ऑपरेशन सिंदूर का असर, सेना को 1 लाख करोड़ ज्यादा: 10 साल में सबसे बड़ा इजाफा; लड़ाकू विमान और इंजनों के लिए 64 हजार करोड़

ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा बजट में 15% बढ़ोतरी कर दी गई है, जो पिछले 10 सालों में सबसे बड़ी इजाफ़ा है। इस बजट में सरकार ने सेना को 7.84 लाख करोड़ रुपये दिए हैं, जो 2025-26 में करीब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इससे सेना की तैयारियां और मजबूत होंगी।

इस बजट में सबसे ज्यादा ध्यान लड़ाकू विमान और एयरो इंजन पर दिया गया है, इसके लिए 63,733 करोड़ रुपये रखे गए हैं। वहीं, नेवी बेड़े के लिए 25,024 करोड़ रुपये दिए गए हैं। भारत-फ्रांस के बीच 114 राफेल जेट की डील होने वाली है, जिसके लिए सरकार ने सेना को कई नए एयरक्राफ्ट और इंजनों का खर्च करने की घोषणा की है।

रक्षा बजट में रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी खर्च बढ़ाया गया है, इसके लिए 17,250 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। सरकार चाहती है कि भारत सिर्फ हथियार खरीदे नहीं, बल्कि बनाए। वित्त मंत्री ने बजट में विमान और रक्षा उपकरण बनाने में इस्तेमाल होने वाले इम्पोर्टेड कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है, इससे फैसले से देश की डिफेंस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री को सीधा फायदा मिलेगा।

पिछले साल चीन का रक्षा बजट करीब 247 बिलियन डॉलर यानी 22.6 लाख करोड़ रुपये रहा, अनुमान है कि इस साल 2026 में यह 300 बिलियन डॉलर यानी 27 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है। वहीं, पाकिस्तान ने भी रक्षा बजट में तेज बढ़ोतरी की है, इसके लिए सरकार ने सेना को कई नए सैन्य उपकरणों और एयरक्राफ्टों का खर्च करने की घोषणा की है।
 
बजट में इतना पैसा खर्च करना अच्छा नहीं है, तो यह तय है कि हमारी अर्थव्यवस्था कैसे मजबूत होगी, नहीं तो यह सब ज्यादा धन के लिए बोर्ड से पतला होगा। लड़ाकू विमान और एयरो इंजन पर इतना पैसा खर्च करना एकदम बेवकूफी है।
 
सुरक्षा पर पैसे खुरचाने से तो जरूर फायदा होगा, लेकिन ये देखेंगे कि इतना पैसा किसने कैसे खर्च करेगा। सबसे पहले, लड़ाकू विमान और एयरो इंजन पर इतनी सारा पैसा खर्च करने से हमें उम्मीद है कि हम अपनी सेना को मजबूत बना सकेंगे। लेकिन पाकिस्तान भी ऐसा ही कर रहा है, और चीन तो दिख रहा है कि वो भारत को कैसे पीछे छोड़ सकता है।

मुझे लगता है कि हमें अपनी रक्षा उद्योग में निवेश करना चाहिए, ताकि हम अपने सैन्य उपकरणों और एयरक्राफ्ट्स को खुद बना सकें। इससे हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो सकती है। सरकार ने इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि हम अपने सैन्य उपकरणों और एयरक्राफ्ट्स को बनाने के लिए कितने पैसे खर्च करेंगे, और यह कि हम अपनी रक्षा उद्योग में निवेश करने के लिए कितने पैसे देने चाहenge।
 
बड़ा बुरा मानिया जा रहा है कि भारत की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन इस रक्षा बजट में तो देखिए! 🤑 7.84 लाख करोड़ रुपये का बजट देना पिछले कुछ सालों में सबसे बड़ा इजाफ़ा है। और इसके बीच लड़ाकू विमान और एयरो इंजन पर 63,733 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा भी की गई है। 🚀

लेकिन चीन और पाकिस्तान ने भी अपने रक्षा बजट में तेज बढ़ोतरी की है! 🤔 22.6 लाख करोड़ रुपये तक चलने की अनुमान है, और पाकिस्तान ने कई नए सैन्य उपकरणों और एयरक्राफ्टों का खर्च करने की घोषणा भी की है।

वित्त मंत्री ने बजट में विमान और रक्षा उपकरण बनाने में इस्तेमाल होने वाले इम्पोर्टेड कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है, इससे फैसले से देश की डिफेंस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री को सीधा फायदा मिलेगा।

क्या यह एक अच्छा निर्णय है? 🤔

<https://www.ndtv.com/in-depth/opera...-2025-07-super-draft-tourism-ministry-1237373>
 
सरकार देश की रक्षा में बड़ा प्रयास कर रही है और अब भारतीय सेना को तेजी से आधुनिक बनाने के लिए 15% बढ़ोतरी किया गया है। यह अच्छी खबर है, लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि विदेशी शक्तियों जैसे की चीन और पाकिस्तान ने भी अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की है... 💡

उसके बाद तो सेना की तैयारियां और मजबूत होंगी, लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सरकार ने रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी खर्च बढ़ाया है, जिससे हम अपने देश में स्वयं बनाए गए रक्षा उपकरणों को विकसित कर सकेंगे। यह अच्छा होगा, लेकिन अभी तो बहुत अधिक समय लगेगा... 🕰️

इसके अलावा, भारत-फ्रांस के बीच राफेल जेट की डील होने वाली है, जिससे हमारी सेना को नए एयरक्राफ्ट और इंजन मिलेंगे। लेकिन यह तो एक समय की बात है, हमें अपने देश में स्वयं बनाए गए रक्षा उपकरणों को विकसित करने पर ध्यान रखना चाहिए। इससे हम अपने देश की सुरक्षा और गरिमा बढ़ा सकेंगे। 🇮🇳
 
बजट में रक्षा वित्त 7.84 लाख करोड़ रुपये बढ़ा दिया गया, जो पिछले 10 सालों में सबसे बड़ी इजाफ़ा है ... ऐसा करने की जरूरत क्यों है, जानें सरकार की सोच 🤔.

अब भारत नेवी बेड़े पर अधिक खर्च कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान और चीन भी ऐसा कर रहे हैं ... इस दुनिया में हर कोई लड़ाकू विमान और सैन्य उपकरण की मांग कर रहा है 💥.

लेकिन सरकार ने बजट में रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी खर्च बढ़ाया है, जो अच्छी बात है ... अब हमें सिर्फ हथियार बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें बनाकर विकसित करने की जरूरत है 🤓.

वास्तव में, चीन ने अपने रक्षा बजट में 300 बिलियन डॉलर का लक्ष्य रखा है, जो हमारी तुलना में बहुत बड़ा है ... लेकिन सरकार की दृष्टि भी अच्छी है, अब हमें सिर्फ सैन्य बलों के लिए नहीं, बल्कि एक मजबूत डिफेंस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री को बनाने की जरूरत है 💪.
 
बजट में कौन सी चीज़ बढ़ी है? हमेशा लड़ाकू विमान 🚀 का बजट बढ़ता रहता है, लगता है उन्हें भारत-फ्रांस के बीच राफेल जेट की डील ने बहुत प्यार कर लिया है 😂। और फिर भी चीन और पाकिस्तान को भेजने के लिए पैसे से पर्याप्त नहीं? मुझे लगता है सरकार सोच रही है कि अगर हम अपने नागरिकों को हवाई जहाज उड़ाने दें, तो वे जरूर हमले करने के लिए तैयार होंगे। 🤣
 
ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा बजट में 15% बढ़ोतरी कर दिया गया है, लेकिन अभी भी चीन और पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में तेजी से बढ़ोतरी की है। यह तो हमारे पड़ोसी देशों की रणनीति हो सकती है - उन्हें हमारे आर्थिक और सैन्य प्रभाव को कम करने का तरीका ढूंढने की, जैसा कि वे पहले भारतीय आर्मी के मुद्दे पर चीनी निवेशकों के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहे थे। सरकार द्वारा रक्षा बजट में बढ़ोतरी करने की घोषणा से हमारे एयरोस्पेस इंडस्ट्री को बहुत फायदा होगा, लेकिन यह भी सवाल उठता है कि सरकार क्यों चीन और पाकिस्तान पर इतना भरोसा कर रही है?
 
बजट में 15% बढ़ोतरी तो अच्छी बात है, लेकिन इतनी बात कर दिया जाना सेना के पास सिर्फ लड़ाकू विमान और एयरो इंजन खरीदने के लिए न कि उसके भविष्य को मजबूत करने के लिए तो फायदा नहीं होगा। सरकार चाहती है कि भारत सिर्फ हथियार बनाएं, लेकिन इतने पैसे में विमान और एयरक्राफ्ट केवल बनाकर रखा जाएगा? 🤔
 
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