कोई बात नहीं, सायटिका की समस्या तो देश भर में वायरस जैसी है। हर दिन नए-नए मामले आ रहे हैं और लोगों को दर्द की आवाज में पड़ना ही नहीं बल्कि बेघेर होना भी पड़ रहा है।
मैंने अपने दोस्त को पता कराया तो वो जैसे ही कोई चीज पर क्लिक किया उसे सिरदर्द आ गया। पूरी तरह से गंभीर नहीं लगा, लेकिन फिर भी डॉक्टर ने कहा कि इससे पहले इलाज कराना चाहिए। मैं समझता हूं, अगर हमारी स्क्रीन पर दिखाई देने वाली चीजें वास्तविक चीजें नहीं होती, तो क्या करें?
लेकिन इसके अलावा, लोगों को यकीन करना पड़ता है कि उन्हें सायटिका नहीं लगी। यह एक बड़ी समस्या है। जब हमारी चीजें वास्तविकता से अलग होती जाती हैं तो कैसे पता चलता है कि हम किसी भी चीज में फंस गए हैं?