भारत के देश की 113 हस्तियों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। इनमें ऐसे लोग हैं, जिन्होंने बिना सुर्खियों में आए समाज, संस्कृति, शिक्षा, पर्यावरण और मानव सेवा के क्षेत्र में दशकों तक काम किया। इन लोगों ने चमक-दमक से दूर, जमीन पर बदलाव लाया।
मध्य प्रदेश के भगवानदास रैकवार ने अपनी जवानी बुंदेली युद्ध कला को संरक्षित करने में बिता दी। छत्तीसगढ़ की बुधरी ताती 15 साल की उम्र से समाज सेवी में जुटी हैं। इसके चलते उन्होंने शादी भी नहीं की।
भगवानदास रैकवार, मध्य प्रदेश का भगवान दास बुंदेली युद्ध कला का एक महान ट्रेनर है। उनकी युवावस्था में उन्होंने बुंदेली युद्ध कला सीखी, जो मध्य प्रदेश के राज्य चित्रकलाओं में विशेष महत्व रखती है। वह अपने कौशल और दृष्टिकोण के कारण 'बुंदेली योद्धा' का खिताब भी जीते थे।
भगवानदास रैकवार की कहानी इस प्रकार है:
भगवानदास रैकवार एक महान बुंदेली कलाकार और ट्रेनर हैं। उनकी युवावस्था में उन्होंने बुंदेली युद्ध कला सीखी, जो मध्य प्रदेश के राज्य चित्रकलाओं में विशेष महत्व रखती है। वह अपने कौशल और दृष्टिकोण के कारण 'बुंदेली योद्धा' का खिताब भी जीते थे।
भगवानदास रैकवार ने अपने जीवन में बुंदेली कलाकृतियों को बहुत महत्व दिया। उन्होंने अपने जीवन के अधिकांश वर्ष इस कला से जुड़े हुए। वह अपने कौशल और प्रतिभा के कारण 'बुंदेली योद्धा' का खिताब भी जीते थे।
भगवानदास रैकवार ने अपने जीवन में कई सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 'बुंदेली कलाकृति' के लिए विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया था।
भगवानदास रैकवार ने अपने जीवन में बुंदेली युद्ध कला को बहुत महत्व दिया। उन्होंने अपने जीवन के अधिकांश वर्ष इस कला से जुड़े हुए। वह अपने कौशल और प्रतिभा के कारण 'बुंदेली योद्धा' का खिताब भी जीते थे।
भगवानदास रैकवार ने अपने जीवन में कई सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 'बुंदेली कलाकृति' के लिए विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया था।
मध्य प्रदेश के भगवानदास रैकवार ने अपनी जवानी बुंदेली युद्ध कला को संरक्षित करने में बिता दी। छत्तीसगढ़ की बुधरी ताती 15 साल की उम्र से समाज सेवी में जुटी हैं। इसके चलते उन्होंने शादी भी नहीं की।
भगवानदास रैकवार, मध्य प्रदेश का भगवान दास बुंदेली युद्ध कला का एक महान ट्रेनर है। उनकी युवावस्था में उन्होंने बुंदेली युद्ध कला सीखी, जो मध्य प्रदेश के राज्य चित्रकलाओं में विशेष महत्व रखती है। वह अपने कौशल और दृष्टिकोण के कारण 'बुंदेली योद्धा' का खिताब भी जीते थे।
भगवानदास रैकवार की कहानी इस प्रकार है:
भगवानदास रैकवार एक महान बुंदेली कलाकार और ट्रेनर हैं। उनकी युवावस्था में उन्होंने बुंदेली युद्ध कला सीखी, जो मध्य प्रदेश के राज्य चित्रकलाओं में विशेष महत्व रखती है। वह अपने कौशल और दृष्टिकोण के कारण 'बुंदेली योद्धा' का खिताब भी जीते थे।
भगवानदास रैकवार ने अपने जीवन में बुंदेली कलाकृतियों को बहुत महत्व दिया। उन्होंने अपने जीवन के अधिकांश वर्ष इस कला से जुड़े हुए। वह अपने कौशल और प्रतिभा के कारण 'बुंदेली योद्धा' का खिताब भी जीते थे।
भगवानदास रैकवार ने अपने जीवन में कई सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 'बुंदेली कलाकृति' के लिए विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया था।
भगवानदास रैकवार ने अपने जीवन में बुंदेली युद्ध कला को बहुत महत्व दिया। उन्होंने अपने जीवन के अधिकांश वर्ष इस कला से जुड़े हुए। वह अपने कौशल और प्रतिभा के कारण 'बुंदेली योद्धा' का खिताब भी जीते थे।
भगवानदास रैकवार ने अपने जीवन में कई सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 'बुंदेली कलाकृति' के लिए विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया था।