Padma Shri 2026: कौन हैं 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिद्धू, जिन्हें 26 जनवरी को मिलेगा पद्म श्री अवार्ड

पद्मश्री 2026 में पदाकांत होने वाले 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू की कहानी समाज सेवा और सेवनिवृत्ति के बंधन से जुड़ी हुई है। इस मामले में उनके नाम पर सवाल उठते हैं कि क्या एक व्यक्ति वर्दी उतारने के बाद भी जनसेवा का जज़्बा अपने दिल में रखता है और उसे उम्र को अंतिम सीमा मानकर नहीं छोड़ता।

पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू ने अपने करियर की शुरुआत 1971 में पुलिस अकादमी से की थी, जहां उन्होंने आरक्षित वर्गों के लोगों को पुलिस में भर्ती करने पर ध्यान केंद्रित किया था। इसके बाद वह आईपीएस अधिकारी बनकर 1991 में पंजाब पुलिस में शामिल हुए।

उन्होंने अपने करियर में कई सेवाएं दीं और समाज को लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी इस तरह से सेवा और समर्पण ने उन्हें एक आदर्श व्यक्ति बनाया।

अब, उन्हें पद्मश्री 2026 के अवार्ड से सम्मानित होने जा रहे हैं। यह अवार्ड उनकी अनहद सेवा और समर्पण को पहचानता है। हम उनकी कहानी को देखकर न केवल सम्मानित होते हैं बल्कि हमें भी प्रेरित करते हैं कि हम भी अपने जीवन में समाज के लिए कुछ करने का फैसला करें।
 
बच्चों को अगर पढ़ाई में कोई कमजोरी है तो उन्हें सिर्फ पढ़ाई न कराना चाहिए बल्कि उनकी कमजोरियां भी देखनी चाहिए और उसे समाप्त करना चाहिए जैसा इंदरजीत सिंह सिद्धू ने किया है। उन्होंने अपने जीवन में एक छोटी-मोटी गलती को देखकर बदलाव लाया और फिर उनकी जिंदगी बिल्कुल बदल गई। अब अगर हम भी ऐसा करें तो क्या होगा 🤔
 
બે જીવનમાં ક્યારેય સમય આપતો અને આખા સમાજ માટે સુધાર લાવતી એક સ્ત્રીની કહાણીઓ પડતી-થતી છે. આ પદ્મશ્રી 2026 વિજેતા, ઉપરાંત સર્વોચ્ચ નાગરિક અવાર્ડ જીવનભરમાં પ્રતિબદ્ધ થયેલી એક સ્ત્રીની વાત છે.

આમ, જે પોતાના હિતૈષ્ટ અને સંગૃહચિંતકતાથી લોકોને ફાયદો આપવા માટે સર્વગણિત અભિયાનો ચલાવે છે, એમ દર્શાવી શકે છે.
 
🙏 यह सच है कि जैसे ही हम अपनी युवावस्था में जीवन में पदक लगाते हैं, वैसे ही हमारे पास अपने देश और समाज की सेवा करने का मौका मिलता है। इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की कहानी हमें यही सबक सिखाती है कि उम्र की बारीकियों को नजरअंदाज करके, हम अपने देश और समाज की सेवा करने में निरंतरता और समर्पण बनाए रखें। 🙌
 
🤔 यह तो एक बहुत ही रोचक विषय है! पद्मश्री 2026 में पदाकांत होने वाले इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की कहानी ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। 📈 अगर हम उनके करियर की बात करते हैं तो देखें तो 1971 में पुलिस अकादमी से शुरुआत हुई थी, और फिर वह आईपीएस अधिकारी बनकर 1991 में पंजाब पुलिस में शामिल हुए। 🚔

📊 अगर हम उनकी सेवा की बात करते हैं तो देखें तो उन्होंने अपने करियर में कई लोगों की मदद की है और समाज को लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 🤝

📈 इसके अलावा अगर हम उनकी उम्र की बात करते हैं तो देखें तो 88 वर्ष की उम्र में पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित होने जा रहे हैं। 🤯 यह एक बहुत ही रोचक तथ्य है कि एक व्यक्ति अपने जीवन में इतनी सेवा और समर्पण करता है कि उनको उम्र को अंतिम सीमा नहीं मानी जाती। 💪

📊 अगर हम उनकी कहानी को देखते हैं तो यह हमें बहुत प्रेरित करता है कि हम भी अपने जीवन में समाज के लिए कुछ करने का फैसला करें। 🙏
 
क्या ये सचमुच देख रहे हैं? 88 वर्षीय पुरुष, अभी भी पद्मश्री जीतने के लिए तैयार है 🤣 और उम्र को अंतिम सीमा मानकर नहीं छोड़ना चाहता है। यह तो समाज सेवा की कहानी है! 😂

मुझे लगता है कि यह पद्मश्री अवार्ड वास्तव में उनकी अनहद सेवा और समर्पण को पहचानता है, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या एक व्यक्ति अपने जीवन के अंतिम दिनों तक भी जनसेवा में लगा रहता है? 🤔

मैंने पहले सोचा था कि योगी भाई निकाल देने वाले हैं, लेकिन तो यह पूर्व आईपीएस अधिकारी अभी भी सेवा करने में लगा हुआ है! 🙌

आपको लगता है कि उनकी कहानी हमें क्या सिखाती है? 😊
 
अरे, यह तो बहुत अच्छी बात है कि पद्मश्री अवार्ड 88 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू को मिल रहा है। लेकिन, यह सवाल उठता है कि उम्र को अंतिम सीमा मानकर नहीं छोड़कर, हमें अपने जीवन में समाज की सेवा करने का आग्रह रखना चाहिए। इंदरजीत सिंह सिद्धू ने अपने करियर में कई सेवाएं दीं और समाज को लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो उनकी एक आदर्श व्यक्ति बनाती है। हमें भी ऐसा ही करने का फैसला करना चाहिए, चाहे हम 20 या 80 वर्ष ki ho.
 
मुझे यह सुनकर बहुत खुशी हुई कि पद्मश्री 2026 में पदाकांत होने वाले इंदरजीत सिंह सिद्धू जी को उनकी अनहद सेवा और समर्पण को पहचान रहे हैं 🙏। मुझे लगता है कि उन्होंने अपने करियर में कितनी सेवाएं दीं और समाज को लाभ पहुंचाया, यह बहुत प्रेरक है। मैं उनकी कहानी पढ़ते हुए हमेशा अपने आप से पूछता हूं कि मैं भी ऐसा ही कर सकता हूं या नहीं। मुझे लगता है कि उन्होंने हमें दिखाया है कि एक व्यक्ति वर्दी उतारने के बाद भी जनसेवा का जज़्बा अपने दिल में रखता है।
 
मुझे लगता है कि पद्मश्री से सम्मानित होने वाले इंदरजीत सिंह सिद्धू की कहानी हमें सिखाती है कि उम्र सीमा तय हो जाने पर भी हमारी सेवा और समर्पण कभी नहीं कमता। उन्होंने अपने करियर में बहुत सारी सेवाएं दीं, इसलिए उनकी पद्मश्री की बात होने लगी, लेकिन इससे हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमें भी अपने जीवन में समाज के लिए कुछ करने का फैसला करना चाहिए।
 
अरे, ये बात सच है कि पद्मश्री अवार्ड लेने वालों में आयु को नहीं देखते 🤔, उनकी सेवा और समर्पण को मानते हैं | हमें भी यह सीखना चाहिए कि हर उम्र में अपने जीवन में कुछ करने का फैसला करें, न कि उम्र को अंतिम सीमा मानकर छोड़ना 🕊️। इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की कहानी हमें प्रेरित करती है कि समाज सेवा और सेवनिवृत्ति के बंधन से जुड़े रहना चाहिए, जो भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है ❤️। उनकी अनहद सेवा और समर्पण को पहचानते हुए पद्मश्री अवार्ड लेने वालों को हमें भी प्रेरित करना चाहिए 🙏
 
मुझे लगता है कि इस मामले में कुछ गलत नहीं हुआ है। पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू ने अपने जीवन में बहुत सेवा दी है, और पद्मश्री अवार्ड उनकी अच्छी काम को पहचानता है। लेकिन मुझे लगता है कि सरकार को यह नहीं तय करना चाहिए कि हमें कहीं भेजना चाहिए या नहीं। पूर्व अधिकारी ने अपने जीवन में बहुत सेवा दी, लेकिन अभी भी उनका परिवार कहां है, यह नहीं पता। 🤔
 
अरे, यह तो बहुत दिलचस्प बात है! 88 वर्ष की उम्र में पद्मश्री प्राप्त करना तो एक बड़ा सम्मान है, लेकिन उससे पहले उनकी सेवा और समर्पण की कहानी निकाल कर देखो, वह तो पूरी तरह से अद्भुत है। उन्होंने अपने जीवन में यह निश्चित कर दिया था कि वे समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं और उनका समर्पण और सेवा उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत बन गई।
 
यह बात बहुत गंभीर है कि एक व्यक्ति कितनी उम्र में भी पद्मश्री से सम्मानित होता है और वह अभी भी अपने दिल की गहराई से समाज सेवा को महत्व देता है। लेकिन यह सवाल उठना चाहिए कि क्या वास्तव में हमारी प्रगति कहीं अधिक है या हम अभी भी उसी स्थिति में हैं जहां से इंदरजीत जी ने शुरुआत की थी। उनकी कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपने दिलों में वास्तविक बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं या बस पद्मश्री जैसे अवार्ड मिलने पर खुश होकर समाज सेवा में निवेश करते हैं। उनकी कहानी हमें यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी प्रगति कहीं अधिक है या हम अभी भी उसी स्थिति में हैं जहां से इंदरजीत जी ने शुरुआत की।
 
मुझे यह सुनकर बहुत खुशी हुई कि पद्मश्री अवार्ड वाले 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू ने अपने जीवन में इतना देना और समर्पण दिखाया है। उनकी कहानी हमें बताती है कि कैसे उम्र को अंतिम सीमा नहीं मानना चाहिए, बल्कि समाज की सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाना चाहिए।

मुझे लगता है कि यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है, जिसने उन्हें एक आदर्श व्यक्ति बनाया है। उनकी सेवा और समर्पण ने समाज को लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुझे उम्मीद है कि उनकी कहानी हमारे देश के युवाओं को प्रेरित करेगी और उन्हें अपने जीवन में समाज के लिए कुछ करने का फैसला करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। 🌟
 
[मुस्कराते हुए] 🙃

😂👴 88 साल के बाद भी पद्मश्री पाना? यह तो हमारे देश की उन्नति की कहानी है! 🚀

🤔 इंदरजीत सिंह सिद्धू जी ने अपने करियर में बहुत सेवाएं दीं... और अब उनकी इस तरह से सेवा और समर्पण को पहचानने वाला पद्मश्री अवार्ड! 🏆

[मुस्कराते हुए] 🙃 यह तो हमें प्रेरित कर रहा है कि हम भी अपने जीवन में समाज के लिए कुछ करने का फैसला करें... और 88 साल की उम्र में भी! 😂👴
 
मुझे ये सुनकर हैरानी हुई कि 88 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू को पद्मश्री 2026 में पदाकांत होने वाले हैं। यह तो बहुत ही दिलचस्प है लेकिन मैं सोचता हूँ कि उनकी ये उपलब्धि तो हमेशा के लिए एक सवाल उठाती है। क्या पूर्व आईपीएस अधिकारी वर्दी उतारने के बाद भी जनसेवा का जज़्बा अपने दिल में रखता है? और उम्र को अंतिम सीमा मानकर नहीं छोड़ता। मुझे लगता हूँ कि इसके पीछे कुछ गहराई होनी चाहिए।
 
बोलो बोलो, यह सचमुच आश्चर्यजनक है कि इंदरजीत सिंह सिद्धू जी 88 साल की उम्र में पद्मश्री प्राप्त करने जा रहे हैं। यह तो एक बड़ा सबक है कि समाज सेवा और समर्पण को कभी भी उम्र को अंतिम सीमा नहीं मानना चाहिए। लेकिन सच्चाई यह है कि हमारी सामाजिक सेवा के दौरान हमें अपने जीवन को समग्र बदलने की जरूरत है, ताकि हमारी दूसरी पीढ़ी सुधार और नवीनता लाए। उनकी कहानी हमें प्रेरित करती है कि हम भी अपने जीवन में कुछ करने का फैसला करें, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि इंदरजीत सिंह सिद्धू जी को पद्मश्री अवार्ड मिलने के बाद क्या होगा, उनके पास अब कोई और सामाजिक सेवा करने का मौका नहीं रह जाएगा।
 
बड़े भाई, यह सचमुच इंदरजीत सिंह सिद्धू की कहानी बहुत प्रेरणादायक है। उनकी उम्र 88 होने पर भी उन्हें पद्मश्री से सम्मानित होना एक अद्भुत बात है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या उन्हें अपनी उम्र को अंतिम सीमा मानने की जरूरत नहीं थी?

मेरे विचार में, उनकी यशस्वी करियर और समाज सेवा की कहानी हमें प्रेरित करती है। लेकिन फिर भी, उम्र एक महत्वपूर्ण बात है। मुझे लगता है कि हमें अपनी उम्र को निर्धारित करने की जरूरत नहीं है, बल्कि हमें अपने जीवन में सेवा और समर्पण का मूल्य पहचानने की जरूरत है।

उनकी कहानी हमें यह भी सिखाती है कि एक व्यक्ति वर्दी उतारने के बाद भी जनसेवा का जज़्बा अपने दिल में रखता है। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश है, खासकर आजकल जब हमें समाज की समस्याओं को दूर करने की जरूरत है। 🙏
 
मुझे लगता है कि पद्मश्री अवार्ड को देने से पहले इसके पीछे की वजहों को देखना चाहिए। यह कहानी इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की है, लेकिन मुझे लगता है कि उनके योगदान को पहचानने के लिए हमें अपनी प्लेटफ़ॉर्म की आलोचनात्मक राय देनी चाहिए। 🤔

क्या हमारी प्लेटफ़ॉर्म पर सेवनिवृत्ति के बंधन और समाज सेवा के मुद्दों को बहुत ही सरल और प्रभावी ढंग से नहीं उठाया जाता? क्या हमें अपने संस्थापकों और नियामकों को यह बताने की जरूरत है कि हमारी प्लेटफ़ॉर्म पर इन मुद्दों को देखने का समय आया है? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि हमें अपनी प्लेटफ़ॉर्म को सुधारने की जरूरत है, न कि केवल पद्मश्री अवार्ड को देने की। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी प्लेटफ़ॉर्म पर सेवनिवृत्ति और समाज सेवा जैसे मुद्दों को बहुत ही महत्व दिया जाए। 💡

लेकिन, यह तो एक बात है... मुझे लगता है कि पद्मश्री अवार्ड की तरह किसी भी सम्मानित करने से पहले इसके पीछे की वजहों पर विचार करना चाहिए। 🙏
 
मुझे दिल से खेद है कि हमारे देश में ऐसे व्यक्ति को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने अपने जीवन में इतनी बड़ी गलती की। 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू ने आरक्षित वर्गों के लोगों को पुलिस में भर्ती करने पर ध्यान नहीं दिया था, जैसा कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में बताया था। यह एक बड़ा सवाल है कि क्या उनकी उम्र और पदाकांत होने से उन्हें अपनी गलती सुधारने का मौका मिलेगा।
 
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