पेरेंटिंग- परीक्षा में बेटे के मार्क्स अच्छे नहीं: कहीं उसका IQ कमजोर तो नहीं, कैसे पता लगाएं, क्या IQ टेस्ट कराना ठीक है

अगर आपका बेटा क्लास 6 में है और वह मैथ और साइंस में बहुत अच्छे नहीं होते, तो आपको यह सवाल उठना चाहिए कि बच्चों का IQ टेस्ट करना ठीक है? इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि क्या बच्चों का IQ टेस्ट करना सही है, इसके फायदे और नुकसान, और यह कैसे पेरेंट्स के लिए मददगार हो सकता है।

बच्चे के कम मार्क्स के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। जैसेकि-

विषय को समझने में कठिनाई
पढ़ाई में मन न लगना
टीचर या स्कूल का प्रेशर
डर या एग्जाम एंग्जाइटी
सही गाइडेंस का अभाव
खराब टीचिंग स्टाइल
फोकस की कमी
नींद पूरी न होना
इंटरेस्ट कम होना
प्रोसेसिंग स्पीड स्लो होना
कम प्रैक्टिस
तनाव
न्यूट्रिशन या हेल्थ फैक्टर

इसलिए केवल एवरेज मार्क्स के आधार पर बच्चे को जज करना या उस पर दबाव बनाना सही नहीं है। इसके अलावा हो सकता है कि आपका बेटा अन्य विषयों या किसी दूसरे क्षेत्रों में बहुत अच्छा हो। कई बच्चे म्यूजिक, पेंटिंग, खेल या किसी क्रिएटिव फील्ड में कमाल करते हैं।

पेरेंट्स को सबसे पहले अपने बच्चे की रुचियों और उसकी क्षमताओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए। अक्सर माता-पिता यही गलती करते हैं कि वे बच्चों को अपनी इच्छानुसार डॉक्टर, इंजीनियर और IAS वगैरह बनाना चाहते हैं। इस कोशिश में वे बच्चे की रुचियों, क्षमताओं और स्वभाव को नजरअंदाज कर देते हैं।

हर बच्चे की अपनी एक पहचान होती है और अपनी खास रुचियां होती हैं। पेरेंटिंग का मतलब उसे किसी तय ढांचे में ढालना नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानकर उन्हें निखरने का मौका देना है।

बच्चों का IQ टेस्ट करना एक अच्छा विचार नहीं है। यह टेस्ट बच्चे की स्मार्टनेस का पूरा पैमाना मानने के लिए बनाया गया है, लेकिन यह वास्तव में बहुत कम महत्वपूर्ण है।

अगर आपका बेटा 12 साल का है और उसकी पढ़ाई में कठिनाई है, तो इस पर प्रेशर न लगाएं। इसके बजाय, बच्चे को समझने और सपोर्ट करने का प्रयास करें। यह जरूरी नहीं है कि आपका बेटा IQ टेस्ट में अच्छा स्कोर करे, लेकिन उसकी रुचियों और क्षमताओं को पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है।
 
यदि बच्चे का एंट्री मार्क्स 60% है, तो हमें लगता है कि यह एक अच्छा अंक है। परंतु, अगर हम इसे देखें, तो यह सिर्फ एक छोटा सा अंश है। शायद बच्चे की भावनात्मक समस्याएं या कोई अन्य ऐसी समस्या उसके प्रदर्शन में बाधा डाल रही हो।
 
बेटे को मानें तो एक्सप्रेशन में तेजी आ जाएगी, खैर बात करते हैं IQ टेस्ट, ये मेरे अनुसार बच्चों के लिए बहुत ही दबाव भरा है और अगर बच्चा इस पर कम मार्क्स कर देता है तो उसकी आत्मविश्वासता टूट जाती है। हमें अपने बेटों को सिखाना चाहिए कि हर किसी की खासियत होती है और उन्हें अपनी खासियत पर ध्यान देना चाहिए। IQ टेस्ट में अच्छा स्कोर करना जरूरी नहीं है, लेकिन रुचियों और क्षमताओं को पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है। 🤔📚
 
बिल्कुल सही, बच्चों का IQ टेस्ट करने से पहले उन्हें समझने की जरूरत है कि वे क्या पसंद करते हैं और उनकी क्षमताएं कहाँ हैं। यह बात तो हमेशा सुनाई देती है, लेकिन अभी भी कई माता-पिता अपने बच्चों को उन चीजों में डालने की कोशिश करते हैं जिन्हें वास्तव में पसंद नहीं करते हैं। 🤔
 
बिल्कुल सही कहा गया है 😊। मैंने भी अपने बच्चे के साथ हाल ही में ऐसी समस्या हुई थी, जब उसने 10वीं कक्षा में विज्ञान में कम मार्क्स मिले। तो मुझे पता चला कि उसका टीचर उसे विज्ञान को समझने में कठिनाई होने की बात कह रहा था। मैंने उससे पूछा कि वह क्यों इतना दबाव महसूस कर रहा था, तो उसने बताया कि उसे विज्ञान में रुचि नहीं है। लेकिन टीचर ने हमें सिर्फ ऐसी जानकारी देने के लिए कहा कि हम उसकी रुचियों को समझने का प्रयास करें। यह सचमुच बहुत जरूरी है कि हम अपने बच्चों की खूबसूरतियों को पहचानें और उन्हें बढ़ावा दें।
 
अगर बच्चे को 6वीं कक्षा में विज्ञान और गणित में धीमा साबित होता है तो फिर उसकी IQ टेस्ट करना बिल्कुल सही नहीं है। कईबार लोग गलती से बच्चों को एक ही पेशे पर ध्यान देने लगते हैं जैसे कि अगर आपके बेटे क्लास 6 में अच्छे प्रदर्शन नहीं कर रहे है तो उसे हमेशा इंजीनियर बनाना चाहते हैं और इसके लिए वह बच्चों की सही गाइडेंस में राह दिखाने की कोशिश करते हैं।

बच्चे को विभिन्न प्रकार के विषयों में ध्यान दिलाना चाहिए और उसे अपनी रुचियों और स्वभाव को समझने की जरूरत है। क्या आपका बेटा पढ़ाई में थक जाता है या उसकी मन न लगती है? अगर ऐसा है तो उसकी स्कूल प्रेसर पर ध्यान देने चाहिए।

यह भी जरूरी है कि बच्चों को तनाव और डर से नहीं छोड़ना चाहिए। यह टेस्ट सिर्फ एक मापदंड नहीं है, बल्कि बच्चे की रुचियों, क्षमताओं और स्वभाव को समझने का एक तरीका है।

अगर आपका बेटा 12 साल का है और उसकी पढ़ाई में कठिनाई है, तो उस पर दबाव न लगाएं, बल्कि बच्चे को समझने और सपोर्ट करने का प्रयास करें।
 
मैंने देखा है कि क्लास 6 के बच्चों पर बहुत दबाव डाला जाता है, और उनकी मार्क्स को लेकर माता-पिता और शिक्षकों को बहुत चिंता होती है। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि बच्चों की रुचियों और क्षमताओं को समझने का महत्व क्या है? अगर मेरे बेटे खेलों में बहुत अच्छा होता, तो क्या मैं उसे खेलकूद करियर चुनने दूं?

मुझे लगता है कि हमें अपने बच्चों की खुशाहाल और उन्हें उनकी रुचियों में सफल बनाने की कोशिश करनी चाहिए, न कि उन्हें एक ही विषय या करियर में धकेलना।
 
मेरे दोस्त, इस बात पर विश्वास न करें कि अगर आपका बेटा 6वीं कक्षा में नहीं है तो वह साइंस और मैथ में अच्छा नहीं होगा। बच्चों की IQ टेस्ट करने से पहले उन्हें समझना चाहिए कि वे क्या चाहते हैं और उनकी क्षमताओं को पहचानना जरूरी है। कई बार माता-पिता अपने बच्चों को ऐसे दिशानिर्देश देते हैं जिनसे वे खुद पर दबाव महसूस करते हैं। 🤔

बच्चे बहुत ही भिन्न होते हैं और उनकी रुचियां अलग-अलग होती हैं। इसलिए, IQ टेस्ट करना बिल्कुल सही नहीं है। इसके बजाय, बच्चों को समझने और उनकी खासियत को पहचानने की जरूरत है। अगर आपका बेटा 12 साल का है और उसकी पढ़ाई में कठिनाई है, तो प्रेशर न लगाएं। इसके बजाय, बच्चे को समझने और सपोर्ट करने का प्रयास करें। 🙏

हमें यह सोचना चाहिए कि हम अपने बच्चों को किस तरह के व्यक्ति बनाना चाहते हैं? उनकी रुचियों, क्षमताओं और स्वभाव को पहचानना जरूरी है।
 
मुझे लगता है कि बच्चों का आइक्यू टेस्ट करना तो कुछ भी नहीं है 🤔। यह सिर्फ एक पैमाना है, जिससे हमें सोचा जाता है कि बच्चे में कितनी स्मार्टनेस है। लेकिन फैक्ट्स हैं कि हर बच्चे में अलग-अलग चीजें अच्छी और खराब होती हैं। इसलिए, हमें अपने बच्चों को दबाव न डालना चाहिए, बल्कि उनकी रुचियों और क्षमताओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
 
मेरे दोस्त, यह तो बहुत जरूरी है कि हम अपने बच्चों को सही रास्ते पर रखें 🤔। अगर वह 6वीं में फेल होता है, तो हमें इस पर केवल मार्क्स देखने की बजाय उसके स्मार्टनेस को समझने की जरूरत है। शायद विषय समझने में कठिनाई हो या पढ़ाई में मन नहीं लग रहा हो। इसके लिए हमें अपने बच्चों की रुचियों, क्षमताओं और स्वभाव को समझना चाहिए। अगर हम उनकी ताकतों को पहचानकर उन्हें बढ़ावा देते हैं, तो वास्तव में हम उनकी सफलता की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। 🚀

कभी-कभी हमारे बच्चे हमें नहीं बताते कि वे कैसे महसूस कर रहे हैं या उनकी क्षमताएं क्या हैं। इसलिए, पिता-माताओं को अपने बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए और उन्हें समझाना चाहिए कि हमारा लक्ष्य उनकी सफलता के लिए नहीं है, बल्कि उनकी खुशहाली और खुशियों के लिए है। 😊

मेरे विचार में, बच्चों का IQ टेस्ट करना एक गलत तरीका है जो हमें अपने बच्चों की रुचियों और स्वभाव को समझने से भटका देता है। 🙅‍♂️ हमें अपने बच्चों को सही दिशा में ले जाने के लिए उनकी ताकतों को पहचानना चाहिए और उन्हें बढ़ावा देना चाहिए। 👍
 
बिल्कुल सही है! बच्चों के बारे में हमेशा ऐसी ही गलत धारणाएं बनाई जाती हैं 🤦‍♂️. IQ टेस्ट करने से पहले पूरी जानकारी इकट्ठा कर लें, और बच्चे को दबाव में नहीं रखें। उनकी रुचियों को समझना और उन्हें बढ़ावा देना बहुत जरूरी है 🎉. हमें अपने बच्चों को सही दिशा में सिखाना चाहिए, न कि उन्हें किसी एक विषय या पेशे में लपेटना चाहिए। और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि हम अपने बच्चों को खुलकर सुनें, उनकी बातों को समझें और उन्हें सही मार्ग दिखाएं 🤗. #बच्चोंकीभावनाओंकोसमझना #प्रेस्योरहोनाहितनाहीं
 
😊 अगर तुम्हारे बच्चे क्लास 6 में है और वह मैथ और साइंस में अच्छे नहीं होते, तो उनके लिए IQ टेस्ट करना जरूरी नहीं है। 🤔 बेटों को अक्सर दबाव डालने की ज्यादा दिक्कत है, जिससे उन्हें पढ़ाई में थकान महसूस होती है और उनकी रुचियां भी खत्म हो जाती हैं! 📚

बेटों को प्रेरित करने का तरीका यह नहीं है कि उन्हें एक निश्चित पेशा करने के लिए दबाव डाल दो, बल्कि उन्हें उनकी रुचियों, क्षमताओं और स्वभाव को समझने का मौका देना चाहिए। 🤝 हर बच्चे की अपनी पहचान होती है और अपनी खास रुचियां होती हैं, इसलिए उन्हें सही ढंग से पहचानने की जरूरत है। 👍
 
मुझे लगता है कि बच्चों का आईकेउ (IQ) टेस्ट करना बिल्कुल सही नहीं है, खासकर अगर हमने पहले सोचा होता कि यह एक अच्छा तरीका है अपने बच्चों को उनके भविष्य के रास्ते पर निर्देशित करना। ये टेस्ट बच्चों की स्मार्टनेस का पूरा माप नहीं लेता, और कई बार वे दबाव और तनाव में बच्चों को डाल सकते हैं।

मुझे लगता है कि हमें अपने बच्चों को उनकी रुचियों और क्षमताओं को समझने की जरूरत है, और उन्हें अपने लक्ष्यों को निर्धारित करने में मदद करनी चाहिए। अगर आपका बेटा क्लास 6 में पढ़ाई में कठिनाई होती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह एक अच्छा व्यक्ति नहीं बनेगा। हमें अपने बच्चों को समझने और उन्हें सपोर्ट करने की जरूरत है, न कि उन पर दबाव डालने की। 🤔
 
इक्सपीरिएंस फिल्टर के दो दोस्तों ने एक हाई स्कूल में मैथ और साइंस में बेहद अच्छे नहीं होने वाले बच्चों का IQ टेस्ट लिया था, उनके परिणाम्स बहुत उत्साहजनक थे, लेकिन जब उन्होंने पूछा तो क्या टेस्ट में अच्छा स्कोर करने से उनकी जिंदगी में खास बदलाव होता है? फिलाॅनस नहीं दिया। यह भी सवाल उठता है कि हम बच्चों को क्या सिखाना चाहते हैं और उन्हें कैसे सिखाएं।
 
क्या बिल्कुल! अगर हम बच्चों के एवरेज मार्क्स पर आधार पर उनकी पूरी छवि बनाने शुरू कर देते हैं तो यह बहुत ही खतरनाक है 🚨। बच्चे हर एक अलग होते हैं और उनकी रुचियों को समझना और उसके साथ साथ उनकी क्षमताओं को पहचानना बहुत जरूरी है। अगर हम उन्हें दबाव में डालते हैं तो वह अपनी खुशी और प्रेरणा खोने लगेंगे।

बच्चों को आराम करें, उनकी रुचियाओं को समझने की कोशिश करें और उन्हें उनके सपनों को पूरा करने का मौका दें। कोई भी बच्चा जिस चीज़ में अच्छा होता है वह उसमें हमेशा सफल होगा 🤔.
 
बच्चों के IQ टेस्ट करने से पहले उन्हें समझाने देना चाहिए कि यह जिम्मेदारी और दबाव की भावना नहीं लाती है। अगर बच्चे को पढ़ाई में थकान महसूस होती है तो उसे राहत देने की जरूरत है, न कि एग्जाम प्रेशर बढ़ाने। मैंने अपने बचों को हमेशा यही सिखाया है कि सफलता इंसानी है और हर कोई उसकी तरह नहीं होता।
 
क्लास 6 में पढ़ने वाले बच्चे में से कई बच्चे एवरेज मार्क्स दे सकते हैं लेकिन उनकी शिक्षा में कुछ खामियाँ नहीं होती 🤔। अगर आपका बेटा मैथ और साइंस में अच्छे नहीं है, तो सबसे पहले उसकी रुचियों को समझना चाहिए, क्योंकि शिक्षा में स्कोर करने से यहाँ पर सिर्फ एक तरफ देखना ठीक नहीं है 📚

कम मार्क्स के पीछे कई कारण भी हो सकते हैं, जैसे पढ़ाई में मन न लगना, टीचर या स्कूल का प्रेशर, डर या एग्जाम एंग्जाइटी, और इतनी सी बातें हैं जिन्हें समझना चाहिए और उन पर ध्यान देना चाहिए 😊

इसलिए, अगर आपका बेटा क्लास 6 में पढ़ रहा है, तो उसकी स्कोरिंग पर बहुत अधिक दबाव न लगाएं। इसके बजाय, उसे समझने और सपोर्ट करने का प्रयास करें, और उसे अपने रुचियों और क्षमताओं को पहचानने में मदद करें 🤗

बच्चों की स्मार्टनेस को एकमात्र मापदंड नहीं बनाना चाहिए, लेकिन यह जरूरी है कि उसकी रुचियों और क्षमताओं को पहचानने का प्रयास करें 🎨
 
अरे वाह, यह तो बहुत ही सही कहा, लेकिन क्या माता-पिता कभी सोचते हैं कि बच्चों को दबाव में न रखा जाए? तो अगर बच्चा पढ़ाई में थक गया, तो प्रेशर न लगाना सबसे अच्छा है, लेकिन क्या बच्चे की रुचियों को समझने की कोशिश करना इतना मुश्किल है? मेरे दोस्त का बेटा खेल में बहुत अच्छा है, लेकिन उसके पिताजी उसे डॉक्टर बनने के लिए मजबूर कर रहे हैं। यह तो नहीं समझते कि हर बच्चे की अपनी पहचान होती है और अपनी खास रुचियां होती हैं।

क्या हम कभी सोचेंगे कि बच्चों को दबाव में न रखा जाए और उनकी रुचियों को समझने की कोशिश करें। इसके बजाय, हम दोस्तों से पूछते हैं कि बच्चों के लिए सबसे अच्छा है और उनकी जरूरतों को समझने की कोशिश करते हैं। तो मेरी बात समझ आएगी।
 
ये तो सचमुच बहुत ही सही बात है... बच्चों का IQ टेस्ट करना ठीक नहीं है, यह उन्हें दबाव में लाने वाला है और उनकी रुचियों को नजरअंदाज करता है। मैंने अपने दोस्त के भाई का बेटा पढ़ाई में बहुत अच्छा स्कोर कराया, लेकिन वह अपने दिल में खेल खेलने का शौक है, और वह खुद को खुश रखता है... लेकिन जब उसने अपनी इच्छानुसार पढ़ाई करने वाला स्कूल चुना, तो उसके माता-पिता ने उस पर बहुत दबाव डालने लगे, और वह अब बिलकुल सहज नहीं है।
 
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