Pension: 26.46 लाख NPS कर्मियों में से केवल एक लाख ने चुना यूपीएस, इनमें नई भर्ती से 1749 तो 17463 रिटायर्ड पर्सन

केंद्र सरकार के एनपीएस कर्मचारियों ने 'यूपीएस' में शामिल होने के लिए तीन बार राजी नहीं हुए। जैसा कि पिछले साल बताया गया था, 14 अक्तूबर तक 24 लाख एनपीएस कर्मियों में से मात्र 97094 ने यूपीएस का विकल्प चुना। अब जानकारी के अनुसार, 1.3 लाख कर्मचारियों ने ही यूपीएस चुना है। नई भर्ती से आए 1749 और 17463 रिटायर्ड पर्सन भी इस योजना में शामिल हो गए हैं।

केंद्र सरकार ने गत वर्ष एक अप्रैल से 'यूपीएस' को लागू किया था। प्रारंभ में एनपीएस वाले केंद्रीय कर्मियों को 30 जून तक यूपीएस का विकल्प चुनने का समय दिया गया, लेकिन यह आंकड़ा, कुल पात्र केंद्रीय कर्मचारियों का सिर्फ 1.37 प्रतिशत रहा। इसके बाद सरकार ने आखिरी तिथि को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया।

एनपीएस कर्मचारियों ने यूपीएस में आने के लिए राजी नहीं हुए। उनकी एक ही मांग थी कि उनके लिए पुरानी पेंशन 'ओपीएस' बहाल की जाए। कर्मचारियों की स्पष्ट अनिच्छा दिखाई देती है कि वे यूपीएस में शामिल नहीं हो रहे हैं।

महाराष्ट्र राज्य जुनी पेन्शन संघटना के राज्य सोशल मीडिया प्रमुख विनायक चौथे ने कहा है कि यूपीएस, फेल साबित हुई है। तीन बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद अभी तक महज चार फीसदी कर्मचारियों ने ही यूपीएस का विकल्प चुना है।

केंद्र सरकार में 1 जनवरी के डेटा के अनुसार, 26.46 लाख कर्मचारी एनपीएस में हैं। 18 जनवरी तक 103735 सेवारत कर्मियों ने यूपीएस का विकल्प चुना है। इनमें सिविल डिपार्टमेंट के 41350, डाक विभाग के 19281, टेलीकॉम के 360, रेलवे के 30836 और डिफेंस सेक्टर के 11881 कर्मियों ने यूपीएस चुना है।
 
अरे, यूपीएस में शामिल होने की तीन बार भी कहीं नहीं जाना, यह बहुत दिलचस्प है 🤔। पुरानी पेंशन 'ओपीएस' निकाल लेना तो एक अच्छा विचार था, लेकिन लगता है कि एनपीएस कर्मचारियों में से बहुत से लोग इस पर विश्वास नहीं करते 🤷‍♂️। 3% की आंकड़ी तो बहुत कम, यह दर्शाता है कि क्या एनपीएस वास्तव में अधिक बेहतर है? और अगर नहीं, तो फिर क्यों इतनी देर तक इस पर तरक्की करने की कोशिश की जा रही थी? 🤔
 
सब से ज्यादा पुरानी पेंशन वाले लोगों को सबसे ज्यादा फायदा 'यूपीएस' में शामिल होना चाहिए ताकि उनके अनुभव से और भी कुछ नया और बेहतर किया जा सके। 🤔

मेरा राय है कि एनपीएस में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले लोग 'यूपीएस' में शामिल होने की जगह अपने-अपने क्षेत्रों में एक अच्छा काम करना चाहिए।

नए युग में हमें अपने देश के प्रति और भी जिम्मेदार बना रहना चाहिए, इसलिए हमें सोचकर कुछ नया और बेहतर करने की जरूरत है।
 
यह बात बहुत अजीब है कि क्यों एनपीएस में शामिल नहीं हुए? मैं समझता हूं कि पुरानी पेंशन 'ओपीएस' बहाल करने की मांग तो अच्छी है, लेकिन 1.3 लाख से कम शामिल होने का यह आंकड़ा बहुत बड़ा है। मुझे लगता है कि सरकार को यह देखना चाहिए कि क्यों इतनी संख्या में कर्मचारियां यूपीएस नहीं चुन रही हैं। शायद सरकार को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना चाहिए।
 
यह तो बहुत अजीब लग रहा है... एनपीएस कर्मचारी तो कहीं नहीं जाने देना चाहते हैं अपना पैसा 'यूपीएस' में रखना चाहते हैं। पुरानी पेंशन सिस्टम को फिर से शुरू करने की बात करते हुए भी, वे तो नहीं जानते कि यह कैसे चलेगा। 1.3 लाख कर्मचारियों ने यूपीएस चुना है, यह आंकड़ा तो बहुत कम लगता है। मुझे लगता है कि सरकार को थोड़ी सी सोच और समझने की जरूरत होगी, ताकि वह जिस परिस्थिति को तैयार कर रही है, वह सही दिशा में चले।
 
तो फिर इतनी ज्यादा कोशिश क्यों नहीं की जा रही थी, हमारे भाइयों और बहनों को लेकर सरकार की ध्यान देने का। 1.37 प्रतिशत यूपीएस चुनने वाले तो सिर्फ इतने ही कर्मचारियों की बात है, यह तो हमारे देश की वरिष्ठता को दर्शाता नहीं है। जिन लोगों ने चुनाव में भाग लेने का फैसला किया, उनके पास और भी बहुत सारे सवाल हैं, यूपीएस में शामिल होने के बाद हमें क्या उम्मीद करनी है?

तो कहिए, सरकार को हमें पूरी जानकारी देनी चाहिए, जैसे कि यूपीएस में शामिल होने से हमें किन समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। और हमें इसके लिए कौन से समाधान मिलेंगे। सरकार को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है, हमारे कर्मचारियों की ज़रूरत है। 🤔
 
मैंने देखा है कि एनपीएस वाले लोग तो खुश नहीं हैं की उन्हें यूएसीपीएस में आने का मौका मिला। उनकी बात समझ में आती है, अगर पुरानी पेंशन 'ओपीएस' बहाल ना होती। मेरे दादा और दादी को भी पुरानी पेंशन मिलती थी, इसलिए उन्होंने सोचा तो यह अच्छा है और अब युवाओं को भी इस पर विचार करना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि यूपीएस में शामिल होने की बात बड़ा फ्लड हुआ। क्या कोई कर्मचारी वास्तव में रुकने की जरूरत नहीं थी? 1.3 लाख कर्मियों ने चुनाव में भाग लेने के बजाय, हमें उम्मीद थी कि हर एक कर्मचारी इस योजना से जुड़े। अब क्या हुआ? कुछ ऐसा नहीं है तो क्या?
 
🤔 यह तो बहुत दिलचस्प बात है कि एनपीएस कर्मचारी 'यूपीएस' में शामिल नहीं हो रहे। पूरा माह जुलाई, अगस्त और सितंबर तक 30 जून से लेकर 30 सितंबर तक समय दिया गया था। इसके बावजूद केवल 1.3 लाख कर्मचारी ही यूपीएस का विकल्प चुन रहे हैं। यह तो जरूर एक बड़ा मुद्दा है। 🤝

मेरा सोचकरा है कि यूपीएस को शुरू करने से पहले सरकार ने अपने कर्मचारियों से बहुत बात नहीं की थी। एनपीएस वाले कर्मचारियों की खास मांग थी कि उन्हें पुरानी पेंशन 'ओपीएस' को फिर से शुरू करना चाहिए। लेकिन सरकार ने इसकी बात नहीं मानी। 🤦‍♂️

अब जब देखा जा रहा है कि केवल 1.37 प्रतिशत केंद्रीय कर्मचारियों ने यूपीएस का विकल्प चुना, तो यह जरूर एक बड़ा संकेत है। सरकार को इस पर अच्छी तरह से विचार करना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि यूपीएस में शामिल होने से पहले एनपीएस कर्मचारी बहुत दिन बिताने पड़े थे। मेरे दादाजी ने भी अपने जीवनकाल में कई तरह की नई बदलावों का सामना किया, लेकिन हमेशा तैयार रहना जरूरी होता है। इस समय की सरकार ने एनपीएस और यूपीएस दोनों की शुरुआत की, लेकिन कर्मचारियों में स्वागत नहीं आया। मुझे लगता है कि अगर हमारे पास अपने विकल्पों पर अधिक विचार करने का समय था, तो शायद यह सब आसान हो गया।
 
नतीजा ज्यादा अच्छा नहीं दिख रहा है 🤔। लोग तो फिकर में पड़ गए, पुरानी पेंशन की बात सुनकर समझ आए कि क्यों राजी नहीं हुए।
 
अरे यार, यह तो वाकई दिलचस्प! ये एनपीएस कर्मचारी तो अपनी पुरानी पेंशन 'ओपीएस' की बात करने में इतने रूठे गए हैं कि अब यूपीएस में शामिल नहीं होना भी उनकी पसंद बन गई है 🤷‍♂️

और तीन बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद अभी तक चार फीसदी कर्मचारियों ने ही यूपीएस का विकल्प चुना है, यह तो दिलचस्प है... लेकिन लगता है कि सरकार ने पहले ही अपना मक्का खो डाल दिया है 😂

महाराष्ट्र राज्य जुनी पेन्शन संघटना के विनायक चौथे जी ने कहा है कि यूपीएस, फेल साबित हुई है, और मैं तो उनकी बात से सहमत हूँ... यह तो सरकार की दिलचस्प योजना है! 🤯
 
बिल्कुल सही है यह आंकड़ा, एनपीएस कर्मचारियों में से केवल छोटी संख्या ही यूपीएस में शामिल हो रही है, यह एक बड़ी चिंता का विषय है। उनकी एकमात्र मांग थी पुरानी पेंशन 'ओपीएस' बहाल करने, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अब जब 3 बार समय सीमा बढ़ा दी गई है तो भी, केवल चार फीसदी कर्मचारियों ने यूपीएस का विकल्प चुना है। यहां तक कि पूर्व सरकार और समाज में इस योजना का समर्थन भी नहीं हो रहा है, लगता है कि यह वास्तव में एनपीएस कर्मचारियों के लिए सहायक नहीं साबित होगी।
 
नहीं तो यूपीएस में क्यों शामिल नहीं हुए? यही सवाल हमारे देश के लिए बहुत ही चिंताजनक है 🤔। एनपीएस कर्मचारियों ने तीन बार राजी नहीं हुए, लेकिन सरकार ने फिर से आखिरी तिथि बढ़ा दी और अभी भी इतने कम लोग इसका विकल्प चुन रहे हैं। यही सवाल उठता है कि हमारे देश में क्यों इतनी अनिच्छा है? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि एनपीएस कर्मचारियों की एक ही बात थी, जो कि उनकी पुरानी पेंशन 'ओपीएस' बहाल करने की मांग थी। लेकिन सरकार ने इसकी सुनने में नहीं दिखाई। अब यह सवाल उठता है कि हमारे देश के भविष्य कैसे देखें? 🌟

मेरा मानना है कि हमें एनपीएस और यूपीएस की समस्याओं पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। सरकार को यह सुनने की जरूरत है कि हमारे कर्मचारियों की अनिच्छा क्यों हुई, और इसके लिए समाधान खोजने की जरूरत है। 🤝
 
बिल्कुल सही है कि एनपीएस में शामिल होने के लिए तीन बार राजी नहीं हुए। यह तो जरूरी है कि सरकार पुरानी पेंशन 'ओपीएस' की व्यवस्था करे। यूपीएस में शामिल होने से उनकी पेंशन को कम करने की बात नहीं है, लेकिन उनकी पेंशन को समान बनाए रखने की। तीन दशमिकें में समय बढ़ाने के बावजूद भी केवल चार फीसदी कर्मचारियों ने ही यूपीएस का विकल्प चुना। यह तो सरकार को सोचने पर मजबूर करता है।
 
मुझे लगता है कि यूपीएस में शामिल होने की बात बड़ी थी, लेकिन अब क्या जुड़वां बनकर रह गए! 14 अक्तूबर तक तो सिर्फ एक लाख 97094 कर्मियों ने ही यूपीएस चुना, लेकिन अब 1.3 लाख कर्मियों ने शामिल होने का फैसला किया। यह अच्छी बात है कि कुछ कर्मी ने यूपीएस में शामिल होने का फैसला किया, लेकिन इतने कम संख्या में तो लगता है कि कुछ भी नहीं हुआ!

मुझे ये सवाल है, कि क्यों इतने कर्मियों ने शामिल होने में रुचि नहीं ली। यह जानना दिलचस्प होगा, कि उन्होंने कहाँ से इस बात की बात की, कि वे यूपीएस में शामिल नहीं हो रहे हैं। अगर पुरानी पेंशन 'ओपीएस' बहाल की जाए, तो फिर क्यों ने चुना?
 
अरे दोस्तों ने, एनपीएस में शामिल होने की बात कर रहे हैं तो क्या? पहले तो राजी नहीं हुए, फिर तीन बार समय सीमा बढ़ा दी, लेकिन अभी तक चार फीसदी पुरुष ही यूपीएस में शामिल हो गए। यही जानकारी है कि क्या केंद्र सरकार ने सही मायनों में विचार किया?
 
इन दिनों एनपीएस वाले लोगों ने यूपीएस में आने की बात नहीं की, तो क्या सरकार हैरान है? यूपीएस में जाने के लिए कुछ भी बदलने की जरूरत नहीं, बस पुरानी पेंशन सिस्टम 'ओपीएस' बहाल कर दीजिए तो सब खुश हो जाते। अब एनपीएस वालों ने तीन बार मौका दिया, लेकिन फिर भी कोई नहीं आया। यूपीएस वाले कर्मचारी अच्छे होते हैं और वे अपने पद से प्रेम करते हैं, लेकिन सरकार उन्हें इतनी जटिलताओं में उलझा दे रही है। 🤔😕
 
नर्सरी चिड़ियों को भी समझ में आता कि यूपीएस में शामिल होने में एनपीएस कर्मचारियों को तीन बार राजी करना आसान नहीं था। उनकी एक सी मांग थी कि पुरानी पेंशन 'ओपीएस' वापस लाई जाए, लेकिन सरकार ने तो फिर ही कह दिया, 'तुम लोगों की बात नहीं मानना' 🤔 https://www.ndtv.com/india-news/nps-mps-aadhaar-sarkar-se-wapsi-bhi-nahi-hui-2064309
 
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