‘पति रूसी सेना में फंसे, सरकार पुतिन से वापस मांगे’: 44 भारतीय वॉर जोन में, परिवार परेशान; रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे से उम्मीद

रूस-यूक्रेन जंग में 61 भारतीय फंस गए, सरकार ने कहा युद्ध में शामिल होने से पहले बातचीत करें।
 
रूस-यूक्रेन जंग की बात करो, तो भारतीयों की जिंदगी कितनी रुक गई, 61 फंस गए तो ये कितना दुखद है 🤕💔। सरकार ने कहा है कि पहले से बातचीत करनी चाहिए, यह अच्छा विचार है, लेकिन जब जंग होती है तो सब कुछ तुरंत हो जाता है। 🤔 मुझे लगता है कि भारतीयों को जंग से बचने के लिए पूरी तैयारी करनी चाहिए, रूस और यूक्रेन दोनों देश खुद की रक्षा कर रहे हैं 🤺♂️

लेकिन सरकार ने कहा है कि शांति से बातचीत हो तो सब कुछ ठीक होगा, मुझे लगता है कि यह सही है, हमें एक दूसरे के साथ समझौता करना चाहिए, जंग नहीं फैलने देना चाहिए 🤝। लेकिन अब 61 भारतीयों को बाहर लाने का काम है तो यह और भी ज्यादा मुश्किल हो गया है 😬
 
ਰूस-यूक्रेन ਦੀ ਜੰਗ ਵਿੱਚ 61 ਭਾਰਤੀ ਲੋਕ ਫਸ ਗਏ ਹਨ, ਇਹ ਘਟਨਾ ਬਹੁਤ ਖੋਖਲੀ ਹੈ। ਮੈਂ ਅਜਿਹੇ ਪ੍ਰਸੰਗ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤੀ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਿਖੇਸ਼ ਵਾਲੇ ਹੋਣ 'ਤੇ ਅਜਿਹਾ ਚਿੰਤਾ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰਦਾ ਹਾਂ। 🤔

ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਅਜਿਹੇ ਪ੍ਰਸੰਗ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋਣ ਬਾਰੇ ਕਿਸੇ ਵੀ ਨਫ਼ਰਤ ਜਾਂ ਨਿਰਾਸ਼ਾ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਨਹੀਂ। ਇਹ ਘਟਨਾ ਤਾਂ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਪੱਖ ਤੋਂ ਸਲਾਹ ਦੀ ਗੱਲ ਹੈ। 🚨

ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਬਿੰਬ ਵਿੱਚ ਅਜਿਹੇ ਪ੍ਰਸੰਗ 'ਤੇ ਮੌਖ਼ਿਕ ਕਾਰਵਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ। ਬਹਾਰ ਨਿਕਲਣ ਅਤੇ ਸਮਾਧਾਨ ਖੁਦਾ ਕਰਨ 'ਤੇ ਭਾਰਤੀ ਜਨਤਾ ਵੀ ਆਪਣੀ ਰੋਸ ਅਹਿੱਸਾਸ ਦੇਖਣਗੀ। 😡
 
मुझे यह तो बहुत दुख दिया 🤕, हमारे देश में इतनी दुर्गम स्थिति में कौन से लोग फंस गए? और सरकार ने कहा है कि युद्ध में शामिल होने से पहले बातचीत करें, यह तो बहुत ही समझदार कदम है, लेकिन मुझे लगता है कि हमारी सरकार को एक और चीज़ करनी चाहिए, जैसे कि युद्ध में शामिल होने वाले सभी भारतीयों को सुरक्षित रूप से लाने की कोशिश करें, यह तो हमारे देश की गरिमा को बचाए रखेगा। और फिर यह तो सरकार को अपने नेताओं को एक बार फिर से पूछना चाहिए, कि हमें युद्ध में शामिल होने की जरूरत है या नहीं।
 
नहीं मानना चाहिए कि हमें रूस-यूक्रेन जंग में तो जरूरी नहीं है कि हमारे लोगों को फंस गए हैं... या फिर सिर्फ़ सोशल मीडिया पर बातचीत कर दी जाए। क्या सरकार ने कहा है? तो फिर यह कैसे अच्छा है? हमें सबसे पहले वास्तविकता को समझना चाहिए, यानी कि रूस-यूक्रेन जंग में कौन-कौन से लोग शामिल हुए हैं। अगर तुमसे पता नहीं है तो फिर सरकार को कैसे कह दूं कि वार को पहले समझने की जरूरत नहीं? 🤔
 
रूस-यूक्रेन जंग की स्थिति बहुत गंभीर है और हमारे देश के लोगों को भी इसका असर महसूस हो रहा है। 61 भारतीय नागरिक जंग के मैदान में फंस गए हैं और सरकार ने कहा है कि युद्ध में शामिल होने से पहले बातचीत करनी चाहिए। मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है कि हम अपने देशवासियों को जंग की स्थिति के बारे में जागरूक करें और उन्हें सुरक्षा के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करें। 🤔

मैंने एक आर्टिकल पढ़ा है जिसमें कहा गया है कि यूक्रेनी सरकार ने रूस के खिलाफ लड़ने के लिए भारतीय सैनिकों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है। यह बहुत दिलचस्प है, लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपने देशवासियों को इससे सावधान रहना चाहिए। 🤷‍♂️

आपको ऐसी खबरें पढ़ने में आनंद आता है? 💬
 
ભારત સેનાની વ્યક્તિગત સમર્થનને બદલે, આ પ્રશ્નચિહ્ન છે કે 61 ભારતીય વ્યક્તિઓને આ યુદ્ધ સંબંધી પોતાના ઉમેરણની ક્ષમા કરી શકે છે?
 
बात की जाए तो रूस-यूक्रेन जंग की बात है... 61 भारतीय लोग फंस गए, सरकार ने उन्हें युद्ध में शामिल होने से पहले बातचीत करने का फैसला किया है। यह बहुत अच्छा कदम है, लेकिन मुझे लगता है कि इससे कुछ नहीं होगा। जंग में शामिल होने के बाद, दृश्य परिवर्तन हो सकता है और हमें पता नहीं चलता है कि वे कहां हैं और वे सुरक्षित हैं।

मुझे लगता है कि सरकार को अपनी सेना को युद्ध में न send करने पर विचार करना चाहिए। जंग में शामिल होने से पहले दiplomatic efforts करना हमेशा अच्छा रहता है। इससे हमें अपने सैनिकों की जान बचाने में मदद मिलती है और दूसरी तरफ, दुश्मन को भी पता चलता है कि हमारे पास बहुत करीब से विचार करने वाले लोग हैं। तो फिर सोच-विचार करने से पहले युद्ध में शामिल होने से बेहतर है।
 
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