RTI: सीआईसी का अहम फैसला, मुवक्किल के मामलों के लिए आरटीआई के तहत जानकारी नहीं मांग सकते वकील

आरटीआई कानून का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकता। वकील द्वारा मुवक्किल/परिजन की ओर से आरटीआई आवेदन को अस्वीकार्य माना गया। इससे पहले, उच्चतम न्यायालय में एक आदेश हुआ था, जिसमें कहा गया था कि वकील अपने मुवक्किल की ओर से दायर किए गए मामलों से संबंधित जानकारी नहीं मांग सकते।

आरटीआई को मुकदमेबाजी में साक्ष्य जुटाने का साधन नहीं बनाया जा सकता। इसके अलावा, आग में रिकॉर्ड नष्ट होने और निजी जानकारी पर छूट के दावे को आयोग ने स्वीकार किया।

वकीलों की ऐसी आरटीआई मांगों पर रोक दोहराई गई, जिससे उनकी प्रैक्टिस को बढ़ावा देने के लिए हर तरह की जानकारी हासिल करने की संभावना कम होती है। इसके अलावा, आयोग ने कहा कि आरटीआई कानून के सराहनीय उद्देश्यों का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकता।

इस फैसले से, वकील द्वारा मुवक्किल/परिजन की ओर से आरटीआई आवेदन को अस्वीकार्य माना गया, जिससे उनके अधिकारों की रक्षा की जा सकेगी।
 
आरटीआई कानून का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकता। आर्टिकल 2 डी के हिसाब से इस्तेमाल की जाने वाली जानकारी को सिर्फ मुकदमेबाजी में उपयोग करना चाहिए, न कि अन्य उद्देश्यों के लिए। अगर वकील खुद निजी जानकारी को जुटाने के लिए आरटीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इससे यह सवाल उठता है कि उन्हें अपने मुवक्किल/परिजन के अधिकारों की रक्षा करने में मदद कैसे करनी होगी। 😕
 
मुझे लगने वाले सबसे बड़े मुद्दे तो यह है कि आरटीआई आवेदन निजी फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यार, इससे पहले हमें यह नहीं सोचना पड़ता था, लेकिन अब यह बहुत जरूरी है। वकील द्वारा मुवक्किल/परिजन की ओर से आवेदन अस्वीकार कर दिया गया, जिससे उनकी जानकारी खोजने की तरीका बंद पड़ा। 🚫

जैसे आरटीआई को साक्ष्य जुटाने का साधन नहीं बनाया जा सकता, इसी तरह निजी जानकारी पर छूट देने के दावे को भी आयोग ने स्वीकार कर लिया। 🤔 यार, यह फैसला वकीलों की प्रैक्टिस को भी प्रभावित कर रहा है।

आयोग ने कहा है कि आरटीआई कानून के सराहनीय उद्देश्यों का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकता। तो अब हमें यह सोचकर आगे बढ़ना चाहिए कि हमारा अधिकार कैसे सुरक्षित कर सकते हैं। 🙏
 
આ તો સરખું! વકીલોને પ્રાણિયાળા બનવાથી અનહદ જાગ્રતિ કરવી જોઈએ. ઘણે મુક્તભાવે લોકો આ અનેક કમીશનરીથી સંપત્તિ ગુજરાય છે. ભાવિમાં આ વધારો ન થઈ શકે! 💡
 
🤝 यह तो बहुत ही अच्छी बात है कि न्यायपालिका ने ऐसी आरटीआई मांगों पर रोक लगाई, जिससे वकील अपने मुवक्किल की ओर से जानकारी न मांग सकें। यह तो उनकी प्रैक्टिस को बढ़ावा देने के लिए बहुत जरूरी है। और यह फैसला निकालने से वकीलों को अपने काम को करने में आसानी होगी, जिससे अधिक सारे लोगों को न्याय मिलेगा। अब किसी भी आरटीआई आवेदन पर तय नहीं किया जाएगा, यह तो बहुत ही अच्छा रहस्म।
 
अरे, तो यह देखकर ही अच्छा लगा कि उच्चतम न्यायालय ने फिर से आरटीआई कानून की मायने समझ लीं। ये वकीलों के लिए बहुत बड़ी बात है कि वे अपने मुवक्किल/परिजन की ओर से जानकारी नहीं मांग सकते। इससे उनका काम आसान नहीं होता। फिर भी, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आरटीआई का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं किया जाता। तो यह फैसला अच्छा है 🙏
 
अरे, तुमने देखा है यह आरटीआई कानून, अब तो वकील के बगैर भी मुवक्किल की ओर से आवेदन कर लेते हैं! 😂 जी बोले तो, यहाँ हमारी निजता की रक्षा के लिए एक law बनाया गया था, लेकिन अब तो यह law वकील के फायदे के लिए भी माना जा रहा है! 🤦‍♂️

लेकिन फिर से, मैं इस पर खुश नहीं हूँ, क्योंकि इससे हमारे मुवक्किलों को अपने अधिकारों की रक्षा करने में मदद नहीं मिल पाएगी। तो, वकीलों को फिर से अपने मुवक्किलों की ओर से आवेदन करने की सलाह देनी चाहिए, और निजी जानकारी के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 🤝

और मैं यह भी कहूँगा कि आरटीआई कानून को समझने की जरूरत है, ताकि हम अपने अधिकारों और निजता की रक्षा कर सकें। लेकिन फिर से, वकीलों को अपने मुवक्किलों की ओर से आवेदन करने की सलाह देनी चाहिए। 🤓
 
🤔 ये तो बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला है। आरटीआई कानून का इस्तेमाल हमेशा निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा होता, तो सब कुछ खुलकर उबर जाता और व्यक्तिगत स्तर पर जानकारी बहुत ही आसानी से मिल जाती। लेकिन अभी तक हमने देखा है कि आरटीआई का इस्तेमाल अधिकांश मामलों में व्यक्तिगत फायदे के लिए किया जाता है। और यह तो कानून की स्थापना के उद्देश्यों के खिलाफ है।

वकीलों की आरटीआई मांगों पर रोक लगने से उनकी प्रैक्टिस को जरूर नुकसान पहुंचेगा। हमें उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय का यह फैसला सबक सिखाएगा और वकीलों को अपनी मांगों को वैध तरीके से पेश करने का संदेश देगा।

आयोग ने सही कहा है, आरटीआई कानून के लिए हमें अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन इसके लिए हमें वैध तरीकों से इसका इस्तेमाल करना होगा।
 
अरे, ये तो वकीलों की निजता पर बोलने का एक नया तरीका है 🙄। आरटीआई कानून वास्तव में उनकी निजता की रक्षा करने का उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन अब यह इस्तेमाल करके उनकी खुशबू टूट रही है 😔। वकीलों को पता होना चाहिए कि आरटीआई कानून का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकता, बस इतना ही 🤦‍♂️

इस फैसले से अच्छा हुआ, वकीलों को अपने मुवक्किल/परिजन की ओर से आरटीआई आवेदन को अस्वीकार्य मान नहीं सकते। अब उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करनी होगी, निजता पर बोलने की जरूरत नहीं 🙏
 
मैं समझ नहीं पाया कि अगर आरटीआई कानून का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकता, तो फिर वकील द्वारा मुवक्किल/परिजन की ओर से यह आवेदन कैसे अस्वीकार्य हुआ? मुझे लगता है कि अगर आरटीआई कानून का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकता, तो वकील द्वारा मुवक्किल/परिजन की ओर से यह आवेदन जरूर स्वीकार करना चाहिए। 🤔
 
आरटीआई कानून तो बस यही है कि हमारे अधिकारों को सुरक्षित रखें और निजी लोगों के खिलाफ भी इसका इस्तेमाल होना चाहिए। ऐसे वकीलों को देखना दुखद है, जो अपने मुवक्किल की ओर से आरटीआई आवेदन करने का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए कर रहे हैं। यह तो हमारे समाज के खिलाफ है और उनकी प्रैक्टिस को बढ़ावा देने वाला भी नहीं है। 😔
 
मुझे लगता है कि आरटीआई कानून का इस्तेमाल हमेशा निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकता, लेकिन वकील द्वारा मुवक्किल/परिजन की ओर से आरटीआई आवेदन को अस्वीकार्य मानना संदेह करने वाला है। इससे पहले, उच्चतम न्यायालय में एक आदेश था, जिसमें कहा गया था कि वकील अपने मुवक्किल की ओर से दायर किए गए मामलों से संबंधित जानकारी नहीं मांग सकते।

मुझे लगता है कि आरटीआई को मुकदमेबाजी में साक्ष्य जुटाने का साधन नहीं बनाया जा सकता, लेकिन वकीलों द्वारा इस्तेमाल किए गए तरीके से यह फैसला आयोग की ओर से स्वीकृत हुआ। इससे पहले, आग में रिकॉर्ड नष्ट होने और निजी जानकारी पर छूट के दावे को आयोग ने स्वीकार किया।

मुझे लगता है कि वकीलों की ऐसी आरटीआई मांगों पर रोक लगाना उनकी प्रैक्टिस को बढ़ावा देने के लिए हर तरह की जानकारी हासिल करने की संभावना कम कर देता है।
 
मुझे लगता है कि इस फैसले से निजी वकीलों की ऐसी आरटीआई मांगें पर रोक लग गई है जो प्रैक्टिस को बढ़ावा देने के लिए होती हैं 🚫👮‍♂️। इससे उनकी संभावनाएं कम हो सकती हैं कि वे अपने मुवक्किलों को सही तरीके से मदद कर सकें। रिकॉर्ड नष्ट होना और निजी जानकारी पर छूट देना भी नहीं चाहिए 🤦‍♂️
 
बहुत गंभीर समस्या हुई तो यह। आरटीआई कानून का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकता। वकील द्वारा मुवक्किल/परिजन की ओर से आरटीआई आवेदन को अस्वीकार्य माना गया, इससे बहुत बड़ा नुकसान हुआ। हमें अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन इसमें अपने वकील को भी सही तरीके से दिखाना चाहिए, ताकि वे हमारी मदद कर सकें।
 
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