टिविटी करने का अवसर दें। मेरे दोस्त का बेटा टेनिस में खेलता है, लेकिन वास्तव में वह शूटिंग और फुटबॉल जैसी गेम्स में मजा करता है। 🏸

मुझे लगता है कि बच्चों को अपने मनोवैज्ञानिक कारणों को समझने की जरूरत है, लेकिन उन्हें भी यह सिखाना चाहिए कि फिजिकल एक्टिविटी करना बहुत जरूरी है। मेरी बहन ने अपने बेटे को योग और डांस कक्षाओं में भर्ती कराया, लेकिन वह वास्तव में खेल में रुचि नहीं लेता। 🧘‍♀️

उम्मीद है, अगर हम बच्चों को उनकी पसंद के अनुसार खेलने का अवसर देंगे, तो वे अपने फिजिकल और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को बेहतर बना पाएंगे। 💪
 
अगर मैं अपने पुत्र को स्पोर्ट्स में शामिल करने का प्रयास कर रहा हूं, तो मैं पहले उसकी रुचि जानने की कोशिश करता हूं। अगर वह खेल नहीं खelta, तो मैं उससे सवाल पूछता - तुम्हें खेलने में क्या पसंद है? क्या तुम फिजिकली एक्टिव रहना चाहते हो?

मुझे लगता है कि शारीरिक गतिविधियों से निम्नलिखित लाभ होते हैं - वजन कम करना, एनर्जी बढ़ना, तनाव कम होना। तो मैं अपने पुत्र को भी ये बातें समझाने का प्रयास करता हूं। फिर अगर वह खेलने में रुचि नहीं लेता है, तो मैं उसके साथ साइकिल चलाने, टेबल टेनिस खेलने जैसी शारीरिक गतिविधियों को करने का प्रयास करता हूं।
 
मुझे लगता है कि मां-बाप अपने बच्चों को स्पोर्ट्स में रुचि लाने का प्रयास करते रहते हैं, लेकिन अगर उनका बच्चा खेलकूद में रुचि नहीं लेता है, तो शायद वह बस इतना ही है कि वह अपने आप में एक अलग फिटनेस स्टाइल पसंद करता है।

उसके मनोवैज्ञानिक कारणों पर विचार करना बिल्कुल सही होगा, लेकिन शायद उसको पहले खेल की जानकारी देनी चाहिए, और फिर साथ में प्रयास करना चाहिए।
 
मेरी बात है! मुझे लगता है कि साइकोलॉजिस्ट डॉ. अमिता श्रृंगी ने सही कहा। बच्चों को एथलीट बनाने की जरूरत नहीं है, बस उन्हें फिजिकली एक्टिव रहना चाहिए। मेरे दोस्त का बेटा खेलने में रुचि नहीं लेता, लेकिन वह हमेशा गेम्स प्ले करता है और ऑनलाइन खिलाड़ी बनता रहता है। मुझे लगता है कि वह अपने सपनों को साकार करने की जरूरत महसूस नहीं कर रहा है।

मेरी राय में बच्चों को खेलने की जरूरत नहीं है, बस उन्हें फिजिकली सक्रिय रहने देना चाहिए। जैसे कि वे पेड़ पर चढ़ने, खिड़की से गिरने (कम मार्ग से), या जंगल में निकलने जैसे छोटे-छोटे खिलाड़ी बनें। इससे उन्हें एथलीट बनने की जरूरत नहीं है। बस उन्हें एक्सपोर्ट करना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि मां-बाप को अपने बच्चे की पसंद को समझने की कोशिश करनी चाहिए। जैसे कि जब तुम्हारा दोस्त तुम्हें खेलने के लिए बुलाता है, लेकिन तुम्हें नहीं लग रहा है तो तुम उसका जवाब देते हो, न तो उत्साहित और न ही मुस्कराते। बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि खेलने में शामिल होना तो अच्छा है, लेकिन जरूर नहीं मानना है।

मुझे लगता है कि बहुत से बच्चे अपनी खुशियों और आनंदों को खोजने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए उन्हें खेलने में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। तुम्हारा बच्चा खेल नहीं खelta, या फिर वह खेलने से डर रहा है?
 
बेटियों और लड़कियों को भी स्पोर्ट्स में रुचि लाने की जरूरत है 🏋️‍♀️, तो अगर वो नहीं कर रही है, तो शायद वो मानसिक रूप से खेलने को नहीं पसंद करती है। हमें अपने बच्चों को यह समझाना चाहिए कि खेलना एक मजेदार चीज़ है जिसमें हम अपने दोस्तों के साथ समय बिता सकते हैं और फिट रेहट कर सकते हैं। अगर वो खेलने में रुचि नहीं लेती है, तो शायद हमें उसके साथ ऐसी गतिविधियाँ करनी चाहिए जिनमें वह खुश रहती हो। 🤗

किसी को भी फिजिकली एक्टिव रहना चाहिए, तो अगर वो नहीं कर रही है तो शायद हमें उसके साथ ऐसे गतिविधियाँ करनी चाहिए जिनमें वह खुश रहती है। 🏃‍♀️💨

कोई भी बच्चा खेल नहीं खेल सकता, तो फिर भी उसे स्वस्थ रहने के लिए अन्य गतिविधियाँ करनी चाहिए। 👍
 
मैंने अपने दोस्त के भाई को कबड्डी में शामिल करने का प्रयास किया, लेकिन वह कभी हंसता नहीं दिखा। तो मैंने उससे बात की, कि क्या खेल में रुचि नहीं है? उसने कहा, "मैं डर रहा हूँ। सभी लड़के अच्छे खिलाड़ी बनते हैं, लेकिन मैं कभी नहीं।"

मुझे याद आया जब मेरी बहन ने बाल्यावस्था में हॉकी में रुचि नहीं ली, तो मैंने उसे समझाने की कोशिश की। उसने कहा, "ठीक है, लेकिन फिर भी मैं खेल नहीं खलाता।" मैंने उससे पूछा, "क्या तुम्हें लगता है कि मैं आपको सही दिखा सकता हूँ?" उसने कहा, "हाँ, ठीक है।"

मुझे लगता है कि हमारे बच्चों को खेल में शामिल होने से पहले उनके मनोवैज्ञानिक कारणों को समझना चाहिए।
 
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