बस, तो यह बात ही सुनहरी राह लेती है... भारत की पहले की मेहमाननवाजी की बात करें तो कोई नहीं नकारना चाहता... पाकिस्तान को भी हमने अपना घर माना, और उन्होंने भी हमारे देश के ख्याल से अच्छे व्यवहार किया।
लेकिन अब, तो यह बात तो बहुत पुरानी हो गई... जैसे कि ये कोई नई खबर नहीं है, जैसे हमारे रिश्तों में एक झूलना हुआ है। चूंकि भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर हिंसा की समस्या हो रही है... तो लगता है कि दोनों पक्ष अपने देश की मुद्रा लेकर आ गए हैं।
लेकिन, शांति की बात करें तो यह हमारे लिए जरूरी है... हमें एक-दूसरे के साथ समझौता करना चाहिए। और अगर दोनों पक्ष अपने असहमतियों को हल करने के लिए मिलकर काम करेंगे, तो शायद यह पूरी तरह से हल हो सकता है।