पेरेंटिंग- परीक्षा में बेटे के मार्क्स अच्छे नहीं: कहीं उसका IQ कमजोर तो नहीं, कैसे पता लगाएं, क्या IQ टेस्ट कराना ठीक है

अगर आपका 12 साल का बेटा क्लास 6 में है और उसके मार्क्स बहुत कम आ रहे हैं, तो यह अच्छा विचार नहीं है। कई बार बच्चों की परीक्षा में अच्छे मार्क्स न आने से वे परेशान हो जाते हैं। ऐसे में उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी दबाव पड़ता है।

इसलिए पेरेंट्स अपने बच्चों को सही तरीके से समझने की कोशिश करें। इससे वे अपने बच्चे की कमजोरियों को पहचान सकते हैं और उन्हें ठीक करने में मदद कर सकते हैं। पेरेंट्स का यह सोच-समझकर करना बहुत जरूरी है।
 
अरे दोस्त, तुमने ये बात पूरी तरह से सही कही है 🤗। बच्चों को परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए नियमित रूप से अभ्यास कराना चाहिए, लेकिन यह तो एक मात्र विकल्प नहीं है। मेरी बेटी क्लास 6 में है और वह बहुत अच्छी है, लेकिन हमेशा जानबूझकर अच्छे प्रदर्शन करने की भावना को कम कर दिया गया है। बच्चों को खेलने दो, उन्हें अपने शौक में लगाया जाए, तो वे सीखने के लिए और अधिक उत्साहित होंगे। और सबसे जरूरी बात यह है कि हमारे बच्चों को खुलकर बोलने का मौका दें, तभी वे अपनी कमजोरियों को पहचान सकते हैं और उन्हें सुधारने के लिए सही रास्ता ढूंढ सकते हैं।
 
नहीं जानते, बच्चों की शिक्षा पर इतनी ध्यान देने से कोई फर्क नहीं पड़ता, हमेशा तो पैरेंट्स अपने बच्चों को अच्छा करने की उम्मीद करते हैं लेकिन कभी-कभी बच्चों में खुद का जीने का तरीका निकल आता है। 🤷‍♂️

अगर पेरेंट्स अपने बच्चों से बात करने की कोशिश नहीं करते तो उनके बच्चे यह महसूस कर सकते हैं कि वे अकेले हैं, और ऐसा करने से बच्चों में खुद को ठीक करने की क्षमता कमजोर होती है जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी दबाव पड़ता है। 🤔

लेकिन फिर भी पेरेंट्स अपने बच्चों को सही तरीके से समझने की कोशिश करें, ताकि वे अपने बच्चे की कमजोरियों को पहचान सकें और उन्हें ठीक करने में मदद कर सकें। यह सोच-समझकर करना बहुत जरूरी है।
 
क्लास 6 में अच्छे मार्क्स न आने से बच्चों को परेशानी होती है तो समझ में आता है, लेकिन जब ऐसे में पैरेंट्स को कहीं और स्थिर करने की जरूरत नहीं है, तो उन्हें अपने बच्चे की कमजोरियों को पहचानने का समय देना चाहिए। इससे वे खुद को भी मजबूत बना सकते हैं और अपने बच्चों को सही रास्ते पर रखने में मदद कर सकते हैं।
 
बेटे के लिए तंग कर दिया जा रहा है... 12 साल का लड़का क्लास 6 में है, लेकिन मार्क्स अच्छे नहीं आ रहे हैं। यह तो बच्चे की आत्मविश्वास पर दबाव डाल देता है। पिता-माता को अपने बच्चों को सही तरीके से समझने की जरूरत है, उनकी कमजोरियों को पहचानने की। अगर पिता-माता ठीक से समझते हैं तो लड़का बेहतर कर सकता है... 🤔
 
मैने देखा है कि कई लोगों ने अपने बच्चों को कम मार्क्स आने पर बड़े दबाव वाली बातें कही हैं। मेरा कहना है कि यह पूरी तरह से सही नहीं है। अगर आपका 12 साल का बेटा थोड़े कम मार्क्स आ रहे हैं, तो शायद वह भी अच्छा विद्यार्थी नहीं है। और फिर भी उसे दबाव न होना चाहिए।
 
बेटे को सही तरीके से समझने की कोशिश करनी चाहिए, नहीं तो वो कमजोरियों को पहचान न सके और ठीक न कर पाए 🤔. अगर 12 साल का बेटा क्लास 6 में है लेकिन मार्क्स बहुत कम आ रही हैं तो यह अच्छा विचार नहीं है।

बेटे को दबाव नहीं डालना चाहिए, इसके बजाय उन्हें सही दिशा में मदद करनी चाहिए। अगर पिता-माता अपने बेटे को सही तरीके से समझने की कोशिश करेंगे तो वो बेहतर परिणाम देख सकेंगे।

किसी भी बच्चे की कमजोरियों को पहचानना और उन्हें ठीक करना पिता-माता की जिम्मेदारी है।
 
अगर आपका बेटा क्लास 6 में है और उसके मार्क्स कम आ रहे हैं तो थोड़ा चिंतित होना समझ में आता है, लेकिन यह इतनी ज्यादा नहीं होना चाहिए। बच्चों को परीक्षाओं में अच्छा करने के लिए बहुत दबाव न डालना चाहिए, इससे उनका स्वास्थ्य और खुशहाली पर भी दबाव पड़ता है 🤔

मेरा मनन है कि शिक्षकों को भी अपने छात्रों के साथ संवाद करने की कोशिश करनी चाहिए, इससे पता चल जाएगा कि किस छात्र को कैसे मदद की जाए और वे कैसे उनके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं 💡
 
बेटे की परीक्षा में अच्छे मार्क्स न आने से वे परेशान हो जाते हैं... maine bhi apne bacche ko school se thoda door rakha tha, vah 8वीं क्लास ke baad college ke admissions par nahi aaya. tab wala kaafi phata ha, lekin main uska khayal karta hu. ab wo college me pad raha hai aur kabhi bhi usse kisi aise samasya se bachna hi nahi chaahta... kya tumhara baccha school se bahut acche marr pe rha hai?
 
बेटे की पढ़ाई में ध्यान देना जरूरी है, लेकिन इतना जोर नहीं लगाना चाहिए। कभी-कभार परीक्षा में कम मार्क्स आ जाते हैं तो भी बच्चों को सही तरीके से समझना चाहिए, कि उनकी कमियों को पहचानकर उन्हें बेहतर बनाने में मदद की जा सकती है।
 
🤔 अगर बच्चे को क्लास में अच्छा नहीं जाता है, तो यह मतलब नहीं है कि वह दिन-प्रतिदिन किसी भी चीज़ में महारत हासिल कर सकता। मेरी राय में, पैरेंट्स को अपने बच्चों को सही तरीके से समझना चाहिए, उनकी कमजोरियों को पहचानना चाहिए और उन्हें ठीक करने में मदद करनी चाहिए। लेकिन यह तो हमेशा आसान नहीं होता। बच्चों को अक्सर दबाव डालना पड़ता है और वे अपने परिवार की उम्मीदों को पूरा करने की कोशिश करते हैं। मेरी सलाह, पैरेंट्स को अपने बच्चों को खुलकर बात करना चाहिए, उनकी समस्याओं को समझना चाहिए और उन्हें स्वस्थ मानसिक स्वास्थ्य बनाने में मदद करनी चाहिए।
 
बेटियों की पढ़ाई में दबाव बढ़ गया है... 😔 छोटे से बच्चे को क्लास 6 में मार्क्स अच्छे न आने पर क्या करना है? शायद हमें यह सोचने की जरूरत है कि बच्चों को सहज महसूस करवाना भी एक महत्वपूर्ण बात है। उनको दबाव नहीं डालना चाहिए, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास दिलाना चाहिए। मेरे राय, हमें अपने बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि असफलता से कैसे सबक लिया जाए और फिर आगे बढ़ने की कोशिश करनी। 📚
 
मुझे लगता है कि बच्चों पर दबाव कम होना चाहिए, खासकर पढ़ाई में। अगर बेटे क्लास 6 में हैं और उनके मार्क्स कम आ रहे हैं, तो पहले सोचें कि क्या वे सही पाठ्यक्रम में हैं या नहीं। शिक्षकों की मदद लेना चाहिए और उन्हें अपने बच्चे की जरूरतों को समझने की कोशिश करनी चाहिए। परीक्षाओं की तैयारी के दौरान तनाव कम होना चाहिए, खासकर अगर वे अच्छे मार्क्स नहीं आ रहे हैं।
 
अरे, अगर आपका बेटा तो 12 साल का है और अब वह क्लास 6 में है, तो इसमें कोई देर नहीं है। लेकिन अगर उसके मार्क्स बहुत कम आ रहे हैं, तो यह अच्छा विचार नहीं है। बच्चों की परीक्षा में अच्छे मार्क्स न आने से वे परेशान हो जाते हैं और उनका मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।

इसलिए, पेरेंट्स अपने बच्चों को सही तरीके से समझने की कोशिश करें, इससे वे अपने बेटे की कमजोरियों को पहचान सकते हैं और उन्हें ठीक करने में मदद कर सकते हैं। पेरेंट्स का यह सोच-समझकर करना बहुत जरूरी है।
 
😊 agar tuhara 12 saal ka beta class 6 me hai aur uske marks bahut kam aa rahe hain to yeh achcha vichar nahi hai 🤔. main sochta hoon ki parents ko apne bachon ke liye thoda patience banana chahiye, kyunki pariksha mein achhe marks na aane se wo kaafi peeska hoga 😓. isse unke mansik swasthya par bhi dabav padta hai 🤕.

tu to sabse mahatvapoorna baat yeh hai ki parents ko apne bachon ko sahi tarah se samajhna chahiye, taki wo uski kamjoriyon ko pehchan sakein aur unhein theek karne me madad kar sakein 💡. parents ka yeh soch-samajhkar karna bahut zaroori hai 🙏.
 
बेटे की परीक्षा में कम मार्क्स आने का मतलब वो समझ गया नहीं है 🤔 या फिर उसकी प्राथमिक शिक्षा अच्छी नहीं थी। मेरे बच्चे ने 2वीं से ही टाइम मैनेजमेंट सीख लिया था, तो वो अब क्लास 6 में छोड़ देते। अगर पिता-माता अपने बच्चों को सही तरीके से समझाने की कोशिश करते हैं और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद करते हैं, तो वो उनकी परीक्षा में भी अच्छे मार्क्स पाने की उम्मीद रख सकते हैं।
 
बेटे की परीक्षा में अच्छे मार्क्स नहीं आने का मतलब उसकी कमजोरियों को पहचान सकते हैं और उन्हें ठीक कर सकते हैं? यह तो बहुत ज्यादा आसान है! 🤔 पेरेंट्स सोच-समझकर उनके बच्चों को समझने की कोशिश करें, तभी वे अपने बच्चों को सही दिशा में ले जा सकते हैं और उन्हें अच्छे मार्क्स पाने की जरूरत नहीं है।
 
अगर बेटा क्लास 6 में नहीं तो फिर मार्क्स कम आ रहे हैं तो वाह, यह एक अच्छा विचार नहीं है ... बेचारे बच्चे परीक्षा में अच्छी नहीं आते तो उनका मन टूट जाएगा। पेरेंट्स को भी तो सोच-समझकर करना पड़ता है कि क्या यह सही रास्ता है ? बेटे की कमजोरियों को पहचानने की कोशिश करो तो ठीक होगा, लेकिन अगर नहीं तो फिर मार्क्स कम आ जाएंगी और बच्चा परेशान हो जाएगा।
 
बेटियों की परीक्षा में भी दबाव पड़ता है न?! मैंने देखा है कि कई बार बच्चियाँ अपने मार्क्स कम आ रहे हैं तो वे बहुत परेशान हो जाती हैं। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बहुत दबाव पड़ता है। पिता-माताओं को अपने बच्चों को सही तरीके से समझने की जरूरत है, ताकि वे उनकी कमजोरियों को पहचान सकें और उन्हें ठीक कर सकें। #बच्चोंकासहयोग #मानसिकस्वास्थ्यमहत्वपूर्ण #परीक्षादबाव #बेटियोंकासहयोग
 
बेटे के परीक्षा में कम मार्क्स आने पर माँ-पिता को निकलने देना चाहिए ना। बच्चों को अच्छे से समझने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि वे अपने बेटे की कमजोरियों को पहचान सकें और उन्हें ठीक कर सकें। मानसिक स्वास्थ्य पर दबाव पड़ना भी गलत है। पेरेंट्स को यह सोच-समझकर करना चाहिए, नहीं तो बच्चे की जिंदगी वैसी ही दुखी हो जाती। 🤕
 
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