पेरेंटिंग- परीक्षा में बेटे के मार्क्स अच्छे नहीं: कहीं उसका IQ कमजोर तो नहीं, कैसे पता लगाएं, क्या IQ टेस्ट कराना ठीक है

आपके बेटे को मैथ्स और साइंस में कम मार्क्स आते हैं। ऐसा देखना चिंताजनक है, लेकिन उसका पूरा पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता।

अगर वह अपने विषयों को समझने में असमर्थ है तो शिक्षक या प्रशिक्षित साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

बच्चे की इंटेलिजेंस को मापते समय, इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि बच्चे की स्थिति, माहौल और उस दिन की स्थिति भी इस पर प्रभाव डालते हैं।

इसलिए अगर आपको अपने बच्चे के मार्क्स देखने में चिंता आती है तो इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि उसके विषयों में सीखने में कठिनाई, पढ़ाई में मन न लगना और टीचर या स्कूल का दबाव बच्चे के मार्क्स को प्रभावित कर सकते हैं।
 
बेटा की मैर्क्स देखने पर चिंता करना जरूरी, लेकिन उसे एक छोटी बात न बनाएं। शिक्षक से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि वो समझ सकेंगे।

मेरी राय में, बच्चे की इंटेलिजेंस को मापने में कई चीज़ें महत्वपूर्ण हैं, जैसे बेटे का स्थिति, दिन का माहौल, और उस विषय में पढ़ाई में कितना रुचि है। अगर वह अपने विषयों में असमर्थ है तो किसी अनुभवी शिक्षक या प्रशिक्षित प्साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

उसके अलावा, पढ़ाई में मन न लगना और उस दिन की स्थिति भी मार्क्स को प्रभावित कर सकती है। इसलिए अगर आपको अपने बच्चे के मार्क्स पर चिंता आती है तो उसकी पढ़ाई में कठिनाई और उस दिन की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है।
 
बेटा तुम्हारी मैथ्स और साइंस में कम मार्क्स आती जाना अस्वाभाविक नहीं है, लेकिन शायद थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है। शिक्षक या प्रशिक्षित साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेना एक अच्छा विचार हो सकता है, फिर तुम्हें पता चल जाएगा कि बच्चा कहाँ गलतियां कर रहा है और सही दिशा में क्या करना चाहिए। और ये जरूरी नहीं कि हर बेटे को एक ही स्तर पर मार्क्स मिलें।
 
बेटे की मैथ्स और साइंस में कम मार्क्स आना चिंताजनक है, लेकिन हमें उसकी बुराई नहीं करनी चाहिए। शायद वह अपने विषयों को समझने में थोड़ा परेशान है।

उसके लिए शिक्षक या प्रशिक्षित साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेना एक अच्छा विचार हो सकता है। हमें उसकी समझने की कोशिश करनी चाहिए, न कि बुराई करनी।

बच्चों की इंटेलिजेंस को मापते समय, हमें उसकी स्थिति, माहौल और उस दिन की स्थिति भी ध्यान में रखना होता है। चिंता होनी चाहिए लेकिन उसके पूर्वानुमान पर नहीं।

शिक्षक या स्कूल का दबाव कभी-कभी बच्चों को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए हमें अपने बेटों को इस बात से नहीं भारित करना चाहिए। उन्हें सही सलाह देनी चाहिए, और उनकी समझने की कोशिश करनी चाहिए। 🤔
 
मेरी बात मानिए तो... अगर आपके बच्चे के मार्क्स में कमी आ रही है तो सबसे पहले उसकी पढ़ाई का तरीका देखिए। क्या वह विषयों में सीखने में सहज है? या उसके पास पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है? अगर ऐसा है तो शायद टीचर या स्कूल की दबाव ने उसके मार्क्स पर असर डाला।

इसके अलावा, बच्चे की इंटेलिजेंस को मापते समय हमें उसकी स्थिति, माहौल और उस दिन की स्थिति को भी ध्यान में रखना चाहिए। अगर वह एक अच्छे माहौल में पढ़ रहा है तो फिर उसके मार्क्स में कमी आ रही है तो शायद कोई समस्या उसके साथ है।

इसलिए अगर आपको अपने बच्चे के मार्क्स देखने में चिंता आती है तो सबसे पहले उसकी पढ़ाई की गुणवत्ता और उसके मन की बात देखिए।
 
मुझे लगता है कि मेरी बेटी की गणित में कम मार्क्स आ रही हैं, तो मैं थोड़ा चिंतित हूं 🤔। लेकिन शिक्षक से बात करके और बच्चे को समझाने का प्रयास करने से मदद मिल सकती है। जैसे अगर वह अपने विषयों को समझने में थक रहा है तो उसे थोड़ा आराम देना चाहिए।

मुझे लगता है कि बच्चे की इंटेलिजेंस को मापते समय ध्यान रखने वाली बात यह है कि उसके माहौल और स्थिति पर भी पड़ने वाला प्रभाव। अगर वह अच्छे माहौल में हो तो अच्छा मार्क्स आ सकता है लेकिन अगर कठिनाई में हो तो कम मार्क्स 🤷‍♀️

मुझे लगता है कि शिक्षक और पिता की भूमिका बहुत जरूरी होती है। हमें अपने बच्चों को सही रास्ते पर रखने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन उनकी इंटेलिजेंस को मापते समय जोखिम भी लेना पड़ सकता है...
 
बेटे की परीक्षा में कम मार्क्स आते हैं तो चिंता होती है लेकिन फिर भी सिखाएं और प्रेरित करें। बिल्कुल सही कहा गया है कि शिक्षक या प्रशिक्षित साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। मैंने भी अपने बच्चे को जब विशेष रुचि ना होती थी, तो उसकी पढ़ाई में मन लगाने की जरूरत थी।
 
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