PM Modi on Mamata Banerjee: पीएम मोदी के विकसित भारत वाले बयान पर बवाल, कांग्रेस ने खोला मोर्चा!

प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत' वाले बयान पर पूरा देश बोल रहा है, लेकिन उनके इस दावे पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी कहते हैं, "प्रधानमंत्री मोदी को यह समझना चाहिए कि 'विकसित भारत' जैसे बड़े विजन की बात करना असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है।"

उनका कहना है, "प्रधानमंत्री मोदी चुनाव प्रचार करने आए थे, उद्योग स्थापित करने नहीं, क्योंकि अगर उनका ऐसा इरादा होता तो वे इतने साल इंतजार नहीं करते. लेकिन चुनाव के मौसम में इस तरह की बयानबाजी करना उन्हें सुविधाजनक लगता है। दो इंजन वाली सरकारों से शासित राज्यों में लोग परेशान हैं; बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश को देखिए।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार कहा है कि उनकी सरकार ने विकसित भारत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी कहते हैं, "प्रधानमंत्री मोदी खुद एक बड़े ड्रामेबाज हैं और ड्रामे के मामले में उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता।"

उनका कहना है, "विकसित भारत जैसे बड़े विजन की बात करना असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है। प्रधानमंत्री मोदी को यह समझना चाहिए कि उनकी सरकार की नीतियों में देश के प्रवासी मजदूर और गरीब वर्ग के लिए वास्तविक न्याय की कमी है।"

कांग्रेस नेता अक्सर यह तर्क देते हैं कि 'विकसित भारत' के विजन में केवल बड़े कॉरपोरेट्स का भला हो रहा है, जबकि मध्यम वर्ग और बेरोजगार युवा आज भी संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, 2047 का लक्ष्य दिखाना वर्तमान की विफलताओं (जैसे बेरोजगारी और महंगाई) को छिपाने का एक तरीका है।
 
मुझे लगता है कि सरकार की आर्थिक नीतियों में सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देना चाहिए, लेकिन अब तक यह तो बस शब्दों में फंस गया है। प्रधानमंत्री जी के 'विकसित भारत' वाले बयान पर बात करने से लोगों को कोई और मदद नहीं मिलेगी।
 
क्या प्रधानमंत्री मोदी का 'विकसित भारत' वाला बयान देश को वास्तव में विकसित बनाने की दिशा में नहीं है? 🤔 उनकी सरकार ने देश के गरीब वर्ग और प्रवासी मजदूरों की मदद करने के लिए क्या कदम उठाए हैं? 🚧 बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में दो इंजन वाली सरकारों से शासित लोग कितने परेशान हैं? 😩 कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की बात समझना भी जरूरी है, वह सीधे ही कह रहे हैं कि 'विकसित भारत' वाले बयान में बड़े कॉरपोरेट्स का फायदा हो रहा है और मध्यम वर्ग और बेरोजगार युवाओं की परेशानियों को छिपाया जा रहा है। 🤝
 
मोदी जी का 'विकसित भारत' बयान तो बस चुनाव प्रचार की तरह सुनाया देता है, लेकिन वास्तविकता वहीं है कि बिहार, ओडिशा, और उत्तर प्रदेश में कैसा माहौल है। उनके सरकार ने तो उन राज्यों में उद्योग स्थापित करने की कोशिश नहीं, बस चुनाव लेने के लिए. और जब विकास पर बात करते हैं तो प्रवासी मजदूर और गरीब वर्ग की बात करना उन्हें फुसफुसाने में अच्छा लगता है। लेकिन सच्चाई यह है कि 'विकसित भारत' जैसा विजन केवल बड़े कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाने की बात नहीं है, बल्कि मध्यम वर्ग और बेरोजगार युवाओं की संख्या बढ़ रही है।
 
मोदी जी की 'विकसित भारत' नीति पर तो लोग बोल रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह सिर्फ चुनाव के मौसम में बयानबाजी करने का एक तरीका है। प्रधानमंत्री जी की सरकार ने क्या वास्तविक बदलाव लाए है, इसका जवाब अभी तक नहीं दिया गया है।
 
मुझे लगता है कि हमें अपने देश के विकास पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन हमें ऐसी बातों से बचना चाहिए जो लोगों को भ्रमित करती हैं और उनके मुद्दों से दूरी बनाए रखती हैं। 🤔

मेरे दिल की बात करना चाहता हूं, हमें अपने देश के विकास के लिए एक-एक छोटे से कदम उठाना चाहिए, न कि बड़े-बड़े बयानबाजी में फंसना। 🚧

उम्मीद है, हमें अपने देश को विकसित बनाने के लिए एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। 🌈
 
🤔 मुझे लगने लगा है कि प्रधानमंत्री मोदी जी के 'विकसित भारत' वाले बयान पर कांग्रेस नेताओं द्वारा उठाए गए सवालों से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मुझे लगता है कि सरकार की योजनाओं में वास्तविक लोगों की बात करनी चाहिए, न कि केवल बड़े कॉरपोरेट्स का। 🤑 पिछले कुछ सालों से देश में बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार द्वारा इनको हल करने की कोई ठोस योजना नहीं है। 🤷‍♂️
 
मैंने पढ़ा है कि भारत में बेरोजगारी बहुत ज्यादा बढ़ गई है, फिर देश में प्रधानमंत्री ने 'विकसित भारत' वाला बयान दिया है... मुझे लगता है कि यह बयान सिर्फ चुनाव में अपने लिए सुविधाजनक हो रहा है, फिलहाल पूरा देश कितना विकसित हुआ है? भारत के बेरोजगार युवाओं और गरीबों की क्या हालत है?
 
मोदी जी अपने 'विकसित भारत' बयान से सचमुच देश में लोगों को बहुत खुश कर रहे हैं ना? 🤔 लेकिन वास्तविकता यह है कि उनकी सरकार ने देश के गरीब और परिवासिक मजदूर वर्ग के लिए क्या किया है? ये सब प्रचार के लिए ही नहीं बल्कि चुनाव के मौसम में ऐसा बयान देने से बचने का एक तरीका भी हो सकता है। प्रधानमंत्री जी अपनी सरकार की नीतियों और परिणामों पर सच्चाई बता कर नहीं बोल रहे हैं। 🤷‍♂️
 
मोदी जी की 'विकसित भारत' की बात सुनकर मुझे बहुत परेशानी होती है 🤦‍♂️। उनकी सरकार ने कई सालों से लोगों को आश्वासन दिया है कि वे एक 'विकसित भारत' बनाएंगे, लेकिन आज तक हमें कोई जवाब नहीं मिल पाया है। 🤔

मेरी राय में, 'विकसित भारत' जैसी बड़ी बातें सुनकर लगता है कि सरकार को बस अपने चुनावों में जीतने के लिए बोलती है, नहीं कि वास्तव में देश को लाभ पहुंचाने के लिए 🗳️। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने बहुत सारी बड़ी घोषणाएं की हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश वास्तव में परिणाम नहीं दे पाया है। 😐

जैसे हम ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में देख रहे हैं जहां दो इंजन वाली सरकार से शासित लोग बहुत परेशान हैं। 🤯 इन जगहों पर कोई विकसित भारत नहीं बन पाया है, बस अपने चुनावों में जीतने के लिए बोलता रह गया है। 😡
 
मोदी जी को यकीन करना चाहिए कि देश में गरीबों की सेहत खराब हो रही है 🤒, लेकिन विकसित भारत के बयान पर बोला जा रहा है।
 
मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी जी की 'विकसित भारत' की बात बहुत बड़ा ड्रमा है, लेकिन यहाँ के देश में वास्तव में गरीबों और मजदूरों की समस्याएं बहुत गंभीर हैं। अगर हम ऐसा कहना चाहते हैं कि हमारा देश विकसित हो रहा है, तो हमें अपने शहरों की सड़कें, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी मूलभूत चीजों पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल कॉरपोरेट्स के लिए।
 
मुझे लगता है कि हमें अपने देश की वास्तविक स्थिति को समझने की जरूरत है, न कि फुसफुसाहट में 'विकसित भारत' के बारे में। प्रधानमंत्री जी की सरकार ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए वास्तविक बदलाव क्या दिखाई दे रहा है? मुझे लगता है कि हमें अपने देश को एक बेहतर बनाने के लिए काम करना चाहिए, न कि सिर्फ बयानबाजी करना। 📈
 
मैंने पढ़ा यह देखा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने फिर से कहा है कि वह 'विकसित भारत' बनाने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वो सच नहीं बोल रहे हैं। वो दिखावे करने वाली बातें कह रहे हैं जो आम आदमी को सुनने वाला है। मैं समझता हूं कि सरकार किस प्रकार के इरादे से आगे बढ़ रही है, लेकिन 'विकसित भारत' जैसा बड़ा लक्ष्य करना असंभव हो सकता है अगर वास्तव में आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखा गया हो।
 
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