पहले पत्थर पर सिर पटक-पटककर ली पत्नी की जान, फिर खुद जहर खाकर चार बच्चों को किया अनाथ

धनोरा तालुका के रूपिनगट्टा गांव में एक दुखद घटना घटी। 37 वर्षीय किसान राकेश सुकना कुजूर और उसकी 32 वर्षीय पत्नी कलिष्टा राकेश कुजूर को जीवन से बेदखल कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, यह घटना गांव के खेत में हुई। रात के अंधेरे में, दोनों पति-पत्नी ने अपने घर वापस आने का वादा किया, लेकिन उनकी उम्मीदें बर्बाद हो गईं।

राकेश और कलिष्टा के साथ उनके पिता भी थे, जो खेत में काम कर रहे थे। गांव के लोगों ने दोनों को खोजा, लेकिन वे घर नहीं पहुंच सके। इसके बाद, उनकी पत्नी कलिष्टा ने अपने चार बच्चों की सुरक्षा के लिए जहर लिया। राकेश भी जहर खाकर अपनी पत्नी के साथ मिल गया।

इस घटना ने गांव के लोगों को हिलाया। इस मामले में पुलिस जांच कर रही है और आरोपियों को पकड़ने का प्रयास कर रही है।
 
मैंने अभी-अभी सुना था कि उनके चार बच्चे क्या करेंगे, मेरी बेटी की उम्र भी एकसाथ नहीं आ सकती थी, और मैंने अपने पति को देखा है जो अकेला रहता है, लेकिन यह तो बहुत पुराना समय से पहले हुआ था, अब मेरे भाई ने भी तलाक कर लिया है और वह शादीशुदा होने का सपना नहीं देख रहा। ये दुनिया में जहरीली हो गई है, जैसे अगर राकेश और कलिष्टा की पत्नी ने जहर नहीं लिया, तो क्या उनके बच्चों को कुछ भी होता, अब मेरी बहन शादीशुदा होने वाली है और वह सोचती है कि अगर उसका पति मुझसे दूर रहता है, तो उसकी जिंदगी सही होगी।
 
यह तो बहुत दुखद घटना है 🤕। राकेश, कलिष्टा और उनके पिता किसना उनके साथ ऐसा क्यों किया? मुझे लगता है कि यह घटना हमें एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर रही है कि कैसे हम अपने परिवार और समाज को बचाने के लिए काम कर सकते हैं। पुलिस जांच में आरोपियों को पकड़ने का प्रयास करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ हमें अपने परिवारों और समाज की सुरक्षा के लिए भी काम करना चाहिए।
 
बहुत दुखद की बात है, यह घटना तो बहुत ही गहरा चीरा लगा होगा। मुझे लगता है कि ऐसे मामलों में हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए और आर्थिक सहायता भी देनी चाहिए। सरकार से लाभांश विस्तारित करने की जरूरत होगी, जिससे नागरिको को जिंदगी को बहुत आसान बनाया जा सके।
 
यह तो बहुत दुखद घटना है 🤕। राकेश-कलिष्टा जोड़े की मुस्कान कहीं नहीं पहुंची। उनके चार बच्चों के लिए यह सब एक बड़ा दर्द है। खेत में काम करते समय भी दो पीढ़ियों के सदस्य की जिंदगी बर्बाद हो गई। गांव के लोगों ने उनकी मदद करने का प्रयास किया, लेकिन यह घटना इतनी जल्दी से नहीं घटी। राकेश-कलिष्टा की कहानी हमें याद दिलाती है कि खेती में जाने से पहले भी जिंदगी को विशेष रूप से प्यार और ध्यान देना चाहिए।
 
😔 यह तो बहुत ही दुखद खबर है, भाई। जैसे ही हम सुनते हैं कि राकेश और कलिष्टा ने अपनी पत्नी को जीवन से बेदखल कर दिया, तो मेरे मन में एक सवाल आया। क्यों कोई ऐसा काम करता है जिससे अपनी पत्नी को खोने का खतरा होता है? 🤔 यह तो बहुत ही गहरी समस्या है, जिसे सिर्फ पुलिस और आरोपियों को पकड़ने वाले नहीं बल्कि हम सभी को हल करना होगा। 💡 हमें पता चलना चाहिए कि खेत में काम करते समय भी अपनी परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखना ज़रूरी है। 🌾 हमें एक दूसरे को सहायता करनी चाहिए और यदि आपको लगता है कि कोई ऐसी समस्या हो रही है, तो तुरंत मदद लेनी चाहिए। 🤝
 
नाराज़गी, यह तो बहुत बड़ी घटना है, कितने लोगों को इस तरह से मरना पड़ा? राकेश और कलिष्टा जैसे दोनों एक-दूसरे के साथ रहते थे, उनके बच्चे भी बछड़े हैं, अब उन्हें छोड़ना पड़ा। पुलिस तो जरूर इस मामले की निकाल-खिचोल करेगी, लेकिन रिश्तों में ऐसी चीजें आमतौर पर क्या होती हैं?
 
😔 यह तो बहुत दुखद घटना है... राकेश और कलिष्टा की यह दुआरे जान लेने वाली बात खेद है... उनके चार बच्चों को यह जोखिम भी नहीं देना चाहिए था। पुलिस जांच कर रही है, शायद जल्द ही आरोपियों को पकड़ा जाएगा, लेकिन फिर भी इस तरह की घटनाओं से हमें सीखना होगा। जीवन में कई परेशानियाँ आती हैं, लेकिन पत्नी को जहर लेना और अपने पति के साथ जाने की बात तो एक बड़ा गलतफहमी है।
 
यह एक बहुत ही दुखद घटना है जो हमारे देश की सामाजिक समस्याओं को उजागर करती है 🤕। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर यही दृश्य देखने को मिलता है, जहां लोग अपने जीवन की लड़ाई और परेशानियों में खो जाते हैं। राकेश, कलिष्टा और उनके पिता की कहानी एक सच्ची दर्दनाक घटना है जिसमें हमें सोचने के लिए मजबूर करती है कि क्या हमारे समाज में पर्याप्त सामाजिक समर्थन और संसाधन उपलब्ध हैं? 🤔

यह घटना न केवल राकेश, कलिष्टा और उनके परिवार को प्रभावित करती है, बल्कि यह हमारे समाज को भी प्रभावित करती है। हमें अपने ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास करना चाहिए और ऐसी घटनाओं से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। पुलिस द्वारा जांच जारी रखना और आरोपियों को पकड़ने का प्रयास करना सही कदम है, लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सामाजिक समर्थन और संसाधनों की आवश्यकता है ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों।
 
अरे यार, यह घटना तो बहुत दुखद है, लेकिन मुझे लगता है कि यह एक बड़ा संकेत है कि हमारे गांव में खेतों में काम करने वालों की सुरक्षा और कल्याण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। राकेश और कलिष्टा की मृत्यु किस मामले में हुई, यह तो समझ में आता है, लेकिन उनके बच्चों की सुरक्षा कैसे? हमारे गांव के नेताओं और पुलिस पर यह जिम्मेदारी क्यों नहीं है?
 
मैंने yesterday bahut suna tha, aap jise vishram kiya karta hai... main bhi unki tarah hi khud ka phool khilata hoon 🌼... ab to yeh sab logon ko dekh rahe hain ki kyun logon ko ek dusre ke saath judne ki zaroorat hai, agar wo nahi hota toh sabka khayal nahi ho sakta. aur bas ek baar sochta hoon ki kaise unke bachche bachne chale? unki umr kitni thi, ab vah toh doosron ke paas rehte hain... main to usse bahut dukhi hoon 🤕
 
ਏਥੋ ਮਹਾਨ, ਯਹ ਦੁਖਦਾਈ ਘਟਨਾ ਤਕ ਪਹੰੁਚ ਗਈ ਹੈ। ਇਸ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਬਾਰੇ ਨਹੀਂ ਸੋਚਦੇ, ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਮਰਯਾਦਾ ਤੇ ਪ੍ਰੇਮ ਬਾਰੇ ਨਹੀਂ ਸੋਚਦੇ। 😔

ਕਿਸੇ ਵੀ ਪਰਿਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ ਜੋ ਮਨੁੱਖ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਹਾਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ, ਉਸ ਦਾ ਕੋਈ ਕੁਝ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ। ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਹੀ ਇੱਕ ਖੇਡ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਜੇਤੂ ਨਹੀਂ ਮਿਲ ਸਕਦਾ, ਪਰ ਅੱਗੇ ਵੱਲ ਵ ਤੋਰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ। 🏆
 
तो यह दुखद घटना कितनी भारी हुई! मैं राकेश, कलिष्टा और उनके बच्चों की गहरी संवेदना करता हूँ। जैसे-जैसे पढ़ता गया, तो मेरे दिल में बहुत दर्द हुआ। उन्हें अपने गांव वापस आने का वादा था, लेकिन इस तरह से नहीं हो सका। मैं उनकी पत्नी कलिष्टा को जो चार बच्चों के लिए जान कर गई, उसकी बात बहुत दुखद है। पुलिस अभी भी जांच कर रही है और आरोपियों को पकड़ने का प्रयास कर रही है। मैं उम्मीद करता हूँ कि जल्द ही उनकी सुरक्षा का समाधान होगा।
 
यह दुखद घटना बहुत गहरी लग रही है... मैं समझ नहीं सकता कि इतने मामूली वादे पर लोग अपनी जान खिलवा देते हैं। क्या हमारे समाज में इतनी अकेलापन और बेकारपन महसूस करते हैं कि लोग आत्महत्या करने की सोचते हैं? और पुलिस को तो इसके बारे में पता होना चाहिए, फिर भी ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। मैं आशा करता हूं कि जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा और गांव के लोगों को शांति मिलेगी। तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे पास इतने सारे रिश्तेदार हैं और हमारी दुकानें तो खुली हैं, बस अपनी जिंदगी को सही दिशा में बदलने की जरूरत है।
 
Back
Top