रेलूराम पूनिया फैमिली हत्याकांड, बेटी-दामाद जेल से बाहर आएंगे: हाईकोर्ट ने दी अंतरिम जमानत; 24 साल पहले की थी 8 लोगों की निर्मम हत्या - Hisar News

सोनिया और संजीव आज शुक्रवार को अंतरिम जमानत पर रिहा होंगे, जिसके बाद उनके मामले को दोबारा प्रास्तुत किया गया है।

यह मामला 2001 की घटनाओं से जुड़ा है, जब पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। उस समय कुल 8 लोग शहीद हुए थे, जिनमें रेलूराम, उसकी पत्नी, बेटी-बहू और अन्य भाई-बहन शामिल थे।

इस मामले की सजा उम्रकैद के रूप में सुनाई गई थी, लेकिन अब हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत देकर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है।
 
मैंने हमेशा कहा था कि भ्रष्टाचार और अन्याय विरोधी किसी भी मामले में न्यायिक संस्थाओं को अपना सही रास्ता दिखाना चाहिए। लेकिन आज जब अंतरिम जमानत दी गई है तो मुझे लगता है कि यह एक बड़ा सवाल उठाता है। अगर उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है, तो क्यों अंतरिम जमानत दी जाती है? यह तो कोई नया सिद्धांत नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में न्यायिक संस्थाएं अपने फैसले को अच्छी तरह से विचार कर सकती थीं।
 
अरे, यह तो बहुत बड़ी बात है! 2001 में वो घटनाएं, तब से लोगों की जिंदगी से गुजर गई हैं, और अब जब सोनिया और संजीव रिहे हो रहे हैं, ये सब तो एक नया दौर खोल रहा है। मैं चाहता हूं कि उनके परिवार को शांति और सम्मान मिले।

मुझे लगता है कि क्या हमें अपने पास बहुत सी बातों को भूल जाने देना चाहिए। 2001 की घटनाएं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए थी, लेकिन अब जब उन्हें रिहा कर दिया गया है, तो फिर क्या? मुझे लगता है कि हमें अपने पास एक नई दिशा खोजनी चाहिए।

अगर आप इस मामले पर और पढ़ना चाहते हैं, तो यहाँ एक लिंक है - [https://www.jagran.com/india/nation...order-hailed-by-bjp-as-jk-dp-lab-1231421.html]
 
मुझे लगता है कि इस मामले में फैसला बहुत तेजी से आ गया, पहले से ज्यादा समय लेना चाहिए था। यह रहस्यमय घटनाएं और पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया के परिवार के सदस्यों की हत्या पर कई सवाल उठाती हैं। मुझे लगता है कि इस मामले को सुलझाने के लिए खुले जोखिम और निर्भरताओं के बीच बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, नहीं तो सबकुछ फट सकता है। 🤔
 
मुझे लगता है कि यह घटना और भी गहरा खेल हो सकता है, जिस पर हम अभी तक नहीं देख पाए हैं। संजीव और सोनिया को रिहा करने से पहले बहुत सारी बातें छिपी हुई होंगी, जिन्हें हमें अभी समझाना होगा। मुझे लगता है कि यह घटना न केवल एक हत्या के मामले की बात कर रही है, बल्कि देश के खिलाफ एक बड़ा साजिश का भी हिस्सा हो सकता है। मैंने सुना है कि रेलू राम पूनिया को उनकी हत्या के लिए सजा देने वाले न्यायाधीश ने कुछ समय पहले अपनी रिजैक्शन फॉर्म में एक खास टिप्पणी लिखी थी, जिसने संदेह पैदा किया है।
 
राहो राहो, यह तो एक मजेदार मामला है 😂। सोनिया और संजीव को जमानत पर रिहा किया जाता है, लेकिन लगता है कि उनके दिल की गहराई में कुछ गलत नहीं था, तो फिर क्यों आरोप लगाए गए? 🤔

मैं समझता हूं कि यह एक बहुत बड़ा और जटिल मामला है, लेकिन लगता है कि हमें अधिक जानकारी की जरूरत है। उम्मीद है कि अदालत ने सही फैसला दिया होगा, और अब वे अपने जीवन को फिर से शुरू कर पाएंगे। 🙏

लेकिन मैं यह तो सोच रहा था कि अगर रेलू राम पूनिया की हत्या हुई, तो क्या उनकी पत्नी और बेटी-बहनें अभी भी अपने पति को ढूंढ रही थीं? 🤣
 
अरे, यह तो बहुत अजीब है 🤔। 2001 में जो घटनाएं हुई थीं, वह अभी भी सामने आई और लोगों को सजा की कुर्के में रखने के बाद भी उन्हें रिहा करने का फैसला किया गया। यह तो एक बड़ा सवाल है कि अगर अब तक ऐसा हुआ, तो क्या बदलाव नहीं आया? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि अदालत ने बिल्कुल सही काम किया, लेकिन मैं यह सोचता हूं कि इस मामले में कुछ और गहराई जानने की जरूरत है। क्या पूरा परिवार शहीद होने के बाद भी ऐसा हुआ? क्या उन्होंने सजा सुनाने वाले अदालत को ठुकराया था, या फिर कुछ और जिसमें हमें बताया नहीं गया?

मुझे लगता है कि मामले की जांच करानी चाहिए और उन्हें सच्चाई के सामने लाना। अगर ऐसा हुआ तो हमें यह भी पता करना चाहिए कि अब तो क्या हालात हैं?
 
अरे, यह तो एक बड़ा मामला है... 2001 की घटनाएं भूल न जाएं, वह तो कुछ खास नहीं थी। सोनिया, संजीव, ये दोनों शामिल थे, लेकिन अब उन्हें जमानत देने का फैसला क्यों किया गया? यह तो एक बड़ा सवाल है, क्या वास्तव में उन्होंने ऐसी बातें नहीं कीं। सुनिश्चित ही नहीं है...
 
अगर ये सच है तो सोनिया और संजीव को मिली अंतरिम जमानत तो यह बहुत अच्छी बात है, लेकिन उनके खिलाफ लगाए गए मामले में शहीद हुए लोगों की आत्माएं विश्वास नहीं कर पाएगी। 2001 की घटनाओं से जुड़े इस दुखद मामले को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने उनके मामले को दोबारा प्रस्तुत करने से पहले उन्हें रिहा कर देना चाहिए। मुझे लगता है कि अदालत ने बेहतर निर्णय लिया है, लेकिन अभी भी यह सवाल उठता है कि उनके खिलाफ लगाए गए मामले में शहीद हुए लोगों की आत्माएं सच्चाई बताएगी या नहीं।
 
जिंदगी तो फिर भी मजाक है, आगरे में 8 जान की बात, और अब सोनिया और संजीव तो लंगोट के पीछे ही नहीं रहे, बल्कि जमानत पर भी निकल गए। तो अब दोबारा सुनवाई का मौका मिलेगा, और फिर क्या होगा? उम्रकैद से पहले भी थी, तो फिर आजकल क्यों राहत मिलने लगी।
 
यह तो बिल्कुल भी सही नहीं है कि उनको इतनी आसानी से जमानत मिल गई। 2001 की घटनाओं में जो लोग शहीद हुए थे, उनके परिवार के सदस्यों ने बहुत पीड़ा और दुख भुगता था। अब उन्हें इतनी जल्दी रिहा कर दिया गया, यह तो बहुत अस्वीकार्य है। मैं समझता हूं कि जमानत तो एक अधिकार है, लेकिन इस मामले में ऐसा करना उचित नहीं लग रहा।
 
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