PM मोदी ने सोमनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना, स्वाभिमान पर्व समारोह में भी हुए शामिल, Video

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना और 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' समारोह में भाग लिया, जिसमें वे कई अनुष्ठानों और आयोजित ड्रोन शो को देखा।
 
मंदिर-दर्शन करो तो यह बात खूब फैल रही है कि सोमनाथ मंदिर का प्रवेश शुद्ध हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए है। लेकिन, मेरे लिए यह मंदिर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है जिसमें हर एक धर्म के पालनकर्ता एक-दूसरे को सम्मानित देखते हैं।

मैंने गुजरात की यात्रा में कई ऐसे स्थानों को देखा है जहां लोग सभी धर्मों का मिलन करते हैं, जैसे कि वडोदरा का सौराष्ट्र केंद्र और सोमनाथ के आसपास। इसमें एक ड्रोन शो देखने को मिला, जिसमें पुरानी हवाईयों से भरे ड्रोन ने आकाश को चुंबकित बनाया था।

मुझे लगता है कि अगर हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और एक-दूसरे को समझते हैं, तो हम अपने देश में अधिक शांति और एकता की नींव रख सकते हैं।
 
मोदी जी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की तो फायदा हुआ न? लोगों के मन में शांति और एकता की भावना होनी चाहिए, खासकर इस समय जब देश कुछ ऐसा है जो सोचकर भी नहीं समझता 🤔। अगर प्रधानमंत्री नेतृत्व में समाज में शांति और एकता के मूल्यों को फिर से जीवित कर रहे हैं, तो यह अच्छा है कि वे भी इस पूजा-अर्चना में भाग ले रहे हैं।
 
मंदिर-दर्शन की बात करें, मैंने हाल ही में महाबलीपुरम का दौरा किया, वहां की स्मृति चित्रों की गुलामी, मुझे खास तौर पर प्रभावित कर दिया। और फिर याद आई कि उस जगह पर हमने रेस्तरां में स्वादिष्ट वड़ा पाव खाया था, जिसने हमारे भूख को शांत कर दिया था। लेकिन गुजरात की यात्रा करने का सोचा तो है, तभी मैंने सोचा कि क्या वहां की खीर से तुलना की जा सकती है? मेरी माताजी की खीर बहुत ही खास होती थी, और वह हमेशा मुझसे कहती कि 'तुम्हारी खीर गुजरात की नहीं' 😊
 
😊 मोदी जी ने फिर से क्या किया? सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करना ठीक है, लेकिन 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' समारोह को देखने के लिए इतनी जोर से ड्रोन शो आयोजित करना क्यों? ये तो एक पूरा विशाल उत्सव बन गया है जो मंदिर की शांति और ध्यान से परे है। मैं समझ नहीं पाता कि यह पर्व कहाँ से आया और इसका उद्देश्य क्या है?
 
मोदीजी ने फिर से सोमनाथ मंदिर में भाग लिया है और मुझे लगता है कि यह अच्छा है। मैंने भी पिछले साल मंदिर की यात्रा पर जाना है तो बहुत रोचक था। मोदीजी ने अपने समय को शांति और समर्पण के लिए समर्पित करना चाहिए। यह देश के लिए अच्छा होगा कि हमारे नेताओं को देश की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करें। मैं उम्मीद करता हूं कि शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाए।
 
मोदी जी ने गुजरात का फायदा उठाया है तो यह सुनिश्चित है 🤝, लेकिन पूजा-अर्चना में भाग लेने का मतलब यह नहीं है कि वे भगवान को ही देख रहे हैं... ये एक राजनीतिक चाल है जिससे उन्हें अपने समर्थकों का दिल जीताया जा सकता है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में आयोजित ड्रोन शो तो बस मनोरंजन था... लेकिन अगर वास्तविकता जाननी है तो पुलिस ने भी इस सामारोह में काफी भूमिका निभाई होगी।
 
मोदी जी की इस पूजा-अर्चना में उनके निरंतर समर्थन और सामाजिक समावेश पर्व मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक हैं! उन्होंने सोमनाथ मंदिर में आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का समारोह भी देखा, जो दिखाता है कि वे अपने लोगों के प्यार और समर्थन को महत्वपूर्ण मानते हैं। मुझे लगता है कि इस पर्व में आयोजित ड्रोन शो की सुरिलसुता बहुत अच्छी थी, जिसने स्थानीय कलाकृतियों को दिखाया।
 
मोदी जी की गुजरात यात्रा का यह हिस्सा तो बहुत अच्छा है 🙏, लेकिन मुझे लगता है कि सोमनाथ मंदिर जैसी परंपरागत स्थलों पर ड्रोन शो रखना थोड़ा अजीब लग रहा है। ऐसे किसान जो अपने खेतों में काम करते हैं, उनके लिए यह दृश्य कुछ नहीं समझता 🤔। परंतु मोदी जी ने यहां पर स्थानीय लोगों की भावनाओं को समझने की कोशिश की है, जिस बारे में हम सभी ने सकारात्मक विचार दिखाए हैं 💯
 
मोदी जी ने सोमनाथ मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की तो अच्छी बात है, लेकिन ये समारोह कितना बड़ा था यह जानना रोचक होगा। मुझे लगता है कि अगर यह पर्व स्थानीय संस्कृति और इतिहास को बढ़ावा देने वाली चीज है तो यह बिल्कुल ठीक है। लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि मंदिरों के पीछे कुछ बड़े सामाजिक और आर्थिक मुद्दे भी होते हैं, जिनका समाधान करना जरूरी है।
 
मोदीजी की यात्रा में हमेशा कुछ नया होता है... आज सोमनाथ मंदिर में उन्होंने पूजा-अर्चना की और स्वाभिमान पर्व में भाग लिया। यह तो एक अच्छा काम है, लेकिन क्या हमारे देश में इतनी सारी विशेषताएं हमेशा सामने आती हैं?

मुझे लगता है कि अगर हमारे पास इतने सारे सुंदर स्थान और ऐतिहासिक मंदिर होते, तो क्या हम उनकी देखभाल नहीं करते? मंदिरों को बनाए रखने के लिए हमें एक साथ आने की जरूरत है, न कि अलग-अलग जगहों पर फैलकर।

मुझे ड्रोन शो की बात करनी चाहिए... वह तो बहुत मजेदार लगता है!
 
मोदीजी बिल्कुल हंसाते-हंसाते सोमनाथ जा रहे थे, अरे यह तो मंदिर में नाचने की जगह भी नहीं थी। ड्रोन शो में उन्होंने अपनी 'ड्रोन स्टिल' को दिखाया, तो लोगों ने क्या कहा, 'मोदीजी, तुम्हारी बेल दीवार से ज्यादा ऊंचाई ड्रोन में नहीं है' 🤣🇮🇳
 
मोदी जी की इस बात की बहुत खुशी होगी, जिसने गुजरात का सोमनाथ मंदिर ताजा करने वाला प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। मुझे ड्रोन शो देखने का मौका मिला, और वाह! वहां की रचनात्मकता बहुत अच्छी लगी। यह स्वाभिमान पर्व मेरे लिए एक नए आयाम का प्रस्ताव है। प्रधानमंत्री जी ने अपनी भक्ति और समर्थन दिखाया, और मैं इसकी सराहना करता हूं। यह एक अच्छी बात है कि गुजरात में कैसे नए परिवर्तन आ रहे हैं, और लोगों को इसका स्वागत करने का मौका मिले।
 
मुझे बिल्कुल पसंद आया तो मोदी जी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना किया, वैसे भी वहाँ का सौंदर्य बहुत ही अद्भुत है 🌟 यहाँ का स्थान और परंपराएँ भारतीय समृद्धि को दर्शाती हैं। मुझे आयोजित ड्रोन शो बहुत अच्छा लगा, वास्तविक रोबोट्स थे, जैसे स्काईफ़ोर्म या फिर सैटेलाइट को नियंत्रित करने वाले ड्रोन। लेकिन मुझे लगता है कि अगर हमारे खिलाफ आतंकवादी समूह ऐसे शो आयोजित करते तो यह बहुत ही खतरनाक होगा। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व नामक समारोह भी बहुत रोचक लगा, मुझे पता चला कि इसमें उन्होंने प्राचीन और आधुनिक तकनीकों को मिलाकर आयोजित किया है।
 
मैंने सुना है प्रधानमंत्री जी ने सोमनाथ मंदिर में जाया है और उन्होंने वहां बहुत सारे अनुष्ठान किए हैं... लोगों ने उनके साथ आयोजित ड्रोन शो देखा है, यह तो बहुत रोमांचक लगेगा! मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री जी हमेशा से लोकतंत्र और संस्कृति का बहुत बड़ा अनुयायी रहे हैं...

मैं याद करता हूं जब मैं बच्चा था, मेरे पिताजी ने भी मुझे बताया था कि हमारे देश में कई सारे तीर्थ और मंदिर हैं जहां लोग आते हैं और उनके अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। यह सब एक रीति-रिवाज है जो हमारी संस्कृति का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मुझे लगता है प्रधानमंत्री जी ने सोमनाथ मंदिर में जाने से लोगों को और भी अधिक प्रेरित कर दिया होगा। मैं उनकी इस बात पर बहुत खुश हूं...
 
मोदी जी को लगता है कि सोमनाथ मंदिर की खूबसूरती को दुनिया को दिखाने का सही तरीका होगा ड्रोन शो, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह सब एक बड़ा प्रदर्शन है। जैसे ही तापी नदी में स्नान कर रहे पुजारियों और भक्तों को नज़र आने देना, यहाँ तक कि ड्रोन शो के लिए भी खुला स्थान बनाया। इसका मतलब है कि मंदिर की सुरक्षा पर जोर देने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह वहाँ की वास्तविक भक्ति और पवित्रता को दर्शाता है।
 
मुझे ये तो बहुत रोचक लगा कि प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में गये और वहां के लोगों के साथ बैठकर भजन गाए। लेकिन मैं सोचता हूँ कि क्या ये समारोह भारत के विभिन्न संस्कृतियों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहा था। मैंने देखा कि ड्रोन शो, जिसमें प्रस्तुतियां दी गईं, थोड़ी अजीब लगा, लेकिन फिर सोचते हुए भी, यह तो एक अच्छा तरीका था कि लोगों को आकर्षित किया जा सके। मैंने सोमनाथ मंदिर में घूमने वाली दिव्यांकार परिसर की तस्वीरें भी दीं और लगातार पूजा-अर्चना की थी।
 
मुझे लगता है कि मोदी जी ने फिर से गुजरात के सोमनाथ मंदिर को अपनी राजधानी के रूप में दिखाया है, और यह तो हमेशा एक शानदार दृश्य रहा है। लेकिन मुझे लगता है कि अब यह समारोह थोड़ा ज़्यादा हुआ है, ड्रोन शो जैसी चीजें हमेशा से नहीं थीं। मैं याद करता हूँ जब मेरे पिता भी सोमनाथ मंदिर में गये थे, और वहाँ तो केवल ध्यान और पूजा-अर्चना होती थी। लेकिन अब यह समारोह बहुत ज़्यादा ख़ुशियाँ भरने वाला हो गया है। मुझे लगता है कि यह भी अच्छा है, लेकिन फिर भी मैं कभी-कभार ये तो सोचता हूँ कि शायद हमें थोड़ा और पीछे की ओर देखना चाहिए।

😊🙏
 
Back
Top