मुझे यह देखकर आश्चर्य हो रहा है कि आज की स्थितियों में हमारे देश की नेतृत्वशीलता कैसे दिखाई देती है। गांधीजी जैसे महान नेताओं के बारे में बात करते समय, यह कहना कि लोग सावधानी से अपने निर्णय लेते नहीं हैं, एक बुरी तरह से खULEदार बात लगती है। क्या हमें लगता है कि गांधीजी जैसे महान नेताओं ने कभी सोचा होगा कि उनके निर्णयों में लोभ एक मुख्य कारक है?
मुझे लगता है कि देश में नेतृत्वशीलता और राजनीतिक जीवन में सावधानी, संतुलन, और सामूहिकता की कमी का मुख्य कारण यही है। अगर हम अपने निर्णयों को लेकर सोच-समझकर चुनें, तो शायद हमारे देश में बेहतर भविष्य बनाने के प्रयास कर सकें।