Rohini Acharya Attacks Nitish Kumar: CM Nitish के बयान पर रोहिणी आचार्य का तीखा हमला। RJD | Tejashwi

रोहिणी आचार्य ने नीतीश कुमार पर फिर से हमला किया है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। वहने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने संसदीय और भाषाई मर्यादा लांघने की आदत बन चुकी है।

रोहिणी आचार्य ने कहा है कि जब किसी के पास तर्क और तथ्य नहीं बचते, तब वह अपनी खीज और वैचारिक खोखलेपन को उजागर करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के पिछले बयानों पर जोर दिया है और कहा है कि उनसे महिलाओं के प्रति मानसिक और वैचारिक कुंठा साफ झलकती है।

महिला सम्मान पर दिए गए बयान को रोहिणी आचार्य ने राजनीतिक और चुनावी दिखावे तक सीमित बताया है। वहने कहा है कि महिलाओं के प्रति मानसिकता हमेशा खराब रहती है।

राजद विधान पार्षदों ने सदन में जोरदार हंगामा शुरू कर दिया, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। इसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आए हैं।

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर एक तीखा पोस्ट शेयर किया है और कहा है कि किसी की निजी जिंदगी में ताका-झांकी और निजी मामलों पर टीका-टिप्पणी वही करते हैं जो या तो निठल्ले होते हैं या जिनकी नीयत और फितरत गंदी होती है।
 
अरे भाई, रोहिणी आचार्य का यह बयान तो बहुत ही सच्चा है... मुख्यमंत्री दा तो बातें करते हैं लेकिन उनके पीछे औरतों को नीचा करने की ताकत है तो वही साबित कर रहे हैं। यह जरूरी है कि हमने उनकी बातों पर ध्यान दिया जाए और उनसे सच्चाई कही। मुख्यमंत्री के पास तर्क नहीं है, बस विचारधारा है। लेकिन, बहुत सारी महिलाएं भी तो उनके बीच खड़ी हैं? यह तो सवाल है! 🤔💁‍♀️
 
नीतीश कुमार की बोली सुनकर मुझे लगता है कि उनकी सरकार को मास्क पहनाने की जरूरत नहीं है, चूंकि उनकी बोली से पहले ही उनका खुल्ला चेहरा दिखाई देता है। रोहिणी आचार्य ने तो सही कहा, जब कोई तर्क और तथ्य नहीं बचते, तब वह अपनी खीज को उजागर करते हैं। लेकिन लगता है कि हमारे देश में यही सब पुराना रूप है, जहां महिलाओं के प्रति मानसिकता हमेशा खराब रहती है।
 
नीतीश कुमार के बयानों पर रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया सुनकर मुझे लगता है कि यह घटना दो पक्षों की गलती का नतीजा है। एक ओर, लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य को अपने अधिकार और व्यक्तिगत स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपनी भाषण में सावधानी बरतनी चाहिए।

मेरे अनुसार, यह घटना हमें एक महत्वपूर्ण सवाल पूछती है - महिलाएं भी राजनीति में शामिल होकर और सफल होकर कैसे अपने विचारों को व्यक्त कर सकती हैं?
 
मुझे लगता है कि रोहिणी आचार्य बहुत बोल रही हैं लेकिन कुछ बातें उन्हें सोच-समझकर नहीं समझाई जा सकतीं। वह तो हमेशा विपक्षी पार्टियों और नेताओं पर हमला करती रहती, लेकिन कभी-कभी उसके द्वारा कहे गए कुछ शब्द भी गलत सुनाई देते हैं। इसके अलावा, राजनीतिक दुनिया में महिलाएं बहुत सक्रीय हो रही हैं और उनके विचार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उन्हें हमेशा एक निश्चित स्तर की शिष्टता और विवेक से बोलना चाहिए।
 
नीतीश कुमार के बयान पर रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया सुनकर मुझे लगता है कि यह बातें लंबे समय से चली आ रही हैं और फिर भी कुछ नहीं बदला। तो ये दोनों किसी और ने चुना होगा जो राजनीतिक खेल में अच्छा है।
 
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